Meaning of The Constipation in Hindi

 

“अगर ऐसी किसी एक बीमारी का नाम लेना हो जो इंसानों के लिये जानलेवा और खतरनाक तो न हो, मगर उनकी जिंदगी का सुख-चैन अक्सर ही लूटती हो, तो इसमें सबसे पहला नाम कब्ज का ही होगा। ऊपरी तौर से देखने पर तो कब्ज कोई बड़ी शारीरिक समस्या दिखायी नहीं पड़ती है, पर जिन्हें अक्सर ही अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इससे दो-चार होना पड़ता है, वे अच्छी तरह से जानते होंगे कि कब्ज कितनी बड़ी मुसीबत है।”

 

Meaning of The Constipation in Hindi
अच्छे स्वास्थ्य के लिये कब्ज का स्थायी उपचार आवश्यक है

 

Constipation Meaning in Hindi कब्ज का अर्थ

Constipation Meaning in Hindi में आज हम आपको कोन्स्टिपेशन के अर्थ और इस बीमारी के कारण और लक्षणों के बारे में बतायेंगे। Constipation का अर्थ है – कब्ज, कोष्ठबद्धता, मलावरोध, मलबंध और अपच। कब्ज यानि कोन्स्टिपेशन, पाचन संस्थान का एक बहुत ही आम रोग है, जिसमे व्यक्ति का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग करने में मुश्किल होती है।

आँतों में मल का शुष्क होकर जमा हो जाना ही कब्ज कहलाता है। कब्जियत का अर्थ ही प्रतिदिन पेट साफ न होने से है। एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में कम से कम एक बार मल का त्याग अवश्य करना चाहिये। अगर कोई इन्सान दिन में विशेषकर, सुबह के समय मल त्याग नहीं कर पाता है, तो यह अस्वस्थता की निशानी है।

पेट में कब्ज रहने पर न सिर्फ पेट से निकलने वाला मल कम हो जाता है, बल्कि वह कड़ा भी हो जाता है। इसीलिये शौच के समय बहुत जोर लगाना पड़ता है, जिससे दूसरे रोगों के होने का खतरा भी पैदा हो जाता है। इसके अतिरिक्त मल की आवृत्ति भी घट जाती है। कब्ज मुख्य रूप से बड़ी आँत से सम्बंधित समस्या है, क्योंकि भोजन का अनुपयोगी और अंतिम अंश, मल के रूप में यहीं आकर इकट्ठा होता है। [स्रोत]

Constipation Statistics in Hindi कब्ज से जुड़े आँकड़ें

चिकित्सीय दृष्टि से एक सप्ताह में तीन से कम बार मल का त्याग करना, कब्ज के अंतर्गत आता है और यदि सप्ताह में सिर्फ एक ही बार मल का विसर्जन हो या शौच बिल्कुल भी न हो, तो यह भीषण कब्ज (Severe Constipation) का संकेत है। लेकिन अगर हम आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की उक्त परिभाषा के अनुसार कब्ज की समस्या पर विचार करें, तो पायेंगे कि 100 में से कोई एक ही इन्सान होगा जो सप्ताह में तीन से कम बार शौच करने जाता होगा।

इस दृष्टि से तो कब्ज की समस्या, कोई विकट स्वास्थ्य समस्या नहीं जान पड़ती, लेकिन जब हम वास्तविक जीवन में कब्ज से खड़ी होने वाली परेशानियों और उसके डरावने आँकड़ों को देखते हैं, तो पता चलता है कि यह परिभाषा कितनी अपूर्ण और यथार्थता से कितनी दूर है। इस बात में किसी भी व्यक्ति को कोई शंका नहीं होगी कि आजकल लगभग हर घर में कब्ज की समस्या बेहद आम है।

