Astrology: Personality of Aries Zodiac Sign in Hindi

 

“हमें लोगों को उनकी श्रेष्ठता के शिखर से नहीं आँकना चाहिये; बल्कि उस दूरी से आँकना चाहिये जो उन्होंने उस स्थान से चली जहाँ से उन्होंने शुरू किया था।”
– हेनरी वार्ड बीचर

 

Aries Zodiac Sign in Hindi
मेहनती और हठी प्रकृति के होते हैं मेष राशि के जातक

Nature and Personality of Zodiac Signs राशियों का स्वभाव और व्यक्तित्व : –

पिछले लेख में आप पढ़ चुके हैं कि हमारी जन्मराशि का आधार चंद्रमा है। व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में स्थित होगा, वही उसकी जन्मराशि होगी। व्यक्ति की जन्मराशि उसके स्वभाव, व्यक्तित्व और जीवन के गुप्त पहलुओं को जानने का बहुत ही सशक्त माध्यम है, फिर चाहे किसी व्यक्ति ने आपसे अपने विषय में कितना ही झूठ क्यों न बोला हो।

लेकिन यदि आपके पास उसकी सही जन्मकुंडली है और आप इसे डिकोड (कूट अनुवाद) कर पाने में सक्षम हैं, तो वह अपना वास्तविक व्यक्तित्व आपसे कभी नहीं छुपा सकेगा। यह महत्वपूर्ण जानकारी आपके जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काम आयेगी। चाहे मित्रों और जीवनसाथी का चुनाव हो या फिर अपने ही व्यक्तित्व की कमजोरियों का पता लगाकर उन्हें दूर करना हो।

या फिर अपने भविष्य को सँवारना हो, जीवन को एक नयी दिशा देनी हो आप हर जगह इसका लाभ उठायेंगे। आगे के लेखों में हम इन सभी 12 राशियों के संपूर्ण नैसर्गिक स्वभाव की विस्तार से चर्चा करेंगे और किस राशि के जातक (स्त्री और पुरुष)का स्वभाव कैसा होगा, उस पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।

चूँकि स्त्रियों का स्वभाव, अभिरुचि, आदतें और उनकी शारीरिक और मानसिक संरचना पुरुषों से बिल्कुल भिन्न होती हैं, इसलिये उनके लिये अलग से विवेचन किया जायेगा। प्रत्येक राशि की प्रकृति कई अन्य छोटे-छोटे घटकों पर निर्भर करती है, जिन्हें एक सारणी के माध्यम से नीचे प्रदर्शित किया गया है।

इसलिये किसी निश्चय पर पहुँचते समय उन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता होती है। हम यह आशा करते हैं कि जीवनसूत्र के विद्वान् पाठक ऐसा करने में निश्चय ही सक्षम होंगे।

Nature of Aries Zodiac मेष राशि का स्वभाव : –

जब जन्म कुंडली में चन्द्रमा मेष राशि में हो, तो उस व्यक्ति की जन्मराशि मेष होती है। मेष राशि, राशिचक्र की प्रथम राशि है। इस राशि का विस्तार भचक्र के 0° से 30° तक है। इसका स्वामी गृह मंगल है और यह क्षत्रिय जाति की पुरुष लिंग वाली अग्नि तत्व प्रधान राशि है। यह पूर्व दिशा की स्वामिनी और उग्र प्रकृति की अल्प संतति वाली राशि है। इसका प्रतीक चिंह एक चंचल मेंढा है।

इस राशि के जातकों का स्वभाव भी उसी की तरह चंचल, अड़ियल और उग्रता से परिपूर्ण होता है। मेष राशि के जातकों को गोचर के फलादेश इसी राशि के आधार पर देखने चाहियें। यदि व्यक्ति के जन्म के समय लग्न मेष राशि का हो, तब भी यह जातकों पर अपना प्रभाव डालती है। यह राशि व्यक्ति के शरीर में उसके मस्तिष्क का प्रतिनिधित्व करती है।

ग्रहों की अनुकूलता के अनुसार सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति मेष राशि में शुभ फल प्रदान करते हैं। शुक्र और शनि के लिये यह सम राशि है तथा बुध शत्रु होने के कारण इसमें अशुभ फल देते हैं। मेष राशि पर सूर्य 30 दिन 55 घडी और 33 पल रहते हैं।  मेष राशि के अंतर्गत अश्विनी और भरणी नक्षत्र के चारों चरण और कृतिका का प्रथम चरण आता है।

