Essential Vitamins for Healthy Body in Hindi

 

“शरीर को अच्छी तरह स्वस्थ रखना प्रत्येक के लिये एक अत्यावश्यक कर्तव्य है… अन्यथा हम अपने मन को मजबूत और शुद्ध रखने में समर्थ नहीं होंगे।”
– महात्मा बुद्ध

 

Essential Vitamins for Healthy Body in Hindi
मनुष्य शरीर को स्वस्थ रखने के लिये बेहद जरुरी हैं विटामिन

Essential Vitamins for Healthy Body स्वस्थ शरीर के लिये अनिवार्य विटामिन : –

पिछले लेख “Health Benefits of Vitamins in Hindi: शरीर के लिये जरुरी है विटामिन” में आप Vitamins के कार्य और उनके महत्व के विषय में पढ़ चुके हैं। वसा में घुलनशील सभी विटामिनों का वर्णन भी हमने पीछे ही कर दिया है। हमें आशा है कि वह लेख आपके कुछ काम अवश्य ही आया होगा। उम्मीद है कि अब आप यह आप भली-भांति समझ गये होंगे कि इस शरीर को स्वस्थ रखने के लिये आहार में विटामिनों को सम्मिलित करना कितना आवश्यक है।

शरीर को बीमार करने के लिये जिम्मेदार कई कारणों में से एक यह भी है कि आज हमारे भोजन में Vitamin और Minerals की मात्रा बहुत कम रह गयी है। इसका मुख्य कारण है अन्न, फल और सब्जियों में उनकी निर्धारित मात्रा का अभाव होना। जिसके लिये उत्तरदायी है उनकी उत्पादन प्रणाली। आज हमारे देश की जमीन में Organic Matter का अभाव हो गया है।

क्योंकि किसान अंधाधुंध तरीके से रासायनिक खादों का ही प्रयोग कर रहे हैं। जैविक खाद जो कि वनस्पति और पशुओं के अपशिष्ट से बनती है, उसका प्रयोग न के बराबर है, क्योंकि इसे तैयार करना में थोड़े परिश्रम और समय की आवश्यकता पड़ती है। जब किसान को उनकी उपज का लागत मूल्य तक नहीं मिल पाता है, तो फिर किसान भी क्यों किसी के लिये इतना परिश्रम करेगा।

उनकी मजबूरी और लालची सरकारों की उदासीनता ने ही आज हमें इस स्थिति में पहुंचा दिया है कि हमारे भोजन में उन तत्वों का बिलकुल अभाव हो चला है जो स्वस्थ शरीर की नींव हैं। शरीर को क्रियाशील रखने के लिये ऊर्जा चाहिये और शरीर को यह ऊर्जा मिलती है भोजन में उपस्थित पोषक तत्वों से, Vitamin और Minerals से। अब आगे पढिये जल में घुलनशील विटामिनों के बारे में –

Water Soluble Vitamins जल में घुलनशील विटामिन : –

Vitamin B (विटामिन B) : –

विटामिनों का सबसे बड़ा समूह, विटामिन B Complex एक उप किण्वक(coenzyme) या फिर एंजाइमों के अग्रदूत के रूप में कार्य करता है। चयापचय की प्रक्रिया में, उपकिण्वक, एंजाइमों (किण्वकों) की उनके कार्य में एक उत्प्रेरक के रूप में सहायता करते हैं। इस भूमिका में, विटामिन एंजाइमों के साथ एक कृत्रिम समूह के अंश के रूप में द्रढ़ता से बंधे हो सकते हैं।

जैसे – बायोटिन उन एंजाइमों का अंश है जो वसा अम्लों के निर्माण में सम्मिलित होते हैं। विटामिन B Complex समूह के सभी विटामिन जल में घुलनशील होते हैं। यह विटामिन आठ प्रकार का होता है, जिन्हें क्रमशः इन नामों से जाना जाता है –

5. Vitamin B1 (विटामिन B1) : –

इस विटामिन का रासायनिक नाम थायमिन है। यह भोजन के चयापचय में सहायता करता है और ऊर्जा उत्पन्न करता है। थायमिन बाल, त्वचा, माँसपेशियों और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। शरीर में इस विटामिन की अत्यधिक कमी हो जाने से व्यक्ति बेरी-बेरी रोग व वरनी-कोर्साकोफ सिंड्रोम से पीड़ित हो जाता है, जिससे तंत्रिका, ह्रदय और पेशीय तंत्र प्रभावित हो सकते हैं।