सन 2016 में एक अंतर्राष्ट्रीय जर्नल (Journal of Gastroenterology and Hepatology), में छपे एक शोधपत्र के अनुसार वैश्विक जनसँख्या की कुल 20 से 30 प्रतिशत आबादी, कब्ज की समस्या से पीड़ित है और ज्यादा उम्र के लोगों में यह समस्या 30 से 35 प्रतिशत तक है। पूरी दुनिया में कब्ज के उपचार हेतु, दवाइयों पर होने वाला सालाना खर्च 25 अरब डॉलर से भी ज्यादा है, जिनमे से 7 अरब डॉलर तो सिर्फ अमेरिका ही खर्च करता है।

 

Causes of The Constipation in Hindi

यह है कब्ज के 9 सबसे प्रमुख कारण

ऊपर दिये गये आँकडों से आप समझ ही गये होंगे कि देखने में बहुत ही सरल सा नजर आने वाला Constipation का यह रोग आज वास्तव में कितनी बड़ी मुसीबत बन चुका है। दूसरे अर्थों में कहें तो आज इन्सान अगर किसी रोग से सबसे ज्यादा परेशान है तो वह है कब्ज। इसीलिये अब हम आपको Constipation से जुडी वह हर छोटी-बड़ी बात विस्तार से बतायेंगे, जिसे जानना आपके लिये अनिवार्य है।

इस कड़ी में सबसे पहले कब्ज के कारणों को जानना जरुरी है, क्योंकि अगर Constipation के कारण का ही पता नहीं होगा, तो फिर इसका इलाज कैसे होगा। Constipation की दवाइयाँ लगातार लेते रहने वाले लोगों का कब्ज इसीलिये दूर नहीं हो पाता है, क्योंकि वह कभी भी इस बीमारी के कारणों को जानने की कोशिश नहीं करते हैं।

और बार-बार दवाइयाँ व डॉक्टर बदलने, बेहिसाब पैसा खर्च करने और अपना कीमती समय तथा मेहनत लगाने के बावजूद, नतीजा ढाक के तीन पात वाला होता है। इसीलिये पहले कब्ज के कारणों को अच्छी तरह से समझें, फिर इसके लक्षणों पर विचार करें और तब इसका उपचार करें। वैसे तो Constipation के कई कारण हैं, लेकिन इनमे से सबसे प्रमुख कारणों को हमने 9 भागों में वर्गीकृत किया हैं –

1. गलत आहार का चुनाव करना

कुभोजन यानि गलत भोजन खाना, Constipation का सबसे बड़ा कारण है। एक हालिया शोध में पाया गया है कि कब्ज होने के पीछे चाहे जितने भी कारण हों, उनमे से 50 प्रतिशत योगदान सिर्फ इसी एक कारण का होता है। गलत भोजन का अर्थ है – ऐसा भोजन जिसे न सिर्फ पचने में देर लगती है, बल्कि जो उदर और आँतों (Gastrointestinal Tract) में भी बड़ी मुश्किल से आगे बढ़ता है। ऐसे भोजन के उदाहरण इस प्रकार हैं –

1. गरिष्ठ पदार्थ अर्थात् देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन करना। इसमें फास्ट फूड और ज्यादा तैलीय भोजन शामिल है।

2. कम रेशेयुक्त भोजन जिसमे फायबर (Fibers) यानि रेशे का अभाव होता है, को नियमित रूप से खाना, जैसे कि मैदा, ब्रेड, बिस्किट आदि।

3. मौसम/ऋतुओं के अनुसार फल, सब्जियों और दूसरे खाद्य पदार्थों का सेवन न करना।

4. ज्यादा मसालेदार और बाहर का भोजन ज्यादा करना ।

5. चाय और कॉफी जैसे पेय पदार्थों को ज्यादा मात्रा में पीना।

6. अक्सर धूम्रपान करना और शराब पीना।

2. सही समय पर भोजन न करना

जिस तरह गलत भोजन स्वास्थ्य के लिये नुकसानदेह है, उसी तरह से गलत समय पर भोजन करना भी शरीर के लिये हितकर नहीं है। क्योंकि यह भी Constipation का एक बड़ा कारण है, फिर चाहे भोजन पौष्टिक और जीवनीशक्ति से भरपूर ही क्यों न हो। देर रात गये खाना खाने से भोजन का सही प्रकार से पाचन नहीं हो पाता है।

