What is The Meaning of Parents in Hindi

 

“ऐसे किसी भी इन्सान को बच्चों को दुनिया में नहीं लाना चाहिये जो उनकी प्रकृति और शिक्षा में अंत तक अडिग रहने को तैयार नहीं है।”
– प्लेटो

 

Parent Meaning in Hindi क्या है माता पिता होने का अर्थ

माता-पिता (Parents) होने का वास्तविक अर्थ क्या है, यह आज हम आपको Parents Meaning in Hindi पेरेंट होने का अर्थ में विस्तार से बतायेंगे। इस लेख को अच्छी तरह अपने मन में बिठाने पर आप यह अच्छी तरह से जान जायेंगे कि एक अच्छे माता-पिता कैसे बने। Parent अंग्रेजी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है माता-पिता या जन्म देने वाला या जन्म का कारण।

लेकिन केवल जन्म देने भर से ही कोई स्त्री या पुरुष माता-पिता (Parents) का गौरवशाली दर्जा हासिल नहीं कर लेता। बल्कि संतान को अच्छे संस्कार, उचित शिक्षा-दीक्षा और उच्चतम जीवन मूल्यों की विरासत प्रदान करके ही कोई इन्सान श्रेष्ठ माता-पिता (Parents) का दायित्व सँभालने के लायक बनता है। इसीलिये बिली ग्रैहम कहते हैं –

“एक इन्सान अपने बच्चों और पोते-पोतियों के लिये जो सबसे महान विरासत छोड़ सकता है, वह अपने जीवन में कमाया गया धन या कोई दूसरी भौतिक वस्तु नहीं है, बल्कि चरित्र और विश्वास की एक विरासत है।”

पत्नी और संतान परिवार की धुरी हैं। हर Parents की यह चाहत होती है कि उनकी संतान सुसंस्कारी, आज्ञाकारी हो, वह परिश्रमी, आत्मनिर्भर और बुद्धिमान बने, माता-पिता की हर आज्ञा का पालन करे। उसके श्रेष्ठ कार्यों से उनका मस्तक गौरव से ऊँचा हो जाय और वे सभी गुण हों जो वे उसमे देखना चाहते हैं। दूसरे अर्थों में कहा जाय तो प्रत्येक माता-पिता (Parents) को एक आदर्श संतान की चाहत होती है।

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How to Be A Good Parent खुद को एक अच्छा पैरेंट बनाइये

विवाह करने के पीछे एक उद्देश्य एक श्रेष्ठ संतान पाना भी होता है। प्रायः यह हर व्यक्ति की नैसर्गिक इच्छा होती है कि उसे एक अच्छा जीवनसाथी और अच्छी संतान मिले। लगभग सभी व्यक्ति एक आदर्श संतान के रूप में श्रीराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध, विवेकानंद, गाँधी और दूसरे महान व्यक्तियों की कामना करते हैं।

एक माता-पिता (Parents) के रूप में ऐसी कामना करना गलत भी नहीं है। लेकिन यह कामना तभी मूर्त रूप ले सकती है जब कि माता-पिता (Parents) संतान के रूप में स्वयं भी वैसे ही बुद्धिमान, शीलवान और परिश्रमी रहे हों। वे उन अच्छाइयों, उन सद्गुणों से युक्त हों जो वे अपनी संतान में देखना चाहते हैं। केवल तभी उनकी कामना यथार्थ में फलित हो सकती है।

अगर Parents (माँ-बाप) की अपनी ही पर्सनालिटी बुराइयों का घर है, अगर उनका अपना ही चरित्र अच्छा नहीं है, तो वह अपनी संतान में अच्छे गुणों के आने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? याद रखिये बबूल के बीज से काँटेदार बबूल का ही पेड़ निकलेगा, उससे मीठे आम का पेड़ कभी नहीं निकल सकता। नीचे दी जा रही जरुरी टिप्स से हमने यही बताने का प्रयास किया है कि संतान के प्रति Parents का व्यवहार कैसा होना चाहिये?

