Most Important Minerals for Healthy Body in Hindi

 

“वे लोग जो मनोरंजन के लिये समय नहीं निकाल सकते हैं, जल्दी हो चाहे देर से, बीमारी के लिये समय निकाल ही लेते हैं।”
– जॉन वानमेकर

 

Essential Minerals for Healthy Human Body in Hindi
शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिये खनिजों को प्रतिदिन लेना अनिवार्य है

Essential Major Minerals for Health स्वास्थ्य के लिये आवश्यक प्रमुख खनिज : –

अपने शरीर को स्वस्थ रखना प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का पहला उत्तरदायित्व है और साथ ही जीवन का प्रथम लक्ष्य भी। क्योंकि यदि इसकी देखभाल आप स्वयं ही नहीं करेंगे, तो फिर और कौन करेगा। और यदि यह किसी कारण से अस्वस्थ या अक्षम हो जाय, तो फिर आपके जीवन के दूसरे लक्ष्यों का कोई महत्व नहीं रह जाता। क्योंकि उन्हें पूरा करने के लिये आपके पास सबसे बड़ा और सबसे सशक्त साधन बस यही है।

इसलिये प्रत्येक व्यक्ति को अपने सबसे अच्छे मित्र, इस शरीर के लिये भी वैसे ही समर्पित बनना चाहिये जैसे कि यह हमारे प्रति रहता है। पिछले लेख में आप पढ़ चुके हैं कि मिनरल्स हमारे शरीर के लिये क्यों आवश्यक हैं। साथ ही साथ आप प्रमुख मिनरल्स के कार्य और शरीर के लिये उनकी महत्ता के विषय में भी पढ़ चुके हैं। अब इसी श्रंखला में पढिये बाकी बचे हुए खनिजों के विषय में –

3. What is the Role of Sodium सोडियम शरीर में क्या कार्य करता है : –

सोडियम मनुष्य शरीर के लिये आवश्यक सबसे अनिवार्य मिनरल्स में से एक है, परन्तु हमें इसे अलग से लेने की प्रायः कोई आवश्यकता नहीं होती। क्योंकि प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाले नमक, अनाज और दूध से ही इसकी पूर्ति हो जाती है। इनके अतिरिक्त हम जो कुछ भी खाते हैं उससे शरीर में इसकी मात्रा और ज्यादा ही बढती है। Sodium हमारे शरीर का ph स्तर और पानी की मात्रा दोनों को नियंत्रित करता है।

इसके अतिरिक्त यह शरीर के कई अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों जैसे माँसपेशियों के संकुचन, पाचन और स्नायविक संदेशों के प्रसारण (nerve signal transmission) के लिये भी एक अनिवार्य तत्व है। Sodium हमारे ब्लडप्रेशर को नियंत्रित रखता है। इसे घर में खाए जाने वाले नमक के नाम से भी जाना जाता है, जो सोडियम और क्लोराइड दो तत्वों का मिश्रण है। यह एक विद्युत अपघट्य भी है।

Deficiency and Excess of Sodium सोडियम की कमी और अधिकता से होने वाली समस्या : –

Sodium की उचित मात्रा न लेने से हाइपोनाट्रेमिया की समस्या पैदा हो सकती है। यह अक्सर तभी पैदा होती है, जब जरुरत से ज्यादा पानी हमारे शरीर में इकट्ठा हो जाता है और पसीने और मूत्र के कारण इस लवण का स्तर गिर जाता है। इससे माँसपेशियों की ऐंठन, थकान, सिरदर्द और निर्जलीकरण(पानी की कमी) की समस्या उत्पन्न हो सकती है। सोडियम को अधिक मात्रा में लेने से हाइपरनाट्रेमिया का खतरा बढ़ जाता है।

