New Seven Wonders of The World in Hindi

 

“कोई भी चीज़ मनुष्य के संकल्प की शक्ति के आगे नहीं टिक सकती, अगर वह अपनी सत्ता को अपने उद्देश्य की सीमा तक दाँव पर लगाने को तैयार है।”
– बेंजामिन डिज़रायली

 

New 7 Wonders of The World in Hindi
आधुनिक युग के सात महान आश्चर्य

7 New Wonders of The World विश्व के सात नये आश्चर्य : –

पिछले लेखों में आप विश्व इतिहास की महान धरोहर 7 Wonders of The Ancient World प्राचीन विश्व के सात आश्चर्यों  के बारे में पढ़ चुके हैं। चूँकि अब उन सभी 7 प्राचीन अदभुत आश्चर्य में से केवल गीजा के पिरामिड ही बचे हैं और पुराने आश्चर्यों के नष्ट होने के बाद भी अनेकों ऐतिहासिक और भव्य संरचनाओं का निर्माण हुआ है।

इसलिये सन 2000 में स्विटज़रलैंड स्थित New 7 Wonders Foundation ने एक मिलेनियम प्रोजेक्ट के रूप में, सारी दुनिया के 200 स्मारकों में से 7 सर्वश्रेष्ठ स्मारक छाँटकर, संसार के सात नए आश्चर्यों का चुनाव करने के लिये एक अभियान आरम्भ किया, जो सन 2007 में जाकर पूरा हुआ।

7 जुलाई सन 2007 में पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में लोकप्रियता के आधार पर संसार के सात नये आश्चर्यों का चुनाव हुआ था। जिसमे 100 मिलियन लोगों ने अपनी पसंद के स्मारकों के पक्ष में मतदान किया। सर्वकालिक महान आश्चर्यों में से एक गीजा के पिरामिड का पुराना दर्जा बरक़रार रखा गया है। अब प्रस्तुत हैं विश्व के सात नये आश्चर्य –

1. Great Wall of China चीन की महान दीवार, चीन : –

चीन की महान दीवार संसार के सात नये आश्चर्यों में सबसे अधिक प्राचीन है। अधिकांश दीवारों का निर्माण ईसा से 700 वर्ष पूर्व हुआ माना जाता है। कुछ दीवारों का निर्माण ईसा से 200 वर्ष पूर्व से लेकर 16वीं शताब्दी (1600 ईस्वी) तक भी हुआ है। बीच के वर्षों में इन दीवारों के टुकड़ों को आपस में जोड़ा गया तथा उन्हे अधिक बड़ा और मजबूत बनाया गया और आज इन्हें ही चीन की महान दीवार के नाम से जाना जाता है।

लेकिन इन सभी दीवारों में 220-206 ईसा पूर्व में बनी दीवारें, जिनका निर्माण चीन के प्रथम शासक किन शी हुआंग ने करवाया था, अधिक प्रसिद्द हैं। इस दीवार की अधिकतम चौड़ाई 9.1 मीटर या 30 फुट है और लगभग उसी रंग की है जो इसके आस-पास की जमीन का रंग है। इसकी ऊँचाई 5 मीटर से लेकर 8 मीटर तक और नीचे की ओर से लेकर ऊपर की ओर तक की चौड़ाई 6 मीटर से 5 मीटर तक है।

यह इतनी चौड़ी है कि इस पर एक बार में 6 घुड़सवार तक दौड़ सकते हैं। यह दीवार एक प्रकार की किलेबंदी है, जो पत्थरों, ईंटों, लकड़ी, और अन्य पदार्थों से मिलकर बनी है। यह दीवार चीन के प्राचीन साम्राज्य और शासकों की, मध्य-पश्चिमी एशिया के बर्बर आक्रमणकारियों से सुरक्षा करने के लिये बनाई गई थी। यह विशाल दीवार पूर्व में दंदोंग से लेकर पश्चिम में लोप झील तक एक आर्क के रूप में फैली हुई है।

चीन की इस विश्व प्रसिद्द दीवार के बारे में कई लोगों का यह कहना है कि चीन की यह दीवार चाँद से भी दिखाई देती है, जो जांच करने पर सिर्फ एक मिथक ही साबित हुआ है। एक विस्तृत पुरातत्वीय सर्वेक्षण के अनुसार यह विशाल दीवार मनुष्य द्वारा निर्मित आज तक बनी सभी संरचनाओं में सबसे अधिक लम्बी है, जिसकी लम्बाई लगभग 6400 किमी से भी ज्यादा है।

इसमें 359 किमी लम्बी खाइयाँ और सुरंगे हैं और लगभग 2232 किमी लम्बे प्राकृतिक सुरक्षा अवरोध हैं, जैसे – नदियाँ और पहाड़ियाँ। कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि संपूर्ण दीवार की लम्बाई 21000 किमी से भी ज्यादा है। हालाँकि आज इस दीवार के कई हिस्से नष्ट होने से इसकी लम्बाई अब काफी कम हो गई है, लेकिन फिर भी अपनी असाधारण लम्बाई, विशालता और प्राचीनता के कारण यह निश्चय ही संसार का एक महान आश्चर्य बनने योग्य है।

