Andrew Carnegie: Successful Businessman Story in Hindi

 

“जो कुछ भी हमने अपने लिए किया है, हमारे साथ ही ख़त्म हो जाता है। लेकिन हमने जो कुछ भी दूसरों के और इस दुनिया के लिए किया है, सदा रहता है और अमर हो जाता है।”
– अल्बर्ट पाइन

 

Famous Successful Businessman Story in Hindi
एक दानी अरबपति जिसने ज्ञान के लिये अपनी सारी दौलत दान कर दी

Inspiring Life of A Successful Businessman एक सफल व्यवसायी

आज यहाँ उस महान और Successful Businessman की चर्चा की जा रही है, जिसने एक बेहद गरीब परिवार में जन्म लिया था, जिसका बचपन अभावों के बीच बीता था, जो जीवन भर कठोर परिश्रम करके तब सफलता की बुलंदियों तक पहुँचा था और जिसने अपनी सारी संपत्ति मानवता की सेवा के लिए, परोपकार में दान कर दी थी। बात हो रही है, अमेरिका के विश्वविख्यात और अपने समय के सर्वाधिक धनी व्यक्ति, एंड्रयू कार्नेगी की, जिन्हें अमेरिका के सबसे अमीर और उदार Businessman में शामिल किया जाता है।

जिन्हें अमेरिका का स्टील किंग कहा जाता था और जिन्होंने अपने देश की उन्नति में एक महान योगदान दिया और उसे दुनिया का सबसे समृद्धिशाली देश बनने में मदद की। आधुनिक युग के इस महान दानवीर ने, सन 1919 में अपनी 90% यानी 35 करोड़ डॉलर की संपत्ति दान में दे दी थी, जो आज सन 2014 में लगभग 5 बिलियन डॉलर बैठती है।

इस संपत्ति को उन्होंने शिक्षा के प्रसार में लगाया। न जाने कितने Schools, Colleges, Libraries और Research Centers ने उनकी इस महान उदारता का लाभ उठाया। शायद यह भी एक कारण है कि अमेरिका Education और Research में दूसरे देशों से कहीं ज्यादा आगे निकल गया जबकि बाकी देश पिछड़े ही रह गये।

Life Story of Businessman Andrew Carnegie एंड्रू कार्नेगी का जीवन

दुनिया के सबसे Successful Businessmen में से एक एंड्रयू कार्नेगी का जन्म 25 नवंबर 1835 के दिन, स्काटलैंड के डनफर्मलाइन में हुआ था। इनके पिता का नाम विलियम कार्नेगी और माँ का नाम मार्गरेट मोर्रिसों कार्नेगी था। इनके पिता जुलाहे का काम करते थे। देश मे भुखमरी की वजह से, बचपन में ही वे अपने बेहद गरीब माता-पिता के साथ अमेरिका चले गए थे। अमेरिका जाने के लिए भी उन्हें पैसे उधार लेने पड़े थे।

गरीबी के कारण, सन 1848 में मात्र 13 वर्ष की आयु में ही उन्हें Bobbin Boy के रूप मे काम करना पड़ा, जहाँ एक कपास की मिल में वह 12 घंटे तक काम करते थे। घर का खर्च चलाने के लिए कार्नेगी अपने माता-पिता के साथ मिलकर काम करते थे। उनके पिता जहाँ एक कपास के कारखाने में काम करते, तो वहीँ माँ जूते सिलकर बेचती।

जब तीनों लोग जी-तोड़ मेहनत करते, तब जाकर कहीं परिवार की गुजर-बसर हो पाती थी। सन 1850 में कार्नेगी पीटसबर्ग की एक Telegraph Company में Telegraph Messenger बन गए। चूँकि वह कठोर परिश्रमी थे, इसीलिये जल्दी ही अपने काम की बारीकियाँ जानकर, Operator बन गए। सिर्फ इतना ही नहीं, उनमे अपने काम के प्रति जूनून और शिक्षा प्राप्त करने की प्रबल जिज्ञासा भी थी।