बच्चों की प्रकृति, उनके जीवन, अभिरुचियाँ और उनके सम्बन्ध में अन्य आवश्यक जानकारी पाने के लिये आपको महान व्यक्तियों की इन Famous Children Quotes in Hindi को भी अवश्य पढना चाहिये, ताकि आप उनके कोमल मन और स्वभाव को जानकर उनके प्रति वैसा ही आचरण करें, जैसा कि किया जाना चाहिये।

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Meaning of A True Parent in Hindi

1. Give Children True Love and Honor बच्चों को सच्चा स्नेह और सम्मान दीजिये

Hindi Parent Quality 1: इस दुनिया में हर प्राणी प्रेम और सम्मान का भूखा है। जब पशु-पक्षी तक प्रेम के प्यासे हैं, तो इंसान इसके बिना कैसे रह सकता है। यह बात बच्चे, बूढ़े और जवान सभी पर समान रूप से लागू होती है। जैसे आप प्रेम और सम्मान पाना चाहते हैं वैसे ही बच्चे भी सच्चे स्नेह और आदर की आकांक्षा रखते हैं। यह सोचना बिल्कुल गलत है कि Parents (माता-पिता) होकर हम बच्चों को आदर क्यों दें? हमेशा याद रखिये जो आप दूसरे को देते हैं, वही आपको कई गुणा होकर वापस मिलता है।

जो जैसा करता है वैसा ही भरता है। यदि आप अपनी संतान को हमेशा अपमानित, लांछित करते हैं, उसकी अनावश्यक आलोचना करते हैं, तो जान लीजिये उसकी नजरों में आपका जो भी सम्मान है, वह धीरे-धीरे समाप्त होता चला जायेगा और बड़े होने पर वह भी आपको ऐसे ही तिरस्कृत और अपमानित कर सकता है। इसीलिये हर Parents को इन दो बातों का बहुत ध्यान रखना चाहिये –

न तो उन्हें अकेले में और न ही सार्वजनिक रूप से अपमानित कीजिये और न ही कभी उनकी दूसरे बच्चों के साथ तुलना कीजिये। याद रखिये, हर इन्सान में अपनी-अपनी नैसर्गिक विशेषता है जो दूसरों में नहीं है। यदि आपके बच्चे में एक अच्छा कलाकार बनने की योग्यता है, और वह इसी दिशा में प्रयत्नशील है, तो उसकी तुलना उस बालक से करके उसे अपमानित मत करिये जो डॉक्टर या इंजिनियर बनना चाहता है।

जो योग्यता आपके बच्चे में है, वह दूसरे में नहीं हो सकती। अपनी संतान के Talent (हुनर) को उभारने हेतु उन्हें प्रोत्साहित कीजिये, उनके सहयोगी बनिये। ध्यान रखिये यदि आप बच्चों को प्यार और सम्मान देंगे, तो वे भी आपको उसी अनुपात में अपना स्नेह और आदर देंगे। एक-दूसरे के दोषों को देखकर आलोचना करना गलत बात है।

भूल करना मनुष्य का स्वभाव है। यदि बच्चों से कोई भूल हो जाय, तो उन्हें आवश्यकता से ज्यादा अपमानित करना Parents और बच्चों के संबंधों में कभी न भरने वाली दरार पैदा कर सकता है। कमजोरी हर मनुष्य में है। क्या आपमें कोई दोष नहीं है? कहावत है तलवार का जख्म तो भर जाता है, पर जुबान का जख्म कभी नहीं भरता।

वे रह-रहकर टीस पैदा करते हैं। यदि आपकी वाणी में मधुरता नहीं है, आप अपनी संतान से कर्कश स्वर में बात करते हैं, तो सचेत हो जाइये। अपनी संतान और अपने बीच कभी न पाटी जा सकने वाली खाई मत पैदा कीजिये।

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2. Do not Intervene in Internal Affairs आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप मत कीजिये

Hindi Parent Quality 2: जैसे हाथों की उंगलियाँ बराबर नहीं होती, वैसे ही दो व्यक्तियों के विचार भी समान नहीं हो सकते। यदि आपकी संतान के विचार आपसे नहीं मिलते हैं, यदि वे किसी कार्य को अपने ढंग से करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने अनुसार कार्य करने को बाध्य मत कीजिये। घरों में कलह का एक कारण यह भी होता है कि Parents उनके जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में टोका-टाकी करते हैं। बचपन या शैशवावस्था में यह हठ कुछ हद तक ठीक कहा जा सकता है।

लेकिन देखा जाता है कि माता-पिता (Parents) किशोर और युवावस्था के बालकों पर भी अपनी इच्छानुसार कार्य करने को अनावश्यक रूप से दबाव डालते हैं। ऐसा नहीं वैसा पहनो, यह मत खाओ वह मत खाओ, इधर-उधर ज्यादा मत घूमा-फिरा करो, यह काम अभी करो, जो हम कहते हैं वही करो, तुम्हे डॉक्टर नहीं इंजिनियर बनना है, आदि-आदि।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि Parents बच्चों के मित्र या मार्गदर्शक बनकर उनका प्रेम या सम्मान नहीं पाना चाहते, बल्कि तानाशाह के रूप में उन पर शासन करना चाहते हैं और यही विरोध को जन्म देता है। बच्चों का मार्गदर्शन करना अलग बात है, और अनुचित हठ पकडे रहना अलग। इस महीन रेखा का निर्धारण समझदारी से करना जरूरी है।