जिससे शरीर में आलस्य और चिडचिडापन होने के साथ-साथ दूसरी स्वास्थ्य समस्याएँ भी उभर सकती हैं। सोडियम को हमें न्यूनतम मात्रा में ही लेना चाहिये, क्योंकि शरीर इसकी पूर्ति आसानी से कर लेता है। अधिक मात्रा में Sodium को लेने से रक्तचाप तेजी से बढ़ता है, जिससे हाइपरटेंशन यानि उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है जो आगे चलकर ह्रदय की कई गंभीर बीमारियों को जन्म देता है।

लम्बे समय तक लेते रहने से यकृत भी कई रोगों में जकड सकता है। इसके अलावा Sodium की मात्रा अधिक होने पर कैल्शियम शरीर में इसके साथ बंध जाता है। इससे नुकसान यह होता है कि जब शरीर को प्रतीत होता है कि सोडियम की मात्रा को निश्चय ही कम होना चाहिये, तो इसके स्थान पर कैल्शियम को बाहर निकाल दिया जाता है।

इसका तात्पर्य यह है कि यदि आप नमक और प्रसंस्करित भोजन के रूप में बहुत ज्यादा सोडियम खाते हैं, तो आपके शरीर में आवश्यक कैल्शियम की मात्रा धीरे-धीरे कम होती चली जायेगी। क्योंकि तब आपका शरीर Sodium की अतिरिक्त मात्रा को कम करने के लिये यही करेगा।

Sodium Rich Foods सोडियम से भरपूर भोज्य पदार्थ : –

नमक, सोया सॉस, तला-भुना भोजन, दूध, शीतल पेय(कोल्ड ड्रिंक्स), अंडे, माँस, अचार, ब्रेड-बिस्कुट, अनाज, सब्जियां आदि।

Requirement of Sodium शरीर के लिए कितनी मात्रा में आवश्यक है : –

हमारे शरीर को प्रतिदिन 700 mg से 1200 mg Sodium की आवश्यकता होती है जो हमें बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इस कारण हमारे शरीर में इस तत्व की कमी शायद ही होती है। औसत रूप से देखें तो लगभग हर व्यक्ति Sodium को इसकी आवश्यक मात्रा से अधिक सीमा में ही ग्रहण करता है, इसलिये हमें जंक फूड, शीतल पेय, और मसालेदार भोजन से बचना चाहिये।

कोशिश करें कि नमक कम से कम खाएं और खूब पानी पीयें। विशेषकर जब आप कोई मेहनत का कार्य करें, क्योंकि पसीने के निकलने से सोडियम का स्तर भी गिरता है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा 2300 mg निर्धारित है।

4. What is the Role of Phosphorous फॉस्फोरस शरीर में क्या कार्य करता है : –

फॉस्फोरस हमारे स्वास्थ्य को उत्तम बनाये रखने के लिये अनिवार्य प्रमुख मिनरल्स में से एक है, जो हमारे दाँतों और स्वस्थ हड्डियों के लिये महत्वपूर्ण हैं। लगभग 75-80% Phosphorous हमारी हड्डियों और दांतों में जमा रहता है। कैल्शियम और फॉस्फोरस दोनों मिनरल्स मिलकर हमारी हड्डियों का निर्माण करते हैं, उन्हें मजबूती देते हैं और हमारे अस्थिपंजर की सुरक्षा करते हैं।

Phosphorous चयापचय की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाता है और शरीर के कुल भार का एक प्रतिशत भाग होता है। Phosphorous हमारे DNA और RNA का भी एक महत्वपूर्ण घटक है, जो भोजन को उर्जा में बदलता है और पोषक तत्वों को उन अंगो तक पहुँचाने में मदद करता है, जिन्हें उनकी आवश्यकता है।

वह भोजन जिसे हम प्रतिदिन खाते हैं, एंजाइम उत्पन्न करता है और फॉस्फोरस की मदद से इन Enzyme को ऊर्जा में बदला जाता है। Phosphorous हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका में पाया जाता है और यह उस प्रणाली का हिस्सा है, जो शरीर में अम्ल और क्षार का संतुलन बनाये रखती है। अधिक Phosphorous से गुर्दों की कार्यक्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

