Cause, Symptoms and Treatment of Rabies in Hindi

 

विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर जानिये वायरस से फैलने वाले घातक रेबीज रोग के बारे में जो उचित इलाज के अभाव में हमेशा मृत्यु का कारण बनता है इसका वायरस 150 से भी ज्यादा देशों में पाया जाता है और यह पालतू और जंगली दोनों तरह के जानवरों से फैल सकता है क्योंकि उनकी लार ग्रंथियों में इसके विषाणु होते हैं पर इंसानों में यह खतरनाक बीमारी कुत्तों और चमगादड़ों से फैलती है दुनिया भर में हर साल 50 हजार से भी अधिक लोग रेबीज के कारण मरते हैं

Cause, Symptoms and Treatment of Rabies in Hindi
जानलेवा रोग है रेबीज, इससे बचिये

ज्यादातर लोग कुत्तों के संपर्क में आते समय सतर्कता बरतते हैं, और यदि श्वान किसी रोग से ग्रस्त हो या आक्रामक व्यवहार का प्रदर्शन करे तो विशेष रूप से सचेत रहना पड़ता है केवल इसलिये नहीं कि उसके अचानक हमला करने पर शारीरिक क्षति का भय रहता है, बल्कि इसलिये क्योंकि वह एक जानलेवा बीमारी के अत्यंत घातक संक्रमण के फैलने का कारण बन सकता है जिसकी उपचाररहित स्थिति सुनिश्चित मृत्यु का बुलावा है

यह प्राणघातक बीमारी है रेबीज, जो वायरस से फैलने वाली उन दस सबसे घातक बीमारियों में शामिल हैं जो इंसानों की सबसे बडी दुश्मन हैं और जिनका वर्णन हमने 10 Most Dangerous Viral Diseases for Humans in Hindi में किया है रेबीज जैसे खतरनाक रोग के उन्मूलन के लिये प्रति वर्ष 28 सितम्बर के दिन मनाया जाने वाला विश्व रेबीज दिवस (World Rabies Day) इस रोग की भयावहता का स्तर बताने के लिये काफी है

चूँकि रेबीज के लक्षण उभरने पर मृत्यु सुनिश्चित ही रहती है इसीलिये विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) ने इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये और इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिये एक विशेष दिन निर्धारित किया है ताकि इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सके ऑस्ट्रेलिया और कई द्वीपीय देश रेबीज से पूर्णतया मुक्त हैं जबकि कनाडा, जापान, अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के कुछ देशों में रेबीज कुत्तों से नहीं फैलता है

What is The Cause of Rabies : –

रेबीज वायरस से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है जिसमे मस्तिष्क में अत्यधिक सूजन आने से चेतना लुप्त हो जाती है रेबीज ‘Rabies Lyssaviruse’ से फैलता है जो रेब्ड़ोविरिडे परिवार (Rhabdoviridae Family) का सदस्य है रेबीज वायरस की संरचना घुमावदार (Helical) होती है इसकी लम्बाई 180 नैनोमीटर और अनुप्रस्थ काट 75 नैनोमीटर होती है इनमे Single-stranded RNA Genome होता है यह रोग मनुष्यों के साथ-साथ अन्य स्तनधारियों को भी हो सकता है

कुत्ते इस वायरस के मुख्य वाहक माने जाते हैं लेकिन यह चमगादड़, बन्दर, गीदड़, लोमड़ी, भेडिये, नेवले और बिल्ली सहित कई अन्य पशुओं से भी फ़ैल सकता है इंसानों में यह रोग दूसरे पशुओं से फैलता है इस रोग के विषाणु केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर आक्रमण करके उसे क्षतिग्रस्त कर देते हैं शरीर को गतिशील बनाने वाले स्नायु (Motor Nerves) अक्षम हो जाते हैं और अंत में साँस रूकने से मृत्यु हो जाती है रेबीज अंटार्कटिका को छोड़कर हर महाद्वीप में मौजूद है (क्योंकि यह एक निर्जन और अति शीत क्षेत्र है)

