Smallest and Largest Oceans in The world in Hindi

 

Facts about Largest Oceans of The World in Hindi
Source: Pixabay  अथाह जल राशि का भंडार अंतहीन महासागर – The Indian Ocean

Know Facts about Smallest, Biggest and Deepest Oceans of The World : –

World Facts की इस अनोखी श्रंखला में हम आपको पहले ही दुनिया की सबसे बड़ी नदियों, झरनों, ज्वालामुखियों, झीलो और रेगिस्तानों के बारे में बता चुके हैं। संसार के दस सबसे बड़े सागरों के विषय में भी आप पहले ही पढ़ चुके हैं। आज हम आपको बतायेंगे दुनिया के सबसे बड़े और विशाल पाँच महासागरों के अदभुत आँकड़ों के बारे में, जिनके सम्बन्ध में लोगों को कम ही जानकारी है।

अन्य लोगों की तरह, इस प्रकृति की कई रहस्यमय चीज़ें हमें भी अपनी ओर आकर्षित करती हैं। उनमे से एक यह अंतहीन महासमुद्र भी हैं। आपमें से कई लोग यह सोचते होंगे कि आखिर सागर और महासागर में क्या अंतर है, जबकि वे दोनों ही अथाह जलराशि का भंडार होते हैं।

इसका सरल सा उत्तर यह है कि जहाँ सागर का क्षेत्र किसी एक या एक से अधिक देश की सीमा तक ही सीमित होता है, वहीँ महासागर का क्षेत्र एक या एक से अधिक महाद्वीप तक विस्तृत होता है। कुछ महासागर तो इतने अधिक विशाल है कि उनमे दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीप तक समा जाँ।

इन सभी महासागरों का वर्गीकरण और इनके जलीय क्षेत्र का सीमांकन International Hydrographic Organization करता है। यह एक inter-governmental organization है जिसकी स्थापना सन 1921 में हुई थी। इसका मुख्यालय मोनाको में है और 100 से भी अधिक देश इसके सदस्य हैं। आइये अब जाने World Oceans के Incredible Facts!

 

1. The Pacific Ocean प्रशांत महासागर : –

प्रशांत महासागर विश्व का सबसे बड़ा और सबसे गहरा महासागर है। इसका कुल क्षेत्रफल 165,250,000 वर्ज किमी (63,800,000 वर्ग मील) है। यह कितना बड़ा है इस बात का अंदाजा आप इस तथ्य से लगा सकते हैं कि यह महासागर पृथ्वी की सतह के कुल क्षेत्रफल का एक तिहाई हिस्सा है और धरती की सतह पर उपलब्ध कुल जल का लगभग 46 प्रतिशत जल इस महासागर में समाहित है।

अधिक क्या कहें यह धरती के संपूर्ण स्थल भाग, इन समस्त महाद्वीपों के कुल क्षेत्रफल यानि धरती के सम्पूर्ण स्थलीय भाग (150,000,000 वर्ग किमी) से भी ज्यादा बड़ा है। यह उत्तर में आर्कटिक महासागर से लेकर दक्षिण में अंटार्कटिका महाद्वीप या दक्षिणी महासागर तक फैला हुआ है। इसके पूर्वी छोर पर उत्तरी और दक्षिणी अमेरिकी महाद्वीप हैं तो पश्चिमी छोर पर एशिया और ऑस्ट्रेलिया।

प्रशांत महासागर की औसत गहराई 4,280 मीटर (14,040 फीट) है। न केवल विश्व के सभी महासागरों का, बल्कि पृथ्वी का सबसे गहरा स्थान भी इसी महासागर में स्थित है, जिसे मेरियाना ट्रेंच (Marianas Trench) के नाम से जाना जाता है। इसका पता सन 1875 में चैलेंजर मिशन (Challenger Expedition) के एक खोजी वैज्ञानिक दल ने लगाया था।

