Health Benefits of Water Treatment in Hindi

 

“जल प्राणियों का जीवन है। इसलिये निषेध होने पर भी कभी पानी नहीं रोकना चाहिये।”
– भावप्रकाश

 

Health Benefits of Water in Hindi
जल चिकित्सा से जानिये पानी आपको कैसे स्वस्थ रख सकता है

Water is Essential for Our Life जल और हमारा जीवन : –

प्रत्येक मनुष्य स्वस्थ रहना चाहता है, पर स्वास्थ्य की उपयुक्त जानकारी के अभाव में उन्हें मन मनोसकर रह जाना पड़ता है। कई बार धन तो कई बार समय की कमी के कारण व्यक्ति के लिए अपने स्वास्थ्य हेतु कुछ विशेष कार्य करना संभव नहीं हो पाता। लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत एक चिकित्सा पद्धति ऐसी भी है जो बिल्कुल निरापद, सरल और निःशुल्क है और यह पद्धति है जल चिकित्सा

जो इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि शुद्ध जल का पर्याप्त मात्रा में नियमित सेवन करने पर अनेकों शारीरिक रोगों से दूर रहा जा सकता है और अच्छे स्वास्थ्य का आनंद उठाया जा सकता है। लेकिन आज मनुष्य जाति के लिए यह एक दुर्भाग्य से कम नहीं है कि प्रकृति में इतना जल होते हुए भी सभी इंसानों को निर्मल स्वच्छ जल मिल पाना दिन प्रतिदिन दुष्कर होता जा रहा है

क्योंकि भूमिगत जल का स्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है। कई स्थानों पर लोग अशुद्ध जल पीने को मजबूर हैं, तो कहीं लोगों को दूसरे स्थानों से जल लाकर पीना पड रहा है। अगर यही स्थिति कुछ समय और रही तो न जाने भविष्य में हमें किन भीषण परिस्थितियों से गुजरना पड़ेगा।हम यह मानकर चलते हैं कि आपको भी कहीं न कहीं से पीने लायक शुद्ध जल मिल ही जायेगा।

Water is Simplest Natural Treatment जल सरलतम प्राकृतिक उपचार है : –

आप माने या न माने शुद्ध जल से प्राप्त होने वाले लाभ अपार हैं। जल चिकित्सा जैसी सुलभ प्राकृतिक संजीवनी बूटी शायद ही कोई दूसरी हो जिसका कोई प्रतिकूल परिणाम कभी सामने आया हो। यह एक सुनिश्चित तथ्य है कि यदि आपको भोजन के रूप में शुद्ध अन्न, जल और रहने के लिए एक शुद्ध वातावरण मिल सके तो आप शायद ही बीमार पड़ें।

हाँलांकि आज के युग में इसकी सम्भावना कम ही है। फिर भी यदि आप किसी प्रकार से पीने के लिये शुद्ध जल का प्रबंध कर सकें तो आप बहुत हद तक अपने स्वास्थ्य को बेहतर स्थिति में रख सकते हैं। छोटे शहरों, कस्बो या गाँवों में रहने वाले लोगों के लिये शुद्ध जल आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

जबकि मेट्रो या बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को फ़िल्टर के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है, क्योंकि वहाँ भूमिगत जल के साधन आसानी से सुलभ नहीं हैं। चाहे तो आप पानी को उबालकर शुद्ध कर लें या फिल्टर के जल का इस्तेमाल करें दोनों ही तरह का जल इस प्रयोग में लिया जा सकता है।

जहाँ सबमर्सिबल पम्प शुद्ध जल देता हो, वहां उसके पानी का भी प्रयोग किया जा सकता है। लेकिन यदि किसी को आसानी से गंगाजल उपलब्ध हो सके तो वह सर्वश्रेष्ठ है। प्रायः गंगोत्री से हरिद्वार तक का जल ही शुद्ध समझा जाता है। अब जानिये पर्याप्त मात्रा में जल पीकर आप कितने लाभ उठा सकते हैं –

Health Benefits of Drinking Water जल पीने के लाभ : –

1. एक 1 लीटर के तांबे के लोटे में जल भरकर उसे लकड़ी या किसी अन्य कुचालक पदार्थ पर इस तरह रखिये कि धरती का संपर्क लोटे से किसी प्रकार न हो, अन्यथा इस जल की समस्त ऊर्जा पृथ्वी में ही समा जायेगी। 12 से 24 घंटे तक तांबे के लोटे में रखा गया स्वच्छ जल इस धातु के उच्च विद्युत् चालकता गुण को ग्रहण कर लेता है

