बुधवार, 9 नवंबर 2016

शरीर के तिलों से जानिये अपने व्यक्तित्व के गुप्त रहस्य




Body Language: Moles, Your Life & Personality




“अज्ञानी व्यक्ति उन सवालों को पूछते हैं, जिनका जवाब बुद्धिमान व्यक्ति हजारों साल पहले ही दे चुके होते हैं।”
– जोहान वोल्फगांग वों गेटे


Body Signs Reflects Your Personality शारीरिक चिन्ह आपके व्यक्तित्व का दर्पण हैं : -


Body Language (SBL) के पिछले लेख में आप शरीर की भाषा को समझाने वाले इस अद्भुत विज्ञान की महत्ता व आवश्यकता के बारे में पहले ही पढ़ चुके है। इस लेख से अब हम क्रमवार बॉडी लैंग्वेज के उन रहस्यों पर से पर्दा हटाते चलेंगे, जिन्हें जानना न केवल आपके जीवन के लिये ही उपयोगी होगा, बल्कि आप अपने और दूसरों के व्यक्तित्व व स्वभाव की पहचान कर उनसे अपेक्षित लाभ उठा सकते हैं।

इतना ही नहीं, आप अपनी कमजोरियों व कमियों को जानकर उन्हें दूर कर सकते हैं, अपने भविष्य के प्रति उठती आशंकाओं को दूर कर सकते हैं और आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिये समाधान के विषय में सोच सकते हैं। साथ ही अपने व्यक्तित्व के मजबूत पक्ष को पहचानकर उसका लाभ उठा सकते हैं दूसरों के स्वभाव की जानकरी पाकर उनसे सतर्क रहते हुए अपना हित साधन कर सकते हैं।

इस अद्भुत ज्ञान के विषय में कई लोगों का यह मानना है कि यह मनगढ़ंत और काल्पनिक है, क्योंकि वे इसके पीछे आधुनिक वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिपादित कोई निश्चित प्रमाण नहीं पाते। इसके बारे में हमें उन लोगों से केवल यही कहना है कि इस विशेष विज्ञान का संबंध सिर्फ हड्डियों और माँसपिंड के इस पिंजरे से नहीं है, जिसकी जांच वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशालाओं की टेस्ट ट्यूब में करते हैं।

यह उससे कहीं ज्यादा जटिल और दुर्बोध्य मनोविज्ञान और आत्मविज्ञान की नींव पर खडा है, जहाँ केवल विचारों, भावों और इच्छाओं का ही वर्चस्व है। जिनकी आज का वैज्ञानिक समुदाय अपने संपूर्ण प्रयासों के पश्चात भी केवल झलक भर ही पा सका है, क्योंकि भावजगत भौतिक संसार की तुलना में हजारों गुना सूक्ष्म है और यहाँ के किसी उपकरण की पहुँच वहां तक संभव नहीं है।


Moles Belongs to Your Life & Personality तिलों का आपके जीवन व व्यक्तित्व से गहरा संबंध है : -


इस लेख में हम शरीर पर बने चिन्ह, जिन्हें प्रायः तिल या मस्से (Moles) के नाम से पुकारा जाता है, की अंग विशेष पर उपस्थिति के आधार पर जातक के व्यक्तित्व व स्वभाव की चर्चा करेंगे। इसके अलावा उनके आधार पर उसके जीवन मे घटने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं पर भी प्रकाश डाला जायेगा। यहाँ कई लोग यह सोचेंगे कि भला एक छोटे से चिन्ह के आधार पर व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवन का गहन विश्लेषण कैसे संभव है?

इस बारे में कैसे कोई निश्चित निर्णय दिया जा सकता है? मात्र एक चिंह के आधार पर यह कैसे कहा जा सकता है कि अमुक व्यक्ति बुद्धिमान होगा या दुश्चरित्र। हमारे ऐसे जिज्ञासु मित्र, कृपया सभी लेख और यह अनुच्छेद ध्यान से पढ़ें, और उस पर गंभीरता से मनन भी करें। हमारे शरीर का प्रत्येक अंग उससे सम्बंधित विशेष शक्ति से क्रियाशील होता है और उसकी छाप लिये होता है। जैसे मस्तिष्क या ललाट क्षेत्र मनुष्य की मानसिक, बौद्धिक एवं सात्विक शक्ति का सूचक है।

नासिका क्षेत्र व्यक्ति की भौतिक और राजसिक प्रवृत्तियों का सूचक है, मुख क्षेत्र व्यक्ति की जैविक वासनात्मक एवं मानसिक इच्छाओं का सूचक है, हमारा ह्रदय क्षेत्र कोमल भावनाओं का सूचक है, हमारा उदार क्षेत्र(पाचन संस्थान) हमारी भौतिक प्रवृत्तियों, लालसाओं, का सूचक है, हमारा प्रजनन क्षेत्र(जननांग) हमारी शारीरिक और वासनात्मक इच्छाओं का सूचक है। इसी आधार पर अन्य क्षेत्रों के विषय में भी जानना चाहिये।


A. Moles on Head मस्तक (ललाट) पर होने वाले तिलों का प्रभाव : -


1. जिन लोगों के ललाट(माथा) की दाहिनी कनपटी पर तिल का चिंह होता है, वे दूसरों से स्नेह करने वाले, सुखपूर्ण जीवन व्यतीत करने वाले और समृद्ध होते हैं। लेकिन जिन लोगों के मस्तक पर बाईं ओर तिल होता है, उन्हें जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

2. यदि किसी व्यक्ति के ललाट में शुक्र रेखा के ऊपर तिल का चिंह हो, तो वह व्यक्ति धनवान व पूर्णतया सुखी होता है। उसके पास भोग-विलास के प्रचुर साधन होते हैं और उन्हें कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होती।


3. जिन व्यक्तियों की सूर्य रेखा के मध्य में तिल होता है, वे ऐश्वर्य से संपन्न और पूर्ण सुख-सुविधा से भरा जीवन गुजारते हैं, समाज में उच्च प्रतिष्ठा और यश प्राप्त करते हैं।

4. यदि सूर्य रेखा के दाहिनी ओर तिल हो, तो वह व्यक्ति अचल संपत्ति का स्वामी होता है व जमीन आदि से लाभ उठाता है।

5. यदि सूर्य रेखा के बायीं ओर तिल हो, तो उस व्यक्ति के गृहस्थ जीवन में निरंतर समस्याएँ बनी रहती हैं।


6. यदि चन्द्र रेखा पर तिल हो, तो वह व्यक्ति अल्पायु होता है तथा वह गुप्त रोगों से ग्रस्त होता है।

7. यदि चन्द्र रेखा के दाईं ओर तिल हो, तो ऐसा व्यक्ति धनवान व समाज में यशस्वी होता है।

8. जिस व्यक्ति की चन्द्र रेखा के बाई ओर तिल का निशान होता है, वह व्यक्ति दूसरों के लिये परेशानियाँ पैदा करता रहता है।


9. यदि शुक्र रेखा के बाई ओर तिल हो, तो ऐसा व्यक्ति कामी, परस्त्रीगामी होता है।

10. यदि गुरु रेखा के दाईं ओर तिल हो, तो वह व्यक्ति अपने जीवन में उन्नति करता है।

11. यदि मंगल रेखा के मध्य में तिल हो, तो वह व्यक्ति संतानहीन होता है।


12. शनि रेखा के आस-पास तिल होने पर व्यक्ति डरपोक होता है, पर इस रेखा के बाईं ओर तिल होने पर व्यक्ति अपने जीवन में यात्राओं से धन अर्जित करता है।

