A New Year Resolution in Hindi: Message for The Great People

 

“यदि आपने इस दुनिया में कोई अंतर नहीं पैदा किया है, तो आप चाहे पचास साल जीयें या फिर सौ साल, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। एक मनुष्य की महानता का वास्तविक लक्षण मानवता के स्तर को कुछ ऊपर उठाने में है, फिर चाहे वह इंसान इस दुनिया में सिर्फ कुछ क्षणों के लिये ही क्यों न रहा हो!”
– पवन प्रताप सिंह

 

New Year Resolution and Promises in Hindi

आज जब आप नूतन वर्ष के इस प्रथम दिवस पर इस लेख को पढ़ रहे होंगे तब इन पंक्तियों का लेखक भी यही उम्मीद करता है कि आपके दिल में भी आशा, विश्वास और उमंग का वही प्रवाह उमड़ रहा होगा जैसा कि उसके अपने ह्रदय में। गुजरा साल अपनी खट्टी-मीठी यादें हमारे जेहन में छोड़कर सदा के लिये विदा हो गया है और अब जिंदगी नयी चुनौतियों, नये अवसरों और नयी प्रतिबद्धताओं के साथ हमारे अगले कदम की प्रतीक्षा कर रही है। हो सकता है कि यही वर्ष हमारे सम्पूर्ण जीवन की रूप-रेखा तय कर दे।

और यह भी हो सकता है कि दूसरे गुजरे सालों की तरह यह वर्ष भी बस धीमे-धीमे बीत ही जाय। यह वर्ष हमारे जीवन में कितना परिवर्तन लाने में सक्षम होगा, यह बस हमारा विवेक और संकल्प ही तय करेगा। हम सभी जीवन में उन्नति की आकांक्षा करते हैं, कामयाबी के सपने देखते हैं और उपलब्धियों को जीना चाहते हैं, लेकिन कितने लोगों को वह वास्तव में मिल पाता है जिसकी वह आरजू करते रहे हैं और जब व्यक्ति को उसकी इच्छित चीज नहीं मिलती, तब दुःख होना स्वाभाविक है।

मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाय तो निराश होने या दुःखी होने में कुछ भी गलत नहीं है। जब पीड़ा की तीव्रता व्यक्ति की सहन शक्ति से परे चली जाती है, तो दुःख और निराशा अनचाहे मेहमान के रूप में उभर ही आते हैं। हमारे जीवन में जो भी समस्याएँ हैं उनमे सर्वाधिक दुःसह बात बस उनकी अवधि की है। वह जितनी जल्दी दूर हो जाती हैं, हम उतना अच्छा अनुभव करने लगते हैं। दुनिया के सभी लोगों की मुश्किलों और मुसीबतों के कारण एक जैसे ही हैं। देखा जाय तो दुःख कुछ इस प्रकार से, इन रूपों में हमारे जीवन में प्रवेश करता है –

Our Eternal Problems हमारी शाश्वत समस्याएँ

1. असफलता – जब पर्याप्त योग्यता और परिश्रम करने के पश्चात भी कोई व्यक्ति वह न हासिल कर पाये जिसका वह अधिकारी है और जो अयोग्य व्यक्ति को योग्यता और पुरुषार्थ के अभाव में आसानी से प्राप्त हो जाय।

2. बीमारी – जो हमारे शरीर की शक्ति को चूसकर हमें पीड़ा और कष्टों के दलदल में फँसाये रखती है और जीवन की अभिलाषाओं का गला घोंट देती है।

3. गरीबी – जो गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार संसार का सबसे बडा दुःख है और व्यक्ति को कदम-कदम पर अपमानित, निर्बल और असहाय महसूस कराती है।

4. कुसंगति – जब कोई दुष्ट लोगों से बचना चाहता हुआ भी परिस्थितिवश उनके चंगुल में फंस जाय (स्वैच्छिक कुसंग नहीं) और शरीर और मन, दिन-रात की तड़प सहने को मजबूर हो।

5. अज्ञात – अज्ञात दुःख वह दुःख हैं जो अप्रत्याशित और अस्वाभाविक रूप से व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करते हैं और जितनी तेजी से आते हैं प्रायः उतनी तेजी से दूर नहीं होते।