लेकिन इसके कारण होने वाले तीव्र जहरीलेपन का कोई प्रमाण नहीं है। वहीँ दूसरी ओर फॉस्फोरस की कमी से होने वाली दुर्लभ घटनाओं में एनीमिया (खून की कमी का रोग), माँसपेशियों की कमजोरी, भूख में कमी, बच्चों में फैलने वाली रिकेट्स की बीमारी और टाँगों में होने वाली झनझनाहट और सुन्न हो जाना जैसे रोग पनप सकते हैं।

Deficiency and Excess of Phosphorous फॉस्फोरस की कमी और अधिकता से होने वाली समस्या : –

जब शरीर में Phosphorous की काफी कमी हो जाती है, तो हमारी हड्डियां भंगुर हो जाती हैं और हड्डियों के जोड़ लचीले न होकर सख्त हो जाते हैं, जिससे चलने-फिरने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इससे हड्डियां कभी भी बहुत आसानी से टूट सकती हैं। Phosphorous की इस कमी को हाइपोफॉस्फेटेमिया कहते हैं।

रक्त में फॉस्फेट का स्तर गिरने का अर्थ है, पेशाब में फॉस्फेट का स्तर बढ़ जाना। इस कमी के मुख्य संकेत हैं – मानसिक स्थिति में परिवर्तन, थकान व कमजोरी का बने रहना और माँसपेशियों का सही तरह से कार्य न करना। इसके विपरीत यदि शरीर में Phosphorous का स्तर बढ़ जाये, तो इस बीमारी को हाइपरफॉस्फेटेमिया कहते हैं।

मुँह से लिये जाने वाले फॉस्फेट के तरल घोल से यह समस्या पैदा हो सकती है। जब फॉस्फेट उच्च मात्रा में हमारे शरीर में इकठ्ठा हो जाता है, तो शरीर में कैल्शियम का स्तर गिर जाता है। इस स्थिति में बस एक यही उपाय रह जाता है कि फॉस्फोरस की मात्रा को सीमित कर दिया जाय। इसके अलावा बहुत ज्यादा फॉस्फोरस हमारी मैगनीशियम को अवशोषित करने की क्षमता में कमी ला सकता है।

Phosphorous Rich Foods फॉस्फोरस से भरपूर भोज्य पदार्थ : –

फॉस्फोरस हमें पेड़-पौधों और पशुओं दोनों से प्राप्त होता है, इसलिये अपनी रूचि के अनुसार भोजन का चुनाव किया जा सकता है। यह दूध और दूध से बने पदार्थो दही, पनीर आदि में, अंडे, बीयर, चिकन, प्रसंस्करित भोजन और सामन मछली में भी पर्याप्त रूप से पाया जाता है। शीतल पेय में भी यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

Requirement of Phosphorous शरीर के लिए कितनी मात्रा में आवश्यक है : –

हमारे शरीर को प्रतिदिन 700 mg Phosphorous की आवश्यकता होती है। विशेष परिस्थितियों में Phosphorous की अधिकतम 4000 mg मात्रा प्रतिदिन ली जा सकती है। क्योंकि शरीर की कई महत्वपूर्ण क्रियाओं में इसकी आवश्यकता पड़ती है, जो प्राकृतिक आहार में ऊपर दी गयी चीजों से आसानी से प्राप्त हो जाती है।

लेकिन ओस्टियोपोरोसिस, क्षय रोग या अन्य किसी रोग के कारण जब शरीर में फॉस्फोरस की अधिक कमी हो जाती है और हड्डियों का क्षरण, रक्त की निरंतर कमी, जैसी समस्यायें होने लगें, तो Phosphorous की पूर्ति के लिये सप्लीमेंट की जरुरत पड़ सकती है।

