भारत के अनोखे राजा-महाराजा और उनका विचित्र जीवन

Secrets
of Indian Royal Families in Hindi

“धरती हर व्यक्ति की
आवश्यकता को पूरा करने के लायक तो पर्याप्त देती है, पर हर व्यक्ति के
लालच को पूरा करने के लिये नहीं।”
– महात्मा गाँधी

Weird Kings of
Bharat भारत के विचित्र शासक : –

सन 1947 में देश के आजाद होने से पहले संपूर्ण भारत
सैकड़ों छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। जिन पर राज करते थे, मुँह में
चाँदी की चम्मच लेकर पैदा हुए, ऐश्वर्य और विलासिता में पले, शाही रौब-दौब
वाले राजा-महाराजा। जिनके लिये हर वस्तु पहले से उपलब्ध थी, जिन्हें अपार
पुण्यों के फलस्वरूप विरासत में ही, ईश्वरीय उपहार के रूप में एक बड़ा
राज्य और एक आलीशान जिंदगी हासिल हुई थी।

आज भले ही उनका अस्तित्व इस धरती से मिट गया हो, लेकिन किस्से-कहानियों के
माध्यम से वह किसी न किसी रूप में अवश्य जीवित रहेंगे। यहाँ न केवल हमें
उनकी शाही जीवनशैली और विचित्र आदतों के विषय में पता चलेगा, बल्कि उनके
ऐश्वर्य और झक्कीपन का नमूना भी देखने को मिलेगा। अगर हम अपने देश के इन
शासकों को “सारे जग से निराला” कहें, तो शायद कुछ गलत नहीं होगा। आखिर ये
तथ्य और सिद्ध भी क्या करते हैं –

1. अलवर के राजा जय
सिंह : –

व्यक्ति के आत्म-सम्मान पर पड़ी चोट उससे क्या कुछ नहीं करवा सकती, यदि इस
बात का कोई ज्वलंत प्रमाण आपको देखना हो, तो अलवर के महाराज जयसिंह
प्रभाकर (1882–1937) से बढ़कर उदाहरण कहीं नहीं मिल सकता। इन्टरनेट पर इस
घटना को कई राजाओं से जोड़कर दिखाया गया है, लेकिन वह ठीक नहीं हैं। यह
महाराज जय सिंह प्रभाकर पुत्र श्री मंगल सिंह प्रभाकर के ही जीवन की
महत्वपूर्ण घटना है। यह 20वीं सदी के शुरुआती दशक के अंतिम दिनों की बात
है, जब अलवर नरेश घूमने के लिये लन्दन गये हुए थे। इसी क्रम में वे एक दिन
बांड स्ट्रीट पर सादे सामान्य वस्त्रों में टहल रहे थे। उसी सड़क पर निकट
ही रॉल्स रॉयस का शोरूम भी था।

महाराज ने जब वहाँ शानदार, चमचमाती, दिलकश गाड़ियों को देखा, तो वह कारों
की कीमत और उसकी खूबियाँ जानने के लिये शोरूम के अंदर चले गये। चूँकि
महाराज साधारण वस्त्र पहने हुए थे, इसलिये शोरूम के सेल्समैन ने भी उन्हें
एक गरीब भारतीय ही समझा और उन्हें अपमानित कर शोरूम से लगभग बाहर ही निकाल
दिया। इस अपमान के पश्चात महाराज जयसिंह वापस अपने होटल के कमरे पर लौट
आये और उन्होंने अपने नौकरों के जरिये शोरूम तक यह सन्देश भिजवाया कि अलवर
के राजा उनकी कुछ कारों को खरीदना चाहते हैं।

कुछ घंटों के पश्चात अलवर नरेश फिर से शोरूम पहुँचे, पर इस बार वह एक राजा
की शानो-शौकत के साथ आये थे और अपने शाही लिबास में थे। उनके आने की सूचना
पर शोरूम के कर्मचारियों ने पहले ही रेड कारपेट(लाल कालीन) बिछा दिया था
और सारा स्टाफ उनकी अगवानी के लिये तैयार खड़ा था। महाराज ने उस समय शोरूम
में खड़ी छहों गाड़ियों को खरीद लिया और पूरी रकम का भुगतान कर दिया। जब वे
महँगी गाड़ियाँ भारत पहुंची, तो अलवर नरेश के आदेश पर छहों रॉल्स रॉयस को
शहर की सफाई के काम में लगा दिया गया।