चूँकि सभी 27 नक्षत्रों की प्रकृति भिन्न है और उनके स्वामी भी अलग-अलग हैं, इस आधार पर एक ही राशि में अलग-अलग नक्षत्रों में जन्म लेने वाले जातकों का स्वभाव भी अलग ही होगा। लेकिन यदि सूक्ष्म फलकथन की आवश्यकता न हो, तो केवल राशियों के आधार पर ही जातक के व्यक्तित्व का विस्तृत और सटीक विश्लेषण किया जा सकता है।

क्रम राशि स्वामी अंग-स्थान जाति लिंग रंग/वर्ण स्वभाव प्रकृति तत्व दिशा बल रत्न त्रिदोष
1 मेष मंगल मस्तिष्क क्षत्रिय पुरुष लाल चर उग्र/
तीक्ष्ण
अग्नि पूर्व दिनबली मूँगा पित्त
2 वृष शुक्र मुख वैश्य स्त्री सफ़ेद स्थिर सौम्य पृथ्वी दक्षिण रात्रिबली हीरा/
ओपल
सम
3 मिथुन बुध ग्रीवा/कंधे शूद्र पुरुष हरा द्विस्वभाव तीक्ष्ण वायु उत्तर दिनबली पन्ना वात
4 कर्क चन्द्र स्तन/फेफड़े ब्राहाण स्त्री रक्त्धवल चर सौम्य जल पश्चिम रात्रिबली मोती कफ
5 सिंह सूर्य ह्रदय/
उपरी पेट
क्षत्रिय पुरुष धूम्र/पीत स्थिर तीक्ष्ण अग्नि पूर्व दिनबली माणिक्य पित्त
6 कन्या बुध निम्न पेट/
कमर
वैश्य स्त्री पिंगल द्विस्वभाव सौम्य पृथ्वी दक्षिण रात्रिबली पन्ना सम
7 तुला शुक्र आंतरिक
जननांग
शूद्र पुरुष काला/
नीला
चर तीक्ष्ण वायु उत्तर दिनबली हीरा/
ओपल
वात
8 वृश्चिक मंगल लिंग/योनी ब्राहाण स्त्री शुभ्र/
श्वेत
स्थिर सौम्य जल पश्चिम रात्रिबली मूँगा कफ
9 धनु गुरु कूल्हे/जंघा क्षत्रिय पुरुष कंचन/
सुनहरा
द्विस्वभाव तीक्ष्ण अग्नि पूर्व दिनबली पुखराज पित्त
10 मकर शनि घुटने वैश्य स्त्री पीला/
पिंगल
चर सौम्य पृथ्वी दक्षिण रात्रिबली नीलम सम
11 कुम्भ शनि पिंडलियाँ शूद्र पुरुष विचित्र/
चितकबरा
स्थिर तीक्ष्ण वायु उत्तर दिनबली नीलम वात
12 मीन गुरु पैर ब्राहाण स्त्री सफ़ेद/
पिंगल
द्विस्वभाव सौम्य जल पश्चिम रात्रिबली पुखराज कफ

Personality of Aries Person मेष राशि के जातक का व्यक्तित्व : –

मेष राशि अग्नि तत्व प्रधान है और अग्नि प्रचंड उर्जा का शक्ति स्रोत है, इसलिये मेष राशि के जातक चंचल, उग्र, आक्रामक स्वभाव के और पित्त प्रधान प्रकृति वाले होते हैं। ये अत्यंत उत्साही और कर्मठ होते हैं। जिस कार्य को करने का संकल्प कर लेते हैं, उसे पूर्ण करने के लिये अंत तक संघर्षशील रहते हैं। ये महत्वाकांक्षी, अत्यंत स्वाभिमानी और निडर होते हैं, यदि गुरु उत्तम हो तो ये खर्चीले भी होते हैं।

इन्हें मान बड़ा प्रिय होता है और जल्दी से किसी को क्षमा नहीं करते हैं। इन्हें इनकी इच्छा के विरुद्ध कोई कार्य करने के लिये विवश नहीं किया जा सकता। ये अत्यंत स्पष्टवादी और साहसी होते हैं। इन्हें छल-कपट बिल्कुल नहीं भाता, इसलिये ये अक्सर ऐसे लोगों से दूर ही रहते हैं। अपने आदर्शों और विचारों के लिये ये अपने परिवार, मित्र और संबंधियों तक से दूरी बना लेते हैं।

ये स्वतंत्रताप्रिय और दूसरों पर प्रभुत्व जमाकर रखने वाली प्रवृत्ति के होते हैं। अपने परिवारीजनों से भी ये यही चाहते हैं कि उनकी बातों को ही प्रधानता दी जाय। इस कारण लोग इनसे प्रसन्न नहीं रहते और अक्सर इनके अपने जीवनसाथी और संतान से भी मधुर संबंध नहीं रहते। मेष राशि के जातकों को चाहिये कि वे दूसरों से अपेक्षाएँ कम कर दें और उन्हें भी एक सामान्य जिंदगी गुजारने दें।

