Struggle: The Top Secret of Success in Hindi

 

“सफलता आपकी उपलब्धियों से नहीं तय की जाती है, बल्कि उन बाधाओं से मापी जाती है जिनका आपने सामना किया है और वह साहस, जिसके बल पर बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आप निरंतर संघर्ष करते रहे।”
– स्वेट मार्डेन

 

Top Secret of Success in Hindi
मुश्किल चुनौतियों से जूझने के लिये पहाड़ जैसा जिगर चाहिये

Struggle is the Source of All Success संघर्ष ही है हर सफलता का जनक : –

चट्टानें फोडती है, अपनी राह में आने वाली हर चीज़ से टकराती है, तब कहीं जाकर नदी आगे बढ़ती है और अपने अस्तित्व की रक्षा कर पाती है। मखमली जमीन की गहराइयों में दबा पड़ा बीज़ अपने ऊपर पड़े, मिटटी के ढेलों को धकेलने की जी-जान से कोशिश करता है, तब कहीं जाकर वह इस स्वप्निल संसार को देख पाता है।

अगर वह ऐसा न कर सके, तो कैसे वह एक महान वृक्ष बने और कैसे एक परोपकारी जीवन जीने की राह लोगों को दिखाए। चीटियाँ अगर रात-दिन परिश्रम न करें, तो कैसे अजूबी बाँबियों का निर्माण हो और कैसे उसे संसार के सबसे परिश्रमी कारीगर का गौरव मिले।

आगे बढ़ने वाले, कुछ कर गुजरने वाले लोगों का इतिहास, जिन्होंने भी ध्यान से पढ़ा है, तो यही पाया है कि सफलता की देदीप्यमान चोटियों पर पहुँचने के लिए, उन्हें न केवल अदम्य संघर्ष के बीच आगे बढ़ना पड़ा है, बल्कि यह भी सिद्ध करना पड़ा है कि रास्ते की बाधाओं के मुकाबले उनका साहस और इच्छाशक्ति ही ज्यादा भारी है।

उनके धैर्य की अटलता, मुश्किलों की जड़ता से ज्यादा वजनदार है। वे किसी भी तरह से उन्हें पीछे लौटने को या रास्ता बदलने को मजबूर नहीं कर सकती हैं और वास्तव में ऐसा करके ही, उन्हें अपनी अभिलाषा का राजसिंहासन मिल सकता है।

Why Struggle is Important in Life जीवन में संघर्ष क्यों आवश्यक है : –

नेपोलियन हिल का कहना है – “शक्ति और उन्नति केवल लगातार प्रयास और संघर्ष करने से ही हासिल हो पाती हैं।” बिना संघर्ष किये, बिना परिश्रम की आग में तपे, कौन आज तक ऊपर उठ सका है? कौन अपना यश दिग-दिगांतर तक फैला सका है? किसने बगैर संघर्षों के महान सफलताओं का स्वाद चखा है? सच तो यह है कि संघर्ष ही जीवन है।

बिना संघर्ष के कोई विशिष्ट सफलता मिलनी संभव नहीं और अगर कोई उपलब्धि मिल भी जाये, तो वह संतुष्टि दे पाए या न दे पाए पर अहं अवश्य उत्पन्न कर देती है। हर व्यक्ति का यह संघर्ष उसके जन्म के साथ ही शुरू हो जाता है। जब माँ के गर्भ में रहने की अवधि पूरी हो जाती है और शिशु बंद कोठरी से बाहर निकलने के लिए संघर्ष करता है, तो माँ की छटपटाहट देखने वालों को भी विचलित कर देती है।

फिर जब वह बोलना सीखता है, तो न जाने कितनी बार शब्दों को गलत बोलता है, पर हर बार संघर्ष करके परिपक्वता पाने की चाह बालक को उसके इच्छित लक्ष्य की प्राप्ति(शब्दों को सही बोलना) करा ही देती है। चलना शुरू करते हुए, न जाने कितनी बार नीचे गिरता है; कभी जमीन पर चलते हुए, कभी बिस्तर या पालने से और कभी गोद से।

