Monkey and Crocodile Story in Hindi

 

“बन्दर और मगरमच्छ की यह प्रेरक कहानी आपको बतायेगी कि किस तरह बुद्धिमानी और समझदारी से इन्सान मुसीबतों के चक्रव्यूह से भी बाहर निकल सकता है। उस समय भी जबकि उसका जीवन भीषण संकट के कारण बस समाप्त ही होने वाला हो।”

 

गोदावरी नदी के किनारे खड़े एक विशाल जामुन के पेड़ पर एक बन्दर रहता था। वह बन्दर सरल और सहृदय होने के साथ-साथ चतुर भी था। नदी में ही रहने वाले एक मगरमच्छ के साथ उसकी बड़ी दोस्ती थी। गर्मियों के मौसम में जब उस जामुन के पेड़ पर फल लगते, तो बन्दर उन्हें तोड़-तोड़कर अपने मित्र मगरमच्छ को दिया करता था।

वह सीधा-सादा मगरमच्छ भी नदी के तट पर आकर उन मीठे जामुनों का स्वाद लेता और नदी के अन्दर खिले हुए कमलों को लाकर उस बन्दर को देता था। इस तरह एक-दूसरे का साथ निभाते-निभाते उन्हें काफी समय हो गया। वह मगरमच्छ कभी-कभी उन मीठे और सुन्दर जामुनों को घर ले जाकर अपनी पत्नी को भी खिलाता था।

वह मादा मगरमच्छ भी उन फलों को खाकर बड़ी तृप्त रहती थी। एक दिन उसके मन में विचार आया कि जिस तरह यह जामुन बड़े मीठे हैं, उसी तरह उस बन्दर का दिल भी बहुत मीठा होगा, क्योंकि वह वर्षों से मीठे-मीठे जामुन खा रहा है। उसने अपने पति मगरमच्छ से कहा कि -“देखो जी! मुझे और मेरे बच्चों को मछलियाँ और जामुन खाते-खाते बहुत दिन हो गये हैं। अब तो आप हमें कोई शानदार चीज खिलाइये।

उसके पति मगरमच्छ ने कहा – “अरी भागवान! अब तू ही बता, ऐसा शिकार मै कहाँ से लाऊं? हम तो पानी में रहने वाले जानवर हैं। यहाँ तो बस मछलियाँ ही मिलेंगी। मादा मगरमच्छ बोली – “अगर आप चाहें तो हमे ऐसा शिकार बड़ी आसानी से मिल सकता है। पति मगरमच्छ के पूछने पर उसने कहा – “देखिये आपका वह बन्दर दोस्त जो हमें हर साल मीठे-मीठे जामुन भेजता है, उसका दिल उन मीठे-मीठे जामुनों को खाकर बहुत मीठा हो गया होगा।

बन्दर और मगरमच्छ की प्रेरक कहानी

आज आप हमें उस बन्दर का ही दिल लाकर दीजिये। उसकी ऐसी बाते सुनकर पति मगरमच्छ बोला – “राम-राम! तुम्हे ऐसी बात नहीं कहनी चाहिये। वह बन्दर मेरा बहुत अच्छा दोस्त है और दोस्त के साथ विश्वासघात करना, उसकी जान लेना बहुत बड़ा पाप है। मै ऐसा हरगिज नहीं करूँगा। उस मगरमच्छ की बात सुनकर उसकी पत्नी एकदम से बड़े तैश में आ गयी।

वह बोली – “अगर आपने आज मुझे उस बन्दर का दिल लाकर नहीं दिया, तो मै बच्चों सहित अपनी जान दे दूँगी।” उसकी यह बात सुनकर पति मगरमच्छ ने उसे मनाने की बड़ी चेष्टा की, पर वह कोई बात सुनने को तैयार नहीं हुई। हारकर उसके पति को उसकी बात माननी ही पड़ी।

वह मगरमच्छ नदी के तट पर आया और बन्दर से बहाना बनाकर बोला – “मित्र! आज तुम्हे मेरे साथ मेरे घर चलना होगा, क्योंकि आज मेरी पत्नी तुम्हारी खातिरदारी करना चाहती है। उसकी बात सुनकर बन्दर तुरंत जाने के लिये तैयार हो गया, क्योंकि वह अपने दोस्त पर बहुत भरोसा करता था। लेकिन उसके मन में कहीं एक शंका भी थी, क्योंकि वह वानरों और मगरमच्छों के जातीय बैर के बारे में जानता था।

उधेड़बुन में पड़ा वह बन्दर मगरमच्छ की कमर पर सवार होकर उसके घर की तरफ चलने लगा। लेकिन उसके मन में यह बात खटक रही थी कि आज आखिर इतने दिनों बाद इसकी पत्नी को मेरी आव-भगत करने की क्या जरुरत आन पड़ी? उस चतुर बन्दर ने मीठे-मीठे शब्दों में अपने दोस्त मगरमच्छ से पूछा – “अच्छा मित्र! तुम मुझे अपने घर ले तो जा रहे हो, पर मै वहाँ जाकर मै तुम्हारी पत्नी को क्या उपहार दूँगा?

Hindi Story of Monkey and Crocodile

मगरमच्छ बड़ा सीधा और सरल था। उसने स्पष्ट कहा – अरे यार! तोहफा लाने की क्या जरुरत है, उसे तो बस तुम्हारा दिल चाहिये और वह तो तुम्हारे पास होगा ही। उस मगरमच्छ की बात सुनकर वह बन्दर बहुत डर गया। उसे अपनी मौत बहुत नजदीक नजर आने लगी, क्योंकि वह नदी के बीच गहराई में आ चुका था और खुद तैरकर नदी के किनारे नहीं पहुँच सकता था।

इसलिये उसने धैर्य और चतुराई से काम लिया और नाके से बोला – “अरे भाई! तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया कि तुम मेरा दिल खाना चाहते हो, क्योंकि अपना दिल तो मै उस जामुन के पेड़ पर ही भूल आया हूँ। अगर तुम मुझे नदी के तट पर वापस ले चलो, तो मै अपने दिल को पेड़ से उतारकर फिर तुम्हारे घर चला चलूँगा।”

मूर्ख मगरमच्छ उसकी बातों को सही मानकर उसे नदी के तट पर ले आया। जैसे ही नदी का किनारा आया, वह बन्दर लपककर और बड़ी तेजी से जामुन के पेड़ पर चढ़ गया। फिर वह मगरमच्छ से बोला – “अरे मूर्ख! भला कहीं किसी जानवर के दो दिल भी होते हैं। आज तो तूने मुझे मार ही डाला था। मित्र के रूप में तू इतना बड़ा धोखेबाज निकलेगा, यह बात मै कभी सोच भी नहीं सकता था।”

“अगर आज मैंने समझदारी से काम नहीं लिया होता, तो तुम दोनों दुष्ट पति-पत्नी ने तो मुझे मार ही डाला था। जा अब यहाँ से चला जा और फिर कभी मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना” उस बन्दर की बातें सुनकर मगरमच्छ अपने विश्वासघात और बेवकूफी पर बड़ा लज्जित हुआ और वापस पानी के अन्दर चला गया।

“समझदार को इशारे की कोई आवश्यकता नहीं है, केवल मूर्खों को ही सलाह की आवश्यकता होती है।”
– बिल कोस्बी

 

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