Diabetes Symptoms and Diabetes Meaning in Hindi

 

“मधुमेह एक ऐसा रोग है जो अगर एक बार किसी इन्सान के शरीर में घुस जाय, तो फिर उसे नहीं छोड़ता। डायबिटीज वह बीमारी है जो जड़ से ख़त्म नहीं होती और इन्सान जब तक जीता है, तब तक उसे इसके साये में रहकर ही जीना पड़ता है।”

 

Diabetes Meaning and Diabetes Symptoms in Hindi
साइलेंट किलर के रूप में प्रसिद्ध है मधुमेह

 

Diabetes Meaning in Hindi डायबिटीज का अर्थ

Diabetes Symptoms and Meaning in Hindi: Diabetes (डायबिटीज) का हिंदी में अर्थ है – मधुमेह, जिसे आम बोलचाल की भाषा में शुगर भी कहा जाता है। डायबिटीज चयापचय संबंधी बीमारियों (Metabolic Related Diseases) का एक समूह है, जिसमें इन्सुलिन हार्मोन की कमी होने से लंबे समय तक, ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) का स्तर उच्च बना रहता है। चिकित्सीय शब्दावली में इसे डायबिटीज मेलेटस (डीएम) के नाम से जाना जाता है।

“मधुमेह एक ऐसा रोग है जो अगर एक बार किसी इन्सान के शरीर में घुस जाय, तो फिर उसे नहीं छोड़ता। डायबिटीज वह बीमारी है जो जड़ से ख़त्म नहीं होती और इन्सान जब तक जीता है, तब तक उसे इसके साये में ही रहकर जीना पड़ता है। यह रोग भले ही लाइलाज हो, लेकिन इस पर नियंत्रण अवश्य रखा जा सकता है।”

और अगर व्यक्ति दवाइयों के साथ-साथ परहेज भी करता रहे, तो वह अपनी जिंदगी को बहुत लम्बा खींच सकता है। Diabetes Symptoms and Meaning in Hindi में आज हम मधुमेह रोग पर विस्तार से चर्चा करेंगे, ताकि डायबिटीज के कारणों और लक्षणों को जानकर, हर व्यक्ति इससे अपना बचाव कर सके।

What is Diabetes in Hindi क्या है मधुमेह

इन्सान की जिंदगी हमेशा से ही जटिलताओं से भरी रही है, उपर से इस भागदौड़ भरे युग में बदलती लाइफस्टाइल ने, उसकी जिंदगी की मुश्किलों को और ज्यादा बढ़ा दिया है। हर पल साथ रहने वाले तनाव और अनियमित खानपान ने इंसानों को एक ऐसी खतरनाक बीमारी का शिकार बना दिया है, जो दिन दुनी रात चुगौनी रफ़्तार से उन्हें अपनी चपेट में ले रही है।

यह बीमारी है मधुमेह, जिसे धीमी मौत यानि स्लो डेथ के नाम से भी जाना जाता है और यह नाम इसे ऐसे ही नहीं मिला है, बल्कि यह आदमी को मारती भी इसी तरह से है। एक बार जब डायबिटीज देह के अन्दर प्रवेश कर जाती है, तो फिर यह शरीर को धीरे-धीरे खोखला करती जाती है। शरीर का प्रत्येक अंग, जिस्म का प्रत्येक हिस्सा, साल दर साल कमजोर होता चला जाता है, अपनी सामर्थ्य खोता चला जाता है।

और अंत में व्यक्ति कई ऐसी बीमारियों का शिकार हो जाता है, जो एक दिन उसका जीवन समाप्त कर देती हैं। मधुमेह के इस रोग का सबसे स्याह पक्ष यही है कि यह एक ही वक्त में आदमी के दिल, दिमाग, हाथ, पैर, किडनी, आँख समेत हर अंग पर अपना धावा बोलता है और इन्सान को वक्त से पहले ही अक्षम कर देता है।