13. जिनकी बुध रेखा के दाईं ओर तिल होता है, वे सफल व्यापारी होते हैं। लेकिन जिन व्यक्तियों की बुध रेखा के बाईं ओर तिल का निशान होता है, वे दब्बू, कायर और डरपोक किस्म के होते हैं। वे अपनी ही नासमझी से अपने स्वयं के कामों को बिगाड़ लेते हैं।


B. Moles on Face मुख पर होने वाले तिलों का प्रभाव : -


(l) कान : -

14. जिन व्यक्तियों के कान के उपरी सिरे पर तिल का निशान होता है, वे व्यक्ति दीर्घायु होते हैं, लेकिन उनका शरीर कुछ कमजोर होता है।

15. जिनके दाहिने कान के पास तिल का निशान होता है, वे बड़े साहसी और पराक्रमी होते हैं।

16. जिनके दाहिने कान के उपरी हिस्से पर तिल का चिंह होता है, ऐसे व्यक्ति सरल स्वभाव के व युवावस्था में पूर्ण उन्नति करते हैं।

17. जिनके बाएँ कान पर तिल होता है, उन्हें अल्पायु का भय रहता है।


(II) आँखे व भौंहे : -

18. जिनकी दोनों भौंहों के बीच में या ललाट में तिल/मस्से का चिंह होता है, तो यह अत्यंत शुभ होता है। ऐसे लोग धार्मिक प्रवृत्ति वाले तथा उदार ह्रदय के होते हैं। ऐसे व्यक्ति राजोचित भोग भोगते हैं तथा इनकी आयु भी अधिक होती है।

19. जिन लोगों की दाहिनी भौंह पर या पास में तिल होता है, उनकी आँखे कमजोर होती हैं। जिनकी बायें नेत्र की भौंहों के पास तिल का चिंह होता है, वे व्यक्ति प्रायः एकांतवासी और साधारण ढंग से जीवन यापन करने वाले होते हैं। लेकिन तिल भौंहों पर होने से व्यक्ति यात्रा अवश्य करता है।

20. जिनकी दाहिनी आँख के नीचे तिल का चिंह होता है, वे सम्रद्ध और सुखी होते हैं। जिनकी बाईं आँख पर तिल होता है, वे अक्सर चिंताग्रस्त रहते हैं। जिन लोगों की दाहिनी आँख पर तिल होता है, वे कामुक होते हैं, उनकी स्त्रियों में काफी आसक्ति रहती है।


(lll) गाल : -

21. जिन लोगों के बाएं गाल पर तिल का निशान होता है, उनके जीवन में प्रायः धन का अभाव रहता है। लेकिन निर्धन होने पर भी उनका गृहस्थ जीवन आम तौर पर सुखमय रहता है।

22. जिन व्यक्तियों के दाहिने गाल पर तिल का चिंह होता है, वे व्यक्ति बुद्धिमान, धनवान और अपने जीवन में उन्नति करने वाले होते हैं।

23. जिनके बायें गाल पर लाल मस्सा होता है, वे मीठे के बहुत शौक़ीन होते हैं और अक्सर मीठे पदार्थों का भोजन करते है।


(lV) होंठ : -

24. यदि व्यक्ति के चेहरे के दाहिने भाग पर तिल हो, तो वह व्यक्ति धनवान, सुखी और प्रतिष्ठित होता है।

25. जिस व्यक्ति के होंठों पर (ऊपर या नीचे के होंठ पर) तिल का चिंह होता है, वह सुखमय जीवन व्यतीत करने वाला होता है। लेकिन अत्यधिक कामुक तथा विलासी भी होता है। उसमे विपरीत लिंगियों के प्रति आसक्ति इतनी अधिक हो सकती है कि न तो वह किसी मान-मर्यादा का विचार करेगा और न ही लज्जा अनुभव करेगा। अवसर पाते ही वह अपनी काम-पिपासा शांत करेगा। ये व्यक्ति केवल अपने ही बारे में सोचते हैं और स्वार्थसिद्धि के लिये किसी भी सीमा तक जा सकते हैं।

26. जिस व्यक्ति के होंठ के नीचे तिल होता है, वह निर्धन होता है और जीवन भर गरीबी में ही दिन व्यतीत करता है।


(V) नासिका व दांत : -

27. यदि नासिका के बाईं ओर तिल हो, तो व्यक्ति बहुत परिश्रम करने के पश्चात ही सफल हो पाता है।

28. जिस व्यक्ति की नासिका के मध्य भाग में तिल होता है, वह अक्सर यात्रा करने वाला और दुष्ट स्वभाव वाला होता है। ऐसे लोगों को मातृ कष्ट की भी प्रबल सम्भावना रहती है।

29. जिनके दांत के नीचे(मसूड़ों पर) तिल का चिंह होता है, उन्हें अक्सर अपने कामों से लज्जित होना पड़ता है।


C. Moles on Neck and Chin गर्दंन व ठोड़ी के तिलों का प्रभाव : -


30. जिन लोगों की ठोड़ी पर तिल का चिंह होता है, वे लोग अपने ही काम की धुन में लगे रहते हैं, अपने ही स्वार्थ को प्रमुखता देते हैं और दूसरों के हित से उन्हें कोई मतलब नहीं होता। प्रायः उन्हें अपने वैवाहिक जीवन में पत्नी से क्लेश सहन करना पड़ता है।

31. जिन लोगों की गर्दन पर तिल का निशान होता है, वे व्यक्ति बुद्धिमान होते हैं और अपनी स्वयं की मेहनत से धन-संपत्ति व ऐश्वर्य अर्जित करते हैं।


D. Moles on Hand, Palm and Armpit हाथ, हथेली व काँख के तिलों का प्रभाव : -


32. जिनके दायें हाथ पर तिल का निशान होता है, वे व्यक्ति बहुत बुद्धिमान होते हैं। लेकिन जिनके बाएं हाथ पर तिल का चिंह होता है, वे कंजूस होते है।

33. जिनकी दाहिनी भुजा पर तिल का चिंह होता है, उन्हें सम्मान प्राप्त होता है और जिनकी बाईं भुजा पर तिल होता है, उन्हें पुत्र की प्राप्ति होती है।

34. जिनकी दाहिनी हथेली पर लाल/काले तिल का निशान होता है, वे अवश्य ही धनवान होते हैं। लेकिन जिनकी बाईं हथेली पर तिल का चिंह होता है, वे अपने धन को बुद्धिमानी से खर्च करते हैं।

35. जिनकी बगल में तिल का चिंह होता है, उन्हें अक्सर हानि उठानी पड़ती है।


E. Moles on Chest and Heart छाती व ह्रदय पर होने वाले तिलों का प्रभाव : -


36. छाती के मध्य तिल होने पर व्यक्ति ऐश्वर्य भोगता है।<

37. जिनकी छाती पर दायीं ओर तिल का चिंह होता है, वे अपने पति/पत्नी से बहुत प्रेम करते हैं, पर अक्सर चिंतित भी रहते हैं।

38. लेकिन जिनकी छाती के बाईं ओर तिल का निशान होता है उनकी अपनी पत्नी/पति से अनबन रहती है और वे कामुक भी होते हैं।

39. जिनके ह्रदय पर तिल होता है, वे बुद्धिमान और विवेकशील होते हैं और जीवन में खूब उन्नति करते हैं।


F. Moles on Stomach and Waist पेट व कमर पर होने वाले तिलों का प्रभाव : -


40. जिनके पसली और पेट पर तिल का चिंह होता है, वे डरपोक और कायर किस्म के होते हैं।

41. जिनके पेट पर तिल होता है, ऐसे लोग खाने-पीने के बहुत शौक़ीन होते हैं। ये नित नये भोज्य पदार्थों का भोग लगाते हैं, इनका मुँह अक्सर चलता ही रहता है। साथ ही इनकी पाचन शक्ति भी अच्छी होती है।