संतोषी बनें और अपनी दृष्टि अपने लक्ष्य पर केन्द्रित रखें। इससे न केवल उनके अपने जीवन में उत्साह, सकारात्मकता और खुशहाली आयेगी, बल्कि दूसरे भी इनकी ओर आकर्षित होंगे। इन्हें अत्यधिक महत्वाकांक्षी होने से बचना चाहिये और निःस्वार्थ भाव से दूसरों के लिये भी कुछ करना चाहिये।

इससे इनके ही सौभाग्य-सूर्य का उदय होगा। यदि मंगल शुभ न हो, तो ये अत्यंत गुस्सैल, निर्दयी, कठोर व क्रूर भी हो सकते हैं। अपराधी व हिंसक लोगों का मंगल प्रायः अशुभ ही देखा गया है।

Physique and Nature of Aries Person मेष राशि के जातक का शरीर और स्वभाव : –

सामान्यतः मेष राशि के जातक बड़े और मजबूत सिर वाले तथा चौड़े माथे के स्वामी होते हैं। सामान्य तौर पर इनका स्वास्थ्य अच्छा ही रहता है। इनका कद मध्यम आकार का, पतला और आकर्षक होता है। यदि मंगल की दृष्टि लग्न पर हो, या वह केंद्र में हो और गुरु का प्रभाव इन पर हो, तो जातक लम्बे कद वाला होता है। अक्सर इनके सिर या मुख पर चोट आदि का निशान भी होता है, इनका चेहरा प्रायः लालिमायुक्त होता है।

यह प्रबल जिजीविषा (जीवट) वाले सरल इंसान होते हैं। यह जिस कार्य को भी हाथ में लेते हैं, उसे अत्यंत उत्साह के साथ आरम्भ करते हैं, लेकिन समय के साथ-साथ इनका उत्साह भी कम होता जाता है। इन्हें चाहिये कि ये धैर्यपूर्ण तरीके से काम करें, तभी ये सफलता की बुलंदियों पर पहुँच सकेंगे। चूँकि ये जल्दी ही अधीर हो जाते हैं, इसलिये अक्सर एक काम को समाप्त करने के पहले ही दूसरे कामों को करना शुरू कर देते हैं।

इसके अतिरिक्त मेष जातक शंकालु, संदेहास्पद मनोवृत्ति वाले होते हैं। जब ये किसी बात पर अड़ जाते हैं, तो फिर किसी की नहीं सुनते। हमेशा दूसरों पर अधिकार ज़माने की इच्छा रखते हैं। प्रभुत्व और अधिकार की इच्छा रखने के कारण अक्सर ये जातक सेना, पुलिस, प्रशासनिक और न्यायिक सेवा में जाते हैं या फिर अपना व्यवसाय चलाते देखे जाते हैं।

चूँकि इन जातकों में प्रचंड उर्जा रहती है, इसलिये यह खाली नहीं बैठ सकते हैं। यदि किसी कारण से इनकी जीवन ऊर्जा को अभिव्यक्ति का मार्ग नहीं मिलता, तो ये चिडचिडे, क्रोधी और उदासीन वृत्ति वाले हो जाते हैं। लेकिन ऐसा बहुत कम होता है, क्योंकि मंगल के कारण इनके व्यक्तित्व में नैसर्गिक रूप से साहस, परिश्रम, प्रभुत्व और महत्वाकांक्षा के गुण भरे होते हैं, जो इन्हें लक्ष्य की पूर्ति होने तक रुकने नहीं देते।

इसके अलावा मेष राशि के जातक न तो आत्महत्या करते देखे जाते हैं और न ही इन्हें अवसाद में डूबा देखा जाता है। यही कारण है कि यह जातक जीवन में उन्नति के शिखर पर पहुँचने वाले, यशस्वी और प्रतापी होते हैं। मेष राशि के जातकों को चाहिये कि वे अपने जीवनसाथी का सम्मान करें, ताकि उनका विवाहित जीवन सुखमय बना रहे। अपनी प्रभुत्व की मनोवृत्ति को दूर रखे, अन्यथा चंद्रमा के पाप प्रभाव में होने से पत्नी से तलाक भी हो सकता है।

“पहले खुद को शांत रखिये, और तब आप दूसरों तक भी शांति ले जा सकेंगे।”
– थॉमस केम्पिस

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