22 Stories of Weird Queens in Hindi

 

“धरती हर व्यक्ति की आवश्यकता को पूरा करने के लायक तो पर्याप्त देती है, पर हर व्यक्ति के लालच को पूरा करने के लिये नहीं।”
– महात्मा गाँधी

 

Story of Weird Queens in Hindi
संसार की सबसे अजीबोगरीब रानियाँ

सभ्यता के इतिहास में ऐसी कई स्त्रियाँ हुई हैं जिन्हें उनकी आदतों और झक्कीपन के आधार पर एक विचित्र प्राणी ही कहा जा सकता है, पर इतिहास की बहुत कम रानियों के पास ही वह वैभव और शक्तियाँ रहीं हैं जिन पर प्रायः राजाओं का ही अधिकार माना जाता है। इनमे से अधिकतर साम्राज्ञीयों को जो ताकत हासिल थी वह उन्हें अपने पतियों से ही मिल पायी थी, पर ताकत के नशे और सनकीपन में वह इन राजाओं से भी कहीं ज्यादा आगे बढ़ गयीं थीं।

आज Story of 10 Weird Queens in Hindi में हम आपका परिचय संसार की कुछ उन्ही विचित्र, क्रूर और अजब आदतों वाली रानियों से कराने जा रहे हैं जो एक समय अपने कारनामों से बहुत चर्चित हुई। इस लेख में हम सिर्फ आठ रानियों का ही वर्णन कर रहे हैं, बाकी के बारे में जानने के लिये नीचे दिये जा रहे लिंक की सहायता लें।

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1. Story of Queen Elizabeth II ब्रिटेन की वर्तमान रानी एलिसाबेथ

इन दिनों ज्यादातर शाही परिवार अपने नाम और इतिहास की तुलना में अपने स्टाइल और शौकों से ज्यादा चर्चित हो रहे हैं। इंग्लैंड की वर्तमान रानी एलिसाबेथ भी अपने ऐसे ही एक अजीब शौक के कारण चर्चा में हैं – जैसे कि उनका जूतों का शौक और पहनने की विचित्र आदत। खैर यह बात तो समझी जा सकती है कि जब आप एक बड़े देश के शासक होते हैं तो आपको खाने से लेकर पहनने तक की सभी चीज़ों पर ध्यान देना पड़ता है।

और कपड़ों के मामलों में यह कुछ ज्यादा ही जरुरी होता है कि आपके जूते कपड़ों के साथ मैच करें। चूँकि विदेशों में स्त्रियाँ ऊँची एडियों की सैंडिल पहनती हैं, ऐसी स्थिति में देर तक खड़े होने पर पैरों की एडियों में दर्द होने की पूरी-पूरी संभावना रहती है।

Evening Standard के अनुसार रानी ने अपने इस काम के लिये एक विशेष नौकर रखा हुआ है जो कुछ देर उनके जूते पहनकर ट्राय करता है कि उनमे रानी को आराम मिलेगा या नहीं। उसके हामी भरने के बाद ही रानी उसे पहनती हैं।

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2. Story of Queen Nefertiti मिस्र की रानी नेफेरटीटी

प्राचीन मिस्र की प्रसिद्ध रानी नेफेरटीटी को उसके सांस्कृतिक पुनुरुत्थान के बहुत सारे कार्यों के लिये याद किया जाता है। वह और उसके पति फराओ अमेंहोटेप IV ने साम्राज्य के धार्मिक ढाँचे को पूरी तरह से बदलकर रख दिया था। चतुर नेफेरटीटी को राजा के समकक्ष दर्जा ही प्राप्त था। उन दोनों ने सभी मिस्री देवताओं को, जिनमे मुख्य देवता आमीन भी शामिल था, अटें (सूर्य देव) से प्रतिस्थापित कर दिया था।

उन्होंने मिस्र के धर्म को अद्वैतवाद में बदल दिया और अपने नाम भी बदलकर अखेनतें और नेफेरनेफेरुआटेन-नेफेरटीटी रख लिये। दोनों ने अटें के सम्मान में एक नया शहर बनवाया। शक्तिशाली और प्रभावशाली रानी नेफेरटीटी, जिसके बारे में माना जाता है कि वह सूर्य की पूजा आरंभ करवाने में राजा अखेनतें से भी ज्यादा उत्सुक थी, ने अपने शासनकाल के दौरान ही एक देवी जैसा रुतबा पा लिया था।

हालाँकि उसके शासनकाल के बाद पुराने देवों के पक्ष में धार्मिक प्रवाह फिर से लौट आया था, लेकिन फिर भी नेफेरटीटी को प्राचीन मिस्री इतिहास की सबसे यादगार धार्मिक क्रांतियों के ध्वजवाहक के रूप में हमेशा याद किया जायेगा।