जो कप्तान जॉर्ज नरेस Captain George Nares के नेतृत्व में महासागरों के विषय में जानकारी इकट्ठा कर रहा था। यह स्थान फिलीपींस द्वीप समूह के पूर्व में स्थित मरिआना द्वीप (Marianas Islands) के 200 किमी पूर्व में है। इसका सबसे गहरा स्थान जिसे Challenger Deep के नाम से जाना जाता है की गहराई (समुद्र तल से) लगभग 11,034 मीटर (36,201 फीट) है।

सबसे पहले सन 1960 में अमेरिकी अन्वेषक जैक्स पिक्कार्ड (Jacques Piccard) ने इस दूरस्थ स्थान को छुआ था। मेरियाना ट्रेंच कितना गहरा है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि अगर माउंट एवेरेस्ट (8,848 मीटर) को इस जगह रख दिया जाय तब भी इसकी चोटी समुद्र के भीतर लगभग 2 किमी की गहराई तक डूबी रहेगी।

आश्चर्य की बात यह है कि इतनी अधिक गहराई पर भी, जहाँ वायुमंडलीय दाब 1000 बार से भी अधिक रहता है, जीवों की कई प्रजातियाँ देखी गयी हैं। प्रशांत महासागर की कुल तटीय सीमा 135,663 किमी (84,297 मील) है जो सभी महासागरों में सर्वाधिक है। प्रशांत महासागर का कुल आयतन लगभग 710,000,000 किमी3 माना गया है जो इसकी अथाह जलराशि का संकेत करता है।

भूमध्य रेखा (विषुवत रेखा) इस महासागर को दो हिस्सों में बाँटती है। विषुवत रेखा के उत्तर का भाग उत्तरी प्रशांत महासागर और रेखा के दक्षिण का भाग दक्षिणी प्रशांत महासागर कहलाता है। 42 से भी ज्यादा देशों की सीमाएँ इस विशाल और असीम महासागर को स्पर्श करती हैं।

2. The Atlantic Ocean अटलांटिक महासागर : –

अटलांटिक महासागर विश्व का दूसरा सबसे बड़ा महासागर है। इसका कुल क्षेत्रफल 106,460,000 वर्ज किमी (41,100,000 वर्ग मील) है। पृथ्वी की सतह के कुल क्षेत्रफल का लगभग 20 प्रतिशत और इसके जलीय भाग का लगभग 29 प्रतिशत जल इस महासागर का हिस्सा है। अटलांटिक महासागर के पूर्व में एशिया, यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप हैं तो इसके पश्चिम में उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप।

उत्तर में इसकी सीमाएँ आर्कटिक महासागर को छूती हैं तो दक्षिण-पश्चिम में प्रशांत महासागर को। दक्षिण-पूर्व दिशा में हिंद महासागर इसे स्पर्श करता हैं, तो वहीँ सुदूर दक्षिण में दक्षिणी महासागर। इस तरह देखा तो यह सभी महासागर, एक विश्वव्यापी एकीकृत महासागर का ही हिस्सा हैं क्योंकि यह सभी एक-दूसरे से भौगोलिक रूप से जुड़े हुए हैं।

अटलांटिक महासागर की औसत गहराई 3,646 मीटर (11,962 फीट) है। इसका सबसे गहरा स्थान प्युर्टोरिको ट्रेंच में स्थित मिलवाकी डीप (Milwaukee Deep) है, जिसकी गहराई 8,486 मीटर (27,841 फीट) है। यह स्थान कैरेबियन सागर और अटलांटिक महासागर के बीच की सीमा पर स्थित है, जहाँ वेस्टइंडीज के अनेकों द्वीप समूह में से एक प्युर्टोरिको द्वीप भी हैं।