5. What is the Role of Magnesium मैगनीशियम शरीर में क्या कार्य करता है : –

कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैगनीशियम, ये तीनो खनिज हमारे शरीर की हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिये बहुत ही आवश्यक खनिज हैं। यह कैल्शियम के साथ मिलकर माँसपेशियों का उचित सञ्चालन करने, खून को जमाने, कोशिकाओं तक सन्देश पहुंचाने, और दाँतों तथा हड्डियों को स्वस्थ बनाये रखने जैसे अत्यंत आवश्यक कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

इसके अतिरिक्त Magnesium रक्तदाब को नियंत्रित रखने, ऊर्जा के चयापचय में और शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने में भी सहायता करता है। मैगनीशियम, शरीर को स्वस्थ रखने के लिये आवश्यक सबसे अनमोल और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध मिनरल्स में से एक है। हमारे शरीर का लगभग 50% Magnesium हड्डियों में जमा रहता है और बाकी का आधा शरीर की कोशिकाओं में इकठ्ठा रहता है।

यह हमारे शरीर के भीतर उत्पन्न होने वाले एंजाइमों को सक्रिय होने में सहायता करता है और वैद्युत अपघट्य पदार्थों (इलेक्ट्रोलाइट) के संतुलन को नियंत्रित रखता है। Magnesium न केवल हाइपरटेंशन और रक्त की शर्करा को समय-समय पर नियंत्रित करता रहता है, बल्कि ह्रदय की उसके सामान्य कार्य को पूरा करने में भी मदद करता है।

यह शरीर के भीतर प्रोटीन के निर्माण के लिये तथा नाडी मंडल के स्वस्थ रहने के लिये आवश्यक है। यह न केवल डायबिटीज को नियंत्रित रखता है, बल्कि किडनी में पथरी को बनने से भी रोकता है।

Deficiency and Excess of Magnesium मैगनीशियम की कमी और अधिकता से होने वाली समस्या : –

जब लम्बे समय तक Magnesium की कमी शरीर में बनी रहे, तो हाइपोमैग्नेसेमिया की समस्या उत्पन्न हो जाती है और मैगनीशियम की कमी शरीर के प्रत्येक अंग को प्रभावित करती है। हमारे शरीर की हड्डियां, दांत, मांसपेशियां, नाडी तंत्र, रक्त परिसंचरण तंत्र सब प्रभावित होते हैं और इसकी परिणति तनाव, सिरदर्द, कमरदर्द और जोड़ों के दर्द के रूप में होती है।

लेकिन चिंता मत करिये, हमारे शरीर में मैगनीशियम की कमी और इसके दुष्प्रभाव कुछ दुर्लभ स्थितियों में ही होते है। Magnesium को बहुत अधिक मात्रा में लेना भी स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद नहीं है। इससे आपको हाइपरमैग्नेसेमिया हो सकता है। यह इसलिये होता है, क्योंकि जब मैगनीशियम शरीर में ज्यादा इकठ्ठा हो जाता है, तो हमारे गुर्दे इस अतिरिक्त मात्रा को मूत्र के जरिये बाहर निकाल देते है।

ऐसी स्थिति में माँसपेशियों की कमजोरी, निम्न रक्तचाप, ह्रदय की अनियमित धड़कन, आलस्य, डायरिया, खुलकर साँस न आना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं, पर ऐसा तब ही होता है, जब आप मैगनीशियम की कोई अतिरिक्त खुराक ले रहे हों।

Magnesium Rich Foods मैगनीशियम से भरपूर भोज्य पदार्थ : –

मैगनीशियम प्रकृति में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। यह न केवल दूध, चॉकलेट, फल और पत्तेदार हरी सब्जियों में पाया जाता है, बल्कि समुद्री भोजन, कठोर जल, माँस और सोयाबीन में भी पाया जाता है। हाथीचक, अदरक, लौंग, शीरे, चावल, बीज और सूखे मेवे में भी यह अच्छी मात्रा में पाया जाता है। अधिक देर तक व्यायाम करने से हमारे शरीर में इस खनिज का स्तर निरंतर गिरता चला जाता है, इसलिये क्षमता से अधिक परिश्रम न करें।