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Story of Cruel Queens of History in Hindi

3. Story of Queen Fredegund मेरोविनगियन रानी फ्रेडेगंड

पाँचवीं शताब्दी में रानी फ्रेडेगंड ने नरसंहारों के जरिये, मेरोविनगियन वंश (Merovingian Frankish Empire) में बदलाव की बयार चला दी थी। एक सामान्य स्त्री से मेरोविनगियन राजा चिलपरिक की पत्नी बनने तक का उसका सफ़र बेहद हैरतंगेज रहा। राज्य को मुट्ठी में रखने के अपने सपने को साकार करने के लिये उसने रानी गाल्सविन्था की मौत की योजना तो तैयार की ही, साथ ही रानी औडोवेरा को एक मठ में भेजकर अपनी राह में आने वाले हर बड़े काँटे को दूर कर दिया।

जब रानी गाल्सविन्था की बहन ब्रूनहिल्ड ने, जो कि फ्रेडेगंड की एक पुरानी दुश्मन थी, ने बदले की कसम खा ली, तब फ्रेडेगंड ने ब्रूनहिल्ड के पति और बहनों को निर्दयता से मौत के घाट उतार दिया। सिर्फ इतना ही नहीं इस क्रूर रानी ने तब क्रूरता की सारी सीमाएँ लांघ दी, जब इसने राजा चिलपरिक के दूसरे बच्चों की इसलिये निर्ममता से हत्या करवा डाली, ताकि सिर्फ उसकी ही Bloodline (वंश-परंपरा) मेरोविनगियन सिंहासन की उत्तराधिकारी बने।

जब सन 587 में राजा चिलपरिक की मृत्यु हुई, उस समय उसका बेटा क्लोटर II एक बच्चा ही था। इसीलिये फ्रेडेगंड ने ही गद्दी संभाली, लड़ाइयाँ लड़ी, विद्रोह कुचले और एक कुशल रानी के रूप में मेरोविनगियन राज्य का कुशलतापूर्वक सञ्चालन किया।

सन 597 में फ्रेडेगंड की मौत के बाद उसका बेटा क्लोटर गद्दी पर बैठा और उसने भी अपनी माँ की ही तरह अपने सम्बन्धियों का नरसंहार जारी रखा। उसने ब्रूनहिल्ड के बच्चों और वंशजों को खोज-खोजकर मारा ताकि भविष्य में विद्रोह की कोई गुंजाईश न रहे।

4. Story of Queen Didda काश्मीर की रानी दिद्दा

जब इन्सान में सत्ता की भूख और ताकत की चाहत, हद से परे चली जाय, तो वह रेखा जो निष्कपट प्रेम और अधिकार को अलग करती है, मिटने लगती है। कश्मीर की रानी दिद्दा के सन्दर्भ में भी यही हुआ था, जिसने असीम ताकत और निरंकुश शासन की चाहत में सिर्फ अपने बेटे ही नहीं, बल्कि अपने पोतों तक को रास्ते से हटा दिया। सत्ता की भूखी रानियों के इतिहास में शायद वह सबसे ज्यादा महत्वाकांक्षी औरत थी।

क्योंकि ज्यादातर रानियों ने सत्ता पर अधिकार इसीलिये किया था, ताकि वह अपनी संतान को गद्दीनशीं देख सकें। लेकिन रानी दिद्दा क्रूरता और लोभ में उनसे कहीं आगे निकल गयी। दिद्दा ने दसवीं शताब्दी के ज्यादातर समय काश्मीर के साम्राज्य पर प्रभुत्व बनाये रखा था। अपने पति क्षेमगुप्त के शासनकाल के दौरान ही इसने दैवीय उपहार में मिली अपनी चतुराई और कौशल से पूरा प्रशासकीय नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था।

और बाद में यह अपने बेटे और पोतों के लिये कार्यवाहक रानी के रूप में शासन करती रही। सिर्फ एक सलाहकार के रूप में सीमित कर दी गयी अपनी स्थिति से नाखुश इस रानी ने जादू-टोने और यातना के बल पर अपने तीनों पौत्रों को सिंहासन से दूर कर दिया। उसके बाद इसने 23 वर्षों के लम्बे समय तक शासन किया।

रानी दिद्दा की शक्ति का अंदाजा उसके काल में निर्मित हुए सिक्कों से पता चलता है जिस पर उसके पति के नाम के साथ-साथ उसका भी नाम खुदा हुआ है। दिद्दा भले ही बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी और निर्दयी रानी थी, लेकिन अपनी कार्यकुशलता से उसने अपने वंश के लम्बे शासनकाल को सुनिश्चित किया और कश्मीर के इतिहास में आज भी उसके शासनकाल को सबसे बेहतर माना जाता है।