दुःख आखिर है क्या – एक वाक्य में कहा जाय तो “जीव की इच्छा के प्रतिकूल स्थिति ही दुःख है”, फिर चाहे वह दुःख सिर्फ एक विचार से क्यों न उत्पन्न हुआ हो। दुःख हर इंसान के जीवन में दस्तक देता है फिर चाहे वह दो पल के लिये क्यों न ठहरा हो। जन्म से लेकर मृत्यु तक की कालावधि में इस धरती पर शायद ही कोई ऐसा इंसान बचा होगा जिसने कभी भी दुःख न सहा हो।

दुःख का स्वरुप अलग हो सकता है, पर पीड़ा का अहसास वही रहता है। हाँ इच्छाशक्ति के बल पर उससे एक सीमा तक तटस्थ अवश्य रहा जा सकता है। अब जरा लोगों की उन इच्छाओं और संकल्पों पर ध्यान दीजिये जो नव वर्ष पर आम हैं –

Common New Year Resolutions नये साल पर सबसे अधिक लिये जाने वाले संकल्प

हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार यह 10 संकल्प दुनिया भर के लोगों द्वारा नये साल पर सबसे ज्यादा लिये जाने वाले संकल्प हैं। जाहिर है कि जो लोग संकल्प लेते हैं उनमे महत्वाकांक्षा के साथ-साथ अपने इच्छित उद्देश्य को पाने की अभीप्सा भी होती है। यह उनकी जागरूकता, निष्ठा, आत्मवलोकन और संकल्प शक्ति को भी दर्शाता है। सदुद्देश्य से संकल्प लेना निश्चय ही एक अच्छी बात है, क्योंकि जिनका जीवन सिर्फ समय काटने की दृष्टि से बीत रहा है, वह अपनी अमूल्य संपदा को व्यर्थ ही गँवा रहे हैं –

1. मै अपना वजन कम कर लूँगा।

2. मै शराब, सिगरेट और नशे की बुरी आदत छोड़ दूँगा।

3. मै अब नियम से हर रोज सुबह घूमने जाउँगा।

4. मै अब मन लगाकर पढूंगा, वक्त बर्बाद नहीं करूँगा।

5. मुझे इस साल पैसे बचाकर नई बाइक, कार या घर आदि लेना है।

6. मै स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दूँगा और अहितकर भोजन आदि खाना छोड़ दूँगा।

7. मै आज से झगडा या गुस्सा करना (अपनी कोई बुरी आदत) छोड़ दूँगा।

8. मै बुरे लोगों, गलत साथियों का साथ छोड़ दूँगा।

9. मै अपने बच्चों और परिवार के लिये अधिक समय निकालूँगा।

10. मै अपने जीवन को आध्यात्मिक बनाने का प्रयास करूँगा।

अब जरा उपर दिये गये दोनों शीर्षकों (दुःख और उनसे बचने के लिये किये जाने वाले संकल्प) पर गौर करिये। क्या हमारे यह संकल्प हमारी उन गलत आदतों की तरफ संकेत नहीं करते जिनके कारण हमारे जीवन में कई तरह की समस्याएँ उठ खड़ी हुई हैं? क्या यह संकल्प दुःख से बचने की, सुख प्राप्ति की हमारी शाश्वत इच्छा को नहीं दर्शाते हैं? इनमे से अधिकाँश इच्छाएँ थोड़े संकल्पबल से आसानी से पूरी हो सकती हैं, लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि अपने मनुष्योचित गौरव को और अधिक ऊँचे स्तर तक पहुँचाने के लिये हमें इन छोटी इच्छाओं से भी आगे बढ़ना आवश्यक है।

