Impotency Causes and Treatment in Hindi

 

नपुंसकता या इम्पोटेंसी एक प्रकार का यौन रोग है जिसके कारण न तो व्यक्ति सही प्रकार से यौन संबंध बना पाता है और न ही अपनी वंश परंपरा को आगे बढा सकता है। नपुंसकता के चिकित्सकों ने अनेकों कारण बताये हैं जो जन्मजात भी हो सकते हैं और असंयम के कारण भी पैदा हो सकते हैं। अक्सर देखा गया है कि या तो नपुंसकों के यौनांग पूर्ण रूप से विकसित नहीं होते हैं या फिर उनके रज-वीर्य शुद्ध नहीं होते हैं।

Causes and Treatment of Impotency in Hindi
नपुंसकता लाइलाज नहीं है

आम तौर पर नपुंसक शब्द पुरुषों के लिये प्रयुक्त किया जाता है लेकिन यह मानना गलत है कि केवल पुरुष ही नपुंसक होता है नपुंसकता स्त्रियों में भी पायी जाती है और ऐसी स्त्री को समाज में प्रायः बाँझ के नाम से पुकारा जाता है वहीँ पुरुष को नपुंसक और अल्पवीर्य कहा जाता है नपुंसक का पर्यायवाची शब्द हिजड़ा है जो दोनों लिंग से इतर एक तीसरे लिंग का बोधक है

कई व्यक्ति यहाँ तक कि कुछ विशेषज्ञ भी Impotency और Erectile Dysfunction को एक ही समस्या मानते हैं नपुंसकता को यौन असमर्थता, यौन अक्षमता आदि नामों से भी जाना जाता है आसान शब्दों में कहें तो नपुंसकता का तात्पर्य सम्भोग कर पाने की असमर्थता से है

Causes of Impotency : –

हार्मोनों के असंतुलन के कारण नपुंसक व्यक्ति के यौन अंग पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाते हैं अति सहवास, शारीरिक दुर्बलता, आघात, खून की कमी और प्रमेह ऐसा व्यक्ति संतान को जन्म देने में प्रायः असमर्थ ही रहता है

Symptoms of Impotency : –

स्त्री-पुरुष में नपुंसकता के एक या एक से अधिक निम्न लक्षण दिखायी दे सकते हैं

यौन संबंध बनाने का प्रयास करने पर भी पुरुष के लिंग में किसी प्रकार की उत्तेजना न दिखायी देना
योनी में शिश्न प्रविष्ट करने से पहले ही लिंग का अपने सामान्य आकर में आ जाना
लिंग की लम्बाई एक इंच से भी कम होना और उसमे लिंगोत्थान न होना

Treatment of Impotency : –

नपुंसकता यदि किसी रोग की विकृति के रूप में हो तो उसके शामक उपचार द्वारा इसकी चिकित्सा करनी चाहिये आजकल आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में भी नपुंसकता का उचित उपचार उपलब्ध है इसीलिये किसी अच्छे यौन रोग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में रहकर इस रोग की चिकित्सा करानी चाहिये जन्मजात नपुंसकता को छोड़कर अधिकाँश मामलों में अशक्तता का इलाज संभव है

वीर्य-दोषों के कारण पैदा हुई विकृति में आयुर्वेदिक, यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के कुछ प्रयोग लाभदायक हैं जिन्हें एक विश्वसनीय घरेलू चिकित्सा के रूप में सदियों से प्रयोग में लाया जाता रहा है इनसे व्यक्ति विशेष को कितना लाभ हो सकेगा यह कई कारणों पर निर्भर करता है जहाँ तक संभव हो छह महीने से अधिक पुरानी, गली-सड़ी और हीनवीर्य वनौषधियों का प्रयोग न करें

क्योंकि सारहीन औषधियों से उपचार में कोई विशेष लाभ न हो सकेगा और परिणाम सदा संदिग्ध ही रहेंगे जब तक विशेष रूप से न बताया जाय तब तक, समुचित लाभ पाने के लिये इन प्रयोगों को कम से कम चालीस दिन तक अवश्य करें इन सभी उपायों में याद रखने योग्य बात यह है कि पेट में कब्ज न होने दें क्योंकि कब्ज को सभी रोगों की जड़ कहा गया है इसीलिये पेट प्रतिदिन नियमित रूप से साफ़ होता रहे इसका ध्यान रखें

अश्वगंधा, शतावर, गोखरू, सफ़ेद मूसली, कौंच बीज, तालमखाना, खिरैटी के बीज, गंगेरन की छाल, मुलहठी और मिश्री इन दस औषधियों को एक समान मात्रा में लेकर सबको कूट करके इनका सूक्ष्म चूर्ण बना लें प्रतिदिन सुबह-शाम 6 ग्राम चूर्ण एक गिलास गाय के दूध के साथ सेवन करें यह उपाय शीघ्रपतन सहित दूसरी यौन समस्याओं में भी लाभदायक है

पलाश की जड़ का रस निकालें इसका तरीका यह है कि पलाश (ढाक) के वृक्ष की जड़ जो लगभग एक इंच मोटी हो उसे खोदकर पृथ्वी से बाहर निकाल लीजिये फिर उसमे काँच की मोटे मुख वाली शीशी का मुँह फँसा दें और शीशी को वहीँ मिटटी से ढक दें दो दिन में ही उसमे लाल रंग का रस इकट्ठा हो जायेगा फिर शीशी को घर लाकर सुरक्षित रखें और प्रतिदिन दो-दो बूँद प्रातः सांय पान के पत्ते में लगाकर खाएं

सूर्य चिकित्सा विज्ञान में भी नपुंसकता का उपचार उपलब्ध है इसके लिये लिंग पर लाल रंग का प्रकाश डालना चाहिये और उसकी नारंगी रंग के तेल से, हल्के हाथों से 2-3 मिनट तक मालिश करनी चाहिये

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