उनमे उन्नति की इतनी तीव्र लालसा देखकर, कर्नल जेम्स एंडरसन ने अपनी विशाल Library उनके लिए खोल दी, जहाँ वह शनिवार के दिन पूरा समय ज्ञान हासिल करने और अपनी क्षमता बढ़ाने में लगाते। कार्नेगी अपने आर्थिक विकास और बौद्धिक तथा सांस्कृतिक विकास, दोनो ही क्षेत्रों में Self-made Man थे।

 

Struggle of Andrew Carnegie एंड्रू कार्नेगी का संघर्ष

एंड्रयू कार्नेगी की क्षमता, उनकी कड़ी मेहनत करने की लगन, उनके धैर्य और उनकी ग्रहणशीलता ने जल्दी ही उनके लिए, अवसरों के अनेकों दरवाज़े खोल दिए। शीघ्र ही उन्हें Pennsylvania Railroad Company में, बढे वेतन पर Secretary की नौकरी मिल गयी। केवल 18 वर्ष की उम्र में ही यह कर्मठ युवा Pittsburgh Division का Superintendent बन गया। अपनी इस नौकरी से उन्होंने बहुत कुछ सीखा, जिसने बाद में उन्हें आगे बढ़ने में बहुत मदद की।

कार्नेगी ने अपने विशाल साम्राज्य की शुरुआत Railroad Business से ही की थी। उसी समय सन 1860-65 में अमेरिका में गृह-युद्ध छिड़ने के कारण, उन्हें बड़े पैमाने पर युद्ध का सामान तैयार करने का आर्डर मिला और मुनाफा होने पर, उन्होंने एक Steel Rolling Mill की स्थापना करके अपने स्टील साम्राज्य की नीव डाली। उन्होंने तेल के व्यवसाय में भी सफलता पाई, लेकिन बाद में अपना सारा ध्यान Steel के Business पर केन्द्रित कर लिया।

पर कार्नेगी दूसरे इंसानों की तरह पैसे के पीछे भागने में यकीन नहीं करते थे और न ही वह आज के उन Successful Businessmen और धनकुबेरों की तरह ढिंढोरा पीटने में विश्वास करते थे, जो पहले तो जनता को चूँसते हैं और फिर वाहवाही के लिए नाममात्र का दान देते हैं। अपनी आत्मकथा में वह लिखते हैं कि मैंने अपने परिवार के लिए पूरे वर्ष का पचास हजार डॉलर का खर्च बाँध रखा है।

उससे ऊपर मुझे जो भी आय होती है उसे मै परोपकार के कार्य में लगा देना ज्यादा बेहतर समझता हूँ। दूसरों की भलाई के सिवाय, हमें व्यवसाय को हमेशा के लिए त्याग देना चाहिए। वह पैसा कमाकर इकठ्ठा करने को मूर्तिपूजा का सबसे घृणित स्वरुप मानते थे। उनकी द्रष्टि में ज्ञान और शिक्षा ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण थे।

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Steel Kingdom of A Successful Businessman एंड्रू कार्नेगी का स्टील साम्राज्य

अब तक कार्नेगी एक Successful Businessman बन चुके थे पर अपनी माँ के जीवित रहने तक वह विवाह नहीं करना चाहते थे, बल्कि उनके जीवन के अंतिम दिनों तक, उनकी बीमारी में वह उनकी सेवा करना चाहते थे। जब सन 1886 में उनकी माँ की मृत्यु हो गई, तब उन्होंने विवाह किया। जब उनका विवाह हुआ था, तब उस समय उनकी पत्नी, उनसे उम्र में 20 वर्ष छोटी थी। यहाँ से उन्होंने अपने स्टील साम्राज्य का विस्तार करना प्रारंभ किया।

सन 1885 से लेकर सन 1990 तक, उन्होंने अपने कारोबार को इस स्तर पर पहुँचा दिया कि ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देश भी Steel Production में उनसे पिछड गए। सस्ते और बड़े स्तर पर स्टील का उत्पादन करने का श्रेय Andrew Carnegie को ही जाता है, जो किसी भी देश के विकास की बुनियाद है। सन 1901 में 66 वर्ष की आयु में कार्नेगी ने J. P. Morgan के साथ मिलकर अमेरिका का सबसे बड़ा Steel Organization बनाया।

