ABOUT JIVANSUTRA

“इस प्रकार के मनुष्य बनिए और इस प्रकार का जीवन जीयें, ताकि हर मनुष्य आपके जैसा बन जाये और आपके जैसा ही जीवन जीयें, तो यह धरती स्वर्ग बन जाएगी।”
– फिलिप ब्रुक्स

 

प्रिय मित्रों,
जीवनसूत्र पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है। इस ब्लॉग की शुरुआत 10 दिसंबर 2013 को हुई और इसे शुरू करने के पीछे यही उद्देश्य रहा है कि जीवन को खुशहाल और उद्देश्यपूर्ण बनाने वाले, श्रेष्ठ और सकारात्मक विचारों को सारे संसार में फैला दिया जाय, जिससे प्रत्येक व्यक्ति एक ऐसा जीवन जीने को प्रेरित हो, जहाँ सुख और संतोष उसके पल-पल के साथी हों। किसी का भी जीवन दुःख, निराशा और नकारात्मकता से न भरा हो।

सभी का जीवन दिव्यता से परिपूर्ण हो और एक आनंदमय जीवन जीते हुए सभी जीवन के उद्देश्य को प्राप्त कर सकें। इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को एक श्रेष्ठ सुखद व संतुलित जीवन के रूप में ढालना चाहता हैं। हम सभी जीवन भर यह प्रयास करते है कि हम जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे आगे रहें, लोग हमारा सम्मान करें, अच्छे कामो के कारण सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त हो और सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों ही क्षेत्र में हम सफल हो सके।

निश्चित रूप से हम सभी इतने समर्थ है कि जीवन को उस शाश्वत आनंदपूर्ण अवस्था तक ले जा सकें, जहाँ हमें किसी चीज़ का अभाव महसूस न हो, लेकिन दो कारणों से हम अपने जीवन को उस तरह नहीं ढाल पाते, जैसी हमारी अभिलाषा रही है। यह दो कारण है –

1. Immaturity & Irregularity of Thoughts (विचारों की अपरिपक्वता और अनियमितता)
2. Lack of Indomitable Willpower (दृढ इच्छाशक्ति का अभाव)

अपने जीवन में अगर हम इन दो बातों पर नियंत्रण कर ले, तो उन्नति के सारे रास्ते खुल जाते है। बड़े काम, बड़ी सफलताएँ सभी बड़े त्याग की मांग करते हैं। चलना तो हम सभी चाहते हैं, पर उतना समर्पण और धैर्य हममें नही होता कि वैसे बन पॉए। शायद इसलिए ये सभी बातें केवल महापुरूषों के, महान व्यक्तियो के जीवन मे ही उतर पाती हैं। फिर भी एक बेहतर जीवन के लिए, एक सफल जीवन के लिए हमें स्वयॅ के स्वभाव और दृष्टिकोण मे कुछ परिवर्तन तो अवश्य लाना होगा।

अपने विचारो और चरित्र को श्रेष्ठ बनाना ही होगा, अन्यथा एक प्रगतिशील और उच्चतर जीवन जीने की लालसा, एक सपना ही बन कर रह जाएगी। आज के इस अत्याधुनिक भागदौड के वातावरण मे, जाने अनजाने मे ही, कब हमारे जीवन मे नकारात्मकता का प्रवेश हो जाता है, पता ही नही चलता। बस पता रहता है तो उस negativity के हम पर पडने वाले दुष्प्रभावों का। चिंता, दुःख, तनाव, उत्तेजना, मन का न लगना ये सब Negative Lifestyle के ही दुष्परिणाम है।

श्रेष्ठ विचारों के माध्यम से इस नकारात्मक विचारधारा को हटाना ही, जीवनसूत्र का मुख्य उददेश्य है। विचारों का इतना महत्व देखते हुए इसे इन सूत्रों पर केंद्रित करने का प्रयास किया गया है। कोशिश यही रहेगी कि ब्लॉग के सभी लेख इन सूत्रों पर केंद्रित रहें। यह पॉंच जीवनसूत्र हैं –

1. उच्च आदर्शों और सिद्धान्तों से युक्त जीवन जीने की प्रेरणा देना।

2. श्रेष्ठ विचारों के माध्यम से व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास करना।

3. जीवन मे उपलब्ध साधनों और अवसरों का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रेरित
करना।