42. जिनकी पीठ पर तिल का चिंह होता है, वे सुखमय जीवन जीते हैं और अक्सर मुश्किल परिस्थितियों से बच निकलते हैं।

43. जिनकी कमर पर तिल का निशान होता है, उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।


G. Moles on Other Body Parts अन्य अंगों पर उपस्थित तिल : -


44. जिस पुरुष के लिंग या अंडकोष पर तिल का चिंह होता है, वह कामुक और रसिक मिजाज होता है; क्योंकि उसमे यौन क्षमता और उत्तेजना भी अधिक होती है। दूसरे शब्दों में कहा जाय, तो वह स्त्रियों का प्रेमी होता है। ऐसा पुरुष हमेशा परस्त्री की ताक में लगा रहता है।

45. जिनके दायें पैर पर तिल का चिंह होता है, वे कुशाग्र बुद्धि के होते हैं।

46. जिनके बाएं पैर पर तिल होता है, वे खर्चीले होते हैं।


"संपूर्ण जीवन एक प्रयोग है। आप जितने अधिक प्रयोग करते हैं उतना ज्यादा बेहतर है।"
- राल्फ वाल्डो एमर्सन


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मंगलवार, 8 नवंबर 2016

भारत के अनोखे राजा-महाराजा और उनका विचित्र जीवन




Secrets of Indian Royal Families in Hindi




“धरती हर व्यक्ति की आवश्यकता को पूरा करने के लायक तो पर्याप्त देती है, पर हर व्यक्ति के लालच को पूरा करने के लिये नहीं।”
- महात्मा गाँधी


Weird Kings of Bharat भारत के विचित्र शासक : -


सन 1947 में देश के आजाद होने से पहले संपूर्ण भारत सैकड़ों छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। जिन पर राज करते थे, मुँह में चाँदी की चम्मच लेकर पैदा हुए, ऐश्वर्य और विलासिता में पले, शाही रौब-दौब वाले राजा-महाराजा। जिनके लिये हर वस्तु पहले से उपलब्ध थी, जिन्हें अपार पुण्यों के फलस्वरूप विरासत में ही, ईश्वरीय उपहार के रूप में एक बड़ा राज्य और एक आलीशान जिंदगी हासिल हुई थी।

आज भले ही उनका अस्तित्व इस धरती से मिट गया हो, लेकिन किस्से-कहानियों के माध्यम से वह किसी न किसी रूप में अवश्य जीवित रहेंगे। यहाँ न केवल हमें उनकी शाही जीवनशैली और विचित्र आदतों के विषय में पता चलेगा, बल्कि उनके ऐश्वर्य और झक्कीपन का नमूना भी देखने को मिलेगा। अगर हम अपने देश के इन शासकों को "सारे जग से निराला" कहें, तो शायद कुछ गलत नहीं होगा। आखिर ये तथ्य और सिद्ध भी क्या करते हैं -


1. अलवर के राजा जय सिंह : -

व्यक्ति के आत्म-सम्मान पर पड़ी चोट उससे क्या कुछ नहीं करवा सकती, यदि इस बात का कोई ज्वलंत प्रमाण आपको देखना हो, तो अलवर के महाराज जयसिंह प्रभाकर (1882–1937) से बढ़कर उदाहरण कहीं नहीं मिल सकता। इन्टरनेट पर इस घटना को कई राजाओं से जोड़कर दिखाया गया है, लेकिन वह ठीक नहीं हैं। यह महाराज जय सिंह प्रभाकर पुत्र श्री मंगल सिंह प्रभाकर के ही जीवन की महत्वपूर्ण घटना है। यह 20वीं सदी के शुरुआती दशक के अंतिम दिनों की बात है, जब अलवर नरेश घूमने के लिये लन्दन गये हुए थे। इसी क्रम में वे एक दिन बांड स्ट्रीट पर सादे सामान्य वस्त्रों में टहल रहे थे। उसी सड़क पर निकट ही रॉल्स रॉयस का शोरूम भी था।

महाराज ने जब वहाँ शानदार, चमचमाती, दिलकश गाड़ियों को देखा, तो वह कारों की कीमत और उसकी खूबियाँ जानने के लिये शोरूम के अंदर चले गये। चूँकि महाराज साधारण वस्त्र पहने हुए थे, इसलिये शोरूम के सेल्समैन ने भी उन्हें एक गरीब भारतीय ही समझा और उन्हें अपमानित कर शोरूम से लगभग बाहर ही निकाल दिया। इस अपमान के पश्चात महाराज जयसिंह वापस अपने होटल के कमरे पर लौट आये और उन्होंने अपने नौकरों के जरिये शोरूम तक यह सन्देश भिजवाया कि अलवर के राजा उनकी कुछ कारों को खरीदना चाहते हैं।

कुछ घंटों के पश्चात अलवर नरेश फिर से शोरूम पहुँचे, पर इस बार वह एक राजा की शानो-शौकत के साथ आये थे और अपने शाही लिबास में थे। उनके आने की सूचना पर शोरूम के कर्मचारियों ने पहले ही रेड कारपेट(लाल कालीन) बिछा दिया था और सारा स्टाफ उनकी अगवानी के लिये तैयार खड़ा था। महाराज ने उस समय शोरूम में खड़ी छहों गाड़ियों को खरीद लिया और पूरी रकम का भुगतान कर दिया। जब वे महँगी गाड़ियाँ भारत पहुंची, तो अलवर नरेश के आदेश पर छहों रॉल्स रॉयस को शहर की सफाई के काम में लगा दिया गया।

जहाँ सफाई कर्मचारी उनमे कूड़ा-करकट, कचरा और शहर की तमाम गंदगी लादकर ले जाते। जल्दी ही यह सनसनीखेज खबर पहले सारे भारत में और फिर सारी दुनिया में फ़ैल गई कि दुनिया की सबसे महँगी और आलीशान कार को कूड़ा-कचरा ढोने में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे रॉल्स रॉयस कंपनी की साख घटने लगी और उसका मजाक उड़ाया जाने लगा। जब भी यूरोप और अमेरिका में कोई व्यक्ति इस बात की डींग हाँकता कि उसके पास एक रॉल्स रॉयस कार है, तो लोग उसका मजाक उड़ाते हुए कहते, "कौन सी कार?"

अच्छा वह, जिससे भारत में शहर का कचरा ढोया जा रहा है। इस तरह कंपनी का नाम खराब होने से कारों की बिक्री तेजी से घटने लगी और उसका राजस्व कम होने लग गया। जब कंपनी को असली बात का पता चला, तो उन्होंने अलवर नरेश से माफ़ी मांगी और उनसे उन आलीशान गाड़ियों में कचरा न ढुलवाने की अपील की। इतना ही नहीं उन्होंने महाराज को छह नई रॉल्स रॉयस गाड़ियाँ मुफ्त में देने का प्रस्ताव भी रखा था।


2. जूनागढ़ के नवाब महाबत खान रसूल खान : -

भारत के सबसे विचित्र शासकों में जूनागढ़ के नवाब को भी प्रमुखता से रखा जा सकता है, जिन्हें कुत्तों से बेहद प्यार था। कहा जाता है कि उनके पास 800 से भी अधिक कुत्ते थे और हर श्वान के लिये एक व्यक्तिगत अनुचर था। अर्थात हजारों व्यक्ति केवल कुत्तों की रखवाली करने के लिये तैनात थे, जिन्हें राजकोष से धन दिया जाता था, पर शायद इतना ही काफी नहीं था। बादशाह न केवल कुत्तों के विवाह करवाते, बल्कि उनके वैवाहिक समारोह के लिये शानदार जलसे भी आयोजित करवाते थे। जिनमे लाखों रुपयों का व्यय होता था और जिसमे रियासत के बड़े-बड़े लोगों के अलावा पडोसी राज्यों के राजा-महाराजा तक आमंत्रित होते थे।