जिसे United States Steel Corporation के नाम से जाना गया। इसकी कीमत उस समय 1 बिलियन डॉलर थी और यह उस समय दुनिया का एकमात्र संगठन था, जिसका बाजार पूंजीकरण इतना अधिक था। कुछ समय बाद Steel King के नाम से प्रसिद्ध हो चुके एंड्रू कार्नेगी ने Retirement ले लिया और बदले में उन्हें आधी सम्पति जो आज (2014) के समय लगभग 6.5 अरब डॉलर बैठती है, दे दी गयी।

इस बेहद Successful Businessman की यह सफलता कई लोगों को अचंभित कर सकती है। लेकिन जिन्होंने महान लोगों का चरित्र पढ़ा है और जो स्वयं भी उन्ही बातों में विश्वास रखते हैं, वे यह जानते होंगे कि अपने समय का सदुपयोग करना, कड़ी मेहनत करना और प्रबल जिज्ञासा रखना बड़ी सफलता के लिए आवश्यक शर्ते हैं।

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Charitable Billionaire in Hindi दानी अरबपति एंड्रू कार्नेगी

एंड्रू कार्नेगी ने भी अपनी सफलता की बुनियाद इन्ही सिद्धांतों के आधार पर तैयार की थी। महान लोग दूसरों की सहायता करने में जितने उदार होते हैं, समय के मामले में वे उतने ही कंजूस होते हैं। कार्नेगी की दानशीलता के बारे में सुनकर एक बार एक नवयुवक उनसे मिलने आया और उनसे मदद करने का आग्रह किया। वह व्यक्ति College की नष्ट हुई Building के निर्माण में उनकी सहायता चाहता था।

आते ही उसने, उन्हें College की आवश्यकता, उसके उद्देश्य और निर्माण के सम्बन्ध में विस्तार से बताना शुरू कर दिया। कुछ देर तक अपनी बात कहने के पश्चात उसने, उनसे 100000 डॉलर की सहायता मांगी। कार्नेगी ने उस नवयुवक से कहा – “Gentleman मैंने यह संपत्ति बड़े परिश्रम से कमाई है जो आपने बताया वह ठीक है, लेकिन क्या आप अकेले ही इस जिम्मेदारी को पूरा करने में समर्थ हैं?

यदि आप 1 महीने में मुझे 1 लाख डॉलर जुटाकर दिखा दें, तो मै आपको तुरंत ही एक लाख डॉलर दे दूंगा।” वह नवयुवक वहाँ से चला गया और किसी तरह काफी परिश्रम करके जब उसने 1 लाख डॉलर जुटा लिए, तो वह फिर कार्नेगी के पास आया। एंड्रू कार्नेगी ने तुरंत ही यह कहते हुए उसे एक लाख का चेक काटकर दे दिया – “बेटे, तुम्हे अपनी बात कम से कम समय में कहने की आदत डाल लेनी चाहिए।

तुम्हे पता होना चाहिए कि मेरे प्रत्येक मिनट की कीमत 25 हजार डॉलर है और तुम्हारे इतना समय लेने के कारण मुझे 2 लाख डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है।” अपने जीवन के अंतिम दिनों में, कार्नेगी ने शिक्षा के प्रसार के लिए विशेष प्रयास किये। चूँकि गरीबी की वजह से वह अपनी पढाई पूरी नहीं कर सके थे, इसलिए वह नहीं चाहते थे कि किसी और को उनकी तरह ज्ञान से वंचित हो जाना पड़े।

शिक्षा को सबके लिए सुलभ करने हेतु, उन्होंने जगह-जगह Public Library बनवाई। इसके अलावा Schools, Universities में Library बनवाने और मानव जाति को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कार्नेगी ने कई Research Center बनवाने में भी अपनी लगभग सारी संपत्ति दान में दे डाली थी। इस तरह देखा जाय तो यह Successful Businessman एक सच्चे परोपकारी के रूप में कार्य कर रहा था।

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Contribution of A True Philanthropist आधुनिक युग का सच्चा दानवीर

