Know Personality from Zodiac Sign in Hindi

 

“कठोर परिश्रम न केवल कामयाबी की चाबी है, बल्कि एक अच्छे भाग्य की भी कुंजी है। सौभाग्य और कुछ नहीं बल्कि पहले किये गये अच्छे कार्यों का ही परिणाम है।”
– अरविन्द सिंह

 

Astrology Zodiac Sign in Hindi
ज्योतिष से जानिये अपने जीवन और व्यक्तित्व के गुप्त रहस्य

What Your Zodiac Says जानिये क्या कहती है आपकी राशि : –

ज्योतिष विज्ञान अनेकों अविश्वसनीय महान रहस्यों को आत्मसात किये हुए है और उनमे से एक है – जन्म कुंडली के आधार पर मनुष्य के व्यक्तित्व और गुण-स्वभाव की विवेचना करना। किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली का संपूर्ण विश्लेषण तो मात्र एक पारंगत ज्योतिष मर्मज्ञ ही कर सकता है। लेकिन केवल जन्मराशि के आधार पर अपने और दूसरों के व्यक्तित्व की कई विशेषताएँ जान लेना प्रत्येक व्यक्ति के लिये संभव है।

जिसके लिए इस विद्या में विशेषज्ञ होने की कोई आवश्यकता नहीं है। बस जरुरत है तो एक सच्ची जिज्ञासा और एकाग्रता की, जिसका प्रयोग आपको इस लेख को पढने में करना होगा और तब आप जो जानेगे, उससे स्वयं भी आश्चर्यचकित हुए बिना न रहेंगे। तो आइये अपने और दूसरों के व्यक्तित्व को समझने की दिशा में एक कदम और बढाइये –

How to Know Your Zodiac Sign अपनी जन्मराशि का पता कैसे लगायें : –

सर्वप्रथम आपको यह पता करना है कि आपकी जन्मराशि क्या है? यदि आपकी जन्मकुंडली पहले से ही तैयार रखी है, तो आपको पता होगा कि आपकी जन्मराशि क्या है। यदि आप नहीं जानते कि आपकी राशि क्या है और न ही आपके पास जन्मकुंडली है, तो या तो आप एक ज्योतिषी से अपनी जन्मपत्री तैयार करा लें या फिर किसी Computer Center पर जाकर अपनी जन्मतिथि, जन्मस्थान और जन्म का समय देकर एक computerized जन्मपत्री बनवा लीजिये।

अब अपनी जन्मराशि का पता करने के लिए आप अपनी लग्न कुंडली को देखिये जो इस रूप में बनी होगी। अब उसमे चन्द्रमा की स्थिति को देखिये कि वह किस राशि में बैठा है? भारतीय ज्योतिष में व्यक्ति की जन्मराशि का आधार चंद्रमा है, क्योंकि चंद्रमा न केवल हमारे मन व भावनाओं का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला गृह भी है।

यह एक राशि पर केवल सवा दो दिन रहता है, अतः सटीक परिणाम हेतु इसे जन्मराशि का आधार माना जाता है। इन खानों में जो नंबर लिखे है वह राशि का नंबर है – जैसे लग्न कुंडली 1 में सातवें नंबर के खाने में 7 लिखा है और चंद्रमा भी यहाँ बैठा हुआ है। इसका अर्थ हुआ कि जातक की जन्मराशि तुला है, क्योंकि जन्मकुंडली में चंद्रमा जिस राशि में होता है, वह जातक की जन्मराशि होती है

और उसी के आधार पर जन्म का नाम निकाला जाता है। ध्यान दीजिये कि कुंडली के 12 खानों में जो 1 से 12 तक के अंक दिए गये हैं, ये 12 राशियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और ये अंक कभी स्थिर नहीं होते। जैसे दूसरी कुंडली में पहले खाने में 4 अंक लिखा है, जबकि पहली कुंडली में पहले खाने में 1 अंक लिखा है। इसका अर्थ यह है कि पहली कुंडली का लग्न मेष है और दूसरी कुंडली का लग्न कर्क है।

Know Ascendent from Horoscope जन्मकुंडली से लग्न जाने : –

आपको यह तथ्य हमेशा याद रखना होगा कि जन्मकुंडली का पहला खाना हमेशा लग्न का होता है। इसमें उस राशि का अंक लिखा होगा जो आपके जन्म के समय पूर्व दिशा में उदित होगी। इसलिये इसमें 1 से लेकर 12 अंक तक की कोई भी राशि हो सकती है। आपको बिना विचलित होते हुए सिर्फ यह ध्यान देना है कि चंद्रमा आपकी कुंडली में किस राशि में बैठा हुआ है।

जैसे पहली कुंडली में 7 अंक वाली तुला राशि में बैठा है, तो कुंडली 2 में 1 अंक वाली मेष राशि में बैठा है। राशियों की तरह गृह भी कुंडली के किसी खाने में स्थिर नहीं होते। गृह किस राशि में विचरण कर रहा है और आपका जन्म किस समय हुआ है, उसके आधार पर ही ये कुंडली के निश्चित खानों में बैठते हैं।