Requirement of Magnesium शरीर के लिए कितनी मात्रा में आवश्यक है : –

हमारे शरीर को प्रतिदिन 300 mg से 450 mg Magnesium की आवश्यकता होती है, जो प्राकृतिक आहार से आसानी से प्राप्त हो सकती है। स्त्रियों को प्रायः प्रतिदिन 320-350 mg और पुरुषों को 400-450 mg Magnesium की आवश्यकता होती है।

भोजन के रूप में लिये जाने वाले मैगनीशियम की प्रतिदिन की कोई अधिकतम मात्रा निर्धारित नहीं है। लेकिन यदि इसे अलग से औषधि के रूप में लिया जा रहा है, तो यह 350 mg से अधिक नहीं होनी चाहिये।

6. What is the Role of Sulfur सल्फर शरीर में क्या कार्य करता है : –

सल्फर यानि गंधक, कैल्शियम और फ़ॉसफोरस के पश्चात हमारे शरीर में पाया जाने वाला तीसरा सबसे प्रमुख मिनरल है। यह एक महत्वपूर्ण खनिज है जो प्रोटीन के अणुओं में पाया जाता है। शरीर का लगभग 50 प्रतिशत Sulfur हमारी माँसपेशियों, त्वचा और हड्डियों में पाया जाता है। गंधक प्रोटीन की संरचनाओं को स्थिर होने में सहायता करता है।

Sulfur प्रोटीन की जैविक क्रियाओं का निर्धारण भी करता है, जिनमे वे भी शामिल हैं जो बाल, त्वचा, और नाखूनों का निर्माण करते हैं। प्रोटीन को बांधने के अलावा सल्फर एंजाइमों की उपयुक्त संरचना और जैविक क्रियाओं के लिये भी आवश्यक है। Sulfur एक प्रभावशाली जीवाणुनाशक है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त रखने के लिये आवश्यक है।

यह कैंसर, एलर्जी, पुरानी सूजन, पुराने दर्द, तनाव अदि को दूर करने में एक बेहद असरदार तत्व है। यदि आपके शरीर में Sulfur पर्याप्त मात्रा में नहीं है, तो एंजाइम अपना कार्य सही प्रकार से नहीं कर पाते हैं, जिससे चयापचय की प्रक्रिया में अवरोध समेत अनेक स्वास्थ्य समस्याएँ पनप सकती है। Sulfur शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करता है और इन्सुलिन को सही प्रकार से अपना कार्य करने में मदद करता है।

सल्फर के बिना इन्सुलिन अपनी जैविक क्रियाओं को सही तरह से नहीं कर सकता। यह विटामिन B के घटक बायोटिन और थायमिन का रूपांतरण करता है, जो कार्बोहायड्रेट को ऊर्जा में बदलने के लिये अनिवार्य हैं। इसके अतिरिक्त यह चयापचय की प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाले पदार्थों जैसे – ग्लूटाथियोन को संश्लेषित करता है और शरीर से कई प्रकार के विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है।

Deficiency and Excess of Sulfur सल्फर की कमी और अधिकता से होने वाली समस्या : –

शरीर में Sulfur की कमी होने पर प्रोटीन के संश्लेषण में बाधा पैदा होती है। गंधक एमिनो एसिड्स कोशिका तंत्र की मरम्मत और उन्हें एकीकृत रखने के लिये आवश्यक हैं। यह फ्री रेडिकल्स को दूर करने और विषैले पदार्थों को विषहीन कर शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं। Sulfur वसा अम्लों और कई अन्य मिनरल्स के साथ मिलकर शरीर की कई महत्वपूर्ण जैवरासायनिक क्रियाओं में भाग लेता है।