2. Petra of Jordan पेट्रा, जॉर्डन : –

पेट्रा जिसे नाबतेंस मूल रूप से रक्मू कहते थे, दक्षिणी जॉर्डन में स्थित एक ऐतिहासिक और पुरातत्वीय शहर है। इस शहर की स्थापना ईसा से लगभग 312 वर्ष पूर्व अरब नाबतेंस की राजधानी के रूप में हुई थी। यह शहर अपनी अनोखी संरचना के कारण प्रसिद्द हुआ है। क्योंकि इसका निर्माण पत्थरों और चट्टानों को काट कर किया गया है तथा इसमें पानी की निकासी का भी बड़ा उत्तम प्रबंध किया गया है।

पेट्रा का दूसरा नाम गुलाबी शहर भी है, क्योंकि जिन पत्थरों को गढ़कर इसका निर्माण किया गया है, वे गुलाबी रंग की हैं। यह शहर जेबेल अल- मध्बह के ढलान पर एक बेसिन में स्थित है, जो पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह स्थान एक लम्बी घाटी की तरह है, जो मृत सागर से लेकर अकाबा की खाड़ी तक फैली हुई है।

यह समुद्र तल से 810 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह लगभग 264 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस अद्भुत कलाकृति को सबसे पहले स्विट्जरर्लैंड के एक अन्वेषनकर्ता जोहान लुडविग बर्कहार्ट ने सन 1812 में खोजा था, अन्यथा इससे पहले यह स्थान पश्चिमी दुनिया के लिये बिल्कुल अनजाना था। सन 1985 में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

और इसकी अलौकिकता का यह शब्द कहते हुए वर्णन किया था – “मनुष्य की सांस्कृतिक धरोहर की सबसे मूल्यवान सांस्कृतिक संपत्तियों में से एक”, जो इस महान आश्चर्य के लिये बिल्कुल तर्कसंगत है। यह शहर प्राचीनकाल में कभी एक बड़ा महत्वपूर्ण व्यापार स्थल था, जहाँ लोग धन-संपत्ति जुटाकर अमीर बनने के लिये, अपनी किस्मत बनाने के लिये आते थे।

पर आज यह शहर और इमारत न केवल जॉर्डन की पहचान है, बल्कि जॉर्डन घूमने आने वाले पर्यटकों का सबसे पसंदीदा स्थल भी है। सारी दुनिया से लोग इस अद्भुत, और अत्यंत आकर्षक शैली में बनी इस खूबसूरत संरचना को देखने जॉर्डन आते हैं और कई दिन तक ठहरकर इसकी दिलकश कारीगरी का आनंद उठाते हैं। क्योंकि यह शहर एक बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, इसलिये इसे अच्छी तरह से देखने के लिये पर्याप्त समय चाहिये।

3. Colosseum of Rome रोम का कोलोसियम, इटली : –

दुनिया के सात नये आश्चर्यों में से एक, रोम का कोलोसियम भी इतिहास की निहायत ही बेशकीमती और अनोखी दौलतों में से एक है, जिसे देखने के लिये आज भी लोग दुनिया भर से दौड़े चले आते हैं। कोलोजियम वास्तव में एक अंडाकार एम्फीथिएटर (एक गोलाकार इमारत जिसमे कोई छत नहीं होती और जिसमे एक खाली स्थान के चारों ओर बैठने के लिये ऊपर की ओर उठते क्रम में सीटें बनी होती हैं) है।

यह इटली की विश्वविख्यात राजधानी रोम शहर के केंद्र में स्थित है। यह कोलोसियम रोमन फोरम के ठीक पूर्व में स्थित है। इस कोलोसियम का निर्माण रोम के प्रसिद्ध शासक नीरो के शासनकाल के ठीक बाद, रोमन सम्राट वेस्पासियन के शासनकाल में सन 72 AD में आरम्भ हुआ था और सन 80 AD में उसके उत्तराधिकारी टाइटस के समय में पूरा हुआ था।

बाद के शासकों ने भी इसमें कई परिवर्तन किये। कोलोजियम को फ्लेविएन एम्फीथिएटर भी कहा जाता है। एम्फीथिएटर को विशेष रूप से प्राचीन यूनान और रोम में जनता के मनोरंजन के लिये प्रयोग में लाया जाता था। कोलोसियम में बैठने के लिये कतारबद्ध व्यवस्था थी, जो उस समय के कठोर रोमन समाज को प्रदर्शित करती है।

उत्तर और दक्षिण के किनारों पर विशेष बक्सों की व्यवस्था की गयी थी, जो शासक और राजपरिवार के लिए थी। उनके बगल में बने एक बडे प्लेटफ़ॉर्म पर राजदरबार के लोग व दरबारियों से ऊपर की पंक्ति में सामंत या शूरवीर बैठते थे, उससे अगली कतारों पर साधारण रोमवासी बैठते थे। कोलोसियम अत्यंत वृहत है और यह सीमेंट और कंक्रीट से बना हुआ है।