न जाने कितनी बार चोट लगती है, न जाने कितनी बार लहू निकलता है, पर पूर्णता पाने की चाह उसे कभी रुकने नहीं देती। एक शिशु अदम्य संघर्ष, धैर्य और निरंतर परिश्रम का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। जो अपने निर्बल शरीर से भी छोटी-छोटी इच्छाओं की पूर्ति के लिए, अपने आपको बार-बार संकटों में डालता है।

Do not Fear of Struggle संघर्ष से मत घबराइये : –

अब जरा ध्यान से सोचिये – हममे से प्रत्येक ने अपने जीवन के प्रारम्भ में यह संघर्ष किया है, परन्तु अब शायद एक छोटे से लक्ष्य के लिए भी प्रयास करने से डरते हैं। प्रारंभिक असफलता में भी कुछ इस तरह हार मानकर बैठ जाते हैं, जैसे कि सब कुछ लुट गया हो। class test में marks कम आये तो निराश हो गए, main exam में नंबर कम आये, तो रोने लगे, और कहीं fail हो गए, तो चल दिए suicide करने।

या फिर इतना तो मान ही बैठे कि हमसे ज्यादा अभागा और दुर्भाग्यशाली व्यक्ति और कोई नहीं। क्यों हो गया अचानक से ऐसा? क्योंकि हमने संघर्ष करने की इच्छाशक्ति खो दी। वो इच्छाशक्ति, जो हमें जन्म के समय ईश्वर से उपहार में मिली थी और जिसे हमने बचपन तक सुरक्षित रखा, विकसित किया, पर आगे चलकर खो दिया।

हम भूल गए बचपन के वे महत्वपूर्ण पाठ, जिन्हें हमने खुद के प्रयासों के बलबूते सीखा था, जिन्हें हमें कोई पढ़ाने या सिखाने नहीं गया था। हमने खुद उन्हें सीखा था- बार-बार चोट सहकर, अपने लहू की कीमत पर। लेकिन न कभी हारे, न कभी डिगे और न कभी पीछे लौटे। याद रखिये, “संपूर्ण जीवन संघर्ष चाहता है।

जिन्हें हर चीज़ दूसरों से हासिल हुई है, वे आलसी, स्वार्थी, और जीवन के सच्चे मूल्य के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं। वह कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयास जिसे हम लगातार दूर करने का प्रयास करते हैं, हमारे एक चरित्रवान मनुष्य बनने और अपने जीवन का लक्ष्य हासिल करने का प्रधान स्तंभ है।”

Struggle is Architect of Noble Character संघर्ष ही श्रेष्ठ चरित्र का निर्माता है : –

फ्रेडरिक डगलस का मानना है, “अगर जिंदगी में कोई Struggle (संघर्ष) नहीं है, तो कोई उन्नति भी नहीं है।” सच्चे अर्थों में जिन्दा वही है, जो संघर्ष कर सकता है, अत्याचार से लड़ सकता है। जिस व्यक्ति को आलस्य ने, प्रमाद ने घेर लिया हो, जिसमे निराशा जड़ जमाकर बैठ गयी हो, उसे तो मृतक ही माना गया है। अन्याय और अनीति से वही व्यक्ति टकरा सकता है, जो संघर्ष का रास्ता अपना सकता है।

सामने अत्याचार, अनीति होती रहे और चुपचाप खड़े देखते रहे, यह पलायन की निशानी है।अदम्य संघर्ष और प्रबल इच्छाशक्ति – इनके सामने सिर उठाने की हिम्मत, भला दुनिया की किस मुश्किल में है, पर एक बात जरूर याद रखने की है कि यह शक्ति केवल उन्ही लोगों के अन्दर पैदा होती है, जो सच्चे चरित्रवान है। लेकिन अकेला संघर्ष ही काफी नहीं है।

