Amazing Facts about Human Lungs in Hindi

 

“फेफड़ें श्वसन तंत्र का सबसे मुख्य अंग हैं जो रक्त को शुद्ध करने का काम करते हैं। जब हम साँस लेते हैं तो वायु Trachea और Bronchial Tubes से होते हुए दोनों फेफड़ों में प्रवेश करती है। यह नली फेफड़ों में जाकर बहुत छोटी-छोटी नलियों में विभक्त हो जाती है। सबसे छोटी नली को Bronchioles कहते हैं जिसके अंत में Alveoli होते हैं। इनकी दीवारों में कई Capillary Veins होती हैं जिनके अंदर से रक्त प्रवाहित होता है। ऑक्सीजन Alveoli से गुजरते हुए Capillary और फिर रक्त में प्रवेश करती है तथा रक्त में उपस्थित कार्बन डाई ऑक्साइड Alveoli से होते हुए शरीर से बाहर निकल जाती है।”

 

Amazing Facts about Human Lungs in Hindi
अद्भुत अंग हैं इंसानी फेफड़ें इनकी सुरक्षा कीजिये

दुनिया ऐसे अनेकों आश्चर्यों से भरी पड़ी है जिनके बारे में जानने, समझने को हम हमेशा बेताब रहते हैं, जिन्हें देखने की लालसा में लोग एक देश से दूसरे देश में दौड़े फिरते हैं। लेकिन जो हमेशा हमारे सबसे निकट मौजूद रहता है, उस अद्भुत आश्चर्य के बारे में जानने की जिज्ञासा शायद ही किसी को रहती है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक मानव शरीर की, जो अपनी विलक्षण संरचना और कार्यक्षमता के कारण आज भी जीव विज्ञानियों के लिये एक चुनौती के रूप खड़ा है।

जिसका प्रत्येक अंग दुनिया की सबसे बेशकीमती चीज़ से भी कहीं ज्यादा कीमती है और जो कर्मठता के सन्दर्भ में संसार की अव्वल से अव्वल मशीन से भी ज्यादा बढ़कर है। शरीर के चार Vital Organs (अत्यावश्यक अंग) Brain, Heart, Kidney और Liver की विलक्षण सामर्थ्य के बारे में हम आपको पहले ही बता चुके हैं। आज हम आपको बता रहे हैं – शरीर के पाँचवें सबसे महत्वपूर्ण अंग के बारे में जिन्हें हम फेफड़ें के नाम से जानते हैं।

हर इन्सान प्रत्येक मिनट लगभग 4 से 15 बार सांस लेता हैं, क्योंकि कोई भी जीवधारी प्राणवायु के बिना जीवित नहीं रह सकता है। पर हम शायद ही कभी अपनी श्वसन प्रक्रिया और अपने श्वसन अंगों के स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं। मानव शरीर बडा ही अनमोल है। इसी तथ्य की ओर दृष्टि रखते हुए आज हम शरीर के अनिवार्य अंग, फेफड़ों से जुडे 20 तथ्य दे रहे हैं, ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने इस अंग की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहे!

Facts about The Structure of Human Lungs : –

1. मानव शरीर में दो फुफ्फुस (फेफड़े) होते हैं जो छाती (थोरेसिक कैविटी) में मध्य रेखा के बायीं और दाई ओर स्थित होते हैं। यह शंक्वाकार आकृति (ऊपर से बहुत छोटे और नीचे से बहुत चौड़े) के होते हैं। बायाँ फुफ्फुस दायें फुफ्फुस से थोडा हल्का होता है, क्योंकि ह्रदय पसलियों के बीच काफी स्थान घेर लेता है।

2. प्रत्येक फेफड़ें का वजन लगभग 650 ग्राम होता है। चूँकि फेफड़ें बहुत ही कोमल अंग हैं, इसीलिये यह एक विशेष प्रकार के थैले में बंद होते हैं जो Serous Membrane से बना होता है। इस थैले में Serous Fluid भरा रहता है जो फेफड़ें की बाहरी आघात से सुरक्षा करता है।

3. फेफड़ें शरीर की अशुद्धि को दूर करने वाले प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं। अन्य अंग हैं – यकृत, गुर्दे और त्वचा, जिनके बारे में हम आपको Liver Facts in Hindi और Kidney Facts in Hindi में बता चुके हैं।

