What is The Meaning of Immunity in Hindi

 

“रोगों का निवारण करने की शरीर की कुदरती शक्ति को Immunity यानि प्रतिरक्षा कहते हैं, जिसके बल पर ही न सिर्फ इन्सान, बल्कि प्रत्येक प्राणी जिन्दा रह पाता है। अगर जीवों के शरीर में इम्युनिटी पॉवर का अभाव हो जाय, तो एक छोटा सा संक्रमण भी आसानी से उनकी जान ले सकता है।”

What is The Meaning of Immunity in Hindi
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आहार आपको हमेशा तंदुरुस्त रखेंगे

Immunity Meaning in Hindi: क्या है इम्युनिटी का अर्थ

Immunity का अर्थ है – प्रतिरक्षा, प्रतिरोधकता, आक्रमण से छुटकारा या मुक्ति। यह शब्द किसी व्यक्ति या वस्तु की, किसी अन्य वस्तु के आक्रमण से बचाव करने की क्षमता के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है। इम्युनिटी का मुख्य रूप से प्रयोग मानव शरीर रचना शास्त्र (Human Anatomy) में किया जाता है। जब Immunity का प्रयोग शरीर के सन्दर्भ में किया जाता है, तब उसका तात्पर्य शरीर की रोगों से बचने की क्षमता से होता है।

संक्रामक रोगों का निवारण करने की शरीर की शक्ति को प्रतिरक्षा (Immunity) कहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि Immunity के कितने प्रकार हैं, इसका क्या महत्व है और कैसे हमारी Immunity बनती-बिगड़ती है? Immunity Meaning in Hindi में, आज हम आपको इन सबके बारे में विस्तार से बतायेंगे।

इंसानों के शरीर में तीन प्रकार की Immunity होती है, जिन्हें सहज प्रतिरक्षा (Innate Immunity), विशिष्ट या अनुकूल प्रतिरक्षा (Adaptive Immunity) और अप्रतिरोधी प्रतिरक्षा (Passive Immunity) कहते हैं। इन तीनों प्रकार की प्रतिरक्षा के आधार पर ही, हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) निश्चित होती है।

चूँकि Passive Immunity जीवन में बहुत थोड़े समय के लिये ही क्रियाशील होती है और व्यक्ति की अपनी खुद की न होकर, बाहर से अर्जित की हुई होती है, इसीलिये आम तौर पर प्रतिरक्षा को दो ही भागों, विशिष्ट प्रतिरक्षा और सहज प्रतिरक्षा में वर्गीकृत किया जाता है। इनका विस्तार से वर्णन, हमने इम्यून सिस्टम से सम्बन्धित लेखों में किया है, जिनके लिंक नीचे दिये जा रहे हैं।

Importance of Immunity in Hindi प्रतिरक्षा का महत्व

इन्सान के जिन्दा रहने के लिये उसके शरीर की Immunity का सशक्त होना अनिवार्य है। अगर इन्सान की प्रतिरक्षा प्रणाली कुछ ज्यादा ही कमजोर हो जाती है, तो आये दिन उसे तरह-तरह के रोग घेरे ही रहते हैं और उसकी जान सांसत में पड़ी रहती है। कमजोर इम्युनिटी वाला इन्सान, न तो स्वस्थ शरीर का लाभ ले सकता है और न ही जिंदगी का सही तरह से लुत्फ़ उठा सकता है।

अगर व्यक्ति की Immunity लम्बे समय तक अच्छी बनी रहे, तो वह घातक से घातक रोगजनक पैथोजेन, जिनमे वायरस, बैक्टीरिया, कई प्रकार के जहर और बाहरी तत्व भी शामिल हैं, से अपने शरीर को बचाये रख पाता है। एड्स एक खतरनाक और लाइलाज रोग समझा जाता है, लेकिन यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, क्योंकि यह शरीर के किसी अंग विशेष को प्रभावित नहीं करती।

बल्कि यह तो शरीर की उस नैसर्गिक प्रतिरक्षा क्षमता की कमजोरी या अभाव है जो इसे रोगों के आक्रमण से बचाकर रखती है। एड्स जिस HIV वायरस के कारण होता है, वह शरीर की Immunity को ही धीरे-धीरे ख़त्म करता चला जाता है और एक दिन शरीर कमजोर होकर सैकड़ों तरह की दूसरी बीमारियों की चपेट में आ जाता है। इसीलिये Immunity शरीर को, रोग पैदा करने वाले कीटों से बचाने के लिये अनिवार्य है।