उस शुभ दिन पर राज्य की ओर से अवकाश घोषित करवा दिया जाता था। हो सकता है कई लोगों को नवाब का यह शौक एक विचित्र सनक या पागलपन लगे, लेकिन कुछ लोगों को वह एक आला दर्जे के पशुप्रेमी(पेट लवर) भी प्रतीत हो सकते हैं। पर इतना तो तय है कि शायद ही इस दुनिया में, कुत्तों या जानवरों से इतना अधिक प्रेम करने वाला कोई दूसरा व्यक्ति आज तक पैदा हुआ हो और आगे भी शायद ही कोई हो।


3. मैसूर के महाराज कृष्णराज वाडियार IV : -

मैसूर के महाराज कृष्णराज वूडियार ने अपने नौकरों को सूरज की तेज धूप से बचाने के लिए एक विशेष प्रकार की रॉल्स रॉयस कार को बनाने का आदेश दिया था। सन 1911 में निर्मित यह कार जब लगभग 100 वर्षों के लम्बे अंतराल के पश्चात एक नीलामी में बिकी, तो इसकी कीमत देखकर सब दंग रह गये। यह कार चार लाख पौंड यानी 4 करोड़ रूपये से भी अधिक कीमत में बिकी। सन 1940 में जब महाराज की मृत्यु हुई थी, तो उस समय वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक थे और उनकी कुल संपत्ति 35 बिलियन पौंड से भी अधिक थी।


4. पटियाला के महाराज भूपेंद्र सिंह : -

पटियाला रियासत के राजा भूपिंदर सिंह भी अपनी शानदार, भड़कीली मेहमाननवाजी के लिये बहुत मशहूर थे। जब उनके निमंत्रण पर ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम उनके निवास "मोती बाग महल" पर आये थे, तो राजा ने उनके स्वागत-सत्कार के लिये जो इंतजाम किया था वह किसी को भी हैरान कर सकता है। विशेष रूप से निर्मित सोने के थालों में उनके भोजन का प्रबंध किया गया था। शराब आदि को परोसने के लिये जिन पात्रों का उपयोग किया गया था, वह सब बेशकीमती रत्नों से जडे हुए थे, वस्त्रों के रूप में महँगे और मखमली रेशमी वस्त्रों का प्रयोग किया गया था।

राजा भूपिंदर सिंह की पत्नी बख्तावर कौर ने किसी रानी के प्रथम भारत दौरे के उपलक्ष में रानी मेरी को एक बेशकीमती व भव्य हार भारतीय स्त्रियों की ओर से तब प्रदान किया था, जब वह सन 1911 में आयोजित हुए जलसे, दिल्ली दरबार में शरीक हुई थीं, जिसका आयोजन इसलिये किया गया था। क्योंकि इतिहास में पहली बार ब्रिटेन के राजा और रानी भारत भ्रमण पर आ रहे थे। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाo राजेंद्र प्रसाद ने भी पटियाला के महाराज के विशेष चाँदी से निर्मित रथ पर सवार होकर राष्ट्रपति भवन के अंदर प्रवेश किया था।

राजा भूपिंदर सिंह को खाने का भी बहुत शौक था। प्रतिदिन 100 से भी अधिक व्यंजन जिनमे लगभग हर तरह का भोजन शामिल होता था, राजा की आज्ञा से तैयार किये जाते थे। प्रत्येक दिन के लिये अलग रेसिपी रहती थी। षडरसों के विषय में जो वर्णन भारतीय साहित्य में वर्णित है, खान-पान का इंतजाम ठीक वैसा ही होता था। कहते हैं 30 प्रकार की तो केवल एग करी ही बनती थी और राजा हर व्यंजन को केवल थोडा-थोडा चखकर ही हट जाता था, बाद में वह भोजन सेवकों को बाँट दिया जाता था।


5. भरतपुर के राजा किशन सिंह : -

राजस्थान में ऐसे अनेकों राजा- महाराजा हुए हैं, जो अपनी विचित्र सनकों के कारण दुनिया भर में विख्यात हुए। भरतपुर के राजा किशन सिंह की गणना भी कुछ ऐसे ही शासकों में की जा सकती है, जो अपने रंगीन मिजाज और दोषदर्शिता के लिये पहचाने जाते थे। किशन सिंह की कोई एक, दो नहीं, बल्कि कुल मिलाकर 40 पत्नियाँ थी। इस गुप्त रहस्य का खुलासा भरतपुर के दीवान रहे जरामनी दास ने अपनी पुस्तक 'महाराज' में किया था। किशन सिंह केवल स्त्रियों का ही शौक़ीन नहीं था, बल्कि उसे तैरने का भी बहुत शौक था और उसका यह शौक जूनून की हद तक था।

इसलिये उसने अपने उस शौक को पूरा करने के लिये गुलाबी संगमरमर से बने एक बड़े तालाब का निर्माण करवाया था और उसमे प्रवेश करने के लिये चन्दन की लकड़ियों से बने एक सीढ़ीदार जीने का भी निर्माण कराया था। जब राजा स्नान करने के लिये वहां आता, तो प्रत्येक रानी नग्नावस्था में उस सीढ़ीदार जीने पर खड़ी होकर राजा की अगवानी करती और जब राजा स्नान के लिये तालाब में प्रवेश कर जाता, तब बारी-बारी से प्रत्येक सीढ़ी पर खड़ी रानियाँ जल की अठखेलियों से राजा का स्वागत करती।

इस तरह राजा तब तक उनसे जलक्रीडा करता था, जब तक अंतिम 20वीं सीढ़ी पर खड़ी रानियाँ राजा के साथ स्नान नहीं कर लेती थी। उस समय सभी रानियों को अपने हाथों में मोमबत्तियाँ थामे रखनी होती थी, क्योंकि महल में जलते सभी दिये बुझा दिये जाते थे और फिर सभी रानियाँ उन जलती शमाओं को थामे राजा के सामने नृत्य प्रस्तुत करती थीं। जिस रानी के हाथ में थमी बत्ती अंत तक प्रज्वलित रहती थी, उसे ही उस रात के समय राजा के साथ सोने का अवसर मिलता था।


6. सवाई माधोपुर के राजा सवाई माधो सिंह II : -

सवाई माधोपुर नरेश सवाई माधो सिंह द्वितीय भी अपनी एक विचित्र आदत के कारण काफी मशहूर हुए थे। बात यह थी कि महाराज गंगाजल को बहुत महत्व देते थे और उसका नियमित सेवन करते थे। लेकिन जब वह ब्रिटेन की यात्रा पर जा रहे थे, तो इस कारण एक बड़ी समस्या उठ खड़ी हुई। क्योंकि वहाँ पर उनका कई दिनों तक रूकने का कार्यक्रम था और उसके लिये बड़ी मात्रा में गंगाजल की आवश्यकता पड़नी थी। लेकिन ऐसा कोई बर्तन नहीं था, जिसमे भरकर इतना अधिक गंगाजल लाया जा सकता, जो उस अवधि के लिये पर्याप्त हो।

इस समस्या के समाधान के लिये दरबारियों से विचार-विमर्श कर राजा ने जयपुर के कारीगरों को शुद्ध चाँदी से निर्मित, दो ऐसे बहुत बड़े बर्तन बनाने का आदेश दिया, जिसमे गंगाजल भरकर वे अपने साथ इंग्लैंड की यात्रा पर ले जा सकें। इन बर्तनों को निर्मित करने के लिये चाँदी के लगभग 14000 सिक्कों को पिघलाया गया और उन्हें बहुत ही कुशलता से इस तरह बनाया गया कि उनमे कोई जोड़ न रहे। ये बर्तन गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दुनिया के सबसे बड़े शुद्ध चाँदी से निर्मित बर्तनों के रूप में आधिकारिक रूप से दर्ज हैं।


