Secrets of Sexual Relationship of Couples in Hindi

 

एक सफल और सुखकर विवाहित जीवन के लिए जिन मूलभूत बातों की आवश्यकता होती है उनमे बारे में हम Secret of Happy Marriage in Hindi इस लेख में पहले ही बता चुके हैं। निश्चित रूप से प्रेम और विश्वास ही एक सफल विवाह के सबसे सशक्त स्तंभ हैं, लेकिन पति-पत्नी के अंतरंग संबंधों को और अधिक द्रढ़ करने के लिये जिस पूर्ण समर्पण की आवश्यकता है उसमें कुछ योगदान रति का भी है।

Secret of Sexual Relationship of Couples in Hindi

सेक्स संबंध जीव की उत्पत्ति के लिये अनिवार्य है क्योंकि यह सृष्टि मैथुनी है। लेकिन पति-पत्नी के बीच स्थापित होने वाले शारीरिक संबंधों की महत्ता इससे इतर भी है कई लोगों का ऐसा मानना है कि सम्भोग एक समर्पित संबंध में कई कारणों से आवश्यक है यह न केवल आपको दैहिक संतुष्टि प्रदान करता है बल्कि आपको एक दूसरे के नजदीक जाने का, एक दूसरे को समझने का भी अवसर देता है बशर्ते मैथुन क्रिया केवल देह के स्तर पर ही संचालित न हुई हो।

यदि सम्भोग का उद्देश्य सिर्फ अपनी वासना की संतुष्टि तक ही सीमित रह जायेगा तो यह सिर्फ एक शारीरिक क्रिया बनकर रह जायेगी और भावनात्मक विकास, आत्मीयता का प्रसार और ऐसी ही न जाने कितनी महत्वपूर्ण चीज़ें जो आपके गृहस्थ जीवन में बहुत महत्व रखती हैं, आपसे दूर ही रहेंगी आज इस लेख में हम सिर्फ पति-पत्नी के अंतरंग संबंधों की महत्ता, उनकी सीमा और उन उपायों की चर्चा करेंगे जो उनके विवाहित जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर सकें –

सिर्फ संभोग क्रिया को ही सफल वैवाहिक संबंधों का सबसे सशक्त आधार मानने वाले पाश्चात्य विशेषज्ञ (मैरिज काउंसलर) अभी तक अपने इस मत की पुष्टि नहीं कर पाये हैं कि जब अमेरिकी और यूरोपीय देशों में उन्मुक्त और स्वच्छंद यौन संबंध बनाने का इतना प्रचलन है तब क्यों वहाँ वैवाहिक संबंध इतने अस्थिर और अल्प समय तक चलने वाले होते हैं

अनेकों रिपोर्टों से यह तथ्य सिद्ध हुआ है कि इन देशों के शादीशुदा जोड़े नियमित रूप से सप्ताह में कम से कम 2 से 3 बार यौन सम्बन्ध बनाते हैं, जबकि भारत और कुछ एशियाई देशों में सेक्स संबंध अनियमित और कम ही बनते हैं फिर भी विवाह की सफलता की दर इन देशों में बहुत अधिक है और अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे के जीवनकाल में कम ही अलग होते हैं इस तरह देखा जाय तो यौन सम्बन्ध सफल विवाह की अनिवार्य शर्त नहीं है जैसा कि कई तथाकथित विशेषज्ञ कहते हैं

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि पति-पत्नी के मध्य स्थापित होने वाले यौन संबंधों या संभोग का कोई महत्व ही नहीं है संतुष्टिदायक यौन संबंध आपके जीवन और व्यक्तित्व में कई सकारात्मक बदलाव ला सकते है अगर आप स्वयं को मानसिक रूप से उन लाभों के लिये तैयार कर सकें तो ऐसे ही कुछ लाभ हम नीचे दे रहे हैं –

1. जब आप प्रफुल्लित और शांत मन से अपने जीवनसाथी के साथ मैथुन की अंतरंग क्रिया में भाग लेते हैं तो न केवल अकथनीय शारीरिक संतुष्टि की प्राप्ति होती है बल्कि उन दमित वासनाओं की भी तृप्ति होती है जिनकी पूर्ति के लिये विवाहित जीवन से अधिक श्रेष्ठ साधन और कहीं पर भी उपलब्ध नहीं है

2. सफल और संतोषप्रद अन्तरंग सम्बन्ध पति-पत्नी को एक-दूसरे से अच्छी तरह परिचित होने का बहुमूल्य अवसर भी देते हैं क्योंकि इन कुछ पलों में उनका अस्तित्व एक-दूसरे से जुड़कर इतना घनीभूत हो जाता है कि उनकी प्रत्येक चेष्टा और आवेग इस समय प्रत्यक्ष रूप से प्रकट हो जाती है, बशर्ते यदि जीवनसाथी एक-दूसरे से संकोच न करें

3. बिस्तर पर जीवनसाथी के साथ बिताये गये अंतरंग पल आपके भीतर छुपे हुए उत्साह को जाग्रत कर देते हैं क्योंकि समस्त शक्तियाँ मन की अनुवर्तिनी हैं और यदि मन प्रसन्नता और तुष्टि का अनुभव करता है तो आपकी उर्जा का स्रोत कभी मंद नहीं पड़ेगा

4. सफल सेक्स संबंध आपके आत्मविश्वास को बेहतर बनाने में भी सहायता करते है इससे आपको अपने गृहस्थ जीवन के उत्तरदायित्वों को सुचारू रूप से निभाने में मदद मिलती है

5. वैज्ञानिकों के अनुसार एक बार की संभोग क्रिया को करने में व्यक्ति की लगभग 300 से 400 कैलोरी उर्जा समाप्त होती है यह न केवल शरीर की अतिरिक्त वसा को दूर करती है बल्कि शरीर से कई विषैले पदार्थों को भी बाहर निकालती है

6. कई विवाहित दम्पत्तियों के अनुसार अच्छी तरह संपन्न हुई सेक्स क्रिया पति-पत्नी के संबंध को और मजबूत करती हैं और अपनी भागदौड़ भरी जीवनशैली से जूझने के लिये उन्हें जिस चिंगारी की जरुरत होती है वह इससे उपलब्ध हो जाती है

7. कई मनोवैज्ञानिकों के अनुसार खुशनुमा माहौल में बनाये गये सेक्स संबंध न केवल तनाव, अनिद्रा जैसे मानसिक रोगों से छुटकारा दिलाने में प्रभावशाली हैं बल्कि यह शरीर में हल्केपन औरउल्लास का भाव भी जगाते हैं

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