How We Achieve Immunity in Hindi

हम प्रतिरक्षा कैसे हासिल करते हैं

Immunity प्राकृतिक या कृत्रिम दोनों ही तरीके से अर्जित की जा सकती है और यह दोनों स्वरुप एक्टिव और पैसिव हो सकते हैं। Active Immunity का अर्थ है कि किसी व्यक्ति के Immune System ने एंटीजन का प्रतिवाद करते हुए अपनी खुद की एंटीबाडी का निर्माण किया तथा उसके लिम्फोसाईटस भी सक्रिय हुए। इसके पश्चात बने मेमोरी सेल्स ने, लम्बे समय तक बनी रहने वाली प्रतिरोधकता भी उपलब्ध करायी।

जबकि Passive Immunity में व्यक्ति को किसी दूसरे द्वारा उत्पन्न होने वाली एंटीबाडी चढ़ाई जाती हैं। एक्टिव इम्युनिटी की तुलना में पैसिव इम्युनिटी थोड़े ही समय तक रहती है, क्योंकि एंटीबाडी, संक्रमण समाप्त होने के पश्चात टूटने लगते हैं।

Active Immunity in Hindi सक्रिय प्रतिरक्षा

Active Immunity भी दो प्रकार की होती है – प्राकृतिक सक्रिय प्रतिरक्षा (Natural Active Immunity) और कृत्रिम सक्रिय प्रतिरक्षा (Artificial Active Immunity)। सक्रिय प्रतिरक्षा, कुदरतन रूप से तभी पैदा होती है, जब व्यक्ति का शरीर बीमार होकर अपनी खुद की एंटीबाडी पैदा करने लगता है।

जबकि कृत्रिम सक्रिय प्रतिरक्षा वैक्सीन द्वारा पैदा की जाती है, जिसमें व्यक्ति के शरीर में मृत या जिन्दा (मगर कमजोर) पैथोजेन या फिर निष्क्रिय विष इंजेक्शन द्वारा डाले जाते हैं। इस प्रकार की वैक्सीन या विषों में एंटीजनयुक्त गुण तो होते हैं जो Immunity के विकास को प्रोत्साहित करते हैं, लेकिन वह बीमारी पैदा नहीं कर सकते हैं।

कई प्रकार की संक्रामक बीमारियाँ इस कृत्रिम प्रतिरक्षण (Artificial Immunisation) से रोकी जा सकती हैं। इन बीमारियों में मुख्य हैं – एंथ्रेक्स, हैजा, डिप्थीरिया, चेचक, खसरा, हेपेटाइटिस B, रूबेला, टिटनस, टाइफाइड, कुक्कुर खाँसी, टीबी और मम्प्स। कुछ संक्रामक रोगों जैसे कि डिप्थीरिया, कुक्कुर खाँसी, कंठमाला रोग आदि के विरुद्ध सक्रिय प्रतिरक्षण (Active Immunisation) जीवनभर बनी रहने वाली Immunity देता है।

जबकि कुछ संक्रमणों में Immunity कुछ सालों तक या फिर सिर्फ कुछ एक सप्ताह तक ही बरकरार रह सकती हैं। इसके बाद दोबारा से वैक्सीन लगवानी पड़ती है। Immunity में दिखायी देने वाली कुछ कमी उस संक्रमण से भी हो सकती है जो उसी पैथोजेन के अलग स्ट्रेन से फैलता है, जिसमे अलग-अलग एंटीजनयुक्त गुण होते हैं, पर जो एक ही बीमारी का कारण बनता है, जैसे कि वायरस से फैलने वाली कुछ बीमारियाँ।

Passive Immunity in Hindi अप्रतिरोधी प्रतिरक्षा

Active Immunity की तरह Passive Immunity भी दो प्रकार की होती है – कुदरती और कृत्रिम। इस प्रकार की कुदरती प्रतिरक्षा गर्भ में पल रहे भ्रूण के अन्दर विकसित होती है, जिसे वह अपनी माँ से ग्रहण करता है। कृत्रिम पैसिव इम्युनिटी रेडीमेड एंटीबाडीज के जरिये हासिल की जाती है।

जिन्हें प्राप्तकर्ता के शरीर में लगाया जाता है। इसमें दिये जाने वाले एंटीबाडीज का स्रोत या तो संक्रमण से ठीक होने वाले व्यक्ति होते हैं या फिर वह जानवर होते हैं, जिनमें कृत्रिम तरीके से सक्रिय प्रतिरक्षा पैदा की जाती है, जैसे कि घोड़े आदि।

पैसिव इम्युनिटी करती है गर्भ में बच्चे की सुरक्षा

इन्सान के शरीर का सुरक्षा कवच बना यह इम्यून सिस्टम, बच्चे के जन्म लेने के 1 वर्ष बाद से अपना काम शुरू कर देता है, पर माँ के पेट में भ्रूण के रूप से लेकर तब तक उसकी सुरक्षा कैसे होती है? चलिये हम बताते हैं। चूँकि नवजात शिशुओं (Newborn Infants) का परजीवियों से पहले का कोई परिचय नहीं रहता, इसीलिये वह संक्रमण का आसानी से शिकार बन सकते हैं।