7. कपूरथला के महाराज जगतजीत सिंह : -

कपूरथला रियासत के शासक महाराज जगतजीत सिंह भी भारत के अत्यंत विलासी शासकों में से एक रहे हैं। उन्हें अत्यंत महँगे, कीमती और विलक्षण वस्त्र पहनने का विचित्र शौक था। महाराज की सभी पोशाकें उस समय के सबसे महँगे लक्ज़री मेगा-ब्रांड के रूप में विख्यात लुइस वुईट्टन द्वारा ही तैयार की जाती थीं, जो जगतजीत सिंह के लिये एक से एक अद्भुत डिजाईन के बेशकीमती वस्त्र तैयार करता था।

घूमने-फिरने के बहुत शौक़ीन जगतजीत सिंह के पास लुइस वुईट्टन के लगभग 60 से भी अधिक बड़े बक्से थे, जिनमे उनके कपडे, पगड़ियाँ, तलवारें, सूट, जूते, पारंपरिक वस्त्र और निजी सामान शामिल थे। महाराज के पास प्रत्येक अवसर पर पहनने के लिये अलग-अलग तरह की पोशाकें थीं, शायद ही वह किसी पोशाक को दूसरी बार पहनना पसंद करते थे।


8. उदयपुर के महाराज : -

उदयपुर का मेवाड़ राजवंश स्फटिक के आकर्षण से इतना अधिक प्रभावित था कि उन्होंने अपने महल के सिंहासन, कुर्सियाँ, मेज, पलंग और यहाँ तक कि पंखे भी स्फटिक से जडवा रखे थे।


“परोपकारी बन जाइये इससे पहले कि धन-संपत्ति आपको लोभी बना दे।”
- थॉमस ब्राउन


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सोमवार, 7 नवंबर 2016

कन्या राशि से जानिये अपने व्यक्तित्व के अबूझ रहस्य




Hindi Astrology: Personality of Zodiac Sign Virgo




“धैर्यवान और समझदार बनिये जीवन ईर्ष्यालु होने और प्रतिशोधी होने के लिये बहुत छोटा है।”
- फिलिप ब्रुक्स


Nature of Virgo कन्या राशि का स्वभाव : -


जब जन्म कुंडली में चन्द्रमा कन्या राशि में हो, तो उस व्यक्ति की जन्मराशि कन्या होती है। कन्या राशि, राशिचक्र की छठी राशि है। इस राशि का विस्तार भचक्र के 150° से 180° तक है और इसका स्वामी गृह बुध है। यह वैश्य जाति की स्त्री लिंग वाली, पृथ्वी तत्व प्रधान राशि है। यह दक्षिण दिशा की स्वामिनी और सौम्य व शीत प्रकृति की अल्प संतति वाली राशि है। यह रात्रि के समय बली रहती है और इसका पिंगल (हरा-पीला) वर्ण है।

इसका प्रतीक चिंह, एक कोमल व संकोची कन्या है। इस राशि के जातकों का स्वभाव भी इसके प्रतीक चिंह की तरह, संकोच, चंचलता, भावुकता और परिपक्वता से पूर्ण होता है। कन्या राशि के जातक प्रायः अस्थिर बुद्धि वाले, कम बोलने वाले तथा शंकालु स्वभाव के होते हैं, लेकिन यह जातक नैसर्गिक रूप से विद्याव्यसनी(खूब पढने-लिखने वाले) और शिल्प-कौशलयुक्त भी होते हैं। अपनी उन्नति के प्रति कन्या राशि वाले विशेष रूप से जागरूक होते हैं।

कन्या राशि के जातकों को गोचर के फलादेश इसी राशि के आधार पर देखने चाहियें। यदि व्यक्ति के जन्म के समय लग्न कन्या राशि का हो, तब भी यह जातकों पर अपना प्रभाव डालती है। यह राशि व्यक्ति के शरीर में उसकी कमर व उसके निचले उदर (आँतें व गुर्दे) का प्रतिनिधित्व करती है। ग्रहों की अनुकूलता के अनुसार चंद्रमा, शुक्र और शनि कन्या राशि में शुभ फल प्रदान करते हैं तथा सूर्य के लिये यह सम राशि है।

मंगल और बृहस्पति इस राशि के स्वामी बुध के शत्रु होने के कारण इसमें अशुभ फल देते हैं। लेकिन इस राशि में इसका स्वामी गृह बुध उच्च होता है, जबकि शुक्र नीच होता है। कन्या राशि पर सूर्य 30 दिन 29 घडी और 04 पल रहते हैं। कन्या राशि के अंतर्गत, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के अंतिम तीन चरण, हस्त नक्षत्र के चारों चरण और चित्रा नक्षत्र के प्रथम दो चरण आते है। इस राशि के जातकों के लिये बुधवार का दिन विशेष अनुकूल होता है।


Personality of Virgo Person कन्या राशि के जातक का व्यक्तित्व : -


कन्या राशि के जातकों का व्यक्तित्व सरल, आकर्षक और सौम्यता से परिपूर्ण होता है। इस राशि के व्यक्ति चंचल व भावुक तो होते हैं, पर साथ ही व्यवहारिक, चतुर और समझदार भी होते हैं। ये अपना प्रत्येक कार्य करने से पहले अच्छी तरह से सोच-विचार करते हैं कि कहीं ये किसी घाटे में न रह जायें या इनसे कोई भूल न हो जाय। इनके कार्यों में नियमितता और कौशल की एक सहज झलक मिलती है। ये लोग सादगीपसंद तो हो सकते हैं, लेकिन फक्कडपन इनके स्वभाव में नहीं होता।

कन्या राशि के जातक शांत प्रवृत्ति के, एकान्तप्रिय और व्यवस्थित ढंग से कार्य करने वाले होते हैं। यह लोग जल्दी से उग्र नहीं होते और किसी भी विवाद पर शान्ति और विवेक से विचार करना पसंद करते हैं। कन्या राशि के जातक बौद्धिक रूप से परिपक्व और विचारशील होते हैं; इसलिये अपने प्रत्येक कार्य को बहुत योजनाबद्ध ढंग से करते हैं और अपनी कल्पनाशक्ति से पहले ही समस्त पहलुओं का आंकलन कर लेते हैं।

लेकिन बुध की अस्थिर प्रवृति के कारण विशेष रूप से जल्दी किसी निश्चय पर नहीं पहुँच पाते। यह विषय की संपूर्ण गहनता पर विचार नहीं कर पाते है, केवल उसके प्रारंभिक कलेवर की सूक्ष्म स्तर तक जानकारी पाने में रूचि रखते हैं। यही कारण है कि इन लोगों को जीवन के अधिकांश क्षेत्रों की सामान्य जानकारी तो होती है, लेकिन गहन ज्ञान किसी क्षेत्र का नहीं होता, क्योंकि यह जानना इनके स्वभाव में ही शामिल नहीं होता।

यह लोग अपने जीवन में परिवर्तन पसंद करते हैं, क्योंकि ये लम्बे समय तक एकरसता की स्थिति में नहीं रह सकते। इस राशि के जातक जीवन को सहज ढंग से जीने में विश्वास करते हैं, इसलिये लड़ाई-झगडे और खतरों से भरे कामों से दूर रहते हैं। ये लोग अधिकांश समस्याओं और परिस्थितियों की जड़ तक पहुँच सकते हैं, क्योंकि इनमे आश्चर्यजनक स्मृति और प्रखर बुद्धि होती है।