बेहद खतरनाक रोग बन चुका है डायबीटीज

एक समय था जब यह रोग 50-60 साल की उम्र में, बहुत ही कम लोगों को हुआ करता था, लेकिन आज स्थिति इतनी विस्फोटक है कि दुनिया भर में 50 करोड़ से भी ज्यादा लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं। जिनमे से 90 प्रतिशत लोग टाइप 2 डायबीटीज से पीड़ित हैं। ट्रेंड भी यही बताते हैं कि मधुमेह रोग के बढ़ने की दर भविष्य में भी इसी प्रकार से जारी रह सकती है। विशेष बात यह है कि पुरुष और स्त्रियाँ दोनों ही इस रोग से बराबर रूप से पीड़ित हैं।

डायबीटीज किसी भी इन्सान के जल्दी मरने का खतरा कम से कम दोगुना कर देती हैं। सन 2018 में दुनिया भर में डायबिटीज के कारण 50 से 60 लाख मौतें हुई थीं। डायबिटीज सिर्फ लोगों को मारने में ही अव्वल नहीं है, बल्कि यह इस सदी की वह सबसे बड़ी महामारी भी बनती चली जा रही है, जो लोगों की जान लेने के साथ-साथ, उनकी धन-दौलत भी लूटने पर तुली है।

सन 2017 में डायबिटीज रोग के इलाज और दवाइयों पर होने वाला कुल वैश्विक खर्च लगभग 727 बिलियन डॉलर था, जिनमे से लगभग 297 अरब डॉलर का खर्च सिर्फ संयुक्त राज्य अमेरिका ने वहन किया था। इस विशाल खर्च से ही इस बीमारी की भयावहता का अनुमान लगाया जा सकता है।

Types of The Diabetes in Hindi मधुमेह के प्रकार

Diabetes Symptoms and Meaning in Hindi: इससे पहले कि हम डायबिटीज के कारणों, लक्षणों, नुकसान तथा उपचार पर चर्चा करें, यह जानना आवश्यक है कि आखिर मधुमेह कितने प्रकार का होता है, क्योंकि इन सभी के कारण और इलाज अलग-अलग हैं। इन्सुलिन हार्मोन के उत्पादन में कमी के आधार पर, डायबिटीज मेलेटस मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है –

Type 1 Diabetes in Hindi टाइप 1 मधुमेह

टाइप 1 डायबिटीज को वंशानुगत मधुमेह भी कहा जाता है। क्योंकि ऐसे लोगों को जिनके परिवार में माता-पिता या दादा-दादी में से किसी एक को मधुमेह होता है, उन्हें इस रोग के होने की ज्यादा संभावना रहती है। टाइप 1 डायबिटीज पीढ़ी-दर पीढ़ी चल सकती है और बच्चे तथा युवा इसका ज्यादा शिकार बनते हैं। इसमें व्यक्ति का अग्न्याशय यानि पैंक्रियास, या तो इन्सुलिन हार्मोन बनाना बिल्कुल ही बंद कर देता है या फिर वह जरुरत से बहुत कम इन्सुलिन बनाता है।

ऐसा बीटा कोशिकाओं के ख़त्म होने के कारण होता है। इस प्रकार की डायबिटीज को पहले IDDM यानि इन्सुलिन आश्रित मधुमेह (Insulin-dependent Diabetes Mellitus) या किशोर मधुमेह (Juvenile Diabetes) के नाम से जाना जाता था। इस डायबिटीज का कारण आज भी अज्ञात है। ध्यान रखने की बात यह है कि इस प्रकार के मधुमेह में लक्षणों का विकास काफी तेजी से, सिर्फ कुछ सप्ताह या महीनो में हो सकता है।

Type 2 Diabetes in Hindi  टाइप 2 मधुमेह

टाइप 2 डायबिटीज, इंसुलिन के प्रतिरोध से शुरू होती है। यह वह स्थिति है जिसमें शरीर की कोशिकाएँ, इंसुलिन का सही ढंग से जवाब देने में विफल हो जाती है। जैसे-जैसे रोग बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे इंसुलिन की कमी भी विकसित हो सकती है। इस प्रकार की डायबिटीज को पहले गैर इंसुलिन-आश्रित मधुमेह (एनआईडीडीएम) या वयस्क-शुरुआत मधुमेह के रूप में जाना जाता था।