सन 1901 से 1919 तक का समय इस Successful Businessman ने, एक महान कर्मयोगी के रूप में, मानवजाति के उत्थान के लिए, खुले हाथों से धन लुटाने में बिताया। मानवता की उन्नति के लिए, किये गए उनके मुख्य प्रयासों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, और दूसरे देशों में Public Library की स्थापना, उनका सर्वप्रमुख कार्य रहा। दानवीर कार्नेगी ने अमेरिका के 47 राज्यों में लगभग 3000 Libraries की स्थापना करने के लिए पैसा दान दिया और केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेकों देशों ने उनकी इस विश्वव्यापी उदारता का लाभ उठाया।

सन 1899 में उन्होंने विश्व प्रसिद्ध Birmingham University की स्थापना के लिए 50000 डॉलर का दान दिया। उनके त्याग और समर्पण की आधारशिला पर खड़े होने वाले विख्यात संस्थानों में शामिल हैं – Carnegie Library, Carnegie Corporation of New York, Carnegie Endowment for International Peace, Carnegie Institution for Science, Carnegie Trust for the University of Scotland, Carnegie Hero Fund, Carnegie Museums, Carnegie Mellon University….. और ऐसे ही न जाने कितने संस्थान।

कहाँ तक कहें, एंड्रू कार्नेगी ने 40-50 साल तक कठोर परिश्रम करके जो कुछ हासिल किया था, उसे अगले बीस सालों में वापस समाज को, संपूर्ण मानवजाति को ही लौटा दिया। इसके विपरीत, अगर अपने देश के धनी व्यक्तियों पर, राजा-महाराजाओं पर नज़र डालें, तो पायेंगे कि उन्होंने जनता को चूस-चूसकर पैसा तो इकठ्ठा किया, पर उसे न तो जनता की सेवा में ही लगाया और न ही अपनी उन्नति कर सके।

Tendency of Indian Riches भारतीय अमीरों की मानसिकता

भारत के धनाढयों ने उस पैसे को या तो ऐशो-आराम में उडा दिया या फिर विदेशी लुटेरे उसे लूटकर ले गये। यहाँ हैदराबाद के निज़ाम और उनके जैसे अनेकों दौलतमंद शासक भी हुए हैं, जिनके पास इतनी अकूत सम्पदा थी कि शायद 50 बिल गेट्स भी उनकी बराबरी न कर पायें और जो शानो-शौकत दिखलाने के लिए लाखों-करोड़ों की कीमत वाली डेमलर क्रिसलर जैसी सैंकड़ों लग्जरी गाड़ियाँ खरीद सकते हैं।

लेकिन गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा और दुर्दशा से दुःख पाते हुए अपने भाई-बहनों के लिए एक दमड़ी तक दे पाने में असमर्थ हैं। यहाँ के मंदिरों में इतनी सम्पदा दबी-छुपी पड़ी है कि अगर उसका हिसाब लगाया जाए, तो अपना देश दुनिया के सबसे अमीर देशों से कोसों आगे नज़र आएगा, लेकिन फिर भी आधी से ज्यादा आबादी गरीबी में जीवन बिता रही है।

अगर इस सम्पदा को भी किसी तरह से हासिल न किया जा सके, तो भी भ्रष्ट सरकारी मंत्रियों, धूर्त अफसरों और लालची उद्धयोगपतियों के पास इतना धन है कि यदि वे ईमानदारी और कार्नेगी जैसी उदारता से धन को देश की सेवा के लिए समर्पित कर दें, तो इस देश का कोई भी बच्चा निरक्षर न रहे और न ही किसी को भूखे पेट सोना पड़े।

महान महात्मा गाँधी, गरीबी को मानवरचित षड़यंत्र मानते थे और यदि हम थोडा ध्यान दें, तो यही पायेंगे कि प्रत्येक देश में आर्थिक असमानता का मुख्य कारण, संपत्ति का कुछ प्रभावशाली लोगों के हाथों में सीमित रह जाना है, जो दूसरों के धन पर नाग की तरह कुंडली मारे बैठे हैं। ऐसे व्यक्तियों को निश्चित ही इस Successful Businessman से, इस उदार महापुरुष से प्रेरणा लेनी चाहिए।

 

Success Story of A Businessman in Hindi कार्नेगी की कामयाबी

एंड्रू कार्नेगी की असाधारण कामयाबी (Extraordinary Success) का राज उनकी 3 Famous Dictum से पता चलता है जो इस प्रकार हैं –

