Complete Body Language Guide in Hindi

 

“अच्छा सोचना अक्लमंदी है, अच्छी योजना बनाना और बड़ी बुद्धिमानी है, पर अच्छा करना सबसे बुद्धिमानी का काम है और सर्वश्रेष्ठ है।”
– अज्ञात

 

Science of Body Language (SBL) क्या है : –

Body Language या शरीर की भाषा एक ऐसी अद्भुत कला है, जिसके जरिये इस विधा में पारंगत कोई भी व्यक्ति किसी अन्य पुरुष या स्त्री के व्यक्तित्व, आदत, व्यवहार व चरित्र का गंभीर आँकलन उनके शरीर के अंगों, मुद्राओं व चिन्हों के आधार पर स्वयं ही कर सकता है, या फिर यह कहें कि यह वह विज्ञान है, जिससे बिना उनसे कुछ पूछे उनके जीवन के गुप्त रहस्यों को भली-भांति जान व समझ सकता है।

क्योंकि हमारा यह जैविक शरीर हमारे उस सूक्ष्म शरीर का ही मूर्त रूप है, जो इच्छाओं, विचारों, भाव-संवेदनाओं और सुद्रढ़ आदतों से निर्मित हुआ है। पाश्चात्य सभ्यता और उसके समर्थक देशों ने Body Language के जो सूत्र और सिद्धांत निर्मित किये हैं, वह प्राचीन भारतीय ऋषियों द्वारा गहन अनुसंधान के पश्चात निर्मित हुए सामुद्रिक शास्त्र की तुलना में अत्यंत संकुचित और अस्पष्ट हैं।

क्योंकि भारत का यह प्राचीन, गहन विज्ञान किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रतिपादित नहीं है, बल्कि न जाने कितने ऋषियों, योगियों, विद्वानों और अन्वेषणकर्ताओं के सम्मिलित प्रयासों का परिणाम है। जिसमे उन्होंने मनुष्य के शारीरिक लक्षणों, मानसिक चेष्टाओं और भावनात्मक आवेगों की अत्यंत दीर्घ काल तक सूक्ष्म परीक्षा की थी।

जहाँ सामुद्रिक शास्त्र शरीर के समस्त लक्षणों व मानसिक चेष्टाओं को आधार बनाकर व्यक्ति के स्वभाव की विस्तृत, वास्तविक और गहन व्याख्या करता है, वहीँ आधुनिक पाश्चात्य विद्वान् शरीर की केवल कुछ विशेष मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं के आधार पर ही किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का समग्र मूल्यांकन करते है।

इसलिये यदि आपको किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का सटीक विश्लेषण करना है, तो अपने पूर्वजों, उन महान ऋषियों द्वारा प्रणीत उसी सामुद्रिक शास्त्र की शरण में जाना ही श्रेयस्कर है, जो किसी प्रकार का संदेह नहीं छोड़ता और मनुष्य के छुपाये गये वास्तविक स्वरुप को प्रकट कर देता है।

Body Language (SBL) के विषय में जानने की आवश्यकता क्यों है : –

नंबरों और नौकरी की दौड़ में व्यस्त आपमें से अधिकांश लोग शायद नहीं जानते होंगे कि जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है, जहाँ इस महान विधा की जानकारी आपके लिये फायदेमंद नहीं होगी। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और जब तक कोई भी व्यक्ति सामाजिक संबंधों में बंधकर जिंदगी गुजारने के लिये तैयार है, तब तक उसे मनुष्यों के साथ अनिवार्य रूप से रहना ही होगा, उनसे मेल-जोल रखना ही होगा।

जब-जब आपके जीवन में कोई नया व्यक्ति आपके साथ जुड़ेगा तब-तब Body Language के इस अनूठे ज्ञान की आवश्यकता आपको हमेशा रहेगी। क्योंकि यही वह एकमात्र साधन है जिसके जरिये आप किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का, उसकी आदतों का, उसके विचारों का, उसकी समझ का वास्तविक परिचय पा सकते हैं। इस दुनिया में 95% से भी अधिक लोग एक दोहरा व्यक्तित्व लेकर जीते हैं।

जो अपने सामान्य जीवन में एक सतही और लोगों की नज़रों में अच्छा लगने वाला व्यक्तित्व प्रकट करते हैं, पर जो वास्तविक जीवन में बिल्कुल बनावटी व आभासी होता है और सिर्फ उनके अपने एकांत के क्षणों और कुछ प्रियजनों के सामने ही प्रकट होता है। लेकिन कोई दूसरा उनके इस रूप को न तो जान पाता है और न ही पहचान पाता है। छदम व्यक्तित्व के आधार पर बने रिश्तों का घातक परिणाम होता है।