क्योंकि अगर आप देर रात में 9 या 10 बजे के बाद भोजन करते हैं, तो न तो फिर आपके पास घूमने के लिये समय बचता है और न ही नींद सही तरह से पूरी हो पाती है। नतीजन सुबह उठने पर पेट सही प्रकार से साफ़ नहीं हो पाता है। अगर गलत समय पर भोजन करने की आदत लम्बे समय तक चलती रहे, तो पाचक अंग निर्बल पड़ने लगते हैं और देर-सवेर कब्ज अपनी जड़ जमा ही लेता है।

3. पानी कम पीना

मानव शरीर में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है। यह जल शरीर के प्रत्येक अंग की शुद्धि के साथ-साथ शरीर में लवणों का संतुलन बनाये रखने के लिये भी अनिवार्य होता है। इसके अतिरिक्त जल चयापचय प्रक्रियाओं में भी प्रभावी भूमिका अदा करता है, इसीलिये पर्याप्त मात्रा में जल पीना न सिर्फ अच्छी सेहत के लिये जरुरी है, बल्कि यह कब्ज को भी दूर रखता है।

कम पानी पीना भी Constipation का एक बड़ा कारण है। ज्यादातर लोग पानी पीने पर ध्यान नहीं देते हैं, वह अक्सर तभी पानी पीते हैं जब प्यास लगने पर, शरीर के याद दिलाने पर, उन्हें मजबूरी में पानी पीना पड़ता है या फिर कोई उन्हें पानी लाकर दे देता है। कम पानी पीने के कारण जठराग्नि (पेट की अंदरूनी ऊष्मा) तेज होने से, मल खुश्क होकर कडा हो जाता है और फिर धीरे-धीरे आँतों में सड़ने लगता है।

यह सडा मल न सिर्फ पेट में दर्द पैदा करता है, बल्कि काबर्निक पदार्थों के विघटन से जहरीली गैसे भी पैदा होती हैं, जो आँतों के माध्यम से रक्त में घुल जाती है और फिर शरीर के प्रत्येक अंग और कोशिका तक पहुँचकर उन्हें नुकसान पहुँचाती है। यही कारण है कि जिन लोगों को हमेशा कब्ज रहता है, वह बुझे-बुझे से, अनमने, उत्साहहीन और चिडचिडे हो जाते हैं, क्योंकि उनके शरीर में लगातार गन्दगी का जहर घुलता रहता है।

4. भोजन के समय असावधानी बरतना

Constipation होने के पीछे एक बड़ा कारण भोजन में बरती जाने वाली असावधानियाँ भी हैं। जिनमे से सबसे प्रमुख है – भोजन को खूब चबा-चबाकर न खाना अर्थात् जबरदस्ती और जल्दी-जल्दी भोजन ठूँसना। जल्दबाजी में भोजन करने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन इतना समझ लीजिये कि ऐसा भोजन कभी भी सही प्रकार से नहीं पच सकेगा।

क्योंकि तेजी से भोजन करने से मुँह के अन्दर लार और भोजन सही तरह से मिश्रित नहीं हो पाते हैं, जिससे पाचन देर से और धीमी गति से शुरू होता है। भोजन करते वक्त ध्यान भोजन को चबाने पर न होकर कहीं और होना भी यही समस्या पैदा करता है। इसके अलावा बगैर भूख के भोजन करना भी पाचक अंगों पर अनावश्यक दबाव डालता है।

पिछला भोजन पचा नहीं और नया पेट में आ जाने से उनकी कार्यक्षमता लगभग ठप सी पड जाती है, जिसकी वजह से भोजन बिना पचे ही सड़ने लगता है। जिस तरह ज्यादा खाना कब्ज का कारण है, उसी तरह से अल्पभोजन करना या कई-कई दिन तक भूखे रहना (ज्यादा उपवास करना) भी कब्ज की समस्या पैदा कर सकता है, क्योंकि इससे भी पाचन संस्थान के अंग निर्बल पड़ जाते हैं।