जहाँ सफाई कर्मचारी उनमे कूड़ा-करकट, कचरा और शहर की तमाम गंदगी लादकर ले
जाते। जल्दी ही यह सनसनीखेज खबर पहले सारे भारत में और फिर सारी दुनिया
में फ़ैल गई कि दुनिया की सबसे महँगी और आलीशान कार को कूड़ा-कचरा ढोने में
इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे रॉल्स रॉयस कंपनी की साख घटने लगी और उसका
मजाक उड़ाया जाने लगा। जब भी यूरोप और अमेरिका में कोई व्यक्ति इस बात की
डींग हाँकता कि उसके पास एक रॉल्स रॉयस कार है, तो लोग उसका मजाक उड़ाते
हुए कहते, “कौन सी कार?”

अच्छा वह, जिससे भारत में शहर का कचरा ढोया जा रहा है। इस तरह कंपनी का
नाम खराब होने से कारों की बिक्री तेजी से घटने लगी और उसका राजस्व कम
होने लग गया। जब कंपनी को असली बात का पता चला, तो उन्होंने अलवर नरेश से
माफ़ी मांगी और उनसे उन आलीशान गाड़ियों में कचरा न ढुलवाने की अपील की।
इतना ही नहीं उन्होंने महाराज को छह नई रॉल्स रॉयस गाड़ियाँ मुफ्त में देने
का प्रस्ताव भी रखा था।

2. जूनागढ़ के नवाब
महाबत खान रसूल खान : –

भारत के सबसे विचित्र शासकों में जूनागढ़ के नवाब को भी प्रमुखता से रखा जा
सकता है, जिन्हें कुत्तों से बेहद प्यार था। कहा जाता है कि उनके पास 800
से भी अधिक कुत्ते थे और हर श्वान के लिये एक व्यक्तिगत अनुचर था। अर्थात
हजारों व्यक्ति केवल कुत्तों की रखवाली करने के लिये तैनात थे, जिन्हें
राजकोष से धन दिया जाता था, पर शायद इतना ही काफी नहीं था। बादशाह न केवल
कुत्तों के विवाह करवाते, बल्कि उनके वैवाहिक समारोह के लिये शानदार जलसे
भी आयोजित करवाते थे। जिनमे लाखों रुपयों का व्यय होता था और जिसमे रियासत
के बड़े-बड़े लोगों के अलावा पडोसी राज्यों के राजा-महाराजा तक आमंत्रित
होते थे।

उस शुभ दिन पर राज्य की ओर से अवकाश घोषित करवा दिया जाता था। हो सकता है
कई लोगों को नवाब का यह शौक एक विचित्र सनक या पागलपन लगे, लेकिन कुछ
लोगों को वह एक आला दर्जे के पशुप्रेमी(पेट लवर) भी प्रतीत हो सकते हैं।
पर इतना तो तय है कि शायद ही इस दुनिया में, कुत्तों या जानवरों से इतना
अधिक प्रेम करने वाला कोई दूसरा व्यक्ति आज तक पैदा हुआ हो और आगे भी शायद
ही कोई हो।

3. मैसूर के महाराज
कृष्णराज वाडियार IV : –

मैसूर के महाराज कृष्णराज वूडियार ने अपने नौकरों को सूरज की तेज धूप से
बचाने के लिए एक विशेष प्रकार की रॉल्स रॉयस कार को बनाने का आदेश दिया
था। सन 1911 में निर्मित यह कार जब लगभग 100 वर्षों के लम्बे अंतराल के
पश्चात एक नीलामी में बिकी, तो इसकी कीमत देखकर सब दंग रह गये। यह कार चार
लाख पौंड यानी 4 करोड़ रूपये से भी अधिक कीमत में बिकी। सन 1940 में जब
महाराज की मृत्यु हुई थी, तो उस समय वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों
में से एक थे और उनकी कुल संपत्ति 35 बिलियन पौंड से भी अधिक थी।