माँ ही इन शिशुओं को कई स्तर की अप्रतिरोधी सुरक्षा (Passive Protection) प्रदान करती है। गर्भावस्था के दौरान एक विशेष प्रकार का एंटीबाडी जिसे IgG कहते हैं, सीधे गर्भनाल के माध्यम से, माँ से बच्चे के शरीर में चला जाता है। इसीलिये इन्सान के बच्चों में, जन्म के समय भी एंटीबाडी का उच्च स्तर विद्यमान रहता है।

इसके अलावा एंटीजन की विशिष्टता की रेंज भी वही रहती है, जैसी कि उनकी माँ की। ब्रैस्ट मिल्क या कोलोस्ट्रम में भी एंटीबाडीज रहती हैं जो कि नवजात के पेट में जाकर, उसकी कई बैक्टीरियल इन्फेक्शन से तब तक सुरक्षा करती हैं, जब तक कि नवजात शिशु अपनी खुद की एंटीबाडीज का संश्लेषण न शुरू कर सके।

इसे ही Natural Passive Immunity कहते हैं, क्योंकि भ्रूण वास्तव मे कोई मेमोरी सेल या एंटीबाडी नहीं बनाता, बल्कि यह सिर्फ इन्हें उधार लेता है। हालाँकि इस प्रकार की प्रतिरक्षा बहुत कम समय के लिये ही होती है, जो कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक बरकरार रह सकती है। Passive Immunity प्रचुर एंटीबाडी युक्त सीरम के माध्यम से वयस्कों में भी पैदा की जा सकती है।

क्या जानते हैं आप Immune Response के बारे में

पहली बार किसी एंटीजन का सामना होने पर प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) जो इम्यून रेस्पोंस देती हैं, उसे प्राथमिक अनुक्रिया (प्राइमरी रेस्पोंस) कहते हैं। इसके बाद दूसरी या ज्यादा बार सामना होने पर एंटीजन को सेकेंडरी रेस्पोंस का सामना करना पड़ता है। इन दोनों रेस्पोंस के बीच निम्न अंतर है –

Primary Response प्राथमिक उत्तर

जब पहली बार Immune System का सामना किसी एंटीजन से होता है, तो एंटीबाडी के स्तर में धीमे-धीमे और देरी से बढ़ोत्तरी होती है। जो संक्रमण होने के लगभग 1 से 2 सप्ताह बाद अपने चरम स्तर पर पहुँचती है। प्रतिरक्षा प्रणाली की यह देर से होने वाली प्रतिक्रिया, उस वक्त को प्रदर्शित करती है जो T-लिम्फोसाईट सिस्टम को एक्टिवेट होने में लगता है और जो बाद में B-लिम्फोसाईट विभाग को उत्तेजित करता है।

एक बार जब संक्रमण ख़त्म हो जाता है, तब शरीर में फिर से एंटीबाडी का स्तर कम होने लगता है। लेकिन अगर Immune System बेहतर ढंग से कार्य करता है, तो यह दीर्घजीवी मेमोरी T-सेल्स और मेमोरी B-सेल्स की अच्छी संख्या उत्पन्न करता है। जो इन्सान को भविष्य में होने वाले संक्रमण के प्रति, अभेद्य सुरक्षा प्रदान करती हैं।

Secondary Response द्वितीयक उत्तर

जब एक ही एंटीजन से कई बार सामना होता है, तो इम्यून रेस्पोंस बहुत तेज होता है और साथ ही बहुत शक्तिशाली भी। क्योंकि पहले संक्रमण के बाद पैदा होने वाली मेमोरी B-लिम्फोसाईटस, बहुत तेजी से विभक्त होती हैं और एंटीबाडी का उत्पादन लगभग तुरंत ही होने लगता है। प्राइमरी रेस्पोंस की तुलना में, सेकेंडरी रेस्पोंस 10 से 50 गुणा तक ज्यादा शक्तिशाली होता है।

और यह पैथोजेन के शरीर में प्रवेश करने के थोड़ी देर बाद (2 या 3 घंटे के अन्दर-अन्दर) ही बड़ी तेज गति से सक्रिय हो जाता है, जिससे पैथोजेन को सँभलने का ज्यादा वक्त नहीं मिलता। इसीलिये सेकेंडरी रेस्पोंस में संक्रमण भी बहुत कम समय में ही समाप्त हो जाता है। आगे पढिये वह लेख, जिन्हें पढने के पश्चात आपको Immunity से संबंधित किसी अन्य लेख को पढने की आवश्यकता नहीं होगी।

क्या जानते हैं आप अपने इम्यून सिस्टम के बारे में

जानिये कैसे करता है शरीर खतरनाक दुश्मनों से अपनी सुरक्षा

“मानव शरीर, सिर्फ तभी तक स्वस्थ और शक्तिशाली बना रह सकता है, जब तक कि उसकी Immunity Power बची हुई है।”

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