चूँकि एक दिन में 24 घंटे होते हैं और हर लग्न लगभग 2 घंटे का होता है, इस आधार पर एक दिन में 12 लग्न होते हैं – अर्थात हर 2 घंटे बाद कुंडली में लग्न बदल जाता है। इसलिये आपकी कुंडली दूसरे व्यक्ति से अलग होगी। आप बस यह ध्यान रखिये कि चंद्रमा जहाँ बैठा है वहां कौन सा अंक लिखा है, वही अंक आपकी जन्मराशि है।

ज्योतिष में सभी राशियों को एक निश्चित अंक प्रदान किया गया है। जैसे – 1 अंक मेष राशि का है, क्योंकि यह भचक्र का प्रथम खंड है। भचक्र अर्थात संपूर्ण रविमार्ग जिसकी सीमा में रहकर समस्त गृह, सौरमंडल के स्वामी सूर्य के चारों ओर चक्कर काटते हैं। चूँकि यह पथ वृत्ताकार है और किसी भी प्रकार के वृत्त का मान हमेशा 360 डिग्री ही होता है, इसलिये भचक्र का मान भी 360 डिग्री होता है।

ज्योतिष में इसे 12 बराबर भागो में बाँट दिया गया, इस तरह 30 डिग्री का एक भाग हुआ और हर भाग एक राशि का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य प्रत्येक मास एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है जिनके नाम, उनका स्वामी गृह और उनकी अंक संख्या यहाँ दी जा रही है –

Name of Zodiac Signs राशियों के नाम : –

1. Aries मेष राशि –
मेष राशि भचक्र का प्रथम खंड है। अतः इसे अंक 1 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 1 से 30 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 1 अंक लिखा होगा, वह मेष राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह मंगल है।

2. Taurus वृष राशि –
वृष राशि भचक्र का दूसरा खंड है। अतः इसे अंक 2 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 30 से 60 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 2 अंक लिखा होगा, वह वृष राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह शुक्र है।

3. Gemini मिथुन राशि –
मिथुन राशि भचक्र का तीसरा खंड है। अतः इसे अंक 3 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 60 से 90 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 3 अंक लिखा होगा, वह मिथुन राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह बुध है।

4. Cancer कर्क राशि –
कर्क राशि भचक्र का चौथा खंड है। अतः इसे अंक 4 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 90 से 120 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 4 अंक लिखा होगा, वह कर्क राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह चन्द्रमा है।

5. Leo सिंह राशि –
सिंह राशि भचक्र का पाँचवा खंड है। अतः इसे अंक 5 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 120 से 150 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 5 अंक लिखा होगा, वह सिंह राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह सूर्य है।

6. Virgo कन्या राशि –
कन्या राशि भचक्र का छठा खंड है। अतः इसे अंक 6 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 150 से 180 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 6 अंक लिखा होगा, वह कन्या राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह बुध है।

7. Libra तुला राशि –
तुला राशि भचक्र का सातवाँ खंड है। अतः इसे अंक 7 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 180 से 210 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 7 अंक लिखा होगा, वह तुला राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह शुक्र है।

8. Scorpio वृश्चिक राशि –
वृश्चिक राशि भचक्र का आँठवा खंड है। अतः इसे अंक 8 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 210 से 240 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 8 अंक लिखा होगा, वह वृश्चिक राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह मंगल है।

9. Sagittarius धनु राशि –
धनु राशि भचक्र का नौवां खंड है। अतः इसे अंक 9 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 240 से 270 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 9 अंक लिखा होगा, वह धनु राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह बृहस्पति है।

10. Capricorn मकर राशि –
मकर राशि भचक्र का दसवाँ खंड है। अतः इसे अंक 10 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 270 से 300 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 10 अंक लिखा होगा, वह मकर राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह शनि है।

11. कुम्भ राशि –
कुम्भ राशि भचक्र का ग्यारहवाँ खंड है। अतः इसे अंक 11 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 300 से 330 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 11 अंक लिखा होगा, वह कुम्भ राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह शनि है।

12. Pisces मीन राशि –
मीन राशि भचक्र का अंतिम खंड है। अतः इसे अंक 12 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 330 से 360 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 12 अंक लिखा होगा, वह मीन राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह बृहस्पति है।

अब आप इन 12 राशियों को उनके अंकों और अधिपति गृह सहित अपने मस्तिष्क में बैठा लीजिये। इससे आपको जल्दी समझने में आसानी रहेगी। अगले लेख से हम प्रत्येक राशि का अलग से संपूर्ण वर्णन करेंगे जिसमे उस राशि के स्त्री और पुरुष दोनों जातकों के स्वभाव, और व्यक्तित्व का विश्लेषण किया जायेगा।

“देवता आपका भाग्य नहीं बनाते, बल्कि आप स्वयं ही उसका निर्माण करते हैं।”
– अरविन्द सिंह

 

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