4. दायें फेफड़ें में तीन भाग (Superior, Middle, Inferior Lobes) होते हैं, जबकि बाये फेफड़ें में सिर्फ दो भाग (Superior, Inferior Lobes) होते हैं। लेकिन इसके बावजूद इसकी कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है।

5. वैज्ञानिकों के अनुसार यदि फेफड़ों की आंतरिक सतह को पूरी तरह से फैला दिया जाय, तो यह लगभग 40 से 100 वर्ग मी (व्यक्ति विशेष के फेफड़ें के अनुसार) का क्षेत्र घेर लेगी। जो लगभग इतना ही है जितना कि एक तरफ का टेनिस कोर्ट।

6. दायाँ फेफड़ा बायें फेफड़ें से अधिक चौड़ा होता है। लेकिन यह बायें फेफड़ें से कुछ छोटा भी होता है, क्योंकि इसे अपने नीचे स्थित यकृत के लिये भी स्थान देना होता है।

7. एक व्यस्क फेफड़ें में लगभग 15 से 20 करोड़ Alveoli होते हैं। इस तरह मनुष्य के दोनों फेफड़ों में लगभग 30 करोड़ से 40 करोड़ Alveoli होते हैं। गोट्टिंगेन विश्वविद्यालय (University of Göttingen) के Anatomy Department के अनुसार तो मनुष्य के फेफड़ों में 48 करोड़ Alveoli तक होते हैं।

8. Alveoli छोटे-छोटे स्पंजनुमा हवा के थैले होते हैं, जो लगभग मानव कोशिका जितने ही सूक्ष्म (10 µm) होते हैं और फेफड़ों की सबसे छोटी वायुनलिका के अंतिम सिरे पर होते हैं। इन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है। यहीं पर Gas Exchange के द्वारा रक्त को शुद्ध करने का कार्य होता है।

9. रक्त को शुद्ध करने का काम दोनों फेफड़ें मिलकर करते हैं, जो फुफ्फुस धमनी और फुफ्फुस शिरा के माध्यम से ह्रदय से जुडे रहते हैं। फुफ्फुस शिरा से अशुद्ध रक्त फेफड़ों में आता है और शुद्ध रक्त फुफ्फुस धमनी के जरिये वापस ह्रदय के निलय (Heart Ventricle) में चला जाता है।

10. दिल की ही तरह मनुष्य के फेफड़ें भी छाती की पसलियों के बीच सुरक्षित रहते हैं और मेरुदंड (Spine Cord) तथा सीने की हड्डी से जुड़े रहते हैं।

11. फेफडों में लगभग 3 मिलियन Capillaries होती हैं जिन्हें यदि पूरी तरह से फैला दिया जाय, तो इनकी कुल लम्बाई लगभग 1000 किमी हो जायेगी।

12. दोनों फेफड़ों में उपस्थित वायु नलिकाओं की कुल लम्बाई लगभग 2400 किमी होती है।

13. जब मनुष्य जन्म लेता है तो उसके फेफड़ें गुलाबी रंग के होते हैं, लेकिन बाद में प्रदूषित वायु के कारण यह गहरे रंग के हो जाते हैं।

Wonderful Functions of The Lungs : –

14. एक व्यस्क व्यक्ति हर रोज लगभग 17500 (12-13 साँस/मिनट की दर से) बार साँस लेता है। यदि वह 70 वर्ष की आयु तक जिये तो अपने पूरे जीवनकाल में वह लगभग 450,000,000 साँसे ले चुका होगा और इतनी ही बार उसका डायाफ्राम भी गतिशील हो चुका होगा।

15. स्त्रियों के फेफड़ों की वायु रोकने की क्षमता पुरुषों के फेफड़ों की तुलना में काफी कम होती है। York University के अनुसार शांत अवस्था में एक पुरुष के फेफड़ों में लगभग 750 सेमी3 वायु होती है, जबकि स्त्री के फेफड़ों में केवल 285 से 393 घन सेमी वायु रोकने की ही क्षमता होती है।

16. फेफड़ें रक्त को शुद्ध करने का काम अवश्य करते हैं, लेकिन साँसों की तेज या धीमी गति का निश्चय मस्तिष्क करता है। जो रक्त में उपस्थित कार्बन डाई ऑक्साइड और ऑक्सीजन गैस के स्तर पर नियमित दृष्टि रखता है। मस्तिष्क के बारे में और अधिक जानें – Incredible Human Brain in Hindi