इससे पहले कि आगे कुछ और लिखा जाय मै आपको महान कवि हेनरी वर्ड्सवर्थ (Henry Wordsworth Longfellow) की जीवन के सम्बन्ध में यह छोटी सी कविता पढने के लिये कहूँगा और साथ ही कहूँगा, इस पर गहराई से विचार करने के लिये भी, ताकि आप इसमें समाहित संदेश का अनुभव कर सकें। मै यह ह्रदय से मानता हूँ कि इस कविता का हिंदी अनुवाद करने लायक काव्य प्रतिभा मुझमे नहीं है, लेकिन यह सोचते हुए कि इससे हमारे विद्वान पाठकों को समझने में कुछ आसानी रहेगी, मैंने यह तुच्छ प्रयास किया है। आशा है गलतियों के लिये विद्वज्जन क्षमा करेंगे –

A Call to Great People महान लोगों का जीवन सन्देश

Lives of great men all remind us
We can make our lives sublime,
And departing leave behind us
footprints on the sands of time-

Footprints that perhaps another,
Sailing o’ver life’s solemn main,
A forlorn and ship-wrecked brother’
Seeing, shall take heart again.

Let us, then be up and doing,
With a heart for any fate;
Still achieving, still pursuing,
Learn to labour and to wait.

महान लोगों की जिंदगी देती है सन्देश हम सभी को
गौरवशाली बना सकते हैं हम भी अपने जीवन को,
जब हम पद-चिन्ह छोड़कर दुनिया से रुख्सत होंगे,

तब वक्त की रेत पर छपे हमारे निशान सदा मौजूद होंगे
जब कहीं कोई थका नाउम्मीद राही उन्हें देखेगा,
तब उसके टूटते दिल में भी नई आशा का संचार होगा

इसीलिये आओ खड़े होकर हम सब अब जुट जाँय,
और दिल से हर किस्मत का सामना करने को तैयार हो जाँय
सीखें कड़ी मेहनत करना और साथ ही इंतजार भी
ताकि हर दिन चूम सके कामयाबी की नयी बुलंदी,

सभी नहीं तो अधिकाँश लोग नव वर्ष पर कोई न कोई अच्छा काम करने का संकल्प अवश्य लेते हैं। फिर चाहे वह किसी बुरी आदत को छोड़ना हो या कोई सामयिक उपलब्धि हासिल करनी हो। लेकिन हमारी दृष्टि में नव वर्ष का दिन अपनी असीम सामर्थ्य को पहचानने का एक सुनहरा अवसर है। यह एक Wake Up Call है जो आपको अपने जीवन के साथ-साथ दूसरों के जीवन में भी परिवर्तन लाने का सन्देश देती है।

यह इस बात का बोध कराता है कि इस जीवन के लिये निश्चित हुई आयु में से एक वर्ष और कम हो गया है और अब आपको एक महिमावान, उच्चतर जीवन जीने की तैयारी करनी चाहिये। जरा सोचिये –

1. क्या आप नहीं चाहते कि आप ऐसा जीवन जीयें जो न केवल आपको संतोष दे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भी मार्गदर्शन करे?

2. क्या आपको नहीं लगता कि जो बदलाव आप इस दुनिया में देखना चाहते हैं, वह पहले आपके अपने जीवन में झलकना चाहिये?

3. क्या आप नहीं चाहेंगे कि जब आप इस दुनिया को छोड़कर जाँय तो यह उससे अधिक बेहतर स्थिति में हो, जैसा कि यह आपके समय में थी?

4. क्या आप नहीं चाहते कि इस संसार से कष्ट, अत्याचार, पाखंड, मूढ़ता और भ्रष्टाचार का आतंक समाप्त हो?

Real Measure of Greatness महानता की कसौटी

याद रखिये! आपके जीवन की सफलता का स्तर आपके दृढ विश्वास से निर्धारित होता है; अगर आपके लक्ष्य छोटे होंगे, तो आपकी सफलता भी छोटी ही होगी। यदि आप चाहते हैं कि अगली पीढ़ी आप पर गर्व कर सके तो नव वर्ष के संकल्पों को उच्चतर आयाम दीजिये। स्वयं को एक महान व्यक्ति बनाइये। महान होने का अर्थ प्रसिद्ध होना नहीं है, महान होने का अर्थ बहुत अमीर होना भी नहीं है, जिसे सब जानते हों वह भी महान नहीं है। कवि, लेखक, राजनेता, शासक, कलाकार, पेशेवर चाहे जो कोई भी हो वह तब तक महान नहीं है, जब तक कि उसने अपने चरित्र का हर दोष खोजकर दूर न कर दिया हो।