यदि आपकी संतान अमर्यादित और असभ्य होती जा रही है, तो प्रेमपूर्वक उसे समझायें। उन्हें उनके गलत कार्यों का दुष्परिणाम समझाइये। उन्हें सत्कर्म करने के लिये प्रोत्साहित कीजिये। उनके सामने उदाहरण प्रस्तुत कीजिये। उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिये यदि आपको कुछ कठोरता भी दिखानी पड़े तो कोई हर्ज नहीं। यदि आपकी संतान बहुत हठधर्मी नहीं है, तो वे अवश्य आपकी बात मान लेंगे।

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3. Be A Man of Character स्वयं को एक आदर्श व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत कीजिये

Hindi Parent Quality 3: अपने बच्चों के सामने एक आदर्श व्यक्ति के रूप में अपनी स्वयं की छवि को पेश कीजिये। कहते हैं वाणी या शब्दों का नहीं, बल्कि आचरण का प्रभाव ज्यादा पड़ता है। यदि किसी को गहराई से प्रभावित करना है तो आपकी वाणी को नहीं, बल्कि आपके चरित्र को बोलना चाहिये। Parents बच्चों से जो कुछ भी चाहते हैं, जो गुण वह अपनी संतान में देखना चाहते हैं, तो वह पहले उन्हें, अपने स्वयं के जीवन में उतारने चाहिये।

यदि आप चाहते हैं कि बच्चे अपनी गलतियाँ माने, तो पहले स्वयं में इतना साहस पैदा कीजिये कि आप अपनी ही गलतियाँ स्वीकार कर सकें। अपने द्वारा हुई भूल को तुरंत स्वीकार कर लीजिये। आपकी स्पष्टवादिता और आदर्श मनोवृत्ति का प्रभाव आपकी संतान पर अवश्य पड़ेगा। यदि आप भूल करके भी अपनी गलती नहीं मानते हैं, तो आपकी संतान पर इसका गलत प्रभाव पड़ेगा।

वे आपको अहंकारी और हठधर्मी समझने लगेंगे। स्वयं को उनके सामने एक विवेकशील, समर्पित, साहसी, उदार और शीलवान माता-पिता (Parents) के रूप में प्रस्तुत कीजिये। जब बच्चे आपके श्रेष्ठ आचरण को देखेंगे तो निःसंदेह वे खुद भी वैसा ही बनने का प्रयास करेंगे और तब उन्हें अच्छाई के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिये वाणी के किसी उपदेश की आवश्यकता न होगी।

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The Real Meaning of Parents in Hindi

4. Do not Show Too much Affection अनावश्यक मोह-ममता मत पालिये

Hindi Parent Quality 4: कुछ Parents जहाँ बच्चों की बिल्कुल नही सुनते, उन्हें अपने कठोर नियंत्रण में बांधकर रखना चाहते हैं, तो वहीँ दूसरी ओर कुछ Parents ऐसे भी होते हैं जो बच्चों की हर छोटी-बड़ी फरमाईश को पूरा करते हैं। यह जाने बिना ही कि क्या बच्चे को वास्तव में इसकी जरुरत है? यदि आप अपनी संतान की हर जायज-नाजायज मांग को पूरा करते हैं, तो जरा संभल जाइये। आप अपनी संतान के अन्दर एक ऐसे दुर्गुण का बीज डाल रहे हैं जो आगे चलकर उनके भविष्य को अंधकारमय बना सकता है।

बच्चे स्वभाव से ही चंचल, कौतुकी, और विवेकशक्ति से हीन होते हैं। कोई आकर्षक चीज़ दिखी नहीं कि उनका मन पहले ही उस पर लट्टू होने लगता है। चाहे वह उनके लिये जरा भी जरूरी न हो, वे फिर भी उसे लेने की जिद अवश्य करेंगे। यदि बचपन से ही माता-पिता (Parents) बच्चों की हर जिद को पूरी करते हैं, तो किशोरावस्था आने तक ये आदतें बहुत गहराई तक जड़ जमा लेती हैं।

रोज-रोज की फरमाईश से माँ-बाप (Parents) और बच्चों में झगडा होता है, तकरार बढती है और रिश्तों में ऐसा तनाव पैदा हो जाता है कि घर का वातावरण नारकीय बन जाता है। इसलिये हर समझदार माता-पिता (Parents) को चाहिये कि वे अपने बच्चों की परवरिश पर बहुत ध्यान दें। उन्हें ज्यादा और अनावश्यक लाड-प्यार देकर उनकी दुनिया मत उजाडिये।