इसका वायरस 150 से भी ज्यादा देशों में पाया जाता है भारत और एशियाई देशों में कुत्ते रेबीज के मुख्य वाहक हैं जबकि यूरोपीय और अमेरिकी देशों में चमगादड़ जब कोई संक्रमित पशु किसी अन्य स्वस्थ पशु या मनुष्य को काटता है तब उसकी लार में उपस्थित विषाणु स्वस्थ व्यक्ति की श्लेष्मा झिल्ली (Mucous Membrane) को पार करते हुए रक्त में पहुँच जाते हैं और वह रेबीज से संक्रमित हो जाता है

रेबीज का वायरस मुख्य रूप से लार और रक्त के संपर्क में आने से फैलता है लेकिन यह वीर्य और योनि द्रव्य के आपसी संपर्क से भी फैल सकता है रेबीज़ वायरस परिधीय तंत्रिकाओं (Peripheral Nerves) के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचता है।

Symptoms of Rabies in Humans : –

रेबीज के शुरूआती लक्षणों में ज्वर और काटे गये स्थान पर झनझनाहट शामिल हैं लेकिन जैसे-जैसे रोग के विषाणु शरीर में फैलते जाते हैं अन्य लक्षणों का उभरना भी आरम्भ हो जाता है जिनमे अनियंत्रित उत्तेजना, हिंसक गतिविधियाँ, विभ्रम, पागलपन, उन्माद, जल से भय और पक्षाघात शामिल हैं रेबीज की उग्र और अंतिम अवस्था में शरीर का कोई भी अंग हिलने-डुलने में असमर्थ हो जाता है और व्यक्ति की चेतना लुप्त हो जाती है, ठीक उसी प्रकार से जैसे कोमा में होता है

चूँकि इस रोग में रोगों को पानी को देखकर डर लगता है इसीलिये इसे हाइड्रोफोबिया भी कहते हैं यदि एक बार रेबीज के लक्षण उभर जाँय तो इसकी अंतिम परिणति हमेशा मृत्यु ही होती है आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार आज तक केवल पाँच ही लोग रेबीज के लक्षण दिखाई देने के पश्चात जीवित बच सके हैं और वह भी तब जब कुशल चिकित्सकों की निरंतर देखरेख में अत्यंत धैर्यपूर्वक उनकी महीनों तक चिकित्सा होती रही थी

लेकिन रेबीज के लक्षण तुरंत ही नहीं उभरते हैं रोग के संक्रमण और लक्षणों के उभरने के बीच की अवधि आम तौर पर एक से तीन मास की होती है हालाँकि यह 10 दिन से लेकर 12 वर्ष तक हो सकती है यह अवधि मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करती है –

प्रथम व्यक्ति की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर,
दूसरी प्रविष्ट हुए विषाणुओं की संख्या पर
तीसरी विषाणुओं को संक्रमण के स्थान से केंद्रीय स्नायु संस्थान तक पहुँचने में लगे समय पर

हमें तीन लोगों में रेबीज के लक्षण उभरने की अलग-अलग समयावधि के विषय में ज्ञात है – पहला एक लड़की जिसे एक भेडिये ने कई जगह से काट खाया था 24 घंटे पश्चात ही उसमे शारीरिक पक्षाघात और विभ्रम के लक्षण दिखने आरम्भ हो गये थे और तीन दिनों के भीतर उसकी मृत्यु हो गयी थी

एक अन्य व्यक्ति में कुत्ते के काटने के पाँच वर्ष पश्चात रेबीज के लक्षण उभरने आरम्भ हुए थे उसकी चार दिनों के भीतर मृत्यु हो गयी थी मरने से पहले उसमे अनियंत्रित उत्तेजना, बेचैनी, मुंह से लार स्रावित होना, और कुत्ते की तरह भौकना जैसी क्रियाएँ दिखने लगी थी

तीसरे व्यक्ति को 12 वर्ष पहले एक गीदड़ ने कान के पास काट लिया था 12 वर्ष के पश्चात उसमे रेबीज के लक्षण उभरना आरम्भ हुए थे लेकिन चिकित्सीय प्रयास के पश्चात भी उसे बचाया नहीं जा सका था

Treatment of Rabies : –

दुनिया भर में हर साल लगभग 50000 लोग रेबीज के घातक संक्रमण के कारण मरते हैं जिनमे 95 प्रतिशत से अधिक मौतें केवल एशिया और अफ्रीका महाद्वीप में ही होती हैं इसका मुख्य कारण विकासशील देशों की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था और जनसामान्य की इस बीमारी के प्रति उदासीनता है रेबीज से होने वाली मौतों के यह आंकडे और अधिक हो सकते थे यदि सन 1885 में लुई पास्चर और एमिली रोक्स ने इसकी वैक्सीन का आविष्कार न किया होता