यह समस्या विकसित देशों में नगण्य है, लेकिन कुछ विकासशील देशो में अब भी बनी हुई है। विटामिन B1 को अधिक मात्रा में लेना भी हानिकारक है, क्योंकि ऐसा करने से व्यक्ति ज्यादातर समय निद्रा जैसी हालत में रहता है और उसे माँसपेशियों के शिथिलीकरण की समस्या भी हो सकती है।

विटामिन B1 के स्रोत व मात्रा –

यकृत, अंडे, पोर्क (सूअर का माँस), जौ का आटा, ब्राउन राइस, सब्जियाँ, आलू, मसूर, विलायती खरबूजा, दूध इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे अच्छी मात्रा में थायमिन पाया जाता है।

हमारे शरीर को प्रतिदिन 1.2 mg विटामिन B1 की आवश्यकता होती है, जो हमें आहार से आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा अभी निर्धारित नहीं की जा सकी है, इसलिये इसे उचित मात्रा में ही लें।

6. Vitamin B2 (विटामिन B2) : –

इस विटामिन का रासायनिक नाम रिबोफ्लेविन है और यह भी भोजन को उर्जा में रूपांतरित करने में सहायक होता है। यह आँतों में आयरन के अवशोषित होने की क्षमता को बढाता है। आँखों, मस्तिष्क, त्वचा व पेशियों को मजबूत बनाता है। कुछ शोधों के अनुसार यह माइग्रेन को दूर रखने में भी सहायक होता है।

शरीर में विटामिन B2 की अत्यधिक कमी होने से अरिबोफ्लाविनोसिस, ग्लोस्सिटिस आदि रोगों के होने की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे गले में घाव, होठों के पास जख्म और फटन, तथा त्वचा की पपड़ी उतरने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जबकि रिबोफ्लेविन अधिक मात्रा में लेने से आपका मूत्र गहरे पीले रंग का हो सकता है, हालाँकि इससे कुछ हानि नहीं होती है।

विटामिन B2 के स्रोत व मात्रा –

दूध व दूध से बने पदार्थ, केले, पॉपकॉर्न, हरी फलियाँ, शतावर, बादाम, पनीर, अंडे, जडे हुए अनाज और दाने इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में रिबोफ्लेविन पाया जाता है।

हमारे शरीर को प्रतिदिन 1.3 mg विटामिन B2 की आवश्यकता होती है, जो इस आहार से बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा अभी निर्धारित नहीं की जा सकी है, इसलिये इसे भी उचित मात्रा में ही लें।

7. Vitamin B3 (विटामिन B3) : –

इस विटामिन का रासायनिक नाम नियासिन या नियसिनामाइड है। विटामिन B1 व B2 की तरह यह भी भोजन को उर्जा में रूपांतरित करने के लिये अत्यावश्यक होता है। नियासिन यकृत, आँखों, त्वचा और तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने में भी केंद्रीय भूमिका अदा करता है। ऐसा माना जाता है कि यह ह्रदय रोगों से भी बचाव करता है।

शरीर में विटामिन B3 की अत्यधिक कमी होने से पेल्लेग्रा रोग के होने की समस्या पैदा हो सकती है, जिसमें त्वचा की उत्तेजना, डायरिया, डिमेंशिया जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। हालाँकि ऐसा होना अत्यंत दुर्लभ ही है। नियासिन को अधिक मात्रा में लेने से भी बचे, अन्यथा यह विषाक्तता उत्पन्न कर सकता है।

जिससे शरीर में हलकी-फुलकी जलन और झनझनाहट हो सकती है। यदि इसकी मात्रा 2 gm/प्रतिदिन से अधिक हो जाय, तो आपका लीवर भी क्षति ग्रस्त हो सकता है और दूसरी समस्याएँ भी पैदा हो सकती हैं।

विटामिन B3 के स्रोत व मात्रा –

माँस, मछली, अंडे, चिकन, सब्जियाँ, मशरूम, कॉफ़ी, पेड़ों से मिलने वाली गिरियाँ, मूँगफली इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में नियासिन पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 16 mg विटामिन B3 की आवश्यकता होती है, जो इस आहार से बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा 35 mg है।

