Best and Famous Tenali Raman Stories in Hindi

 

तेनालीराम जिनका पूरा नाम तेनाली रामकृष्ण था दक्षिण भारत के विजयनगर राज्य के प्रसिद्ध शासक महाराज कृष्णदेव राय के दरबार के अष्टदिग्गजों में से एक थे। वैसे तो इन्हें मुख्य रूप से एक विकटकवि या विदूषक के रूप में जाना जाता है, लेकिन यह एक कवि भी थे और अपनी कुशाग्र बुद्धि और हास्यबोध के कारण यह कृष्णदेव राय को वैसे ही प्रिय थे जैसे अकबर को बीरबल।

Best Tenali Raman Stories in Hindi
असाधारण विदूषक थे तेनालीराम

तेनाली रामलिंगचार्युलु का जन्म 16वीं शताब्दी के शुरुआती दशक में थुमुलुरु नामक गाँव में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था। कुछ समय बाद जब इनके पिता की मृत्यु हो गयी तो इनकी माता इन्हें अपने भाई के घर, तेनाली ले आयी जहाँ इनकी किशोरावस्था बीती। तेनालीराम पहले शैव धर्म के अनुयायी थे पर बाद में इन्होने वैष्णव धर्म अपना लिया था।

बचपन में तेनालीराम को कोई विशेष शिक्षा नहीं मिल पायी थी लेकिन अपनी प्रखर जिज्ञासा और परिश्रम के बल पर वह इतने बड़े विद्वान बने। इनके जीवन के कई किस्से मशहूर हैं और हम उनमे से अधिकांश का परिचय आपसे धीरे-धीरे करायेंगे। इन सभी कहानियों से इनकी चतुराई के साथ-साथ इनके व्यक्तित्व की उदारता का भी पता चलता है।

एक बार महाराज कृष्णदेव राय को अपना राज्य फैलाने की इच्छा हुई विचार करने पर उन्होंने पाया कि इसके लिये उन्हें एक बड़ी और शक्तिशाली सेना की आवश्यकता होगी और सेना को सशक्त बनाने के लिये घोड़ों की आवश्यकता होगी मंत्री की सहमति से उन्होंने राज्य के हर निवासी के लिये एक घोड़े की परवरिश करना अनिवार्य कर दिया और साथ ही यह आदेश भी दिया कि सभी घोड़ों को हरे चारे के रूप में बढ़िया खुराक दी जाय राज्य की आम जनता को इस फैसले से कोई विशेष परेशानी नहीं हुई क्योंकि जहाँ वह इतने जानवर पाल रहे थे, वहाँ एक घोड़े को पालने मे भला क्या दिक्कत हो सकती थी लेकिन तेनालीराम को राजा पर बडा गुस्सा आया पर बेचारा और कर भी क्या सकता था लेकिन अपनी तेज बुद्धि से उसने इस मुश्किल का एक विचित्र हल सोच लिया उसने अपने घोड़े को एक कोठरी में बंद कर दियाऔर हर रोज एक निश्चित समय पर कोठरी में लगी एक छोटी सी खिड़की से घोड़े को बहुत थोड़ी सी घास डाल देता

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