यदि शरीर में इसकी बहुत कमी हो जाती है, तो इन सभी कार्यों में बाधा पड़ती है और आपके बालों, पाचन तंत्र, त्वचा, माँसपेशियों और अस्थि तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह आपके सौंदर्य व यौवन को बरकरार रखने के लिये भी जरुरी है।

Sulfur Rich Foods सल्फर से भरपूर भोज्य पदार्थ : –

सल्फर उन भोज्य पदार्थों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो हमारे लिये प्रोटीन की पूर्ति करते हैं। जैसे – मीट, चिकन, अंडे, मछली, कच्चा दूध। मेथिलसल्फोनिलमीथेन (MSM) प्रकृति में उपलब्ध जैव सल्फर का सबसे प्रचुर स्रोत है, जिसमे गंधक की मात्रा 34% तक होती है। यह कोई दवाई नहीं है, बल्कि कई पौधों में पाया जाने वाल एक तत्व है और एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी है।

एलोवेरा में यह उच्च सांद्रता में मिलता है। इसके अलावा बादाम, शतावर, फलियाँ, करमसाग, अखरोट, काजू, जैसे सूखे मेवे, फलियाँ, लहसुन व प्याज आदि में भी यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

Requirement of Sulfur शरीर के लिए कितनी मात्रा में आवश्यक है : –

हमें अपने शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिये सल्फर की उच्च मात्रा की आवश्यकता होती है। औसतन हमारे शरीर को प्रतिदिन 1500 mg से 2500 mg Sulfur की जरुरत होती है। इसकी अधिकतम मात्रा 7000 mg प्रतिदिन निर्धारित है।

7. What is the Role of Chloride क्लोराइड शरीर में क्या कार्य करता है : –

क्लोराइड भी मनुष्य के लिये अनिवार्य प्रमुख मिनरल्स में से एक है। Chloride मुख्य खनिज पोषक तत्वों में से एक है, जो शरीर में विभिन्न तरल पदार्थों का उचित संतुलन बनाने के लिये बहुत आवश्यक है। यह रक्त का एक विशिष्ट ऋणात्मक आवेशित आयन है, इसी कारण से यह शरीर के मुख्य वैद्युत अपघट्यों में से एक है। औसत रूप से एक व्यस्क मानव शरीर में कुल 115 gm क्लोराइड होता है।

Chloride पेट में हाइड्रोजन के साथ मिलकर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाता है। जो भोजन को पचाने के लिये एक शक्तिशाली पाचक एंजाइम का कार्य करता है और प्रोटीन को तोड़ने के लिये और दूसरे धात्विक खनिजों के अवशोषण के लिये आवश्यक होता है। बाद में यह अम्ल Chloride के रूप में आँतों में जाकर पुनः अवशोषित हो जाता है और फिर वहां से रक्त में मिल जाता है।

इस तरह यह आमाशय से स्रावित होने वाले अम्ल की मात्रा को नियंत्रित करता है। यह सोडियम और पोटैशियम के साथ मिलकर शरीर के ph संतुलन को बनाये रखता है और शरीर से कार्बन डाई ऑक्साइड को बाहर निकालने में मदद करता है। ये तीनों खनिज साथ मिलकर वैद्युत आवेशों को संपूर्ण शरीर में फैलाने में तंत्रिका तंत्र की मदद करते हैं।

यह हमारे गुर्दों के सही प्रकार से कार्य करने के लिये, रक्त नलिकाओं में तरल की उचित मात्रा बनाये रखने के लिये और माँसपेशियों को गतिशील बनाने के लिये भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल मनुष्यों के ही लिये नहीं, बल्कि यह जानवरों के लिये भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवन के लिये आवश्यक खनिज है।

Deficiency and Excess of Chloride क्लोराइड की कमी और अधिकता से होने वाली समस्या : –