Life & Interests of Virgo Person कन्या राशि के जातक का जीवन और रुचियाँ : -


आजीविका के रूप में भी इन्हें लेखन-अध्यापन और सरल व्यापार का क्षेत्र ही अधिक भाता है, क्योंकि ये लेखन और पुस्तक पढने के शौक़ीन होते हैं। ये लोग सफल इंजिनियर और डॉक्टर भी हो सकते हैं। चूँकि इन्हें प्रकृति और पर्यावरण से भी काफी प्रेम होता है, इसलिये इन्हें अक्सर इनसे सम्बंधित क्षेत्रों में भी कार्य करते हुए देखा जा सकता है। लेकिन अपने कार्यक्षेत्र में भी यह जातक कोई खतरा नहीं उठाते, इसलिये कई बार उन्नति के शिखर पर नहीं पहुँच पाते हैं।

कन्या राशि के जातक श्रृंगार और सौंदर्य के प्रेमी होते हैं और अपनी वेशभूषा के प्रति हमेशा सजग रहते हैं। ये प्रायः भीड़ से दूर ही रहना पसंद करते हैं और नये लोगों के साथ संकोच से मिलते हैं; जल्दी से किसी पर विश्वास नहीं करते। यह लोग अंतर्ज्ञान की क्षमता से संपन्न होते हैं और इनमे अच्छे-बुरे की पहचान करने की नैसर्गिक क्षमता होती है। ये जल्दी से भावनाओं में नहीं बहते और कुछ स्वार्थी प्रवृत्ति के होते हैं।

स्वभाव में भावुकता और प्रखर बौद्धिक क्षमता शामिल होने के कारण, इनके व्यक्तित्व में एक बच्चे की मासूमियत, अल्हड़ता और एक वृद्ध की गंभीरता दोनों गुण शामिल रहते हैं; इसलिये ये कवि, शायर और रचनाकार भी बनते देखे गये हैं। अपने शरीर और स्वास्थ्य के प्रति कन्या राशि के जातक काफी सजग होते हैं, इसीलिये प्रायः इनका स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहता है। ग्रहों की स्थिति अनुकूल न होने पर, प्रारब्धवश इन लोगों को पेट के रोगों और तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित समस्याओं का सामना करना पड सकता है।

कन्या राशि के जातक अपने जीवन के प्रति अत्यधिक रूप से चिंतित रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से यही जताते हैं कि 'मै तो चिंतामुक्त हूँ'। कन्या राशि द्विस्वभाव राशि है और इस राशि की तरह यह लोग भी एक दोहरी जिंदगी जीते हैं। वैसे तो यह लोग सांसारिक बुद्धि वाले दुनियादार लोग होते हैं, जो अपने लाभ पर ही दृष्टि रखते हैं। लेकिन जीवन के अंतिम दिनों में इस राशि के जातकों में धर्म व अध्यात्म के प्रति रुझान बढ़ता देखा गया है।


“जो जानते हैं, वह उसे करते हैं। और वह जो समझते हैं, उसे सिखाते हैं।”
- अरस्तू


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रविवार, 6 नवंबर 2016

जानिये कितने आवश्यक हैं विटामिन आपके स्वास्थ्य के लिये




Hindi Health Article on Essential Vitamins




“जिसके पास स्वास्थ्य है, उसके पास आशा है; और जिसके पास आशा है, उसके पास जिंदगी में सब कुछ है।”
– अरब की कहावत


Vitamins and Our Health विटामिन और हमारा स्वास्थ्य : -


इस धरती पर हर मनुष्य इस शरीर को जीवित और स्वस्थ रखने के लिए, प्रतिदिन अपनी-अपनी रूचि के अनुसार भोजन लेता है। यह केवल भोजन का स्वाद और उसकी पौष्टिकता नहीं है, जो इस देह का अस्तित्व बनाये हुए है, बल्कि उसमे समाहित वह विटामिन और मिनरल्स हैं जो हमारे जीवन के लिये अनिवार्य हैं। यही कारण है कि क्यों इन तत्वों से युक्त एक संतुलित आहार लेना प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिये अत्यंत आवश्यक है।

क्यों चिकित्सक सभी रोगियों को अपनी खाने की आदतें सुधारने के लिये कहते हैं, क्योंकि हमारा शरीर न तो किसी मिनरल को बनाने में समर्थ है और न ही यह मनुष्य के जीवन के लिये अनिवार्य 11 Vitamins को बना पाने में समर्थ है। हमारा शरीर 13 अनिवार्य विटामिन में से केवल 2 ही Vitamins अपने स्वयं के बल पर निर्मित कर सकता है। बाकी की उपलब्धता के लिये यह प्रकृति पर ही निर्भर है। Vitamins और Minerals को संयुक्त रूप से माइक्रोन्यूट्रिएंटस यानि सूक्ष्म पुष्टिकर पदार्थ कहा जाता है।

क्योंकि शरीर को उनकी बहुत थोड़ी मात्रा की ही आवश्यकता पड़ती है, लेकिन यदि उस थोड़ी मात्रा की पूर्ति न हो पाए, तो शरीर को बीमारियों का शिकार होते देर नहीं लगती। शरीर को किन मिनरल्स की आवश्यकता होती है, इसका वर्णन हम पहले ही "शरीर को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो लेना मत भूलिये यह 16 मिनरल्स" इस लेख में कर चुके हैं। ये दोनों तत्व साथ-साथ मिलकर शरीर के सैकड़ों कार्यों को करते हैं।

शरीर की प्रत्येक कोशिका के निर्माण और मरम्मत से लेकर अस्थि, माँस, रक्त की उपलब्धता, घावों को ठीक करना, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाये रखना और आहार को उर्जा में बदलने समेत न जाने ऐसे कितने काम हैं, जिनका पूर्ण होना इनके बिना बिल्कुल संभव नहीं। इसी बात से हर कोई यह अंदाजा लगा सकता है कि इनकी हमारे जीवन में क्या महत्ता है। अब इस लेख के जरिये विटामिनों के प्रकार, शरीर में उनके कार्य और उनकी प्राप्ति के स्रोत के विषय में चर्चा की जायेगी। आशा है यह लेख स्वास्थ्य की जागृति की दिशा में सहायक होगा!


Difference between Vitamins and Minerals विटामिन और मिनरल्स में क्या अंतर है : -


विटामिन और मिनरल्स दोनों ही शरीर के लिये अत्यंत आवश्यक हैं, लेकिन इनमे बहुत अंतर है। Vitamins जहाँ जैविक पदार्थ हैं, वहीँ Minerals अजैविक पदार्थ हैं; अर्थात इनमे कोई कार्बनिक पदार्थ नहीं है। विटामिन ऊष्मा, एसिड और वायु के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं, लेकिन मिनरल्स अपनी रासायनिक संरचना को बरकरार रखते हैं। यही कारण है कि Minerals आसानी से भोज्य पदार्थों के जरिये हमारी देह में अवशोषित हो जाते हैं।

लेकिन Vitamins भोजन को पकाने, उबालने और भण्डारण की प्रक्रिया में या तो नष्ट हो जाते हैं या फिर वे अपनी शक्ति खो देते हैं। Vitamins शब्द का तात्पर्य यह नहीं है कि दूसरे अनिवार्य पुष्टिकर पदार्थ जैसे - आहार में लिये जाने वाले खनिज, अनिवार्य वसा अम्ल या अनिवार्य एमिनो एसिड (जिनकी शरीर को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है) और अधिकांश प्रकार के अन्य पुष्टिकर पदार्थ जो स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, वे भी इसके अंतर्गत आते हैं।

बल्कि यह उनसे पूर्णतया अलग वह यौगिक व अत्यंत महत्वपूर्ण पुष्टिकर पदार्थ है जिसकी एक जीव को सीमित मात्रा में ही आवश्यकता होती है। एक बात और ध्यान देने की यह है कि विटामिन और मिनरल्स दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। विटामिन के विभिन्न प्रकारों की उचित मात्रा के बिना हमारा शरीर उनसे सम्बंधित मिनरल्स को शरीर में संचित रखने में असमर्थ ही रहता है। इसलिये आपको दोनों की उपयुक्त मात्रा को बनाकर रखना चाहिये।