जो सामने आता है यातनाओं, दुखों और विक्षुब्धताओं से भरे उन सम्बन्धों के रूप में, जो संपूर्ण जीवन की मधुरता और उसके सौंदर्य को नष्ट कर देते हैं और इस परिणाम को भुगतना पड़ता हैं, उन सरल व निर्दोष लोगों को जिन्होंने उनके उस आभासी रूप का विश्वास कर उन्हें अपने जीवन में स्थान दिया, अपना विश्वास सौंपा। इसके उदाहरण के रूप में शायद किसी को कुछ बताने की आवश्यकता न पड़े।

क्योंकि समाज में दिन-रात फैलती बुराइयाँ, षड़यंत्र, छल-कपट, विश्वासघात और उनके कारण होने वाले अपराध, जिन्होंने न जाने-कितने नर-नारियों के जीवन की ऊँची अभिलाषाओं को असमय ही कुचल दिया, बल्कि संसार को भी एक ऐसा स्थान बना दिया, जहाँ सच्चे व सरल व्यक्तियों पर भी कोई विश्वास नहीं करना चाहता, इस बात का ज्वलंत प्रमाण हैं।

Body Language (SBL) का ज्ञान हमारे लिये किस तरह उपयोगी है : –

यह निर्विवाद तथ्य है कि किसी दूसरे व्यक्ति को सुधारना, उसके व्यक्तित्व में परिवर्तन लाना संसार में सबसे मुश्किल काम है और यदि वह तैयार न हो तो नितांत असंभव। यह कार्य तो खैर हमारे वश में नहीं है, लेकिन हम इतना तो कर ही सकते हैं कि अपने जीवन में प्रवेश करने वाले दूसरे व्यक्ति के स्वभाव की कुछ तो परीक्षा कर सके। विशेषकर तब जब हम उन्हें अपना विश्वास सौंपने जा रहे हों,

क्योंकि अगर उन्होंने हमें धोखा दिया, तो यह उनकी धूर्तता होगी, लेकिन यदि हमने अपने अज्ञान के कारण स्वयं ही नुकसान उठाया, तो यह हमारी मूर्खता होगी। आप लोगों में से कुछ लोग शायद इस बात का विश्वास नहीं करेंगे कि Body Language से न केवल इंसानों की, बल्कि पशुओं के स्वभाव व गुणों की भी जांच की जाती है।

जो लोग ग्रामीण पृष्ठभूमि के हैं, वे जानते होंगे कि जिन गाय-भैसों के थन व दुग्ध क्षेत्र बडा व विशाल होता है, वह छोटी नस्लों की तुलना में अधिक दूध देती हैं। जो बैल व घोड़े पूँछ की जड़ पर हाथ रखते ही उछल पड़ते हैं, वे दौड़ने व काम करने में सबसे आगे रहते हैं, यही बात मनुष्यों के सन्दर्भ में भी है। दिखने में तो सभी व्यक्ति एक-जैसे ही लगते हैं – हड्डियों और माँस से बने हुए पुतले की तरह।

लेकिन उनके व्यक्तित्व, चरित्र और स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर होता है। जो उनके शारीरिक अंगों की माप, स्वरुप, उनकी मानसिक चेष्टाओं, मुद्राओं, वाक्शैली आदि से प्रकट होता है, जिसके बारे में आप आगे पढेंगे। आपने ध्यान दिया होगा जब आप स्कूल या कॉलेज के छात्र थे, तो प्रैक्टिकल के लिये आने वाला Examiner छात्रों से सवाल पूछने के साथ-साथ उनके शरीर की भाव-भंगिमाओं पर भी ध्यान देता था।

जब कोई छात्र उत्तर देते समय अटकता था, तो वह जान रहा होता था कि इस छात्र को अपने उपर पूर्ण विश्वास नहीं है और न ही इसे प्रश्न का समुचित उत्तर पता है। लेकिन जो छात्र बिल्कुल निडर और स्वाभाविक रूप से उसके प्रश्नों का सही उत्तर देते थे, वह उनकी प्रशंसा करते हुए उन्हें सबसे अच्छे अंक देकर जाता था।

Body Language का ज्ञान एक Successful और Happy Life के लिये बहुत जरुरी है : –

उनके अच्छे प्रदर्शन में केवल उनकी जानकारी का ही योगदान नहीं होता था, बल्कि उनकी प्रभावशाली Body Language की भी अहम् भूमिका रहती थी। इस स्थिति का सामना हर व्यक्ति को उस समय भी करना पड़ता है, जब वह किसी नौकरी के लिये Interview में बैठता है। विशेषकर तब जब आप किसी प्रतिष्ठित पद के लिये अपनी योग्यता का दावा पेश करते हुए एक Panel Interview का सामना करते हैं।