जब तक कि उसने अपनी वासनाओं की आँधी को न थाम लिया हो और जब तक कि उसने अपने अधिकार की वस्तु, असहाय और अशक्तों को निःस्वार्थ भाव से उदारतापूर्वक न दे दी हो। इस दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विचारकों, दार्शनिकों और महापुरुषों ने महानता की यही कसौटी निर्धारित की है। आप महानता की ओर अग्रसर होंगे, यदि आप अपने जीवन को परिवर्तित करने के उद्देश्य से यह संकल्प लेकर चल रहे हैं जो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी द्वारा प्रतिपादित हैं –

“आइये प्रतिज्ञा करें कि हम अपने दिन की प्रत्येक सुबह की शुरुआत इन क्रियाकलापों से करेंगे –

मै धरती पर किसी से नहीं डरूंगा।
मै केवल भगवान से ही डरूंगा।
मै किसी के भी प्रति दुर्भावना नहीं रखूँगा।
मै किसी के भी अन्याय के सामने नहीं झुकूँगा।
मै असत्य को सत्य से जीतूँगा। और असत्य का विरोध करने के लिए, मै सारे दुःख उठाऊंगा।
मै कभी दूसरों पर अत्याचार नहीं करूँगा।
मै कभी गलत तरीके से संपत्ति अर्जित नहीं करूँगा।
मै स्त्रियों का हमेशा सम्मान करूँगा।”

Realise Your Potential अपनी क्षमता को जानिये

निश्चित रूप से इन सब बातों को आचरण में उतारने के लिये प्रबल इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। लेकिन यदि आप जैसे योग्य, उच्च शिक्षित, उत्साही और विवेकशील व्यक्ति भी इन संकल्पों को अपने जीवन में नहीं उतार सकेंगे, तो फिर वह लोग कैसे हिम्मत करेंगे जो आपसे भी अधिक दीन-हीन दशा में हैं। “यकीनन मनुष्य जीवन कष्टों से भरा है और सभी को भगवान का नाम लेते हुए हर चीज़ धैर्यपूर्वक सहन करनी है। कोई भी नहीं, यहाँ तक कि भगवान भी मनुष्य रूप में, शरीर और मन के कष्टों से बच नही सके हैं।”

इसीलिये डरिये मत, बल्कि एक शूरवीर की तरह डटकर खड़े हो जाइये और आज इस नये वर्ष के दिन स्वयं को एक अच्छा मनुष्य, एक महान इंसान बनाने का संकल्प कीजिये। क्योंकि मनुष्य वही बनता है, जैसा वह सोचता है कि वह है। यदि हमें यह विश्वास हो कि हम यह काम नहीं कर सकते, तो यह विचार ही हमें उस कार्य के लिये अक्षम बना देता है पर अगर मुझे यह विश्वास है कि मै इसे कर सकता हूँ तो यह क्षमता न होने पर भी अपेक्षित शक्ति का विकास स्वतः ही हो जाता है।

ध्यान दीजिये वो इंसान कभी भी नाकामयाब नहीं हो सकता है जिसने अपना साहस, अपना आत्म-सम्मान, अपना चरित्र और अपना आत्म-विश्वास नहीं खोया है। इस दुनिया में हजारों प्रतिभाएँ गुमनामी में रहकर जीती हैं और मर जाती हैं, या तो स्वयं की वजह से या फिर दूसरों के कारण। अगर आप चाहते हैं कि आप इस दुनिया में अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरे, तो आपको अपनी क्षमताओं में दृढ विश्वास करना ही होगा। क्योंकि स्वामी विवेकानंद के अनुसार आपके अपने आत्मा के अलावा, आपका कोई दूसरा शिक्षक नहीं है।

“अपने जन्मजात पराक्रम और शक्ति का परिचय दीजिये। सही कर्म के लिये सही निश्चय कीजिये। कठोर परिश्रम को पूरे जोरों से कीजिये…और तब आप निश्चित ही वह होंगे जो आप स्वयं को देखना चाहते थे।”
– महर्षि वेद व्यास

 

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