1. अपनी जिंदगी का पहला एक तिहाई हिस्सा, हर व्यक्ति को आवश्यक शिक्षा हासिल करने में लगाना चाहिए।

2. जीवन का अगला एक तिहाई हिस्सा, उसे ज्यादा से ज्यादा धन कमाने में लगाना चाहिए।

3. और अपने जीवन के अंतिम एक तिहाई समय में, उसे कमाए गए पैसे को, मानवता की सेवा में श्रेष्ठ कार्यों में लगाना चाहिए।

ऐसा नहीं है कि उन्होंने यह कोई नयी बात कही थी। भारतीय संस्कृति अपनी वर्णाश्रम व्यवस्था के जरिये, प्राचीनकाल से ही यह सन्देश देती हुई चली आ रही है, लेकिन उन्होंने इसे जीवन में उतार कर यह दिखाया कि वास्तव में ऐसा संभव भी है। कितना अच्छा हो, अगर हर व्यक्ति इस प्रकार से जीवन जीये, तो सारे विश्व से गरीबी और अभावों की समस्या का जड़ से समाधान हो जाये।

The Gospel of Wealth’ में वह लिखते हैं कि “अमीरों को अपनी संपत्ति का उपयोग, देश और समाज को समृद्ध करने में करना चाहिए।” इसी में वह आगे लिखते हैं, जो कुछ इस प्रकार है और जिसे हर उस इन्सान को अवश्य पढना चाहिये, जो पैसे के लिये पागल हुआ जा रहा है, जो रात-दिन केवल पैसे के पीछे पड़ा हुआ है और जिसकी नज़रों में दुनिया में पैसे से ज्यादा बढ़कर मुकद्दस चीज कोई दूसरी नहीं है।

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Message of A Successful Businessman in Hindi सफल व्यवसायी का महान सन्देश

एंड्रू कार्नेगी के इस सन्देश से उनके जीवन का उद्देश्य, मानसिकता और धन की नश्वरता के सम्बन्ध में उनके विचार स्पष्टता से परिलक्षित होते हैं। इसे उन राजनेताओं, अधिकारीयों और पेशेवरों को भी पढना चाहिये जो पैसे के लिये अपने जीवन मूल्यों, नैतिकता, आदर्श और चरित्र को नष्ट करने में जरा भी नहीं हिचकते हैं। जो अपनी योग्यता को एक जड़ चीज के आकर्षण में फंसाकर इस तरह कलंकित कर लेते हैं कि न सिर्फ अपने जीवन का मूल उद्देश्य भूल जाते हैं, बल्कि मानवता भी उनके दुष्कृत्यों के कारण आँसू बहाती रहती है।

“आदमी केवल रोटी से ही जिन्दा नहीं रहता है। मै ऐसे कई करोड़पतियों को जानता हूँ, जो उस एकमात्र पोषण से वंचित हैं, उसके बिना तड़प रहे हैं, जो आदमी के अन्दर की मनुष्यता को जीवित रख सकता हैं, और मै ऐसे कई गरीब आदमियों और मजदूरों को जानता हूँ, जो उस सुखमय जीवन का आनंद लेते हैं, जो उन करोड़पतियों की शक्ति के बाहर की बात है।

यह मन है, जो शरीर को समृद्ध करता है। उस समुदाय से ज्यादा दुर्भाग्यशाली और कोई नहीं है, जिसके पास पैसा तो है, लेकिन दूसरी कोई चीज नहीं है। पैसा केवल उन वस्तुओं के उपयोगी दास की तरह है, जो इसकी स्वयं की अपेक्षा अपरिमेय रूप से उच्च हैं। इससे ऊपर उठने पर, यह एक पशु की तरह ही बर्ताव करता है।

मेरी आकांक्षाएं इससे कहीं ज्यादा उच्च हैं। मेरी इच्छा है कि इसे मन और आत्मा के आनंद और प्रबोधन के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। इसे उन सभी कार्यों में नियोजित करना चाहिए, जो दूसरों के जीवन में मधुरता और प्रकाश लाते हैं। मेरी समझ में, यही धन-संपत्ति और ऐश्वर्य का सर्वश्रेष्ठ सम्भावित उपयोग है।”

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Motivational Life of A Great Businesman प्रेरणादायी जीवन