इसी के नाम पर इस ट्रेंच (खाई) का नामकरण किया गया है। अटलांटिक को सभी महासागरों में सबसे अधिक खारा माना जाता है। दुनिया की प्रसिद्द गर्म जलधाराओं में से एक गल्फ स्ट्रीम तथा नार्थ अटलांटिक करंट, अटलांटिक महासागर की सतह के बहाव और महासागरीय जलवायु को नियंत्रित करती हैं। यह धाराएँ उत्तरी अमेरिकी तट से उत्तर-पूर्व दिशा में चलती हैं।

अटलांटिक महासागर की सीमाएँ पूर्व दिशा में स्थित भूमध्य सागर, बाल्टिक सागर और काला सागर से भी मिलती हैं। अटलांटिक महासागर की कुल तटीय सीमा 111,866 किमी (69,510 मील) है, जो प्रशांत महासागर के बाद सबसे ज्यादा है। इसका कुल आयतन 310,410,900 किमी3 है। दुनिया के सबसे रहस्यमय स्थानों में से एक बरमूडा ट्रायंगल भी इसी महासागर का ही एक हिस्सा है।

सर्दियों के मौसम में जब ठण्ड बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो इसके कई हिस्सों में तैरते हुए बड़े-बड़े हिमशैल (Icebergs) भी देखे जा सकते हैं, जो कई बार जहाजों के लिये खतरा बन जाते हैं। यह पुरानी दुनिया (एशिया और यूरोप) को नयी दुनिया (अमेरिकी महाद्वीप) से अलग करता है। लगभग 50 से भी ज्यादा देशों की सीमाएँ अटलांटिक महासागर से लगी हुई हैं। दुनिया के सबसे व्यस्त जलीय व्यापारिक मार्ग भी इससे ही होकर गुजरते हैं।

3. The Indian Ocean हिंद महासागर : –

हिंद महासागर विश्व का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है। इसका कुल क्षेत्रफल 70,560,000 वर्ज किमी (27,240,000 वर्ग मील) है। पृथ्वी की सतह के कुल क्षेत्रफल का लगभग 15 प्रतिशत और इसकी सतह पर उपलब्ध जल का लगभग 20 प्रतिशत भाग इस महासागर में समाहित है। हिन्द महासागर का नाम भारतीय उपमहाद्वीप के नाम पर रखा गया है, क्योंकि भारत इस क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा देश है।

यह महासागर उत्तर में एशिया, पश्चिम में अफ्रीका, पूर्व दिशा में ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप और दक्षिण में अंटार्कटिका या यह कहें कि दक्षिणी महासागर से घिरा हुआ है। इसके एक ओर अटलांटिक महासागर है तो दूसरी ओर प्रशांत महासागर है। यह महासागर स्वेज नहर के जरिये भूमध्य सागर से भी जुड़ा हुआ है। हिंद महासागर की औसत गहराई 3,741 मीटर (12,274 फीट) है।

इसका सबसे गहरा भाग डायमंटिना ट्रेंच में स्थित डायमंटिना डीप है, जो लगभग 8,047 मीटर (26,401 फीट) गहरा है। यह स्थान ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर से 1125 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम दिशा में है। कुछ Geologists के अनुसार Java Trench, Indian Ocean का सबसे गहरा स्थान है, जो जावा द्वीपसमूह के निकट पड़ता है। हिन्द महासागर का संपूर्ण हिस्सा पूर्वी गोलार्ध में ही पड़ता है।

और पूर्वी गोलार्ध का केंद्र भी इसी महासागर के ही अन्दर पड़ता है। जैसे प्रशांत महासागर विश्व का सबसे ठंडा महासागर है, उसी तरह हिन्द महासागर भी संसार का सबसे गर्म महासागर है। इस महासागर का मुख्य जलस्रोत इसमें गिरने वाली बड़ी नदियाँ हैं जो अपनी विपुल जलराशि इस महासमुद्र में उड़ेलती है। जैसे – शत-अल-अरब, सिन्धु, जाम्बेजी, गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा, गंगा, ब्रह्मपुत्र, इरावदी आदि