4. पटियाला के
महाराज भूपेंद्र सिंह : –

पटियाला रियासत के राजा भूपिंदर सिंह भी अपनी शानदार, भड़कीली मेहमाननवाजी
के लिये बहुत मशहूर थे। जब उनके निमंत्रण पर ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम
उनके निवास “मोती बाग महल” पर आये थे, तो राजा ने उनके स्वागत-सत्कार के
लिये जो इंतजाम किया था वह किसी को भी हैरान कर सकता है। विशेष रूप से
निर्मित सोने के थालों में उनके भोजन का प्रबंध किया गया था। शराब आदि को
परोसने के लिये जिन पात्रों का उपयोग किया गया था, वह सब बेशकीमती रत्नों
से जडे हुए थे, वस्त्रों के रूप में महँगे और मखमली रेशमी वस्त्रों का
प्रयोग किया गया था।

राजा भूपिंदर सिंह की पत्नी बख्तावर कौर ने किसी रानी के प्रथम भारत दौरे
के उपलक्ष में रानी मेरी को एक बेशकीमती व भव्य हार भारतीय स्त्रियों की
ओर से तब प्रदान किया था, जब वह सन 1911 में आयोजित हुए जलसे, दिल्ली
दरबार में शरीक हुई थीं, जिसका आयोजन इसलिये किया गया था। क्योंकि इतिहास
में पहली बार ब्रिटेन के राजा और रानी भारत भ्रमण पर आ रहे थे। भारत के
प्रथम राष्ट्रपति डाo राजेंद्र प्रसाद ने भी पटियाला के महाराज के विशेष
चाँदी से निर्मित रथ पर सवार होकर राष्ट्रपति भवन के अंदर प्रवेश किया था।

राजा भूपिंदर सिंह को खाने का भी बहुत शौक था। प्रतिदिन 100 से भी अधिक
व्यंजन जिनमे लगभग हर तरह का भोजन शामिल होता था, राजा की आज्ञा से तैयार
किये जाते थे। प्रत्येक दिन के लिये अलग रेसिपी रहती थी। षडरसों के विषय
में जो वर्णन भारतीय साहित्य में वर्णित है, खान-पान का इंतजाम ठीक वैसा
ही होता था। कहते हैं 30 प्रकार की तो केवल एग करी ही बनती थी और राजा हर
व्यंजन को केवल थोडा-थोडा चखकर ही हट जाता था, बाद में वह भोजन सेवकों को
बाँट दिया जाता था।

5. भरतपुर के राजा
किशन सिंह : –

राजस्थान में ऐसे अनेकों राजा- महाराजा हुए हैं, जो अपनी विचित्र सनकों के
कारण दुनिया भर में विख्यात हुए। भरतपुर के राजा किशन सिंह की गणना भी कुछ
ऐसे ही शासकों में की जा सकती है, जो अपने रंगीन मिजाज और दोषदर्शिता के
लिये पहचाने जाते थे। किशन सिंह की कोई एक, दो नहीं, बल्कि कुल मिलाकर 40
पत्नियाँ थी। इस गुप्त रहस्य का खुलासा भरतपुर के दीवान रहे जरामनी दास ने
अपनी पुस्तक ‘महाराज’ में किया था। किशन सिंह केवल स्त्रियों का ही शौक़ीन
नहीं था, बल्कि उसे तैरने का भी बहुत शौक था और उसका यह शौक जूनून की हद
तक था।

इसलिये उसने अपने उस शौक को पूरा करने के लिये गुलाबी संगमरमर से बने एक
बड़े तालाब का निर्माण करवाया था और उसमे प्रवेश करने के लिये चन्दन की
लकड़ियों से बने एक सीढ़ीदार जीने का भी निर्माण कराया था। जब राजा स्नान
करने के लिये वहां आता, तो प्रत्येक रानी नग्नावस्था में उस सीढ़ीदार जीने
पर खड़ी होकर राजा की अगवानी करती और जब राजा स्नान के लिये तालाब में
प्रवेश कर जाता, तब बारी-बारी से प्रत्येक सीढ़ी पर खड़ी रानियाँ जल की
अठखेलियों से राजा का स्वागत करती।