5. Story of Queen Ranavalona I मैडागास्कर की रानी रनावलोना

मैडागास्कर की रानी रनावलोना I को पागल शासक के घृणित नाम से यूँ ही संबोधित नहीं किया जाता था। राजसिंहासन पर बैठकर निरंकुश शासन चलाने के अपने ख्वाब को पूरा करने के लिये उसने अपने ही पति को जहर देकर मार डाला था। सत्ता भी क्या अजीब चीज है? रक्त संबंधी तो दूर की बात ठहरे, संसार में सबसे प्रिय माने जाने वाले पति-पत्नी और संतान तक राजगद्दी के लिये दुश्मन नजर आते हैं।

साम्राज्ञी बनने के बाद उसने ईसाई धर्म के अनुयायियों के खिलाफ एक नृशंस अभियान चलाया। अपने 33 वर्ष के लम्बे शासनकाल के दौरान उसने उन लोगों की क्रूरतापूर्वक हत्या करवायी जिन्होंने ईसाई धर्म नहीं छोड़ा था। न जाने कितने लोगों को उसने पर्वतों की चोटियों से खाई में फिंकवा दिया, न जाने कितनों को खौलते पानी और आग में झुलसाकर मरवा दिया और न जाने कितनों को वीभत्स तरीके से चीर डाला।

मैडागास्कर को एक यूरोपीय उपनिवेश बनने से बचाने के लिये संकल्पित रनावलोना ने विदेशियों को एक स्थान पर जुटने का हुक्म दिया और फिर उसके बाद एक कसाई की तरह उन सबको मौत के घाट उतरवा दिया। लेकिन उसके मरते ही उसके कमजोर इच्छाशक्ति वाले उत्तराधिकारी ईसाई मिशनरियों को अपने यहाँ आते देखते रहे, जो एक नये जोश से वहाँ वापस लौट रहे थे।

तीन दशक पश्चात ही वहाँ के अंतिम राजा को जबरदस्ती देशनिकाला दे दिया गया और मैडागास्कर एक फ्रेंच कॉलोनी बन गया। उस दौर में जब यूरोपीय देश अफ्रीका के प्रत्येक इलाके पर कब्ज़ा करते हुए उन्हें निरंतर अपना उपनिवेश बनाते चले जा रहे थे तब देवत्व का हरण करने वाली धर्मविरोधी मगर भयंकर रनावलोना विदेशी शासन से अपने देश को बचाने में सफल रही। आज भी मैडागास्कर में उसे देशभक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

 

Hindi Story of Queens Who took Revenge

6. Story of Princess Olga कीव की राजकुमारी ओल्गा

10वीं सदी की बदले की एक अनोखी गाथा में कीव (Kiev) की राजकुमारी ओल्गा ने शहीद राजकुमार इगोर की विधवा की भूमिका एक गलत मगर साहसी ढंग से अदा की। जब इगोर को ड्रेवलेन जनजाति के लोगों ने मार डाला, तो खून की प्यासी ओल्गा ने उन्हें मिटाने के लिये बेहद खतरनाक और बुरा रास्ता अख्तियार किया।

उसने न सिर्फ दो उच्चस्तरीय ड्रेवलेन प्रतिनिधिमंडलों को मरवा डाला, बल्कि ट्रोजन हॉर्स की तर्ज पर उनकी राजधानी को जलाकर राख करवा दिया जैसे कि स्पार्टा ने ट्रॉय का विध्वंस किया था। जब ओल्गा वापस लौटी तब उसकी एक औरत के बदले वाली वह शक्तिशाली, आक्रामक और दयाहीन तस्वीर सदा के लिये लोगों की स्मृति में अंकित हो गयी।

इसके अलावा उसने सरकार के ढांचे में भी व्यापक सुधार किये और राज्य की छीनी गयी जमीन को वापस हासिल किया, लेकिन उसकी इच्छाएँ बदले और शासन से भी उपर चली गयी थीं। उसके दिमाग पर ईसाईयत का बुखार चढ़ गया था। ईसाई धर्म स्वीकार करने के लिये उसने कांस्टेंटिनोपोल की यात्रा की और अपना नाम बदलकर हेलेना रख लिया।

इस तरह वह कीव की पहली ईसाई शासक बनी और ईसाई धर्म को पहली बार एक बड़े और संभ्रांत नगर में फैलने का अवसर मिला। ओल्गा का ईसाईयत फैलाने का यह सपना आगे चलकर उसके पोते ने पूरा किया, जब उसने कीव में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार किया। आज ओल्गा की रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च में एक संत के रूप में पूजा होती है और ईसाई धर्म को फैलाने में दिये गये योगदान के लिये याद किया जाता है।

