The True Aim of Life in Hindi

 

समय और जीवन के संबंध में सर्वाधिक सुंदर सत्यों में से एक यह है कि हम नहीं जानते कि भविष्य में क्या होने जा रहा है, लेकिन एक बात अवश्य निश्चित है कि वह लोग जो इनका सर्वाधिक उपयोग करने हेतु संकल्पित हैं, सबसे ज्यादा पायेंगे और वही शाश्वत आनंद के राज्य में भी प्रवेश करेंगे।
– अरविन्द सिंह

 

The True Aim of Life in Hindi

जीवन का यथार्थ उद्देश्य क्या है इसकी मीमांसा करने में हमारे पूर्वजों और ऋषि-मुनियों ने अपना सम्पूर्ण जीवन लगा दिया था मानवीय सभ्यता के लाखों वर्षों के इतिहास में अन्य किसी प्रश्न ने मनुष्य को इतना अधिक नहीं उलझाया होगा जितना कि इस कारण की खोज ने कि मनुष्य आखिर धरती पर पैदा किसलिये हुआ है समय-समय पर अनेकों दार्शनिकों, मनोवैज्ञानिकों, लेखकों और महापुरुषों ने जीवन के स्वरुप और इसके उद्देश्य पर अपने विचार व्यक्त किये हैं

लेकिन इनमे से अधिकतर विचारकों के मत अलग-अलग थे और प्रायः दूसरों ने उनका खंडन करने का प्रयास ही अधिक किया था दरअसल इस प्रश्न का सबसे सारगर्भित और सुनिश्चित उत्तर केवल बुद्धि और अनुमान के आधार पर नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि अपना समस्त जीवन हम दूसरों के विचारों से प्रभावित होते हुए ही बिता देते हैं संसार की क्षुद्र मान्यताओं और पूर्वाग्रहों से हमारा अंतस इतना भ्रमित हुआ रहता है कि पूर्णतया मौलिक कहने लायक एक विचार भी हमारे पास नहीं रहता

जब हमारे जीवन की समस्त क्रियाएँ केवल दूसरों के कृत्य का अनुसरण मात्र बन जाँय तब मन को प्रशांत और एकाग्र रखकर उसे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और जटिल प्रश्न को खोजने की दिशा में अग्रसर होने के बारे में कौन सोचे जीवन का उद्देश्य स्पष्ट करने के लिये आवश्यकता है गहन अनुभव और बोध से परिष्कृत हुए विवेक की इसलिये नहीं कि सामान्य बुद्धि नहीं जानती कि जीवन की सर्वश्रेष्ठ वस्तु क्या है या फिर हम क्यों जी रहे हैं?

इस सवाल का जवाब तो सभी जानते हैं मूल समस्या बस उस बात को ह्रदय से, अपने अस्तित्व की सम्पूर्ण गहराइयों से स्वीकार करने की है जिसे हम अच्छी तरह से जानते हैं समस्या सिर्फ यह है कि हम उन कार्यों को करने से हमेशा बचने की चाह करते हैं, जिन्हें हमारी अपनी जानकारी के अनुसार अवश्य ही किया जाना चाहिये हम सभी अच्छी तरह जानते हैं कि सभी की जिंदगी के दिन मृत्यु द्वारा सीमित किये गये हैं, लेकिन बुद्धिमान मनुष्य जीवन भर स्वयं को धोखे में रखना चाहता है

यह सोचकर कि आगे फिर कभी ऐसा कर लूँगा, या यह समय उपयुक्त नहीं, या फिर उस अभिमान के बंधन में बंधा हुआ जिसने समस्त क्षितिज पहले ही सीमित कर दिये हैं अपने पूरे दिन के क्रियाकलापों पर जरा गौर कीजिये क्या समस्या कुछ इन रूपों में सामने नहीं आती –

कामकाजी स्त्री-पुरुष के लिये – आज तो काम करते-करते थक गये हैं थोड़ी देर चैन से बैठ जाँय/आराम कर लें
स्कूल/ कॉलेज जाने वाले बच्चों के लिये – आज तो पढ़ते-पढ़ते और काम करते-करते थक गये हैं जरा दम लें लें
भोजन करते समय – यदि भोजन अपनी रुचि का बना हो तो ठीक, अन्यथा यह कैसा भोजन है, इसे कैसे खायें

निश्चित रूप से जीवन का एकमात्र उद्देश्य आनंद की प्राप्ति है और हम सभी उसी आनंद को चाहते हैं जो कभी समाप्त न हो, काल जिसकी सीमाओं का अतिक्रमण न कर सके, जिसे कोई हमसे छीन न सके और जो कभी कम न हो लेकिन जिसे हम दूसरों के जीवन में भी प्रसारित कर सकें अपने ह्रदय की गहराइयों में उतरकर और पूर्ण रूप से निष्कपट रहकर बताइये क्या आनंद आपके जीवन की भी एकमात्रा अभिलाषा नहीं है

जब आप बहुत ज्यादा पैसा कमाने के लिये, अधिक संपत्ति जुटाने के लिये प्रयास करते हैं तो क्या इसके पीछे वह आंतरिक मनोभाव काम नहीं करता जो आपको यह विश्वास दिलाता है कि जब आपके पास पैसा हो जायेगा तो आपका जीवन और अधिक खुशहाल और भी अधिक आनंदमय हो जायेगा? जब आप इस प्रयत्न में लगे रहते हैं कि किस तरह बड़े से बड़ा पद और पुरस्कार मुझे ही हासिल हो

तब क्या आपके अंतर्मन में यह कामना हर वक्त हिलोरे नहीं मारती कि जब आपको समाज में अधिक से अधिक यश हासिल हो जायेगा तब आपके और आपके परिजनों के जीवन में आनंद और बढ जायेगा और क्या इसी आनंद की अपेक्षा आपको तब नहीं रहती जब आप अपने मित्रों, संतान, माता-पिता, जीवनसाथी और सहयोगियों से व्यवहार करते हैं कोई भी व्यक्ति इस तथ्य को झुठला नहीं सकता कि आनंद उसके जीवन की एकमात्र और सबसे बड़ी अभिलाषा है और यही उसके जीवन का उद्देश्य भी

वास्तविक समस्या बस उस मार्ग के चुनाव की है जिसे हम आनंद-प्राप्ति का माध्यम चुनते हैं स्वार्थी मनुष्य आनंद को देहभाव और व्यक्तिगत अहं की सीमाओं में बाँधकर अपने लिये उसी प्रकार से सीमित रखना चाहते हैं जैसे जल का कुआँ जबकि महान और उच्चस्तरीय आत्माएँ आनंद को मुक्त रूप से उसी प्रकार से प्रवाहित होने देती हैं जैसे वह विशाल नदियाँ जो अंतहीन महासमुद्र से जुडी हैं

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