इस प्रकार की डायबीटीज का सबसे बड़ा कारण अनियमित जीवनशैली है, जिसमे तनाव करना, शरीर का वजन ज्यादा होना और पर्याप्त व्यायाम न करना जैसे कारण शामिल हैं। टाइप 2 डायबिटीज में लक्षणों का विकास बहुत धीरे-धीरे होता है और इसके लक्षण काफी कम हो सकते है।

Gestational Diabetes in Hindi गर्भावस्था का मधुमेह

गर्भावस्था के दौरान होने वाला मधुमेह, इस बीमारी का तीसरा मुख्य स्वरुप है। जो तब होता है, जब मधुमेह के किसी पूर्व इतिहास के बिना किसी गर्भवती महिला के शरीर में, ब्लड शुगर का उच्च स्तर विकसित हो जाता है। ऐसा उनके शरीर में हार्मोन्स में आये बदलावों के कारण होता है।

हालाँकि ज्यादातर मामलों में Gestational Diabetes डिलीवरी के बाद ठीक हो जाती है, लेकिन ठीक होने के बाद भी इन महिलाओं और उनके बच्चों में आगे चलकर, मधुमेह होने की संभावना अधिक होती है।

Pre-Diabetes in Hindi प्री-डायबिटीज

प्री-डायबिटीज, मधुमेह होने से पूर्व की अवस्था है। इस अवस्था में भी आपके शरीर में ग्लूकोज की मात्रा सामान्य से अधिक होती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको डायबिटीज का रोग हो चुका है। इस अवस्था में उचित आहार-विहार से और थोड़े समय तक दवाइयों का सेवन करने से, इस रोग के होने की संभावना बिल्कुल ख़त्म की जा सकती है। लेकिन अगर अपने वजन पर ध्यान न दिया जाय और असंयमित जीवनशैली जारी रखी जाय, तो डायबिटीज होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

Causes of The Diabetes in Hindi मधुमेह के कारण

आखिर क्यों होता है किसी इन्सान को मधुमेह

Diabetes Symptoms and Meaning in Hindi: मधुमेह होने के कई कारण बताये जाते हैं, लेकिन यह सभी कारण इन्सुलिन और पैंक्रियास से जुड़े हैं। डायबिटीज होने पर या तो पैंक्रियास पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता या फिर शरीर की कोशिकायें इंसुलिन का ठीक से जवाब नहीं देती। यह दोनों ही परिस्थितियाँ स्वास्थ्य के लिये घातक हैं। Pancreas Meaning in Hindi में हमने आपको बताया था कि हमारा पैंक्रियास शरीर में पैदा होने वाली उर्जा को खोलने की चाबी है।

जिसे यह अपनी विशेष कोशिकाओं से निकलने वाले हार्मोन्स की मदद से नियंत्रित करता है। इन्ही हार्मोन्स में से एक है इन्सुलिन, जो शरीर में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका सम्पादित करता है। इन्सुलिन के द्वारा ही हमारे रक्त में घुली ब्लड शुगर, शरीर की कोशिकाओं तक पहुँच पाती है और इसी शुगर से इन कोशिकाओं को उर्जा मिलती है।

लेकिन जब इन्सुलिन कम बनता है, तो शुगर कोशिकाओं तक नहीं पहुँच पाती और लगातार रक्त में ही प्रवाहित होती रहती है। इससे शरीर को एनर्जी नहीं मिल पाती और शरीर के सभी अंग ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने से कमजोर होने लगते हैं। चिकित्सकों ने मधुमेह होने के पीछे यह 12 कारण बताये हैं –

टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के सबसे बड़े कारण

1. टाइप 1 डायबिटीज में इन्सुलिन का उत्पादन करने वाली बीटा कोशिकाएँ ख़त्म होने लगती हैं, जिसका प्रमुख कारण है – व्यक्ति का अपना खुद का Immune System (प्रतिरक्षा प्रणाली)। जिसका एक महत्वपूर्ण घटक T-सेल्स, बीटा सेल्स को अपना दुश्मन मानकर, उन पर आक्रमण करके, उन्हें ख़त्म करने पर तुल जाते हैं। हालाँकि यह आज तक पता नहीं चल पाया है कि आखिर वह ऐसा क्यों करते हैं?