8. Vitamin B5 (विटामिन B5) : –

इस विटामिन का रासायनिक नाम पेंटोथेनिक एसिड है। थायमिन, रिबोफ्लेविन और नियासिन की तरह विटामिन B5 भी भोजन से ऊर्जा उत्पन्न करने के काम में आता है। यह विटामिन न्यूरोट्रांसमीटर, स्टेरॉयड हार्मोन, लाल रक्त कणिकाओं को संश्लेषित करने में भी सहायता करता है। शरीर में विटामिन B5 की अत्यधिक कमी होने से पेरेसथेसिया रोग उत्पन्न हो सकता है।

पेंटोथेनिक एसिड को अधिक मात्रा में लेने से भी बचे, अन्यथा डायरिया, उल्टी और ह्रदय की जलन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। हालाँकि यह सभी लक्षण दुर्लभ ही हैं।

विटामिन B5 के स्रोत व मात्रा –

माँस, चिकन, अंडे, ब्रोक्कोली, एवोकेड़ो, साबुत अनाज, मशरूम, शकरकंद, योगर्ट आदि इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में पेंटोथेनिक एसिड पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 5 mg विटामिन B5 की आवश्यकता होती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा अभी निर्धारित नहीं की जा सकी है, इसलिये इसे भी उचित मात्रा में ही लें।

9. Vitamin B6 (विटामिन B6) : –

इस विटामिन का रासायनिक नाम प्यरीडोक्सिन या प्यरीडोक्सामिन है। विटामिन B6, विटामिन B Complex समूह के सबसे महत्वपूर्ण विटामिनों में से एक है। यह विटामिन एमिनो एसिड्स( जो प्रोटीन के निर्माण का मूल आधार हैं) के चयापचय के लिये आवश्यक हैं और शरीर में कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करते हैं। यह विटामिन ह्रदय की बीमारियाँ होने के खतरे को भी कम करता है।

यह सेरेटोनिन नामक हार्मोन के उत्पादन में सहायता करता हैं, जो निद्रा, भूख और मनोरूचि का नियमन करता है। यह लाल रक्त कणिकाओं और स्टेरॉयड हार्मोन के निर्माण में मदद करता है तथा मानसिक और सुरक्षा कार्यों को प्रभावित करता है। यदि शरीर में इसकी अत्यधिक कमी हो जाय, तो दौरे और दूसरी मानसिक समस्याओं का सामना करना पड सकता है, पर ऐसा दुर्लभ परिस्थितियों में ही होता है।

लेकिन विटामिन B6 की अधिक मात्रा लेने से (जो आहार से नहीं, बल्कि सप्लीमेंट लेने के कारण होती है) माँसपेशियों की कमजोरी, शरीर का संवेदनहीन हो जाना और स्नायुओं का क्षतिग्रस्त हो जाना जैसी समस्याएँ पैदा हो सकती है।

विटामिन B6 के स्रोत व मात्रा –

माँस, मछली, चिकन, सब्जियाँ, भुने हुए शकरकंद, पहाड़ी बादाम, उबला पालक, केले, पेड़ों की गिरियाँ आदि इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में प्यरीडोक्सिन पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 1.3-1.7 mg विटामिन B6 की आवश्यकता होती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा 100 mg निर्धारित है।

10. Vitamin B7 (विटामिन B7) : –

इस विटामिन का रासायनिक नाम बायोटिन है। पहले इसे विटामिन H के नाम से जाना जाता था। जल में घुलनशील दूसरे B Complex विटामिनों की तरह बायोटिन भी कोशिकाओं की वृद्धि और भोजन के चयापचय में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह थायमिन, रिबोफ्लेविन, नियासिन और पेंटोथेनिक एसिड की तरह शरीर के लिये ऊर्जा का उत्पादन करता है।

सामान्यतः शरीर में इस विटामिन की कमी दुर्लभ परिस्थितियों में ही होती है। लेकिन जब शरीर में इसकी बहुत कमी हो जाती है, तो व्यक्ति डर्मेटिटिस, एंट्रीटिस से पीड़ित हो सकता है। इसे अधिक मात्रा में लेने का कोई प्रतिकूल परिणाम अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करने से शरीर में बायोटिन के अवशोषण की क्षमता कम हो जाती है।