5. शारीरिक परिश्रम न करना

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी में प्रगति होती चली जा रही है, वैसे-वैसे आदमी भी आरामतलबी होता चला जा रहा है। हालात इतने बदतर हो गये हैं कि आज ज्यादातर लोग शारीरिक परिश्रम से जी चुराने लगे हैं और यह आदत धीरे-धीरे उनकी लाइफस्टाइल का अंग बनती जा रही है। लेकिन आपको बता दें कि कम चलना या काम करना और किसी भी तरह की शारीरिक मेहनत न करना, कब्ज के प्रमुख कारणों में से एक है।

आलस्य से हर समय पड़े रहना और शारीरिक काम के बजाय दिमागी काम ज्यादा करना, पाचन संस्थान पर बुरा प्रभाव डालता है, क्योंकि भोजन एक ही स्थान पर पड़ा रहता है। चलने-फिरने से न सिर्फ आपके पाचक अंगों का व्यायाम होता है, बल्कि उनमे एक नयी स्फूर्ति भी आती है। याद रखिये मोटापे का सबसे बड़ा कारण भी शारीरिक परिश्रम से जी चुराना ही है।

6. शरीर का दूसरे रोगों से पीड़ित होना

कई बार Constipation का कारण दूसरी बीमारियाँ भी होती हैं जो पाचन संस्थान के अंतर्गत आने वाले अंगों को कमजोर करके उनकी कार्यक्षमता को या तो कम कर देती हैं या फिर लगभग ख़त्म ही कर देती हैं। इनमे से मुख्य रोग हैं –

1. बड़ी आंत में घाव या चोट (यानि बड़ी आंत में कैंसर)

2. बदहजमी और मंदाग्नि (पाचक अग्नि का धीमा पड़ना)

3. आँत, लिवर और तिल्ली की बीमारी

4. दु:ख, चिन्ता, और अवसाद

5. कंपवाद (पार्किंसन बीमारी)

6. मधुमेह आदि

7. दवाइयों का सेवन करना

आजकल की जिंदगी में दवाइयों और इंसानों का चोली-दामन का साथ हो गया है। शायद ही कोई ऐसा घर बचा हो जहाँ दवाइयों का सेवन न किया जाता हो। चूँकि खाने पर दवाइयाँ सबसे पहले पेट में ही जाती हैं, इसीलिये पाचन संस्थान के अंगों पर इनका प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ता है।

वैसे तो ज्यादातर दवाइयों के सेवन से शरीर पर कोई विशेष दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन कुछ खास दवाओं का सेवन करने से Constipation की समस्या पैदा हो सकती है, विशेषकर तब जब उन्हें कई-कई दिन तक लेना हो। इन दवाइयों में तेज एंटीबायोटिक और कैंसर की दवाइयाँ, विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

8. शरीर में हारमोंस का असंतुलन

शरीर में हारमोंस का असंतुलन भी कब्ज होने का कारण बन सकता है, जैसे – थायरॉयड हार्मोन की कमी से कई लोगों में अपच, और गैस की समस्या देखने को मिलती है। इसके अलावा अग्न्याशय (Pancreas) से निकलने वाले हार्मोन्स भी पाचन संस्थान को बहुत हद तक प्रभावित करते हैं, क्योंकि यह भोजन के पाचन में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

9. कब्ज के अन्य कारण

कब्ज का एक कारण मल को रोकना भी है। कई लोग ऐसे होते हैं जो मजबूरी में या जान-बूझकर मल को जोर लगाकर आँतों में ही रोके रखते हैं और समय पर शौच करने के लिये नहीं जाते। लेकिन उन लोगों को यह मालूम नहीं होता कि बार-बार ऐसा करना कितना खतरनाक हो सकता है।