2. टाइप 2 डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण है – तनाव। लगातार तनाव, अवसाद और मानसिक परेशानियों के बने रहने से, Blood में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है और व्यक्ति आगे चलकर मधुमेह का शिकार बन जाता है। दुनिया में टाइप 2 डायबिटीज के जितने भी रोगी हैं, उनमे से 60 प्रतिशत लोगों के डायबेटिक होने के पीछे की सबसे बड़ी वजह यह तनाव ही है।

3. जो लोग अक्सर और ज्यादा मात्रा में मीठे खाद्य पदार्थों जैसे कि मिठाइयाँ, चाय, कोल्ड ड्रिंक्स आदि का सेवन करते हैं, उन्हें डायबिटीज होने का काफी ज्यादा खतरा रहता है, विशेषकर 40 की आयु के बाद।

4. कुछ दवाइयाँ जैसे कि ग्लूकोकोर्टिकोइडस, थाइरोइड के हार्मोन्स, स्टेटिन्स और बीटा एंड्रेएनार्जिक अगोनिस्ट्स भी डायबिटीज का कारण बन सकती हैं।

5. अनियमित खानपान वाले, तैलीय भोजन का सेवन करने वाले और अक्सर फास्ट फूड खाने वाले लोगों में, मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है।

ऐसे लोग भी बन सकते हैं डायबिटीज के शिकार

6. जो लोग डेस्क जॉब करते हैं या जो दिन में ज्यादातर समय बैठकर ही अपने काम निबटाते हैं, ऐसे लोगों को डायबिटीज होने का खतरा रहता है।

7. नशीले पदार्थों, शराब और धूम्रपान का सेवन करने वाले लोगों को भी आगे चलकर, मधुमेह की समस्या से दो-चार होना पड़ सकता है।

8. आनुवांशिक कारणों से भी डायबिटीज का रोग किसी व्यक्ति को घेर सकता है, क्योंकि इसे पीढ़ी दर पीढ़ी चलते देखा गया है।

9. मोटापे का शिकार, बढे वजन वाले, और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को भी, डायबिटीज होने का काफी खतरा रहता है।

10. शारीरिक श्रम और व्यायाम की कमी भी आगे चलकर, किसी इन्सान में डायबिटीज की समस्या को जन्म दे सकती है।

11. देर रात तक जागना, कम नींद लेना और रात को देरी से भोजन करना भी, डायबिटीज की बीमारी के खतरे को बढ़ा देता है।

12. इनके अतिरिक्त संक्रमण से फैलने वाली कुछ बीमारियाँ भी डायबिटीज का कारण बन सकती हैं, जैसे कि कोक्ससैकिवायरस B।

Symptoms of The Diabetes in Hindi मधुमेह के लक्षण

Diabetes Symptoms and Meaning in Hindi: डायबिटीज एक ऐसा रोग है जो चुपचाप शरीर में प्रवेश करता है और जब तक यह अपनी जड़ नहीं जमा लेता, तब तक इसके लक्षण आसानी से नहीं पहचाने जाते। इसीलिये अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना हर इन्सान के लिये बेहद जरुरी हो जाता है। अब हम आपको डायबिटीज के सबसे आम लक्षणों (Main Symptoms of The Diabetes) के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें हर इन्सान को सावधानी से पहचानना आना चाहिये।

अकारण थकावट या कमजोरी महसूस होना

काम करने के दौरान या काम के बाद थकान होना एक आम बात है, लेकिन अगर आपको बिना काम किये भी सारा दिन थकान महसूस होती है, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है। ऐसे में आपको अपनी सेहत पर ध्यान देने और चिकित्सक से अपना चेकअप कराने की जरुरत है।

ध्यान रखिये, अगर रात को भरपूर नींद लेने के बाद भी आपको ऐसा लगता है जैसे कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है या फिर आपका शरीर थका हुआ है, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है। क्योंकि ब्लड शुगर का स्तर लगातार बढ़ने पर ऐसी समस्या आम हैं। डायबिटीज के ज्यादातर रोगी अपने शरीर में, अचानक कमजोरी भी महसूस करते हैं।