जैसे Vitamin D की कमी के कारण हमारा शरीर Calcium को अवशोषित नहीं कर पाता और यह शरीर से वैसे ही बाहर निकल जाता है। Vitamins शरीर की वृद्धि, विकास और कोशिकाओं की सामान्य प्रक्रियाओं के लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं और यह भी Minerals की ही तरह मेटाबोलिज्म (चयापचय) की प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य हिस्सा हैं। Metabolism(चयापचय) वह प्रक्रिया है जिसके जरिये हमारा शरीर हमारे द्वारा खाये गये भोजन को उर्जा के रूप में रूपांतरित करता है।

जो अंततः हमारे ही शरीर की अनेकों शारीरिक क्रियाओं को पूर्ण करने के लिये शक्ति उपलब्ध कराती है। सोचने से लेकर दौड़ने तक हम जो कुछ भी इस शरीर से करते हैं, उसके लिये उर्जा उपलब्ध कराना, और शरीर को हमेशा स्वस्थ बनाये रखना ही इनका कार्य है। हमारे शरीर को कुल 13 अनिवार्य विटामिनों की आवश्यकता होती है; जिन्हें उनकी प्रकृति या संरचना के आधार पर नहीं, बल्कि जैविक और रासायनिक क्रियाओं के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता हैं। जो इस प्रकार हैं -


Fat-Soluble Vitamins (वसा में घुलने वाले विटामिन) : -


वसा में घुलने वाले विटामिन वे Vitamins हैं जो केवल वसा में ही घुल सकते हैं और हमारे उदर के अंदर जाकर वसा से बंध जाते हैं। ये शरीर के भीतर ही लम्बे समय के लिये संचित हो जाते हैं, ताकि बाद में आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग किया जा सके। वसा में घुलने वाले विटामिन सीधे हमारे खून में नहीं मिलते हैं, बल्कि यह आँतों की दीवारों में स्थित लसीकाओं के माध्यम से खून में प्रवेश करते हैं।

वसा में घुलने वाले कई विटामिन केवल प्रोटीन के संरक्षण में रहकर ही शरीर के अन्य भागों तक पहुच पाते हैं, क्योंकि प्रोटीन इनके लिये एक वाहक (करियर) का कार्य करता है। शरीर में इन Vitamins का अवशोषण कुछ इस तरह से होता है - जब हम वसा में घुलनशील विटामिनों से युक्त भोजन खाते हैं, तो वह आमाशय में जाकर वहाँ स्रावित होने वाले पाचक अम्लों से पचाया जाता है। जहाँ से वह छोटी आंत में आ जाता है। वहां उसका देर तक पाचन और अवशोषण होता है।

चूँकि वसा में घुलने वाले विटामिनों को अवशोषित करने के लिये पित्त की आवश्यकता होती है, इसलिये यकृत(लीवर, जहाँ पित्त का निर्माण होता है) से पित्त आकर छोटी आँत में मिल जाता है। जहाँ यह वसा को तोड़ देता है और समस्त पोषक तत्व आँतों की दीवारों द्वारा अवशोषित कर लिये जाते हैं। यहाँ से यह विटामिन लसिका नलिकाओं में चले जाते हैं; जहाँ से फिर यह सीधे खून में मिल जाते हैं। ये Vitamins वैसे तो संपूर्ण शरीर में उपस्थित होते हैं, क्योंकि शरीर को समय-समय पर इनकी आवश्यकता पड़ती हैं।

लेकिन इनकी बड़ी और अतिरिक्त मात्रा लीवर में और वसा उतकों में संरक्षित रहती है। लगभग अधिकांश वसा में घुलनशील विटामिन अपने आप ही शरीर में इधर-उधर जाने के लिये असमर्थ होते हैं। इसलिये इनके साथ वाहक के रूप में अनिवार्य रूप से प्रोटीन अणुओं की आवश्यकता पड़ती हैं। रोग या चोट आदि के समय, जब-जब हमें इन Vitamins के अतिरिक्त भंडार की आवश्यकता होती है, तो हमारा यकृत इन्हें मुक्त कर देता है।

आप यह जानकार आश्चर्यचकित रह जायेंगे कि यदि हम आज और अभी से Vitamin-A लेना बंद कर दें, तब भी यह हमारे लीवर में इतनी मात्रा में संचित रहता है कि अगले 7-8 वर्षों तक हमारे शरीर को विटामिन-A की निर्बाध आपूर्ति कर सके। चूँकि यह Vitamins हमारे शरीर में लम्बे समय तक संचित रहते हैं, इसलिये इन विटामिनों को इनकी निर्धारित मात्रा में ही लेना चाहिये। सप्लीमेंट के रूप में इन्हें अधिक मात्रा में लेना घातक है। Vitamin A, Vitamin D, Vitamin E और Vitamin K ये चार वसा में घुलनशील विटामिन हैं।


Water-Soluble Vitamins (जल में घुलने वाले विटामिन) : -


पानी में घुलनशील विटामिन वे Vitamins हैं जो भोजन के जलीय अंश में उपस्थित रहते हैं और पाचन की प्रक्रिया के दौरान जैसे ही भोजन अन्य घटकों में टूटता है, यह अवशोषित होकर तुरंत खून में मिल जाते है। चूँकि मनुष्य शरीर में सबसे बड़ा अंश जल का है, इसीलिये ये Vitamins तुरंत ही सारे शरीर में आसानी से फ़ैल जाते हैं। हमारे गुर्दे जल में घुलनशील विटामिनों के स्तर को लगातार नियंत्रित करते रहते हैं। इसीलिये जब भी इन Vitamins का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, तो इन्हें मूत्र के जरिये बाहर निकाल दिया जाता है।

हाँलाकि जल में घुलनशील विटामिन शरीर में अनेकों कार्य करते हैं, लेकिन उनमे सबसे महत्वपूर्ण है - उस भोजन से उर्जा को मुक्त करने में सहायता करना, जिसे आप खा रहे हैं। दूसरे Vitamins हमारे उतकों को स्वस्थ रहने में मदद करते हैं। सामान्य तौर पर जल में घुलनशील विटामिन शरीर में केवल कुछ समय तक ही संचित रह पाते हैं, लेकिन Vitamin B12 वर्षों तक हमारे लीवर में संचित रहता है।

फॉलिक एसिड और विटामिन C कुछ दिन तक हमारे शरीर में संचित रहते हैं, पर अधिकांश विटामिनों की पूर्ति करने के लिये इनका जल्दी-जल्दी नियमित तौर पर सेवन करना जरुरी है। लेकिन इन Vitamins को सप्लीमेंट के जरिये अधिक मात्रा में लेना नुकसानदेह है। Vitamin B के कुल सातों प्रकार और Vitamin C जल में घुलनशील विटामिन हैं। आइये अब विस्तार से इनके बारे में जानें -


Proper Dose of Vitamins विटामिनों को कितनी मात्रा में ग्रहण करना चाहिये : -


RDA - हमारे शरीर को किस विटामिन की कितनी मात्रा की आवश्यकता है, इसके लिये वैसे तो प्रत्येक देश के अपने अलग-अलग मानक निर्धारित हैं। लेकिन इस लेख में सभी विटामिनों की मात्रा US RDA (United States Recommended Dietary allowances) के अनुसार दी जा रही है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के संगठन FNB के द्वारा व्यापक शोध के आधार पर निर्धारित है।