जैसे कि सभी व्यक्तियों के जीवन में उतार चढ़ाव आते हैं, ऐसे ही कार्नेगी को भी कई बार विवादों में फँसना पड़ा। लेकिन संघर्षों और विवादों से अछूता जीवन, शायद ही किसी महान व्यक्ति का रहा हो। अपने कर्मचारियों की मांगे न मानने के कारण उन पर एक बड़े विवाद का आरोप लगा। जिसमे कुछ लोगों की मृत्यु हो गई थी, हालाँकि वे उस समय दूसरे देश में थे और कर्मचारियों की मांगे भी अपेक्षाकृत अनुचित थी।

लेकिन फिर भी इस घटना से कार्नेगी की एक Great Successful Businessman की प्रतिष्ठा को बड़ा धक्का पहुँचा। कार्नेगी की मृत्यु 11 अगस्त सन 1919 को अमेरिका के मेसाचुसेट्स शहर में निमोनिया के कारण हुई थी। उस समय तक वह लगभग 4.8 बिलियन डॉलर की संपत्ति दान कर चुके थे। उनकी मृत्यु के बाद भी लगभग 3 करोड़ डॉलर अनेकों Charities, Foundations और पेंशन पाने वालों को दे दी गयी।

जब हम इस महान और कर्मठ Businessman के जीवन और सफलता का मूल्याँकन करते हैं तो यही पाते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना सम्पूर्ण जीवन न सिर्फ कठोर परिश्रम करते हुए व्यतीत करना चाहिये, बल्कि उसे इस बात का भी प्रयास करना चाहिये कि उसके परिश्रम का अधिकांश लाभ समाज को ही मिले। जीवन निर्वाह की व्यवस्था करते-करते व्यक्ति अपने स्वार्थ में इतना न डूब जाय कि समाज की बेहतरी की ओर से अपनी आँखे ही बंद कर ले।

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Legacy of A Successful Businessman एक महान व्यवसायी का उत्तरदान

एंड्रू कार्नेगी न सिर्फ एक Successful Businessman थे, बल्कि एक महान और सच्चे परोपकारी के रूप में भी उन्होंने अमेरिका के अमीरों को वह उज्जवल राह दिखायी जिस पर आगे चलकर बिल गेट्स, वारेन बफे और स्टीव जॉब्स जैसे दिग्गज चलने का साहस कर पाये और समाज उनकी योग्यता और प्रतिभा का लाभ उठा सका। शायद, उन्हें इस बात में विश्वास था कि जो मनुष्य जाति की सेवा करता है, वह ईश्वर की सेवा करता है।

कार्नेगी शायद जानते थे कि धन से कुछ ख़रीदा तो जा सकता है, परन्तु खरीदी हुई वस्तु का आनंद, तो अपने भीतर ही जगाना होगा और इसका एक आसान तरीका यह भी है कि जो कुछ भी हमारे पास है, उसे दूसरों को बाँट दिया जाये, क्योंकि दूसरों के ह्रदय में पैदा हुई प्रसन्नता हमें भी छुए बिना न रह सकेगी। इसीलिए उन्होंने अपना सर्वस्व विश्वमानव की आराधना में लगा दिया।

एंड्रू कार्नेगी तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन जब तक यह मानव समाज अपना अस्तित्व बनाये हुए है, जब तक कृतज्ञता की भावना लोगों के ह्रदय में जीवित है, तब तक उनका नाम एक महान Successful Businessman के रूप में इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा रहेगा और उनका जीवन, उन सभी चरित्रवान व्यक्तियों को आत्मत्याग के मार्ग पर चलने के लिये प्रेरित करता रहेगा, जिनका अस्तित्व विराट रूप ले चुका है।

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“जो निस्वार्थ, निर्लोप तथा अलोलुप हैं, वही वास्तव में संपन्न हैं। इसके विपरीत, जो लालची हैं, अतिकाम हैं, लिप्सालु हैं, वे धनवान होने पर भी दरिद्र ही हैं। सच्च्चरित्र और निस्वार्थ लोकसेवी ही किसी राष्ट्र को ऊँचा उठा सकते हैं और भगवान का प्यार भी ऐसे ही लोगों के लिए सुरक्षित है।”
– पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

 

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