इस महासागर की जलधाराएँ मुख्य रूप से मानसून द्वारा नियंत्रित की जाती हैं। एशिया और अफ्रीका में पड़ने वाले कई सागर, इस महासागर का ही हिस्सा माने जाते हैं। जिनमे प्रमुख हैं – बंगाल की खाड़ी, अरब सागर, फारस की खाड़ी, खम्भात की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी, लाल सागर और अंडमान सागर। दुनिया की कुछ सबसे पुरानी सभ्यताएँ भी इसी महासागर के क्षेत्र में पड़ने वाले देशों में पनपी थीं।

हिंद महासागर की अधिकतम चौड़ाई 10,000 किमी है तथा इसका कुल आयतन 264,000,000 किमी3 है। हिन्द महासागर का समुद्री क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त जलीय व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। संसार का 80 प्रतिशत से भी अधिक तेल और गैस का व्यापार इसी क्षेत्र से होता है। दुनिया के कुछ सबसे महत्वपूर्ण और विशाल बंदरगाह भी इसी के क्षेत्र में पड़ते हैं। लगभग 50 देशों की सीमाएँ हिन्द महासागर से मिलती हैं।

4. The Southern Ocean दक्षिणी महासागर : –

दक्षिणी महासागर दुनिया का चौथा सबसे बड़ा महासागर है। इसे अंटार्कटिक महासागर या ऑस्ट्रल महासागर के नाम से भी जाना जाता है। इसका कुल क्षेत्रफल 20,327,000 वर्ज किमी (7800000 वर्ग मील) है। इसकी औसत गहराई 4,000 से 5,000 मीटर तथा तटीय सीमा 17968 किमी है। सन 2000 ई0 से पूर्व तक विश्व में केवल चार ही महासागर थे।

लेकिन International Hydrographic Organization के भूगर्भ विज्ञानियों के समुदाय ने भौगोलिक क्षेत्रों के सरल पृथक्करण के लिये वर्ष 2000 में एक नये महासागर की रचना की और अब यह आधिकारिक रूप से दुनिया का पाँचवा महासागर है। पहले अंटार्कटिका महाद्वीप के चारों ओर फैला समुद्री क्षेत्र आर्कटिक महासागर में सम्मिलित था, लेकिन अब इसे एक नया नाम दे दिया गया है।

आकार में यह महासागर संयुक्त राज्य अमेरिका से लगभग ढाई गुणा बड़ा है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि अंटार्कटिका महाद्वीप के चारों ओर फैला प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर का वह जल जो 60 डिग्री दक्षिण अक्षांश तक है वह दक्षिणी महासागर के नाम से जाना जाता है। यह नया महासागर सिर्फ अंटार्कटिका तक ही सीमित है।

इसका सबसे गहरा बिंदु समुद्र तल से 7235 मीटर नीचे दक्षिण सैंडविच ट्रेंच ( South Sandwich Trench) में है। भूगर्भविज्ञानियों के मुताबिक इस महासागर में तेल और गैस का बहुत बड़ा भंडार छिपा हुआ है। Biodiversity की दृष्टि से भी यह दुर्लभ प्रजातियों के अनेकों पशु-पक्षियों का निवास-स्थान है।

5. The Arctic Ocean आर्कटिक महासागर : –

लगभग 14,056,000 वर्ज किमी (5,427,000 वर्ग मील) क्षेत्रफल के साथ आर्कटिक महासागर दुनिया के पाँचो महासागरों में सबसे छोटा और सबसे उथला महासागर है। इसका अधिकांश भाग उत्तरी गोलार्द्ध के मध्य में स्थित आर्कटिक उत्तर ध्रुवीय क्षेत्र में पड़ता है। इसका क्षेत्रफल लगभग अंटार्कटिका महाद्वीप के बराबर ही है। आर्कटिक महासागर की औसत गहराई 1,038 मीटर (3,406 फीट) है।