और इस आवेशित जल को पीने से E.Coli जैसा भयंकर बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाता है, जो आमाशय के अंदर अल्सर जैसे खतरनाक रोग को पैदा करता है। इसके अतिरिक्त यह जल पेट और आँतों की अनेकों जीवाणुओं के संक्रमण से भी रक्षा करता है।

2. प्रातःकाल पिया गया जल अमृत के तुल्य होता है जो पीने के पश्चात रात भर देह में संचित हुए समस्त विषैले पदार्थों को बाहर निकाल फेंकता है। इसलिये सुबह के समय खाली पेट 2-3 गिलास जल अवश्य पीयें यदि अधिक जल पी सकते हैं तो और अच्छा है।

3. प्रतिदिन सुबह सोकर उठने के पश्चात 2-3 गिलास कुनकुना जल पीने से न केवल मल-त्याग आसानी से होता है, बल्कि कब्ज के कारण होने वाले गुदा रोगों (बवासीर इत्यादि) से भी बचाव होता है।

4. प्रतिदिन 12 से 15 गिलास (3.5-4.5 ली0) पानी पीने से शरीर में लवणों का उचित संतुलन बना रहता है और वात-पित्त-कफ से पैदा होने वाले अनेकों रोगों से बचाव होता है।

5. सोने से एक घंटा पहले 1 गिलास कुनकुना जल पीने से और सुबह सोकर उठने के पश्चात 2 गिलास जल पीने से शरीर में कहीं भी पथरी के बनने की सम्भावना नहीं रहती और सभी प्रकार के मूत्र रोग दूर होते हैं।

6. नियमित रूप से 1-2 घंटे के अंतराल पर पानी पीते रहने से पेट में अम्ल व क्षार का संतुलन बना रहता है व पेट और सीने की जलन, एसिडिटी, बदहजमी, अरुचि आदि से आसानी से बचा रहा जा सकता है।

7. गर्मियों में लगातार शीतल जल पीते रहने से भयंकर लू से बचाव होता है जो शरीर से अधिक पसीना निकालकर डीहाइड्रेशन पैदा करती है और पानी की कमी के कारण व्यक्ति का जीवन संकट में पड जाता है।

8. भोजन करने से तुरंत पहले कभी जल न पीयें, क्योंकि ऐसा करने से भोजन को पचाने वाले पाचक अम्ल धीमे पड जाते हैं जिससे भोजन सही तरह से नहीं पचता। भोजन करते समय बीच-बीच में एक-दो घूंट जल पीते रहने से पेट में भोजन और जल आपस में अच्छी तरह मिल जाते हैं जिससे आँतों को रस अवशोषित करने में आसानी होती है

और मल त्याग करते समय व्यक्ति को नाडियों पर जोर नहीं डालना पड़ता। क्योंकि अपशिष्ट पदार्थ आसानी से बड़ी आंत में पहुँच जाता है, लेकिन इस जल की मात्रा 150-200 ml से अधिक न हो।

9. इतना ही नहीं जल न केवल मानसिक तनाव, थकान, आलस्य, चिंता और अवसाद को दूर करने में सहायक है, बल्कि यह माँसपेशियों की क्रियाशीलता बढाने, मनोदशा ठीक करने और एक अच्छी नींद लाने में भी अत्यंत सहायक सिद्ध हुआ है।

10. भोजन करने के तुरंत बाद न तो कभी जल लें और न ही किसी प्रकार के फल या जूस का सेवन करें। क्योंकि ऐसा करने से भोजन का पाचन देर से होता है और आमाशय सहित अन्य पाचक अंगों की जैवरासायनिक प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।

11. जल शरीर के सबसे बड़े अंग हमारी त्वचा के स्वास्थ्य के लिये भी अत्यंत आवश्यक है। प्रतिदिन स्नान के माध्यम से हमारी त्वचा जल की ऋणात्मक आयनों से आवेशित ऊर्जा को ग्रहण करती है। जो न केवल नयी कोशिकाओं के निर्माण और उनकी मरम्मत के लिये अनिवार्य हैं, बल्कि त्वचा के सौंदर्य व चमक को भी नियमित बनाये रखती है।

