Causes, Symptoms of Sexually Transmitted Diseases in Hindi

 

Sexually Transmitted Diseases (STD) या यौन संचारित रोग (गुप्त रोग) वह रोग हैं जो स्त्री-पुरुष के यौन अंगों के संपर्क से फैलते हैं चूँकि यह रति या मैथुन के द्वारा फैलते हैं इसीलिये इन्हें रति रोग या Venereal Diseases के नाम से भी जाना जाता है यह कोई एक रोग नहीं है, बल्कि कई बीमारियों का समूह हैं, इनमे सुजाक, उपदंश, एड्स और रतिज व्राणाभ मुख्य हैं गुप्त रोग सिर्फ मनुष्यों से मनुष्यों में नहीं फैलता है, बल्कि यह मनुष्य और जानवरों के आपसी यौन संपर्क से भी आसानी से फैल सकता है, ऐसा मन जाता है कि एडस का लाइलाज रोग इंसानों में पशुओं के द्वारा ही संचरित हुआ था

Sexually Transmitted Diseases in Hindi
गुप्त रोगों को छिपाकर उन्हें असाध्य मत बनाइये, त्वरित उपचार करिये

यौन संपर्क में केवल योनि सम्भोग ही नहीं, बल्कि मुख मैथुन और गुदा-मैथुन भी शामिल हैं जब कोई गुप्त रोग से ग्रस्त व्यक्ति किसी स्वस्थ व्यक्ति से इनमें से किसी भी प्रकार से मैथुन करता है तो रोग के जीवाणु स्वस्थ व्यक्ति में प्रवेश करके उसे भी यौन रोगी बना देते हैं यदि समय पर उचित इलाज कराया जाय तो गुप्त रोगी शीघ्र स्वस्थ हो सकता है

गुप्त रोगों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनका पता आरंभिक अवस्था में नहीं चलता है पुरुषों में तो यौन रोगों के लक्षण संक्रमण होने के कुछ समय पश्चात दिखना आरम्भ हो जाते हैं (यदि वह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें तो) लेकिन स्त्रियों में गुप्त रोगों का पता तभी चलता है जब संक्रमण अधिक बढ़ जाता है लेकिन गुप्त रोगों के साथ सबसे बड़ी समस्या है “यौन अंगों का विवादस्पद विषय होना”

ज्यादातर लोग यौन अंगों से सम्बंधित कोई भी बात कहने से डरते हैं और भारतीय समाज में तो यह बहुत ही अधिक गुप्त विषय माना जाता है जब पुरुष ही इस विषय में कुछ कहने से इतना कतराते हैं तो आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि स्त्रियों को इस रोग को बताने में कितनी परेशानी होती होगी यही कारण है कि भारत गुप्त रोगियों की संख्या के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हैं

Symptoms of Sexually Transmitted Diseases गुप्त रोगों के लक्षण : –

अधिकांश गुप्त रोगों के लक्षण एक जैसे ही होते हैं इसीलिये उनकी पहचान और उचित चिकित्सा के लिये विशेषज्ञ चिकित्सक की आवश्यकता पड़ती है गुप्त रोग होने पर कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं जिनमे सामान्य घाव से लेकर कैंसर तक शामिल हैं STD के निम्नलिखित लक्षण हैं, लेकिन यह इससे भी अधिक हो सकते हैं –

(1) शरीर के कई हिस्सों पर लाल-लाल चकत्ते पड़ जाते हैं – विशेषकर कमर, गर्दन और हाथों पर, ऐसा

(2) जननेन्द्रिय के आसपास पीड़ाविहीन लाल घाव हो जाते हैं, जिनमे कभी-कभी खुजली भी हो सकती है या

(3) सम्भोग करते समय अथवा मूत्र त्याग के समय पीड़ा होना (संक्रमण के अनुसार तेज या धीमा दर्द हो सकता है)

(4) औरतों में योनिक्षेत्र के आसपास खुजली होती है और योनि से सफेद-पीले रंग के बदबूदार द्रव्य का स्राव भी संभावित होता है

(5) पुरूषों के गुप्त रोगों मे लिंग से बदबूदार द्रव्य का स्राव हो सकता है

(6) जो लोग गुदा मैथुन के अभ्यस्त होते हैं उनकी गुदा के अन्दर और आसपास के क्षेत्र में पीड़ा होती है

(7) स्त्री-पुरुष की जननेन्द्रिय के आसपास त्वचा के रंग वाले मस्से हो जाते हैं, जो छूने में मुलायम प्रतीत होते हैं।

(8) रोगी का वजन कम होने लगता है और रात्रि के समय पसीना अधिक आता है

(9) एक अज्ञात थकान से रोगी का शरीर टूटा रहता है और स्वभाव में चिडचिडापन आने लगता है

(10) छूत के अन्य रोगों का फैलना

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