जब सत्य और धर्म उसके सहायक होंगे तभी वह अदभुत शक्ति पैदा होगी, जो किसी व्यक्ति को सफलता की नई ऊँचाइयों तक ले जा सके।चुनौतीपूर्ण जीवन जीने की चाह में ही मानवीय प्रगति का राज छिपा है। अगर हमें अपने जीवन के उद्देश्य को हासिल करना है, संसार के सामने अपनी योग्यता प्रकट करनी है, तो अदम्य संघर्ष के सिवा कोई दूसरा उपाय नहीं है।

याद रखिये, “साहसी व्यक्तियों को, वीरों को शक्ति किसी से माँगनी नहीं पड़ती, बल्कि उनका आत्मा ही उन्हें बल प्रदान करता है। ऐसा व्यक्ति जब बुराइयों को, अपने रास्तों की बाधाओं को और अत्याचार को रोकने को आगे बढ़कर चल पड़ता है, तो वह अकेला नहीं रह जाता, बल्कि उसके पीछे चलने वाले अपने आप पैदा हो जाते हैं।

फिर दुनिया की कोई ताकत उसके कदमो को पीछे नहीं लौटा सकती, कोई उसे हराने में समर्थ नहीं हो सकता। कोई भी उसकी फौलादी इच्छाशक्ति को नहीं तोड़ सकता। सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने वाले को सिर्फ भगवान् पर विश्वास और उसका आशीर्वाद ही काफी है।”

Struggle is the Gateway of Victory संघर्ष ही विजय का राजमार्ग है : –

स्वेट मार्डेन कहते हैं – “हमेशा ध्यान रखिये, संघर्ष जितना प्रबल होता है, विजय भी उतनी ही गौरवशाली होती है। जिस चीज़ को हम जितनी कम कीमत पर हासिल करते हैं, उतनी ही कम हमारी प्रतिष्ठा होती है। यह केवल बहुमूल्यता ही होती है, जो हर चीज़ को उसकी कीमत दिलाती है। मै उस व्यक्ति का सम्मान करता हूँ, जो मुश्किलों में भी मुस्कुरा सकता है, जो निराशा से शक्ति हासिल कर सकता है और उठ कर खड़ा हो सकता है।”

बाधाएँ, रुकावटें, अन्याय ये सब चुनौतियाँ हैं, जो मनुष्य के वजूद को, उसके अस्तित्व को इस भाव से ललकारती हैं कि अगर हिम्मत है, तो मुझसे टकराकर और पार जाकर दिखा और जिसका जवाब कोई कायर या डरपोक नहीं दे सकता है। क्योंकि उस बेचारे के पास तो इतनी इच्छाशक्ति भी नहीं है कि अपने स्वार्थ और प्रलोभन से ही मुक्ति पा सके।

पर जो सच्चे शूरवीर हैं, वे अपने अस्तित्व को दांव पर लगाकर भी मुश्किलों का सामना करते हैं, मौत के खुले जबड़ों को तोड़ने का जज्बा रखते हैं। आगे बढ़ने की इच्छा और नए जन्म में कोई अंतर नहीं है। अगर आपका संपूर्ण अस्तित्व लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, उन्नति के लिए तड़प रहा है, तो यह समझना चाहिए कि आपमें अदम्य साहस और इच्छाशक्ति है।

अब जरूरत है, तो बस एक ही बात की – प्रतिकूलताओं के, बाधाओं के पार लगाने वाले सतत संघर्ष की। फिर तब तक मत रुकिये, जब तक मंजिल नहीं मिल जाती। लक्ष्य-प्राप्ति होने तक एक विजेता की तरह मुश्किलों से टकराते हुए बस आगे ही बढ़ते चले जाइये।

“संसार के सबसे सुन्दर लोग वे होते हैं, जिन्हें हार का पता है, जिन्होंने पीड़ा सही है, जिन्होंने संघर्ष किया है, जिन्होंने खोया है और इन गहराइयों के बीच से अपना रास्ता हासिल किया है।”
– एलिज़ाबेथ कुब्लर रोस

 

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