7. Story of Isabella of France इंग्लैंड की रानी इसाबेला

इंग्लैंड की रानी इसाबेला, फ्रांस की राजकुमारी और इंग्लैंड के राजा एडवर्ड II की पत्नी थी। राजा एडवर्ड एक होमोसेक्सुअल (समलैंगिक) इन्सान था। जब इसाबेला को इसका पता चला, तो उसका झुकाव एडवर्ड के पसंदीदा अनुचरों पिएर्स गेव्स्टन और हघ डेस्पेंसर की ओर हो गया। इन विचित्र परिस्थितियों के बीच इसाबेला ने एडवर्ड के बच्चों को जन्म दिया, उन्हीं में से एक एडवर्ड III भी था।

इतने सालों तक चुप्पी साधने के बाद, इसाबेला अपनी भावनाओं पर और काबू न रख सकी और सन 1325 में उसका अवैध संबंध ब्रिटिश देशद्रोही लार्ड रॉजर मोर्टिमर के साथ हो गया, जिसे निर्वासित कर दिया गया था। अनदेखा किये जाने के गुस्से ने उसके अन्दर एक प्रचंड प्रतिशोध की भावना भर दी और इसाबेला ने इंग्लैंड पर आक्रमण करके गद्दी पर कब्ज़ा कर लिया।

इस तरह उसने एडवर्ड III के लिये एक कार्यवाहक रानी के रूप में काम किया। बदले की आग में जलती इसाबेला ने अपने पति एडवर्ड II की हिरासत में रखते हुए नृशंसता से हत्या करवा डाली। अपने इस कर्म का दंड भी उसे जल्दी ही मिल गया, जब उसके बेटे एडवर्ड III ने बड़े होने पर अपनी माँ को गद्दी से जबरदस्ती उतार दिया।

28 वर्षों तक एक निर्वासित जीवन बिताने के बाद इसाबेला दुःख और पीड़ा के बीच ही मर गयी। इसाबेला ने यह निर्मम काम जिस एडवर्ड III के लिये किये थे, उसने लगभग 50 वर्षों तक ब्रिटेन पर राज किया जो एक उदार ह्रदय शासक माना जाता है। रानी इसाबेला की यह कहानी प्यार, धोखे, ताकत, परिवार और पतन की एक अद्भुत कहानी है।

8. Story of Queen Nandi ज़ुलु साम्राज्य की रानी नंदी

कोई भी व्यक्ति जिसे इस बात पर आश्चर्य होता हो कि एक दुश्चरित्र स्त्री आखिर अपने जीवन में क्या हासिल कर सकती है, रानी नंदी सबसे उपयुक्त उत्तर है। यह वह स्त्री थी जिसने ज़ुलु साम्राज्य (Zulu Empire) की नींव डाली थी। नंदी, अफ्रीका की लंगेनी जनजाति की एक सदस्य थी। जब वह यौवन की दहलीज पर कदम रख रही थी तो ज़ुलु कबीले के सरदार सेनजंगाखोना से सम्बन्ध के चलते वह गर्भवती हो गयी।

कबीले के बड़े लोगों ने उसे स्वीकार नहीं किया। जब उसके पुत्र शक का जन्म हुआ, तब उसे सेनजंगाखोना की तीसरी बीबी होने का अपमानजनक दर्जा हासिल हुआ, क्योंकि पहली पत्नी के अलावा बाकी पत्नियों का सामाजिक स्तर बहुत नीचा समझा जाता था। इस पर उसके कबीले की दूसरी औरतें उसका मजाक उड़ाती और उस पर ताने कसती।

अपनी इस अपमानजनक स्थिति को पहचानते हुए, उसने अपने बेटे की परवरिश की और उसे एक भारी योद्धा बनाया जो सन 1815 में जुलू लोगों का मुखिया बना। अब नंदी रानी माँ बन गयी जिसे लोग न्द्लोरुकाज़ी (महान स्त्री हथिनी) कहते थे। यह वीर स्त्रियों के लिये वहाँ प्रचलित उपाधि थी।

स्थिति बदलते ही उसने उन लोगों पर कहर बरपाया जिन्होंने उस पर और उसके बेटे पर जुल्म ढाया था। चूँकि शक अविवाहित ही रहा, तो भाग्यवश नंदी ही अपने पूरे जीवनकाल में ज़ुलु साम्राज्य की गद्दी के पीछे की असली ताकत बनी रही।

“अपनी इच्छाओं को पूरा करना गलत नहीं है, लेकिन निर्दोषों पर अत्याचार करके तब अपने सपने पूरा करना, मनुष्य को पतन के मार्ग पर घसीट लाता है।”
– पवन प्रताप सिंह

 

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