Amazing Facts about Human Teeth in Hindi

 

“मनुष्य के पूरे जीवनकाल में दांत सिर्फ दो बार निकलते हैं – एक शैशव काल में और दूसरा 6 से 8 वर्ष की आयु में। यह दोनों ही दांत अलग-अलग प्रकार के होते हैं। शैशव काल के दांतों को अस्थायी दांत या दूध के दांतों के नाम से जाना जाता है जबकि बाद में निकलने वाले दांतों को स्थायी दाँत कहते हैं।”

Amazing Facts about Human Teeth in Hindi
मुख की शोभा में चार चाँद लगा देते हैं मोतियों से चमकते दांत

दांत मनुष्य के जीवित रहने के लिये अनिवार्य भले ही न हों लेकिन यह शरीर का एक महत्वपूर्ण अवयव अवश्य हैं इनके बिना जिंदगी कैसी हो जाती है यह जानना हो तो उन वृद्धजनों से पूछिये जिनके मुँह में अब दांत नहीं हैं स्वादिष्ट भोजन का सही प्रकार से स्वाद लेना चाहते हैं तो दांतों की मदद लेनी ही पड़ेगी दांत न केवल भोजन को काटने, कुतरने और चबाने के लिये आवश्यक हैं

बल्कि यह उसे निगलने और पचाने में भी बहुत सहायता करते हैं मनुष्य के सुंदर चेहरे की सुन्दरता बहुत हद तक दाँतों पर भी निर्भर करती है जरा उन वृद्ध लोगों के पिचके हुए मुख को देखिये जिनके सभी दांत निकल गये हैं क्योंकि यदि दांत निकल जाँय तो जबड़े का बहुत हिस्सा खाली हो जाता है और गाल अन्दर की ओर धँस जाते हैं

हँसते समय मोती की तरह सफेद दाँतों के झिलमिलाते सौंदर्य को देखना वाकई बहुत अच्छा लगता है

दाँतों की सुरक्षा और मजबूती के लिये उनकी जड़ें मजबूती से ढकी होती हैं

हमारे मुख में चार प्रकार के दाँत होते हैं छेदक या कृंतक दांत (Incisor Teeth) भेदक या रदनक दांत (Canine Teeth) अग्रचर्वणक दांत (Premolar Teeth) और चर्वणक दांत (Molar Teeth)

दाँतों को उनके कार्य के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है जैसे कृंतक दांत काटने का काम करते हैं रदनक दांत फाड़ने का तथा अग्रचर्वणक और चर्वणक दांत चबाने का काम करते हैं

दांतों की जड़ें उपरी और निचले जबड़े में स्थित रहती हैं और यह मसूड़ों से ढकी रहती हैं

यदि दाँतों के स्वास्थ्य पर समुचित ध्यान दिया जाय तो यह बहुत लम्बे समय तक टिके रहते हैं हमने देखा है कि कई लोगों के दांत 65 वर्ष की आयु में भी सही-सलामत थे

मनुष्य के पूरे जीवनकाल में दांत सिर्फ दो बार निकलते हैं एक शैशव काल में और दूसरा 6 से 7 वर्ष की आयु में यह दोनों ही दांत अलग प्रकार के होते हैं शैशव काल के दांतों को अस्थायी दांत या दूध के दांतों के नाम से जाना जाता है जबकि 7 वर्ष की आयु पर निकलने वाले दांतों को स्थायी दाँत कहते हैं

दांत अलग-अलग घनत्व और कठोरता वाले उतकों से बने होते हैं

जब मनुष्य पैदा होता है तब उसके मुख में दांत नहीं होते हैं हालाँकि कुछ शिशुओं में जन्म के समय एक या दो दांत उपस्थित होते हैं पर ऐसा अक्सर बहुत कम ही होता है

शिशुओं के दांत 6 मास की आयु से निकलना आरंभ होते हैं और सबसे पहले नीचे के दो दांत निकलते हैं दांत निकलना बच्चों के लिये एक कष्टदायक अनुभव होता है और इस समय बच्चा चिडचिडा हो जाता है कुछ मामलों में शिशुओं को दस्त आदि की समस्या भी हो सकती है

छोटे बच्चों के मुँह में लगभग 20 दांत होते हैं जो कि अस्थायी दांत होते हैं जबकि एक व्यस्क व्यक्ति के मुख में 32 दांत होते हैं

स्थायी और अस्थायी दाँतों में संरचना की दृष्टि से कोई अंतर नहीं होता है सिवाय इसके कि अस्थायी दाँत, स्थायी दाँतों की तुलना में छोटे होते हैं

स्थायी दांत 6 से 8 वर्ष की आयु में निकलना आरंभ होते हैं और यह अक्सर वृद्धावस्था में जाकर ही टूटते हैं

मुख खोलते ही जबड़े के मध्य में जो चार दांत होते हैं इन्हें कृंतक दांत कहते हैं उपरी और निचले दोनों जबड़ों को मिलाकर कुल आठ Incisor Teeth होते हैं इन दाँतों का शिखर या उपरी सिरा चौड़ा और निचला सिरा संकरा होता है इनका किनारा समतल तथा धारदार किनारा काटने ले लिये बिल्कुल उपयुक्त होता है

अंतिम कृंतक दांत के ठीक पीछे रदनक दांत होता है इस प्रकार हमारे मुख में कुल चार Canine Teeth होते हैं यह छेदक दांत की तुलना में बड़े और शक्तिशाली होते हैं चीज़ों को चीरने-फाड़ने के लिये इनकी आकृति आदर्श है क्योंकि यह ऊपर से नुकीले और खांचेदार होते हैं

Canine Teeth के ठीक पीछे अग्रचर्वणक

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