यह उन सभी एम्फीथिएटर में सबसे विशाल हैं, जिनका निर्माण आज तक के इतिहास में किया गया है। यह लगभग 6-7 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यह 189 मीटर लम्बा और 156 मीटर चौड़ा है। इसके आधार का क्षेत्रफल 24000 वर्ग मीटर है और इसका नक्शा एक दीर्घवृत्त जैसा है। बाहरी दीवार की ऊँचाई 48 मीटर है और इसकी परिधि 545 मीटर है। इसका केंद्रीय क्षेत्र 87 मीटर लम्बा और 55 मीटर चौड़ा है।

यह पाँच मीटर ऊँची दीवारों से घिरा है, जिसके ऊपर बैठने का इंतजाम है। बाहरी दीवार का निर्माण एक विशेष प्रकार के पत्थर से हुआ है, जिन्हें लगभग 300 टन के लोहे के शिकंजों से कसा गया है। आज भले ही यह सुन्दर स्मारक एक अवशेष के रूप में हो लेकिन इसकी भव्यता देखकर आसानी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय यह कितना आकर्षक रहा होगा।

4. Chichen Itza चिचेन इत्ज़ा, मैक्सिको : –

चिचेन इत्ज़ा उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में स्थित मैक्सिको देश का गौरव है और दुनिया के सात नये आश्चर्यों में से एक है। यह प्रसिद्द स्मारक मैक्सिको के युकाटन राज्य के पूर्वी भाग में बसे टिनुम नगर में स्थित है। यह अद्भुत स्मारक जो आज विश्व के नये आश्चर्यों में से एक है, मैक्सिको की उन पुरातात्विक जगहों में से एक हैं, जहाँ सबसे अधिक पर्यटक घूमने के लिये आते हैं।

हर साल लगभग 14 से 15 लाख पर्यटक इस ध्वस्त हो चुकी सुन्दर इमारत को देखने के लिए आते हैं। चिचेन इत्सा, माया सभ्यता के सबसे बड़े शहरों में से एक था। उन्होंने ही चिचेन इत्ज़ा का नामकरण किया था, जिसका अर्थ होता है – “इत्ज़ा के कुँए के मुँह पर। ” इत्ज़ा उन वंश विशेष के लोगों के एक समूह का नाम है, जिन्होंने उत्तरी प्रायद्वीप के राजनैतिक और आर्थिक प्रभुत्व को हासिल कर लिया था।

चिचेन इत्सा का निर्माण कार्य सन 600 में आरभ हुआ माना जाता है, लेकिन यह संपूर्ण रूप से सन 900 के पश्चात ही बनकर तैयार हो पाया था। 10वीं शताब्दी में यह एक क्षेत्रीय राजधानी के रूप में एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में उभरा, पर 14वीं सदी में इसका भी पतन होना शुरू हो गया। 16वीं सदी में यह स्पेनिश लोगों के अधिकार में आ गया।

बाद में मैक्सिको सरकार और अमेरिका के नामी कार्नेगी संस्थान के सहयोग से इसकी मरम्मत और संरक्षण का कार्य आरम्भ हुआ। यहाँ कोई एक नहीं, बल्कि कई छोटी-बड़ी इमारतों के समूह हैं, जो लगभग 5 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैले हुए हैं। यह शहर एक टूटे-फूटे भू-भाग पर बना हुआ था, जिसे बाद में बड़ी-बड़ी इमारतों के समूह के निर्माण हेतु समतल बनाया गया था।

चिचेन इत्सा की इमारतें वास्तुशैली के अनुरूप बनी आकृतियों के सेट की एक श्रंखला में वर्गीकृत की गयी हैं। यहाँ पर उत्तम तराशे गये पत्थरों से निर्मित कई इमारतें हैं, जो अलग-अलग ढंग से संरक्षित की गयी हैं और कईयों का तो पुनर्निर्माण भी किया गया है। ये इमारतें एक-दुसरे से, ईंट-पत्थरों से बने खडंजों के सेतुओं के एक घने जाल से जुडी हुई थी, जिन्हें सैकबोब कहा जाता था।

पुरातत्वविदों ने इस क्षेत्र में अब तक लगभग 80 से भी ज्यादा ऐसे सैकबोब का पता लगाया है, जो एक-दूसरे को पार करते हुए शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक सभी दिशाओं में फैले हुए हैं।  इन सभी कॉम्प्लेक्सों में तीन सर्वश्रेष्ठ हैं –

1. Great North Platform – जिसमे शामिल हैं El Castillo (एल कैसिल्लो), Temple of Warriors (यौद्धाओं का मंदिर) और The Great Ball Court (दी ग्रेट बॉल कोर्ट)

2. The Osario Group – जिसमे शामिल हैं The Pyramid of Osario Group (ओसारियो समूह के पिरामिड) और Temple of Xtoloc (टोलोक का मंदिर)

3. The Central Group – जिसमे शामिल हैं Caracol (कराकोल), Las Monjas (लॉस मोंजास) और Akab Dzib (अकब जिब

“रास्ता आसमान में नहीं है, रास्ता दिल में है।”
– गौतम बुद्ध

 

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