17. जब हम साँस लेते हैं तो फेफड़ें खींची गयी हवा के स्थान लेने के कारण फ़ैल जाते हैं और जब हम साँस छोड़ते हैं तो अशुद्ध वायु बाहर निकल जाने के कारण यह सिकुड़कर पिचक जाते हैं। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।

18. लेकिन फेफड़ें स्वयं ही इस श्वास की आकुंचन-प्रकुंचन प्रक्रिया को करने में समर्थ नहीं होते हैं। इसमें उनकी सहायता करता है Diaphragm, जो एक छोटी गुम्बदाकार मांसपेशीय संरचना है। यह फेफड़ों के ठीक नीचे अवस्थित होता है और Thoracic और Abdominal Cavity को अलग करता है।

19. श्वसन क्रिया में सहायता देने के लिये हमारे शरीर में Diaphragm के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त मांसपेशियाँ भी होती हैं, जो पसलियों से जुडी रहती हैं। यह तब कार्य करती हैं जब साँस लेने के लिये व्यक्ति को अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता पड़ती है।

20. एक बार साँस लिये जाने पर फेफडों में लगभग 6 लीटर वायु भीतर जाती है। इस तरह एक स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़ें हर दिन लगभग 2000 मी3 वायु खींचते हैं।

21. एक व्यस्क व्यक्ति यदि वह पूर्णतया स्वस्थ हो, तब भी फेफड़ों की कुल क्षमता का अधिकतम 70 प्रतिशत भाग ही इस्तेमाल कर सकता है।

22. एक ही समय में साँस भी लेना और कोई चीज निगलना असंभव है।

23. यह सुनने में आश्चर्यजनक है, लेकिन मनुष्य सिर्फ एक फेफड़ें की मदद से भी कई साल तक जिन्दा रह सकता है।

Facts about Health and Disease of The Lungs : –

24. फेफड़ों की सुरक्षा व्यवस्था भी अत्यंत विशिष्ट होती है। Bronchial Tubes की दीवारों पर बहुत छोटे-छोटे बालों की एक परत होती है जिसे Cilia कहते हैं। यह परत फेफड़ों द्वारा पैदा किये जाने वाले म्युकस के जरिये किसी प्रकार से बच निकले जीवाणुओं, और धूलि कणों को शरीर से बाहर निकाल देती है और फेफड़ों की सुरक्षा करती है।

25. Asthma (दमा) वैश्विक स्तर पर फेफड़ों से संबंधित सबसे बडा रोग है। WHO के अनुसार दुनिया भर में लगभग 25 करोड़ से भी अधिक लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, जिनमे से 2.5 करोड़ रोगी तो अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में ही हैं।

26. फेफड़ों से संबंधित जितने भी रोग हैं उनमे से 70 प्रतिशत के पीछे धूम्रपान (सिगरेट, बीडी, तम्बाकू) का योगदान रहता है। क्योंकि इसमें 7000 से भी अधिक रसायन पाये जाते हैं, जिनमे से 70 रसायन फेफड़ों के लिये बहुत खतरनाक हैं।

27. सिगरेट के धुएँ में उपस्थित निकोटीन एक तेज जहर है जो शरीर के हर अंग को बुरी तरह प्रभावित करता है। लेकिन इसका सबसे खतरनाक प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता है जो फुफ्फुस कोशों में जाकर टार के रूप में जमा हो जाता है और धीरे-धीरे उन्हें नष्ट करता रहता है।

28. दमा, फेफड़ों का कैंसर, COPD और न्यूमोनिया, यह चार रोग फेफड़ों के सबसे खतरनाक रोग हैं जो प्रतिवर्ष लाखों लोगों की मौत का कारण बनते हैं।

29. चिकित्सा विज्ञान के इतनी प्रगति कर लेने के पश्चात भी अभी तक न तो कृत्रिम फेफड़ें का निर्माण संभव हो पाया है और न ही इसका प्रत्यारोपण।

30. On Top

“कुछ भी सीखना इतना आसान नहीं है जितना कि अनुभव और किसी भी चीज़ को लागू करना इतना मुश्किल नहीं है जितना कि अनुभव।”
– जोश बिल्लिंग्स

 

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