वहां बोर्ड का एक सदस्य केवल आपकी Body Language पर ही ध्यान रखता है। वह अन्य सदस्यों की तरह आपसे कोई प्रश्न नहीं पूछता, बल्कि सिर्फ यह देखता है उत्तर देते समय, बोलते समय, बैठते समय आपका शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है। चूँकि यह विषय बहुत बड़ा है, इसलिये एक ही लेख में इसे पूर्ण करना असंभव है। आप अपनी उत्कंठा बनाये रखिये, हम इसे कई लेखों की श्रंखला में पूर्ण करने का प्रयास करेंगे।

Body Language से हम केवल दूसरों के ही नहीं, बल्कि अपने स्वयं के व्यक्तित्व व स्वभाव की परीक्षा कर अपनी कमजोरियों को भी दूर कर सकते हैं और अपनी शक्तियों को पहचान सकते हैं, जो हमारे लिये जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काम आयेंगी। चाहे अपने स्वयं के व्यक्तित्व को उत्तम व श्रेष्ठ बनाना हो या फिर दूसरे के व्यक्तित्व की वास्तविकता को जानना हो, चाहे एक अव्वल विद्यार्थी बनना हो।

या फिर नौकरी या career में बहुत आगे बढ़ना हो, चाहे अच्छे मित्रों को चुनना हो या एक अच्छे जीवनसाथी की खोज करनी हो, चाहे भविष्य के अनागत की झलक पानी हो या अशुभ परिस्थितियों और दुखों से बचाव करना हो, Body Language का यह विशेष ज्ञान आपकी हमेशा सहायता करेगा। चाहे इस धरती पर हम रहे न रहें, लेकिन इस महान विज्ञान की प्रासंगिकता सदैव बनी रहेगी।

Body Language (SBL) से व्यक्ति के व्यक्तित्व व स्वभाव की पहचान कैसे की जाती है : –

प्रत्येक शरीर की अपनी स्वयं की एक भाषा होती है, जो हमारे बिना जाने स्वाभाविक रूप से चेतन-अवचेतन मन के अनुरूप कार्य करती है। हम चाहे उसे अपनी वाणी से कैसे भी व्यक्त करें, लेकिन शरीर के क्रिया-कलाप हमारी यथार्थ भावना के अनुरूप ही होंगे। हमारे शरीर के अंग, शरीर पर जन्मजात बने चिंह, दाग, तिल, अंगों की माप, मानसिक भावनाओं के अनुरूप होने वाली शारीरिक चेष्टाएँ आदि सभी हमारे जीवन के गुप्त रहस्यों को जानने के साधन हैं।

जो हमारे व्यक्तित्व, मानसिक गठन, नैसर्गिक स्वभाव और चरित्र को प्रकट करते हैं। जिन्हें झूठ बोलकर या छिपाकर नकारा नहीं जा सकता, यथार्थ सत्य को परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इनसे हम न केवल अपने व दूसरों के जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी पा सकते हैं, बल्कि सुदूर भविष्य की आवश्यक जानकारी भी मिलती है। शरीर की भाषा के इस विज्ञान में इन गूढ़ बातों पर ध्यान केन्द्रित कर किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व की जांच की जाती है –

1. शरीर पर जन्म से बने चिन्हों द्वारा – जैसे, तिल, मस्से, रेखाओं, दाग व निशानो से।

2. शरीर के अंगों के स्फुरण से – हाथ-पैर, कान, नाक, आँख आदि अंगों के फड़कने से।

3. शरीर के अंगों की माप और स्वरुप से – जैसे बाल, नाखून, मस्तक, नाक, हाथ, पैर, कमर, छाती, होंठ आदि से।

4. शरीर की मुद्राओं द्वारा – चलने-फिरने, बैठने, बोलने, सोचने, खाने-पीने, हँसने, इशारा करने आदि क्रिया-कलापों से।

अगले लेखों से आप क्रमवार शरीर की भाषा से व्यक्तित्व को प्रकट करने वाले इन साधनों के बारे में विस्तार से पढेंगे, जो न केवल आपको आश्चर्यचकित कर देंगे, बल्कि यह भी प्रमाणित कर देंगे कि विदेशियों की तुलना में अपने देश का विज्ञान कितना ऊँचा, प्रामाणिक और सटीक है।

हमें पूर्ण आशा है कि यदि आप संशयरहित मानसिकता से एक सच्चे जिज्ञासु की भांति इस अनमोल ज्ञान को ग्रहण करने की दिशा में अग्रसर होंगे, तो किसी भी बात पर संदेह करने के लिये कोई स्थान नहीं रहेगा।

“अगर आप पैसे से आजादी की उम्मीद करते हैं, तो आप इसे कभी हासिल नहीं कर सकेंगें। इस दुनिया में सच्ची सुरक्षा केवल ज्ञान, अनुभव और योग्यता की उपलब्धि में है।”
– हेनरी फोर्ड

 

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