विटामिन B7 के स्रोत व मात्रा –

यकृत, मछली, कच्चे अंडे की जर्दी, मूँगफली, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, साबुत अनाज, एवोकेडो आदि इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में बायोटिन पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 30 µg विटामिन B7 की आवश्यकता होती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा अभी तक निर्धारित नहीं की जा सकी है, इसलिये उचित मात्रा में ही लें।

11. Vitamin B9 (विटामिन B9) : –

इस विटामिन का रासायनिक नाम फॉलिक एसिड या फोलिनिक एसिड है। विटामिन B9 भी विटामिन B Complex समूह के सबसे महत्वपूर्ण विटामिनों में से एक है। यह विटामिन एमिनो एसिड्स( जो प्रोटीन के निर्माण का मूल आधार हैं) के चयापचय के लिये आवश्यक हैं और शरीर में कोशिकाओं के निर्माण में बहुत मदद करता हैं। हमारे शरीर को फॉलिक एसिड की नियमित रूप से आवश्यकता पड़ती है।

यह रक्त का निर्माण करने के लिये एक महत्वपूर्ण घटक है और गर्भवती स्त्रियों के लिये अत्यंत आवश्यक है। जिससे उनके शिशु का उचित विकास हो सके, और मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में होने वाले जन्मजात दोषों को दूर रखा जा सके। यह दिल के रोगों और आँतों के कैंसर को दूर रखने में भी हमारी मदद करता है।

शरीर में फॉलिक एसिड की मात्रा बहुत कम होने पर, शरीर में रक्त की कमी (Megaloblastic anemia) या एनीमिया रोग हो जाता है और गर्भवती स्त्रियों के शिशुओं में जन्मजात विकृति (जैसे – neural tube defects) आदि पैदा हो जाती है। इसे अधिक मात्रा में लेने से शरीर में विटामिन B12 की कमी होने जैसे लक्षण पैदा हो सकते है।

विटामिन B9 के स्रोत व मात्रा –

यकृत, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, ब्रेड, पास्ता, शतावर, पालक, संतरे का जूस, मसूर और प्रसंस्करित अनाज व धान्य आदि इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में फॉलिक एसिड पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 400 µg फॉलिक एसिड की आवश्यकता होती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा 1000 µg निर्धारित है।

12. Vitamin B12 (विटामिन B12) : –

इस विटामिन का रासायनिक नाम मेथिलकोबैलेमिन, सियनोकोबैलेमिन है। यह विटामिन भी विटामिन B6 व फॉलिक एसिड की तरह, वसा अम्ल व एमिनो एसिड्स ( जो प्रोटीन के निर्माण का मूल आधार हैं ) के चयापचय के लिये आवश्यक हैं। Vitamin B12 शरीर में नयी कोशिकाओं के निर्माण करने में मदद करता हैं।

यह हमारे तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने के लिये और अल्झाइमर जैसी बीमारीयों के खतरे को कम करने के लिये भी आवश्यक है। वृद्धावस्था के निकट पहुँच चुके लोगों में इस विटामिन की कमी अक्सर हो जाती है, जिसके कारण उनमे स्मृति नाश, विभ्रम और रक्त की कमी के रोग देखने को मिल सकते हैं।

इसलिये अधिक आयु वाले प्रौढ़ व्यक्ति विटामिन B12 से युक्त आहार नियमित रूप से लें। इसकी अधिक मात्रा से होने वाला कोई विशेष रोग अभी तक सामने नहीं आया है, हालाँकि किसी-किसी व्यक्ति में मुहाँसे या फुंसी जैसी छोटी-मोटी कोई समस्या सामने आ सकती है, जिससे डरने की जरुरत नहीं है।

विटामिन B12 के स्रोत व मात्रा –

माँस, चिकन, मछली, अंडे और दूध आदि इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में विटामिन B12 पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 2.4 µg विटामिन B12 की आवश्यकता होती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा अभी तक निर्धारित नहीं की जा सकी है, इसलिये उचित मात्रा में लें।