बार-बार पेशाब आना

डायबिटीज के रोगियों का सबसे आम लक्षण है – बार-बार पेशाब आना। इसका कारण यह है कि जब इन्सुलिन की कमी से, रक्त में शुगर आवश्यकता से ज्यादा मात्रा में इकट्ठा हो जाती है, तो शरीर उसे मूत्र के जरिये बाहर निकाल देता है, जिसके कारण मधुमेह के रोगी को थोड़ी-थोड़ी देर में पेशाब करना पड़ता है।

बहुत ज्यादा और बार-बार प्यास लगना

डायबिटीज के रोगियों को प्यास भी बहुत ज्यादा लगती है, इसीलिये उन्हें बार-बार पानी पीना पड़ता है। चूँकि बार-बार मूत्र त्यागने के कारण, मधुमेह के रोगी के शरीर से, पानी और शुगर बाहर निकल जाती है, इसीलिये उन्हें हमेशा प्यास लगी रहती है।

अचानक वजन कम होना

वजन ज्यादा होना, डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है, वहीं वजन कम होना भी डायबिटीज होने का संकेत हो सकता है। जब मधुमेह रोग की शुरूआत होती है तो आरंभ में ही रोगी का वज़न अचानक तेजी से कम होने लगता है, जबकि उसके खान-पान और दैनिक दिनचर्या में कोई फेरबदल भी नहीं होता। अगर सामान्य दिनों की अपेक्षा, आदमी का वजन एकाएक कम होने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिये।

लगातार भूख लगना

डायबिटीज के रोगियों का एक विरोधाभासी लक्षण है – वजन कम होने के बावजूद भूख में बढोतरी होना। मधुमेह रोग में रोगी की भूख अन्य दिनों की अपेक्षा कई गुना बढ जाती है। क्योंकि इन्सुलिन की कमी के कारण शर्करा कोशिकाओं तक नहीं पहुँच पाती, जिससे उनके शरीर में उर्जा की कमी होने लगती है। नतीजन उन्हें बार-बार कुछ न कुछ खाने की इच्छा होती है।

चोट या जख्म का ठीक न होना या देर से घाव भरना

एक स्वस्थ आम इन्सान के छोटे-छोटे संक्रमण या चोट थोड़े ही समय में अपने आप ठीक हो जाती है, क्योंकि उनका Immune System सही ढंग से काम कर रहा होता है। लेकिन डायबिटीज के मरीज के शरीर में लगी कोई भी चोट या किसी भी तरह का संक्रमण जल्दी से ठीक नही होता है। उनका छोटा सा जख्म बढ़कर एक बड़ा घाव बन सकता है।

और अगर वे वायरल, खॉसी-जुकाम या किसी बैक्टीरियल इंफेक्शन से पीड़ित हो जाय, तो उन्हें लम्बे समय तक इससे जूझना पड़ता है। इसलिये अगर आपके शरीर में कहीं कोई चोट या घाव लग जाय और यह जल्दी न भरे, चाहे यह कोई छोटी सी खरोंच ही क्यों ना हो, तो आपको सावधान रहना चाहिये। विशेषकर तब जब वह धीरे-धीरे एक बडे़ घाव में बदल जाय या उसमे संक्रमण के लक्षण दिखायी दें।

आँखों की रौशनी कम होना

डायबिटीज आंखों की रौशनी पर भी काफी बुरा प्रभाव डालती है। क्योंकि बढ़ी हुई ब्लड शुगर, आँखों के रेटिना की कोशिकाओं को समाप्त करती चली जाती है। डायबिटीज के रोगियों को इस रोग की शुरूआत में ही आंखों से संबंधित समस्याओं जैसे कि रोशनी कम होने और धुंधला दिखाई पडने की परेशानी से जूझना पड़ सकता है। आम तौर पर डायबिटीज के रोगियों को, किसी भी वस्तु को देखने के लिए आंखों पर ज्यादा ज़ोर डालना पडता है।

बार बार पेशाब या रक्त में संक्रमण होना

ब्लड शुगर लगातार बढ़ी रहने के कारण, डायबिटीज के रोगियों में संक्रमण की समस्या और उनमे भी विशेषकर मूत्रमार्ग का संक्रमण होने की दिक्कत एक आम बात है। इसीलिये अगर कोई व्यक्ति बार-बार रक्त और पेशाब के संक्रमण की समस्या से जूझ रहा हो, तो उन्हें एक बार डायबिटीज की जांच अवश्य करानी चाहिये।