इस महासागर का सबसे गहरा स्थान यूरेशियन बेसिन में स्थित लाइक डीप (Litke Deep) है जिसकी गहराई 5,450 मीटर (17,880 फीट) है। आर्कटिक महासागर चारों ओर से एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका महाद्वीप तथा ग्रीनलैंड और अन्य कई द्वीपों से घिरा हुआ है। यह महासागर उत्तरी ध्रुव के चारों ओर फैला हुआ है जो कि दुनिया के सबसे अधिक ठंडे स्थानों में से एक है।

इस कारण से यह महासागर लगभग पूरे वर्ष आंशिक रूप से जमा रहता है और सर्दियों के दिनों में बर्फ की मोटी-मोटी परतों से ढका रहता है। आर्कटिक अन्य सभी महासागरों की तुलना में सबसे कम खारा है, क्योंकि यह दूसरे महासागरों से सीमित रूप से ही जुड़ा है। इसके अतिरिक्त ध्रुवीय क्षेत्र में होने के कारण इसका पानी अधिक नहीं उड़ता है और नदियाँ भी निर्बाध रूप से इसमें जल की आपूर्ति सतत करती रहती हैं।

आर्कटिक महासागर बेरिंग स्ट्रेट के जरिये प्रशांत महासागर और ग्रीनलैंड तथा लैब्राडोर समुद्र के जरिये अटलांटिक महासागर से जुडा हुआ है। इस महासागर के ऊपर पूरे वर्ष बादल और धुंध छाई रहती है, क्योंकि यहाँ का तापमान गर्मियों में भी शून्य डिग्री के आस-पास ही रहता है। फिर भी एक आश्चर्यजनक बात यह है कि सर्दियों में इस महासागर की सतह का तापमान अंटार्कटिका की तरह शून्य से कई डिग्री नीचे नहीं जाता है।

बल्कि स्थिर ही रहता है, क्योंकि समुद्री जल का घनत्व हिमांक बिंदु के निकट जाने पर ताजे पानी की तुलना में अधिक बढ़ता है और यह डूबना आरम्भ कर देता है। सर्दियों में अपेक्षाकृत गर्म महासागरीय जल, बर्फ से ढके होने के बावजूद एक हल्का सा प्रभाव डालता है। आर्कटिक महासागर की तटीय सीमा की लम्बाई 45,390 किमी (28,200 मील) है।

इसका कुल आयतन 18070000 किमी3 है। रूस, नॉर्वे, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका इस महासागर की सीमाओं से लगते देश हैं। आर्कटिक महासागर में कुछ दुर्लभ जीव पाये जाते हैं जिनमे वालरस, व्हेल, ध्रुवीय भालू और जेलीफिश शामिल हैं। हमें आशा है कि इस लेख से आपको पृथ्वी के इन विशाल महासागरों के बारे में कुछ जानकारी अवश्य ही हो गयी होगी।

इन सभी के बारे में विस्तार से वर्णन करना एक छोटे से लेख में संभव भी नहीं है। यहाँ हमारा उद्देश्य सिर्फ अपने विश्व और पृथ्वी से संबंधित उन मूलभूत जानकारियों को साझा करना है जिनकी एक शिक्षित और जागरूक व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है ताकि हम अपनी स्वयं की और उन लोगों की मदद कर सकें जो वास्तव में जानने के इच्छुक हैं।

“यदि आप एक जहाज बनाना चाहते हैं, तो लोगों को लकड़ी लाने के लिए, काम बांटने के लिए और आदेश देने के लिए नगाड़ा पीटकर इकठ्ठा मत कीजिये। इसके बजाय उन्हें अत्यंत विस्तृत और अंतहीन समुद्र के लिए ललकारना सिखाइए।”
– एंटोनी डी सेंट एक्सुपेरी

 

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