Constipation Causes and Treatment in Hindi

 

अगर ऐसी किसी एक बीमारी का नाम लेना हो जो इंसानों के लिये जानलेवा और खतरनाक तो न हो, मगर उनकी जिंदगी का सुख-चैन अक्सर ही लूटती हो तो इसमें सबसे पहला नाम कब्ज का ही होगा। ऊपरी तौर से देखने पर तो कब्ज कोई बड़ी शारीरिक समस्या दिखायी नहीं पड़ती है, पर जिन्हें अक्सर ही अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इससे दो-चार होना पड़ता है वे भली-भाँति जानते होंगे कि कब्ज कितनी बड़ी मुसीबत है।

Constipation Causes and Treatment in Hindi
अच्छे स्वास्थ्य के लिये कब्ज का स्थायी उपचार आवश्यक है

चिकित्सीय दृष्टि से एक सप्ताह में तीन से कम बार मल त्याग करना कब्ज के अंतर्गत आता है और यदि सप्ताह में सिर्फ एक ही बार मल का विसर्जन हो या शौच बिल्कुल भी न हो तो यह भीषण कब्ज (Severe Constipation) का संकेत है पर यदि हम आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की उक्त परिभाषा के अनुसार कब्ज की समस्या पर विचार करें तो पायेंगे कि 100 में से कोई एक ही व्यक्ति होगा जो सप्ताह में तीन से कम बार शौच करने जाता होगा

इस दृष्टि से तो कब्ज की समस्या कोई विकट स्वास्थ्य समस्या नहीं जान पड़ती लेकिन जब हम वास्तविक जीवन में कब्ज से खड़ी होने वाली परेशानियों और उसके डरावने आँकड़ों को देखते हैं तो पता चलता है कि यह परिभाषा कितनी अपूर्ण और यथार्थता से कितनी दूर है इस बात में किसी भी व्यक्ति को कोई शंका नहीं है कि लगभग हर घर में कब्ज की समस्या आजकल आम है

सन 2006 में Journal of Gastroenterology and Hepatology में छपे एक शोधपत्र के अनुसार वैश्विक जनसँख्या की कुल 5 से 30 प्रतिशत आबादी कब्ज की समस्या से पीड़ित है और अधिक आयु के लोगों में यह समस्या 20 से 35 प्रतिशत तक है पूरी दुनिया में कब्ज के उपचार हेतु दवाइयों पर होने वाला सालाना खर्च 3 अरब डॉलर से भी अधिक है

पेट में शुष्क मल का जमा होना ही कब्ज है। यदि कब्ज का शीघ्र ही उपचार नहीं किया जाये तो शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। कब्जियत का मतलब ही प्रतिदिन पेट साफ न होने से है। एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में दो बार यानी सुबह और शाम को तो मल त्याग के लिये जाना ही चाहिये। दो बार नहीं तो कम से कम एक बार तो जाना आवश्यक है। नित्य कम से कम सुबह मल त्याग न कर पाना अस्वस्थता की निशानी है।

कब्ज के निम्न लक्षण हैं –

पेट में गैस बनना और फूल जाना
उदार के निचले हिस्से में पीड़ा या परेशानी होना
कठोर शुष्क या कम मल का निकलना
शौच जाने के पश्चात भी पेट में भारीपन महसूस होना
शौच के लिये जोर लगाना
गुदाद्वार से रक्त निकलना या शुष्क मल के कारण गुदा में घाव/भगंदर हो जाना
शौच के संबंध में मानसिक चिंता या तनाव रहना
दिन में कई बार मल त्याग के लिये जाना पर फिर भी पूर्ण रूप से मल का निष्कासन न होना

कब्ज मुख्य रूप से बड़ी आँत से सम्बंधित समस्या है

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