त्वचा संबंधी रोग होना

रक्त में ग्लूकोज का स्तर लगातार बढ़ा रहने के कारण, और कोशिकाओं के उर्जा की कमी से जूझने की वजह से, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। इससे शरीर की बीमारियों से लडऩे की क्षमता कम हो जाती है। जिसके कारण कई तरह के स्किन इंफेक्शन हो जाते हैं, जो जल्दी ठीक नहीं होते। त्वचा के सामान्य संक्रमण बडे घाव बन जाते हैं, बार-बार फोड़े-फुंसियाँ निकलती हैं और कभी-कभी हाथों, पैरों और गुप्तांगों पर खुजली वाले जख्म भी हो जाते हैं।

शरीर में झनझनाहट होना या चक्कर आना

चूँकि डायबिटीज के रोगियों के शरीर में उर्जा की कमी लगातार बनी रहती है, इसीलिये वह थोडा सा काम करने पर या फिर बिना कोई काम किये भी थकान या कमजोरी महसूस करने लगते हैं। जब मधुमेह का रोग पुराना होता जाता है, तो यह लक्षण और ज्यादा तेज होते जाते हैं। इसीलिये कुछ वर्षों बाद डायबिटीज के रोगियों को, अचानक ही सिरदर्द या चक्कर आने की समस्या या फिर पैरों में झनझनाहट महसूस होने लगती है।

चिडचिडापन उभरना

शरीर में ब्लड शुगर का लेवल हमेशा बढ़ा रहने से डायबिटीज के रोगी अक्सर मूडी हो जाते हैं और उन्हें जल्दी गुस्सा आने लगता है। डायबिटीज और डिप्रेशन के रोगी के लक्षण, काफी हद तक एक जैसे ही लगते हैं। जैसे कि उनका कहीं बाहर जाने का मन नहीं होता, कुछ काम करने में दिल नहीं लगता और अक्सर ही किसी बात के कारण चिडचिडे बने रहते हैं।

तो अगर आपको भी यह समस्याएं है, तो इन्हें नजरंदाज करने की कोशिश न करें और चिकित्सक के पास जाकर तुरंत अपने जरुरी टेस्ट करायें। ताकि वक्त रहते डायबिटीज की बीमारी का पता लगाया जा सके और फिर इस रोग को नियंत्रित भी किया जा सके। इससे आप लम्बे समय तक, एक खुशहाल जिंदगी जी सकेंगे।

Tests for The Diabetes in Hindi मधुमेह की जाँच

मधुमेह के रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य और अपनी जिंदगी सलामत रखने के लिये, नियमित रूप से कई टेस्ट कराने की जरुरत पड़ती है। ऐसे ही कई टेस्ट्स के बारे में हम आपको बता रहे हैं –

1. Blood Sugar Test ब्लड शुगर की जाँच

किसी व्यक्ति को डायबिटीज है या नहीं, इसकी जाँच करने के लिये शरीर में रक्त शर्करा यानि ब्लड शुगर का स्तर जाँचा जाता है। इसके लिये खाने से पहले और खाने के बाद, शरीर में ग्लूकोज के स्तर की जाँच करने के लिये ब्लड टेस्ट कराना पड़ता है। अगर ब्लड शुगर का स्तर निर्धारित सीमा के अन्दर रहता है, तो फिर डायबिटीज का खतरा टल जाता है।

2. Cholestrol Test कोलेस्ट्रोल की जांच

डायबिटीज के रोगियों को, कोलेस्ट्रोल की जाँच भी अनिवार्य रूप से करानी चाहिये। क्योंकि मधुमेह के रोगियों में कोलेस्ट्रोल बढ़ने पर हृदय रोग का खतरा दोगुना हो जाता है। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने से खराब कोलेस्ट्रोल यानि LDL की गति धीमी हो जाती है, जिसकी वजह से वह चिपचिपा हो जाता है और इससे कोलेस्ट्रोल ज्यादा तेजी से बढ़ने लगता है। बैड कोलेस्ट्रोल, रक्त धमनियों में जम जाता है और फिर हृदय से जुड़ी समस्याएँ पैदा करता है।

