Incredible Facts about Human DNA in Hindi

 

“डीएनए या डी-ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल एक तंतुनुमा आणविक संरचना है जो समस्त प्राणी जगत का आधार है। यह सभी सजीव प्राणियों की उत्पत्ति, वृद्धि और विकास से संबंधित विशाल जेनेटिक सूचनाओं को स्वयं में समाहित किये रहते हैं जो कभी नहीं खोती। जीन, गुणसूत्र आदि संरचनाएँ डीएनए से ही मिलकर बनी होती हैं।”

Incredible Facts about Human DNA in Hindi
जिंदगी का ब्लूप्रिंट है डीएनए

यूँ तो ईश्वर की हर कृति बेमिसाल है लेकिन इंसान उसकी अद्भुत कारीगरी का नायाब उदाहरण हैं। हर रोज आप खुद को शीशे में निहारते हैं, अपने सुंदर, स्वस्थ और बलिष्ठ शरीर को देखकर प्रसन्न होते हैं। यदि कभी कोई रोग आ घेरता है तो आप चिकित्सक के पास जाकर उसका उपचार कराते हैं और हमेशा इस बात का ध्यान रखने का प्रयास करते हैं कि किस तरह आपका शरीर एक लंबे वक्त तक आपकी हर इच्छा को पूरा करने में अंतिम समय तक साथ दे।

पर क्या कभी आपने सोचा है कि यह इतना बड़ा शरीर और इसके अद्भुत अंग किस प्रकार बने हैं माता-पिता संतान की उत्पत्ति में एक बहुत छोटी सी भूमिका निभाते हैं फिर किस प्रकार से एक नये जीव की सृष्टि उसी आकार में होती है जो समस्त मनुष्य जाति का है आखिर शरीर की वह सबसे आधारभूत संरचना क्या है जो शरीर का उसके पूर्वजों की देह के साद्रश्य ही पुनर्निर्माण करती है और वह भी बिना हमारे ज्ञान में आये, बिना किसी व्यवधान के।

जीव विज्ञान के विद्यार्थी जानते हैं कि कोशिका ही संपूर्ण मानव शरीर का मूल आधार है हमारे शरीर का प्रत्येक अंग, हर छोटा-बडा हिस्सा इसी कोशिका की वृहत इकाइयों से मिलकर बना है और सिर्फ इन्सान ही क्यों धरती पर जितने भी सजीव प्राणी हैं उनके अस्तित्व का बीज भी इसी कोशिका के अंदर ही छिपा है।

क्योंकि इसी कोशिका के केन्द्रक के भीतर उपस्थित है मानव जीवन का ब्लूप्रिंट जिसे दुनिया DNA के नाम से जानती है आज हम आपको बतायेंगे डीएनए से सम्बंधित कुछ ऐसे तथ्य जिन्हें आप पहले से नहीं जानते होंगे –

Top DNA Facts –

DNA की खोज प्रथम बार सन 1869 में फ्रेडरिक मिएस्चेर द्वारा की गयी थी लेकिन इसकी आणविक संरचना की पहचान और जेनेटिक्स में इसके महत्व को दुनिया के सामने लाने का श्रेय कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों सर जेम्स वॉटसन और फ्रान्सिस क्रिक को जाता है जिन्होंने सन 1953 में कैवेंडिश प्रयोगशाला में यह अभूतपूर्व कार्य संपन्न किया था। इस खोज के लिए उन्हें सन 1962 में नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

जीन DNA की बहुत लंबी Strands से बने होते हैं प्रत्येक कोशिका में डीएनए की कुल लम्बाई लगभग एक मीटर होती है लेकिन यह डीएनए जिन क्रोमोसोम/गुणसूत्र में अवस्थित होता है उनकी लम्बाई केवल एक माइक्रोमीटर ही होती है आप सोचेंगे कि आखिर यह उलटबाँसी कैसे संभव हो सकती है कि एक बड़ी चीज छोटी चीज के अंदर समा जाय हैरान मत होइये दरअसल DNA मजबूती से गूंथा रहता है जिससे कि यह इतने छोटे से स्थान में आसानी से आ जाय।

DNA का पूरा नाम (डी-ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) Deoxyribonucleic Acid है यह एक तंतुनुमा द्वि-विमीय अणु (Double Stranded Molecule) है जो न्यूक्लियोटाइड (Nucleotides) की दो श्रंखलाओं से बना होता है।

DNA को अविनाशी कहा जा सकता है क्योंकि यह कभी समाप्त नहीं होता करोड़ों वर्ष पूर्व पैदा हुए किसी व्यक्ति का डीएनए उसकी वंश-परंपरा (Bloodline) के अंतिम सदस्य तक।

DNA के अणु की संरचना किसी घुमावदार सीढ़ी की तरह होती है।

आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन यह सच है कि इंसान का डीएनए, केले के डीएनए से 50% तक मिलता है।

वनमानुष शारीरिक संरचना के आधार पर मनुष्य के सबसे निकटवर्ती जीव माने जाते हैं दरअसल इसके पीछे कारण छिपा है इनके जीन की संरचना में मानव का डीएनए चिम्पैंजी के डीएनए से 95% तक मेल खाता है।

शरीर में DNA का कार्य उस वृहत सूचना का संग्रह करना है जो किसी भी शरीरधारी प्राणी की जैविक क्रियाओं को निर्धारित करती है।

DNA के चार आधार होते हैं जिन्हें अडेनिन, ग्वानिन, थाइमिन और साइटोसिन कहा जाता है।

DNA एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होता जाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार जबसे इस धरती पर मानव की उत्पत्ति हुई है तबसे आज तक हम 510 डीएनए कोड खो चुके हैं।

DNA मानव शरीर की प्रत्येक कोशिका में उपस्थित होता है।

DNA प्रत्येक सजीव प्राणी, चाहे वह जीवाणु ही क्यों न हो, के भीतर पाया जाता है हालाँकि अधिकांश विषाणुओं के अंदर RNA ही होता है लेकिन कुछ ऐसे भी वायरस हैं जिनके भीतर DNA पाया जाता है।

आप यह जानकर आश्चर्यचकित रह जायेंगे कि इस धरती पर जितने भी इंसान हैं उन सभी के DNA का 99.9% भाग एक जैसा ही है बचा हुआ 0.1% डीएनए ही हमारी अपनी विशिष्ट पहचान को दर्शाता है।

घातक विकिरण जैसे सूर्य की तेज पराबैंगनी किरणे और आणविक विकिरण हमारे DNA की संरचना को बदल सकते हैं या स्थायी नुकसान पहुँचा सकते हैं।

कैंसर, मधुमेह, हीमोफीलिया और ऐसे ही कुछ दूसरे रोग DNA की खराबी के कारण आगे आने वाली पीढ़ियों में भी संक्रमित हो सकते हैं विशेषकर कैंसर के 70% से अधिक रोगों में जीन की खराबी ही सबसे बडा कारण होती है।

कई Research से पता लगा है कि डीएनए की औसत अर्ध-आयु 521 साल होती है और यह स्वयं के कई प्रतिरूप बनाने में समर्थ है।

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