मस्तिष्क में बढ़ी उष्णता को कम करने के लिये शीतल जल की पट्टीयाँ एक प्रभावी उपाय है। यह न केवल सिरदर्द को कम करता है, बल्कि कभी-कभी यह मनुष्य के जीवन की भी रक्षा करता है।

12. हम अपने बाह्य शरीर की सफाई अनेकों तरह से कर सकते हैं, लेकिन शरीर के आंतरिक अंगों की साफ़-सफाई के लिये जल एकमात्र विकल्प हैं। चाहे यह रक्त की शुद्धता हो या चाहे ह्रदय, वृक्क, आँतें, आमाशय, यकृत आदि जीवन के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण अंगों की स्वच्छता की बात हो, जल इनके लिये अमृत के समान गुणकारी है।

जल ही वह माध्यम है जिसके जरिये शरीर और उसके अंग अपने भीतर दौड़ते हुए विषैले और खतरनाक पदार्थों को देह से बाहर निकाल सकते हैं। पर्याप्त रूप से जल न पीने के कारण ही आज अंगों में पथरी बनने और गुर्दों के बेकार होने का खतरा बढ़ता ही जा रहा है।

13. जल व्यक्ति के वजन को कम करने में भी अत्यंत प्रभावशाली है। स्वास्थ्य को उत्तम बनाये रखने के लिये व्यक्ति को दो बार ही भोजन की पूर्ण मात्रा लेनी चाहिये, वह भी तब जब खुलकर भूख लगती हो। अन्य समय में व्यक्ति को दूध, फल और उनके रस का ही सेवन करना चाहिये (कठोर शारीरिक परिश्रम करने वाले व्यक्ति के लिये नहीं)।

लेकिन अधिकांश व्यक्तियों की आदत होती है कि वे थोड़ी सी भूख लगने पर भी कुछ भी खा लेते हैं और धीरे-धीरे मोटापे की समस्या से ग्रस्त हो जाते हैं। यह भूख आभासी होती है। वास्तव में यह वह समय होता है, जब आपके शरीर को जल चाहिये होता है।

कहा गया है कि उत्तम स्वास्थ्य पाने के लिये अपने पेट को दो हिस्से भोजन से, एक हिस्सा जल से और एक हिस्सा वायु से भरना चाहिये। इसलिये ऐसे अवसरों पर जल या ऐसा आहार लें जिसमे जल की मात्रा अत्यधिक हो।

14. यदि किसी कारण से पेट में कब्ज होने पर पित्त की सांद्रता बढ़ गयी हो और खट्टी-खट्टी डकारें आ रही हों या फिर पेट में तेज जलन होती हो और ऐसा अक्सर होने लगे तो इसे दूर करने के लिये यह क्रिया कुछ दिन नियमित रूप से करें। यह न केवल इन समस्त समस्याओं को दूर करेगी, बल्कि आपके पाचन तंत्र को सुधारकर उसे बलशाली बनायेगी।

एक बर्तन में 2-3 लीटर जल लेकर उसे हल्का गर्म करें और फिर तब तक पीयें जब तक आपका पेट पूरी तरह से न भर जायें। जब जल पीने की बिल्कुल इच्छा न हो तब कमर को आगे की ओर थोडा झुकाकर इस तरह खड़े हो जाय कि आपका सिर और मुँह नीचे की ओर रहे। अब तर्जनी और मध्यमा ऊँगली को मुँह के अंदर कुछ दूर तक ले जाइये।

इससे आपको उल्टी आने लगेगी और पेट से गन्दा पानी बाहर आना शुरू हो जायेगा। इस जल के साथ-साथ अधपचे भोजन के कुछ अंश और हरे-पीले रंग का पित्त बाहर आ जायेगा, अंत में साफ़ पानी बाहर आयेगा और पेट की सारी समस्या, जलन आदि दूर हो जायेगी। इस क्रिया को प्रतिदिन सुबह के समय खाली पेट ही करें। आप स्वयं फर्क महसूस करेंगे।

“जो अच्छी तंदुरुस्ती का मजा उठाता है वह धनी ही है, चाहे वह इसे जानता हो या नहीं।”
– इटली की कहावत

 

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