इस तरह राजा तब तक उनसे जलक्रीडा करता था, जब तक अंतिम 20वीं सीढ़ी पर खड़ी
रानियाँ राजा के साथ स्नान नहीं कर लेती थी। उस समय सभी रानियों को अपने
हाथों में मोमबत्तियाँ थामे रखनी होती थी, क्योंकि महल में जलते सभी दिये
बुझा दिये जाते थे और फिर सभी रानियाँ उन जलती शमाओं को थामे राजा के
सामने नृत्य प्रस्तुत करती थीं। जिस रानी के हाथ में थमी बत्ती अंत तक
प्रज्वलित रहती थी, उसे ही उस रात के समय राजा के साथ सोने का अवसर मिलता
था।

6. सवाई माधोपुर के
राजा सवाई माधो सिंह II : –

सवाई माधोपुर नरेश सवाई माधो सिंह द्वितीय भी अपनी एक विचित्र आदत के कारण
काफी मशहूर हुए थे। बात यह थी कि महाराज गंगाजल को बहुत महत्व देते थे और
उसका नियमित सेवन करते थे। लेकिन जब वह ब्रिटेन की यात्रा पर जा रहे थे,
तो इस कारण एक बड़ी समस्या उठ खड़ी हुई। क्योंकि वहाँ पर उनका कई दिनों तक
रूकने का कार्यक्रम था और उसके लिये बड़ी मात्रा में गंगाजल की आवश्यकता
पड़नी थी। लेकिन ऐसा कोई बर्तन नहीं था, जिसमे भरकर इतना अधिक गंगाजल लाया
जा सकता, जो उस अवधि के लिये पर्याप्त हो।

इस समस्या के समाधान के लिये दरबारियों से विचार-विमर्श कर राजा ने जयपुर
के कारीगरों को शुद्ध चाँदी से निर्मित, दो ऐसे बहुत बड़े बर्तन बनाने का
आदेश दिया, जिसमे गंगाजल भरकर वे अपने साथ इंग्लैंड की यात्रा पर ले जा
सकें। इन बर्तनों को निर्मित करने के लिये चाँदी के लगभग 14000 सिक्कों को
पिघलाया गया और उन्हें बहुत ही कुशलता से इस तरह बनाया गया कि उनमे कोई
जोड़ न रहे। ये बर्तन गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दुनिया के सबसे
बड़े शुद्ध चाँदी से निर्मित बर्तनों के रूप में आधिकारिक रूप से दर्ज हैं।

7. कपूरथला के
महाराज जगतजीत सिंह : –

कपूरथला रियासत के शासक महाराज जगतजीत सिंह भी भारत के अत्यंत विलासी
शासकों में से एक रहे हैं। उन्हें अत्यंत महँगे, कीमती और विलक्षण वस्त्र
पहनने का विचित्र शौक था। महाराज की सभी पोशाकें उस समय के सबसे महँगे
लक्ज़री मेगा-ब्रांड के रूप में विख्यात लुइस वुईट्टन द्वारा ही तैयार की
जाती थीं, जो जगतजीत सिंह के लिये एक से एक अद्भुत डिजाईन के बेशकीमती
वस्त्र तैयार करता था।

घूमने-फिरने के बहुत शौक़ीन जगतजीत सिंह के पास लुइस वुईट्टन के लगभग 60 से
भी अधिक बड़े बक्से थे, जिनमे उनके कपडे, पगड़ियाँ, तलवारें, सूट, जूते,
पारंपरिक वस्त्र और निजी सामान शामिल थे। महाराज के पास प्रत्येक अवसर पर
पहनने के लिये अलग-अलग तरह की पोशाकें थीं, शायद ही वह किसी पोशाक को
दूसरी बार पहनना पसंद करते थे।

8. उदयपुर के महाराज
: –

उदयपुर का मेवाड़ राजवंश स्फटिक के आकर्षण से इतना अधिक प्रभावित था कि
उन्होंने अपने महल के सिंहासन, कुर्सियाँ, मेज, पलंग और यहाँ तक कि पंखे
भी स्फटिक से जडवा रखे थे।


“परोपकारी बन जाइये इससे पहले कि धन-संपत्ति आपको लोभी बना दे।”
– थॉमस ब्राउन

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