Chloride की कमी वैसे तो दुर्लभ ही है, लेकिन यदि ऐसा हो जाय तो यह जीवन को संकट में डालने वाली परिस्थिति को जन्म देती है, जिसे Alcalosis (अल्कालोसिस) कहते हैं। जिसमे रक्त बहुत क्षारीय हो जाता है और हमारे शरीर में उपस्थित तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ जाता है। शरीर से सोडियम की अत्यधिक मात्रा निकलने से यह समस्या हो सकती है, जो शरीर से बहुत ज्यादा पसीना निकलने और लगातार उल्टी और दस्त लगे रहने के कारण खड़ी होती है।

इसके लक्षणों में माँसपेशियों की कमजोरी, भूख न लगना, चिडचिडापन, निर्जलीकरण और बहुत अधिक थकान शामिल हो सकते हैं। शरीर के स्वस्थ रहने के लिये हर समय अम्ल और क्षार एक निश्चित संतुलन बना रहना बहुत आवश्यक है। Hypochloremia (हाइपोक्लोरेमिया) जल के अधिक भार, अपव्ययी दशाओं और शरीर के अधिक जल जाने से हो सकता है, क्योंकि ऐसे में extracellular fluids शरीर से अलग हो जाते हैं।

Chloride को अधिक मात्रा में लेने से, रक्तचाप बढ़ जाता है और शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ रूक जाते हैं, जो अक्सर अधिक नमक और पोटैशियम क्लोराइड लेने से होता है। लेकिन फिर भी शरीर पर इसकी अधिक मात्रा का कोई विषाक्त प्रभाव अभी तक देखा नहीं गया है। Chloride की अधिक मात्रा को आसानी से अधिक मात्रा में पानी पीकर कम किया जा सकता है।

लेकिन यदि इसे लम्बे समय तक बहुत अधिक मात्रा में लिया जाय और शरीर को पर्याप्त तरल न मिलने के कारण ph असंतुलन बना रहे, तो इसका बुरा प्रभाव गुर्दों पर देखने को मिल सकता है। सामान्य स्थिति में ऐसा होने पर, शरीर में अम्ल की मात्रा बढ़ सकती है और एसिडिटी, कब्ज, पेट दर्द आदि समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।

Chloride Rich Foods क्लोराइड से भरपूर भोज्य पदार्थ : –

घर में इस्तेमाल होने वाले सफ़ेद नमक, खमीर सत्व, पनीर, सोया सौस और प्रसंस्करित भोज्य पदार्थ में यह अधिक मात्रा में पाया जाता है। नमक से हमें सोडियम और क्लोराइड दोनों खनिज पर्याप्त मात्रा में प्राप्त हो जाते हैं। दूध, ब्रेड, राइ, जैतून, टमाटर, सलाद, अजमोद और सब्जियों में यह कम मात्रा में पाया जाता है, जो कि शरीर के लिये स्वास्थ्यप्रद भी है।

Requirement of Chloride शरीर के लिए कितनी मात्रा में आवश्यक है : –

हमारे शरीर को प्रतिदिन 750 mg से 950 mg Chloride की आवश्यकता होती है, जो प्राकृतिक आहार से आसानी से प्राप्त हो सकती है। प्राकृतिक भोजन के रूप में लिये जाने वाले क्लोराइड की प्रतिदिन की कोई अधिकतम मात्रा निर्धारित नहीं है,क्योंकि यह फलों व सब्जियों में कम मात्रा में ही पाया जाता है। लेकिन यदि इसे अलग से लिया जा रहा है, जैसे – नमक तो इसकी अधिकतम मात्रा 2500 mg से अधिक नहीं होनी चाहिये।

आगे इस लेख में पढिये अच्छे स्वास्थ्य के लिये क्यों जरुरी हैं Trace Minerals: एक Healthy Body के लिये बहुत जरूरी हैं यह 16 Minerals

और Mineral Deficiency से क्या असर पड़ता है हमारे स्वास्थ्य पर

“कुछ उपचार दवाइयों से भी ज्यादा बुरे होते हैं।”
– पब्लिलिअस साइरस

 

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