13. Vitamin C (विटामिन C) : –

इस विटामिन का रासायनिक नाम एस्कॉर्बिक एसिड है और यह जल में आसानी से घुलने वाला विटामिन है। विटामिन C शरीर के लिये आवश्यक अनिवार्य विटामिनों में से एक है और शरीर को नियमित तौर पर इसकी जरुरत पड़ती है, क्योंकि यह शरीर में लम्बे समय तक नही रुकता। विटामिन C एंटी ऑक्सीडेंट का कार्य भी करता हैं और शरीर की फ्री रेडिकल्स से रक्षा करता है।

Vitamin C के कारण ही त्वचा की चमक-दमक बनी रहती है। इसमें देह की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने का गुण भी है। यह कोलाजेन के निर्माण में मदद करता है, जो घावों को ठीक करने के लिये महत्वपूर्ण है। विटामिन C शरीर की कई प्रकार के रोगों से रक्षा करता है। यहाँ तक कि कई प्रकार के कैंसर जैसे – मुँह, गले, पेट और स्तन कैंसर के होने का खतरा इसके नियमित सेवन से कम हो जाता है।

विटामिन C की कमी और अधिकता के कारण होने वाली समस्या –

शरीर में इस विटामिन की अत्यधिक कमी होने पर स्कर्वी रोग हो जाता है, जिसमे व्यक्ति सिर के बाल व दांतों के गिरने तथा मसूड़ों की सूजन और उनसे खून निकलने की समस्या से ग्रस्त हो जाता है। इसके अतिरिक्त शरीर में भारीपन, आलस्य और थकान निरंतर बने रहते हैं। पर यह रोग तभी सामने आता है, जब आपने महीनों से फल व सब्जियों का सेवन न किया हो, जो इस विटामिन के मुख्य स्रोत हैं।

ऐसी स्थिति में आपको कुछ समय तक इसकी बढ़ी हुई मात्रा लेनी पड़ सकती हैं। इस विटामिन की अधिक मात्रा लेने से Vitamin C megadosage नाम की समस्या हो जाती है, हालाँकि इसकी सम्भावना बहुत ही कम होती है।

विटामिन C के स्रोत व मात्रा –

यकृत, मट्ठा, दही, फल जैसे – अंगूर, संतरा, आम, मौसमी, माल्टा, स्ट्रॉबेरी, टमाटर व सब्जियाँ जैसे – ब्रोकली, पालक, बथुआ, नींबू, लाल मिर्च आदि इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में विटामिन C पाया जाता है।

हमारे शरीर को प्रतिदिन 90 mg विटामिन C की आवश्यकता होती है, जो हमें इस आहार से बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा 2000 mg निर्धारित है।

इस तरह शरीर के लिये आवश्यक सभी 13 विटामिनों के विषय में विस्तृत वर्णन कर दिया गया है। आशा है यह लेख आपको पसंद आया होगा। इस लेख को लिखने के लिये लेखक को बहुत अधिक परिश्रम करना पड़ा है, क्योंकि यह मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति, उसके शरीर व स्वास्थ्य से जुडा हुआ है।

इस लेख को लिखने में जो समय व्यतीत हुआ है, जो परिश्रम करना पड़ा है; वह तभी सफल कहा जा सकेगा, जब आप अपने स्वास्थ्य के प्रति कुछ जागरूक होंगे और इन आवश्यक तत्वों को अपने आहार में शामिल करते हुए एक स्वस्थ जीवन जीने की ओर अग्रसर होंगे। क्योंकि बीमार शरीर किसी यम-यातना से कम नहीं है।

कोई कमी न रहे, इसके लिये न केवल इन्टरनेट, बल्कि कई पुस्तकों और शोध लेखों का सहारा भी लेना पड़ा है। इतना करने के पश्चात भी यह कहना मुश्किल है कि इसमें कोई भूल नहीं हुई है। हो सकता है इतनी सावधानी के पश्चात भी कोई तथ्य छूट गया हो। यदि आपकी दृष्टि में इस लेख में कोई कमी सामने आ रही हो, तो कृपया उसे बताने की कृपा करें, ताकि उसे शीघ्र ही दूर किया जा सके।

ईश्वर करे आप सभी का जीवन स्वस्थ शरीर की मुस्कान से परिपूर्ण हो!

“हमारे अन्दर की प्राकृतिक शक्तियाँ ही बीमारी की सच्ची उपचारकर्ता हैं।”
– हिप्पोक्रेट्स

 

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