3. Blood Pressure Test ब्लड प्रेशर की जांच

डायबिटीज की तरह हाई ब्लड प्रेशर को भी, साइलेंट किलर के नाम से जाना जाता है। मधुमेह के रोगियों में हाई ब्लड प्रेशर काफी घातक सिद्ध हो सकता है, क्योंकि मधुमेह के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर होने से, हृदय रोग, हार्ट अटैक, किडनी व आंखों की समस्या पैदा हो सकती है। इन सभी समस्याओं से बचने के लिये, डायबिटीज के रोगियों को रक्तचाप की जाँच भी नियमित रूप से करानी चाहिये।

4. Kidney Function Test गुर्दों की जाँच

डायबिटीज शरीर के प्रत्येक अंग को नुकसान पहुँचाती है। जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है तो यह किडनी की मुख्य कार्यकारी यूनिट नेफ्रोंस को ख़त्म करती जाती है। इसीलिये मधुमेह के रोगियों को अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार, किडनी फंक्शन टेस्ट और कुछ अन्य टेस्ट भी समय-समय पर कराते रहने चाहिये, ताकि पता चल सके कि उनकी किडनी सही ढंग से काम कर रही हैं या नहीं। नियमित जांच से रोगी किडनी की समस्या से दूर रह सकता है।

5. Leg Test पैरों की जांच

मधुमेह के रोगियों को अपने पैरों का भी विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिये और अगर पैरों की कोई भी समस्या दिखे तो उसे, इसे गंभीरता से लेना चाहिए। क्योंकि डायबिटीज के रोग में पैरों की संवेदनशीलता, धीरे धीरे कम होने लगती है और पैरों में लगने वाली छोटी से छोटी चोट, खरोंच, बिवाई या घाव ठीक न होने पर भयंकर रूप धारण कर सकती है तथा खतरनाक संक्रमण फैला सकती है।

6. Eye Test आंखों की जांच

डायबिटीज के रोगियों को समय-समय पर अपनी आँखों की जाँच भी कराते रहनी चाहिये। क्योंकि जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर लंबे समय तक बढ़ा हुआ रहता है, तो इसका बुरा असर रेटिना की कोशिकाओं पर पड़ता है और वह नष्ट होने लगती हैं। इस समस्या को रेटिनोपेथी कहते हैं।

चूँकि आंखों को होने वाले नुकसान का पता आसानी से नहीं चलता है, इसलिये उनकी नियमित जांच करनी जरूरी है। अगर रेटिनोपेथी का इलाज जल्दी नहीं किया जाता, तो रोगी अंधा भी हो सकता है। कई बार मधुमेह के रोगी को धुंधला दिखाई देने लगता है, ऐसा होने पर तुरंत अपने चिकित्सक से संपंर्क करें।

Treatment of The Diabetes in Hindi

जानें कैसे होता है मधुमेह का उपचार

Diabetes Symptoms and Meaning in Hindi: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है, क्योंकि इसकी कोई कारगर दवाई नहीं है। चूँकि यह लाइफस्टाइल से जुडी बीमारी है, इसीलिये आप अपनी जीवनशैली को बदलकर ही, इस रोग से छुटकारा पा सकते हैं। जो लोग डायबिटीज जैसे खतरनाक रोग की चपेट में आने के बाद भी गंभीर नहीं होते हैं, उन लोगों की जिंदगी आगे चलकर बहुत मुश्किल हो जाती है।

मधुमेह के रोगियों के लिये परहेज से रहना बहुत जरुरी है। अर्थात उन्हें अपने खाने-पीने की आदतों पर लगाम लगानी ही होगी और अपनी दिनचर्या भी बदलनी पड़ेगी, तभी वे इस रोग के चंगुल में बुरी तरह फँसने से बच सकते हैं। उन्हें न सिर्फ मीठा खाना छोड़ना पड़ेगा, बल्कि फास्ट फूड और शराब से भी दूरी बनानी पड़ेगी।

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