मल को उपर की ओर चढाने से वह वापस बड़ी आंत में उपर चला जाता है और फिर वहीँ सड़ने लगता है। बाद में वह काफी जोर लगाने पर ही गुदा मार्ग से नीचे उतरता है। ऐसा करने से गुदा की कोमल नाड़ियों पर दबाव पड़ता है, जिससे आगे चलकर बवासीर की समस्या जन्म ले सकती है।

Constipation के पीछे कुछ दूसरे कारण भी हो सकते हैं जिनमे शरीर में महत्वपूर्ण मिनरल्स और विटामिन्स की कमी भी एक वजह है। जैसे जब शरीर में कैल्सियम और पोटैशियम की मात्रा हद से ज्यादा कम हो जाती है, तो चयापचय की प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ने लगता है, जिसकी वजह से भी भोजन सही प्रकार से नहीं पचता है।

Symptoms of The Constipation in Hindi

यह हैं शरीर में कब्ज रहने के लक्षण

अब हम आपको कब्ज के लक्षणों के बारे में बताते हैं, ताकि आपको वक्त रहते पता चल सके कि कहीं आप भी तो धीरे-धीरे इस रोग के चँगुल में तो नहीं फँसते जा रहे हैं। ध्यान दीजिये Constipation का कोई एक लक्षण नहीं है, कई बार तो एक ही व्यक्ति में कब्ज के कई-कई लक्षण देखने को मिल जाते हैं।

इसीलिये अपनी शारीरिक स्थिति पर ध्यान देना आवश्यक है। अगर किसी व्यक्ति को इनमे से कोई भी स्वास्थ्य समस्या है, तो इसे कब्ज का ही लक्षण समझना चाहिये। समझने में आसानी रहे, इसलिये इन लक्षणों को हमने संक्षिप्त रखने का प्रयास किया है –

1. दिन में कई बार मल त्याग के लिये जाना पर फिर भी पूर्ण रूप से मल का निष्कासन न होना

2. गुदाद्वार से रक्त निकलना या शुष्क मल के कारण गुदा में घाव/भगंदर हो जाना

3. उदर के निचले हिस्से में पीड़ा या परेशानी होना

4. कठोर, शुष्क या कम मल का निकलना

5. शौच जाने के पश्चात भी पेट में भारीपन महसूस होना

कब्ज के 16 लक्षणों के बारे में जानिये

6. शौच के लिये जोर लगाना

7. पेट में अक्सर गैस बनना और फूल जाना

8. शौच के संबंध में मानसिक चिंता या तनाव रहना

9. चहरे पर दाने, फुंसियाँ, मुँहासे निकलना

10. लगातार बहती नाक, जो ठण्ड से न पैदा हुई हो

11. मुँह से अक्सर बदबू आना

12. भूख में कमी आना

13. सिरदर्द या चक्कर आना

14. जी मिचलाना

15. मुँह में अल्सर होना

16. पेट का लगातार भरे रहना

Treatment of Constipation in Hindi कब्ज का इलाज

उपर दिये गये तथ्यों से आप समझ ही गये होंगे कि कब्ज से बचने के लिये प्रतिदिन दो बार नहीं तो कम से कम एक बार ही शौच के लिये जाना आवश्यक है। ध्यान दें यदि कब्ज का शीघ्र ही उपचार न किया जाये तो शरीर में कई विकार उत्पन्न हो जाते हैं। Constipation से बचने के लिये आपको रेशेयुक्त भोजन, जैसे साबूत अनाज का ज्यादा सेवन करना चाहिये।

इसके अलावा ताजे फल और सब्जियों को भी खूब खायें, पर वसा युक्त भोजन का सेवन कम ही करें। भोजन आसानी से आँतों में आगे बढे, इसलिये पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरुरी है। इस लेख में हमने मुख्य रूप से Constipation के कारणों और लक्षणों की ही चर्चा की है। कब्ज के उपचार और इलाज के बारे में विस्तार से जानने के लिये जीवनसूत्र का यह लेख पढ़ें –

“अगर दुनिया में कब्ज की सबसे सस्ती कोई दवाई है, तो वह सिर्फ पानी ही है। ज्यादा समस्या आने पर अपने चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिये।”

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