दुनिया भर में हर साल हजारों लोगों और कुत्तों को इसका टीका लगाया जाता है अब तक यह टीके लाखों लोगों को लगाये जा चुके हैं एक अनुमान के अनुसार रेबीज वैक्सीन हर साल 2 लाख से अधिक लोगों की जान बचाती है रेबीज के उपचार में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –

काटे गये स्थान को और खरोंचों को 10 से 15 मिनट तक साबुन या डिटर्जेंट मिश्रित जल से धोना चाहिये क्योंकि यह विषाणुओं को मारकर उनकी संख्या कम कर देते हैं और संक्रमण को रोकने में कुछ हद तक प्रभावी होते हैं
साबुन के जल से धोने के पश्चात घाव को यदि एल्कोहल से धोया जाय तो विषाणुओं की संख्या में और कमी आ जाती है क्योंकि एल्कोहल भी एक तेज जीवाणुनाशक है

ऐसा करने के पश्चात चिकित्सालय में जाकर रेबीज वैक्सीन लगवायें यह जितनी जल्दी लग जाये उतना अधिक बेहतर है यदि संक्रमण होने के छह दिनों के अन्दर ही रेबीज का टीका लगवा लिया जाता है तो यह 100 प्रतिशत प्रभावी होता है वैसे प्रयास किया जाना चाहिये कि 24 घंटे के भीतर ही इसका टीका लगवा लिया जाय

रेबीज वैक्सीन में कुल चार टीके लगाये जाते हैं पहला टीका लगने के तीन दिन के पश्चात दूसरा टीका लगाया जाता है, तीसरा और चौथा टीका पहले टीके के सातवें और चौदहवें दिन लगाया जाता है

रेबीज होने के पश्चात बचे पाँच लोगों का उपचार जिस पद्धति से किया गया था उसे मिल्वौकी प्रोटोकॉल के नाम से जाना जाता है

Prevention of Rabies : –

रेबीज को फैलने से रोकने का मुख्य उपाय सावधानी और जागरूकता ही है हम इन उपायों के जरिये अनेकों लोगों को अकाल मृत्यु से बचा सकते हैं –

1. यदि कोई जानवर चाहे वह स्वस्थ ही क्यों न हो, कभी काट ले तो टीका अवश्य लगवाये
2. अपने आस-पास के लोगों को भी इस बीमारी के संबंध में सचेत करते रहें
3. प्रति वर्ष अपने पालतू पशुओं (कुत्ते, बिल्ली आदि) को टीका लगवायें
4. जानवर के काटने पर नीम-हकीम और अकुशल चिकित्सकों के पास न जायें, बल्कि इसकी वैक्सीन लगवायें
5. आवारा घूमते कुत्तों से सावधान रहें और यदि वह असामान्य व्यवहार करे तो अपने शहर की नगरपालिका को सूचित करें

रेबीज का इतिहास बहुत पुराना है लगभग 2000 वर्षों से भी अधिक दुनिया में रेबीज से जितने भी लोग मरते हैं उनमे से एक तिहाई मौतें भारत में होती हैं जहाँ हर साल 20 से 22 हजार लोग मरते हैं इसके पश्चात चीन और कांगों गणराज्य का स्थान हैं यह मौतें भी केवल इसीलिये होती है क्योंकि उन लोगों को समय पर इसकी वैक्सीन नहीं मिल पाती है ध्यान दीजिये रेबीज वैक्सीन सरकारी चिकित्सालयों में निःशुल्क लगायी जाती है

यदि किसी कारण से वह उपलब्ध न हो तो आप किसी चिकित्सक के परामर्श से सीधे मेडिकल स्टोर से खरीद कर भी इन्हें लगवा सकते हैं इसके कुल चार इंजेक्शन लगाये जाते हैं और वह भी 15 दिनों की अवधि में इसीलिये लापरवाही कतई न करें और दवाई में पैसे खर्च होंगे यह सोचकर लालच भी न करें क्योंकि रेबीज होने पर मौत हमेशा तय रहती है जीवन धन से कहीं ज्यादा कीमती है

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