एक शोध में यह निष्कर्ष सामने आया है कि जिन बच्चों को बचपन में ज्यादा लाड-प्यार मिला और जिनकी हर इच्छा को उनके Parents निरंतर पूरा करते रहे, वे बड़े होकर जिद्दी, गुस्सैल, गैरजिम्मेदार और निष्क्रिय ही बने रह गये। न तो वे समाज की उन्नति में कोई योगदान दे सके और न ही स्वयं के व्यक्तित्व का विकास कर सके।

यदि आप अपनी संतान को शिष्ट, सभ्य, सुसंस्कृत और शीलवान बनाना चाहते हैं, तो उन्हें संसाधनों का सदुपयोग करना सिखाइये, उन्हें हर चीज़ की महत्ता और मूल्य के बारे में समझाइये। उन्हें कभी यह आभास मत होने दीजिये कि आप उनकी हर फरमाईश पूरा कर सकते हैं, बल्कि उन्हें त्याग के मार्ग पर चलना सिखाइये। सिर्फ तभी जाकर आप एक अच्छे पैरेंट के रूप में उनके साथ न्याय कर पायेंगे।

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5. Change The Environment, Live Spritually घर का वातावरण बदलिए

Hindi Parent Quality 5: व्यक्तित्व निर्माण (Personality Development) की प्रक्रिया का मार्ग यही है कि प्रत्येक परिवार में श्रेष्ठ वातावरण के निर्माण का प्रयास किया जाय और यह कार्य स्वयं को ईश्वर की ओर चलाये किये बिना न हो सकेगा। केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि संसार की सुख-शांति और सुव्यवस्था भी इसी बात पर निर्भर है कि मनुष्य उच्चस्तरीय और दिव्य भावनाओं से ओत-प्रोत रहे। ये Emotions (भावनाएँ) केवल दिल से ही निकलती हैं और इन्हें बाहर से नहीं थोपा जा सकता।

अंतःकरण पर प्रभाव डालने की शक्ति, श्रद्धा और विश्वास में ही निहित होती है। इसलिये अपने परिवार में आस्तिकता का, धार्मिकता का वातावरण पैदा कीजिये, पर आस्तिकता केवल देवदर्शन और पूजा के छुट-पुट उपचारों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिये। एक सच्चा आस्तिक, धार्मिक व्यक्ति बनने का अर्थ है – “उच्चस्तरीय चरित्र का विकास करना और श्रेष्ठ मार्ग पर चलना।”

ईश्वर (God) समस्त दिव्य भावनाओं का, सभी सद्गुणों का स्रोत है और उसकी ओर निष्ठा से बढ़ने वाले व्यक्तियों में भी वैसे ही दिव्य गुण आने आरम्भ हो जाते हैं। मनुष्य को सच्चे अर्थों में मनुष्य बनाने की संभावना उच्च आदर्शवादिता पर आधारित है। उसे विकसित करने के लिये, हर घर में आस्तिकता का वातावरण बनना चाहिये।

इसके लिये आवश्यक है कि परिवार का हर सदस्य किसी न किसी रूप में ईश्वर से अपना संपर्क बनाये रखे। यदि आप अपने बच्चे में बचपन से ही श्रेष्ठ गुणों को पनपते देखना चाहते हैं, तो उन्हें हर प्रकार से ईश्वर की ओर अग्रसर करने का प्रयास कीजिये और ऐसा करने का सर्वश्रेष्ठ उपाय यही है कि माता-पिता (Parents) खुद आगे बढ़कर उनका नेतृत्व करें क्योंकि बच्चे बड़ों का अनुसरण करते हैं।

जब वे आपको आस्तिकता के मार्ग पर आगे बढ़ते देखेंगे तो निश्चय ही स्वयं भी वैसा ही करेंगे। सदा याद रखिये, ईश्वर की उपासना से लेकर समस्त स्वाध्याय, सत्संग, कथा-प्रवचन आदि धार्मिक क्रियाओं का एकमात्र उद्देश्य मनुष्य में चरित्रनिष्ठा और समाजनिष्ठा पैदा करना है। व्यक्ति के अन्दर सच्चरित्रता, उदारता, विनम्रता, सहस, कर्तव्यपरायणता, क्षमाशीलता जैसे सद्गुणों को पैदा करना है।

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“व्यक्तित्व निर्माण की शुरुआत घर से होती है और उसका आधार पेरेंट्स (माता-पिता) हैं। जो बच्चों को सिखाते हैं, उन पर यदि बड़ें स्वयं अमल करें तो यह संसार स्वर्ग बन जाय।”
– पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

 

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