4. सफलता और जीवन के उददेश्य की प्राप्ति हेतु, उच्चस्तरीय चरित्र का विकास करना।

5. कल्पनाशक्ति व ज्ञान का विकास करते हुए जीवन प्रबंधन के लिए प्रेरित करना।

गहराई से ध्यान दे पॉए तो पता चलेगा कि विचार, चरित्र, जीवन और सफलता का आपस मे बडा गहरा संबंध है। चरित्र, जीवन और सफलता ये तीनो कहीं न कहीं एक Noble Thinking पर टिके हुए हैं। जैसे हमारे विचार रहते है उसी प्रकार से हमारा चरित्र और जीवन भी ढलते चले जाते हैं। सफलता भी श्रेष्ठ विचारों पर टिकी है। शायद इसीलिए David Bohm ने कहा है “अपनी वास्तविकता को बदलने के लिए आपको अपने आंतरिक विचारों को बदलना होगा”।

इसके अलावा अच्छे विचार हर जगह Positivity create करते है जिससे न केवल अपनी जानकारी ही बढती है बल्कि अच्छे कार्यों के लिए प्रेरणा और मन-मस्तिष्क को शांति तथा सूकुन भी मिलता है। कौन कितना सौभाग्यशाली है? जब लोग इस बात के आधार पर किसी व्यक्ति का मूल्यांकन करते है तो इसके जवाब में उसके धन, वैभव, पद-प्रतिष्ठा कि नाप-तोल करते हैं। ठाट-बाट का जीवन जीने लायक कितने साधन उसके पास है, इस बात के आधार पर उसका मूल्यांकन किया जाता है।

जबकि देखा यह जाना चाहिए कि गुण, कर्म, स्वभाव, चिंतन और चरित्र की द्रष्टि से कौन किस स्तर पर रह रहा है। एक जिम्मेदार और चरित्रवान व्यक्ति बनना हम सबका लक्ष्य होना चाहिए। क्योंकि श्रेष्ठ उपलब्धियां और अवसर ऐसे व्यक्ति के पास खिंचे चले आते हैं और ऐसा व्यक्ति ही देश व समाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण काम कर सकता है। अपने आन्तरिक व्यक्तित्व को तो हम श्रेष्ठ न बना सके, पर बाहर से दूसरों को अपने धन, पद, प्रतिष्ठा से लुभाते रहे तो यह सब फिर वैसा ही परिणाम उत्पन्न करेगा जैसा आज हम हर जगह देख रहे है।

एक समय का प्रतिष्ठित व्यक्ति दूसरे समय समाज का अपराधी नजर आता है। यह सब इसलिए होता है कि उन्होने कभी भी श्रेष्ठ विचारों को महत्व नहीं दिया और न ही एक उच्चस्तरीय चरित्र का निर्माण किया, बल्कि तेजी से सब कुछ पाने के लिए अपने जीवन मूल्यों से समझौता करने मे भी कोई संकोच नही किया। जीवन मे स्थायी सफलता पाना एक उन्नत दृष्टिकोण और श्रेष्ठ विचारों वाले व्यक्ति के लिए ही संभव है।

Life को meaningful बनाने वाली ability को हासिल करने का ही दूसरा नाम Personality Building है और यह केवल Noble Thoughts और एक Strong Willpower के बल पर ही संभव है। उत्कृष्ट चिंतन, श्रेष्ठ चरित्र और आत्मीय व्यवहार की नींव पर टिका शानदार व्यक्तित्व एक यादगार जिंदगी जीने के लिए बहुत जरूरी है। इस ब्लॉग के माध्यम से व्यक्तित्व विकास, जीवन मे सफलता के लिए आवश्यक सूत्र, अवसरों को सही प्रकार से प्रयोग करने की दक्षता और नेतृत्व क्षमता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न लेखों के माध्यम से चर्चा की जाएगी।

अगर विद्वान पाठकगण इन लेखों से कुछ भी लाभ उठा सके, तो मै समझूंगा कि इस ब्लॉग से लिखने का मेरा उददेश्य पूर्ण हो गया। आशा है कि ब्लॉग आप सभी की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा और कुछ महत्वपूर्ण कार्य कर सकने मे समर्थ होगा।

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“चरित्र ही वह वस्तु है, जिसकी संसार को सबसे ज्यादा आवश्यकता है। इस दुनिया को ऐसे लोगों की बडी जरूरत है, जिनका जीवन निस्वार्थ प्रेम का ज्वलंत उदाहरण हो।”