RDA प्रत्येक विटामिन और मिनरल की आहार के रूप में प्रतिदिन ली जाने वाली वह औसत मात्रा है, जो एक व्यक्ति को स्वस्थ और उनकी कमी से मुक्त बनाये रखने के लिये आवश्यक है। यहाँ पर विटामिनों की जो मात्रा दी जा रही है वह 19 से 70 वर्ष तक के पुरुषों के लिये उपयुक्त है। कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर, स्त्रियों को पुरुषों की तुलना में इनकी कम मात्रा की आवश्यकता होती है।

UL - UL (Tolerable Upper Intake Level) विटामिनों व मिनरल्स की प्रतिदिन ली जा सकने वाली वह अधिकतम मात्रा है जो एक औसत व्यक्ति के लिये सुरक्षित है। इसलिये यदि आप इन तत्वों की अधिक मात्रा के कारण शरीर में पैदा होने वाली विषाक्तता से बचना चाहते हैं, तो  इनका सेवन इससे कम मात्रा में ही करें। इन सभी तत्वों को मिलीग्राम (mg), माइक्रोग्राम (mcg या µg) में मापा जाता है।

चूँकि विटामिनों का विषय न केवल विस्तृत है, बल्कि स्वास्थ्य के लिये भी बहुत महत्वपूर्ण है; इसलिये इस लेख में हम केवल वसा में घुलनशील विटामिनों का ही विस्तृत वर्णन करेंगे। जल में घुलनशील दोनों विटामिनों का वर्णन अगले लेख में किया जायेगा। अब आगे पढिये-


Fat-Soluble Vitamins वसा में घुलनशील विटामिन : -


1. विटामिन A : -


Vitamin A का रासायनिक नाम रेटिनौल, रेटिनल है। इसे बीटा केरोटिन के नाम से भी जाना जाता है। Vitamin A के कुछ प्रकार, कोशिका और उतकों की वृद्धि के नियंत्रक और उनमे विभेद करने का कार्य देखते हैं। इसे मुख्य रूप से आँखों के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इसका कार्य मात्र इतने तक ही सीमित नहीं है। यह अन्य कई अत्यावश्यक कार्य करता है। जैसे - यह लाल और श्वेत रक्त कणिकाओं के निर्माण में सहायक होता है, उनकी क्रियाशीलता बढाता है और शरीर की सामान्य वृद्धि और विकास के लिये महत्वपूर्ण है।

यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और रक्त वाहिनियों को स्वस्थ रखता है तथा त्वचा, दांत और कोशिकाओं को स्वस्थ रखने से लेकर हड्डियों के पुनर्निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाता है। Vitamin A हमारी कुछ तरह के कैंसर और आँखों के रोगों से भी बचाव करता है तथा रेटिना के स्वास्थ्य के लिये भी यह बेहद जरुरी है। यह Vitamin कुछ तरह के त्वचा रोगों के इलाज में भी इस्तेमाल किया जाता है।


विटामिन A की कमी और अधिकता के कारण होने वाली समस्या -

शरीर में Vitamin A की कमी के कारण रतौंधी, हाइपरकेराटोसिस और केराटोमैलासिया के रोग होते है। रतौंधी का रोग होने पर व्यक्ति कम रौशनी में कुछ नहीं देख पाता। अधिक बुरी स्थिति में रोगी अंधा भी हो सकता है। इस विटामिन को अधिक मात्रा में लेना भी खतरनाक है, क्योंकि ऐसा करने से हाइपरविटामिनोसिस A का रोग होने की प्रबल सम्भावना रहती है।


विटामिन A के स्रोत व मात्रा -

यकृत, मछली, अंडे, काड लीवर ऑइल, दूध, पके हुए पीले-नारंगी रंग के फल जैसे - आम, खरबूजा, संतरा, विलायती खरबूजा, केला आदि व गाजर, चुकंदर, कद्दू, पालक, शकरकंद, सोया दूध और हरी पत्तेदार सब्जियाँ इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में Vitamin A पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 900 µg Vitamin A की आवश्यकता होती है, जो हमें इस आहार से बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा 3000 µg निर्धारित है।


2. विटामिन D : -


Vitamin D को कोलकेल्सिफेरोल (विटामिन D3) और एर्गोकेल्सिफेरोल (Vitamin D2) के रासायनिक नाम से भी जाना जाता है। यह विटामिन हमारी हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिये बहुत आवश्यक है। इसके अभाव में शरीर की कैल्शियम को अवशोषित करने की क्षमता समाप्त हो जाती है, जिसके कारण हड्डियां भंगुर हो जाती है और उनके हल्की सी चोट से भी टूटने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। Vitamin D हमारे शरीर में हार्मोनों की तरह से कार्य करते हुए, खनिजों के चयापचय के नियंत्रक का कार्य भी करता है।

यह न केवल कैल्शियम के चयापचय के लिये, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने, तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने और हड्डियों का घनत्व बढाने के लिये भी अत्यंत आवश्यक है। सूर्य का प्रकाश इसका सबसे सरल और प्रचुर प्राकृतिक स्रोत है, जो इस विटामिन को क्रियाशील करने के लिये भी आवश्यक है। सर्दियों में इस Vitamin को विशेष रूप से लेने की आवश्यकता है। केवल एक घंटे तक धूप में बैठने से ही शरीर को इसकी पर्याप्त मात्रा मिल जाती है।


विटामिन D की कमी और अधिकता के कारण होने वाली समस्या -

Vitamin D की कमी के कारण रिकेट्स और ओस्टोमैलासिया के रोग होने की सम्भावना होती है, जो हड्डियों से संबंधित रोग हैं। इनमे अस्थियाँ मुलायम और कमजोर होकर मुड जाती हैं, जिससे शरीर में कुबडापन आ जाता है। इसकी अधिक मात्रा भी शरीर के लिये नुकसानदेह है, ऐसी स्थिति में हाइपरविटामिनोसिस D का रोग होने की प्रबल सम्भावना होती है। अतः उचित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिये।

कुछ समय पहले एक शोध में यह तथ्य सामने आया था कि भारत के 80% से अधिक स्त्री-पुरुषों में Vitamin D की भारी कमी है। शायद यह भी एक कारण हो सकता है कि प्रौढ़ अवस्था में पहुँचने वाले अधिकांश लोगों में जोड़ों से संबंधित समस्याएँ बढती ही चली जा रही हैं।


विटामिन D के स्रोत व मात्रा : -

मछली, अंडे की जर्दी, यकृत, मशरूम, प्रसंस्करित अनाज, प्रसंस्करित दूध, सूर्य की धूप आदि इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में विटामिन D पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 10 µg Vitamin D की आवश्यकता होती है, जो हमें इस आहार से बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा 50 µg निर्धारित है।


3. विटामिन E : -


Vitamin D का रासायनिक नाम टोकोफेरोल्स, टोकोट्रिनोल्स है। यह विटामिन भी अन्य विटामिनों की तरह विविध जैवरासायनिक कार्यों को संपन्न करता हैं। विटामिन E अत्यावश्यक लिपिडो को क्षति से बचाने, मुक्त अणुओं को शरीर से बाहर निकालने और कोशिका झिल्ली को एकीकृत बनाये रखने में सहायता करता है। यह एक शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में भी कार्य करता है और शरीर को फ्री रेडीकल्स से बचाने के लिये आवश्यक है।

यदि शरीर में संतुलन और उचित समन्वय की कमी महसूस हो या माँसपेशियों में कमजोरी या हाथ-पैर का सुन्न हो जाना जैसी समस्याएँ होने लगे, तो यह इस बात का संकेत हैं कि आपके शरीर में Vitamin E की मात्रा बहुत कम हो चुकी है।


विटामिन E की कमी और अधिकता के कारण होने वाली समस्या -

शरीर में Vitamin E की कमी की सम्भावना वैसे तो बहुत दुर्लभ है, लेकिन यदि हो जाय तो पुरुषों में बांझपन और स्त्रियों में गर्भपात के रोग देखने को मिलते हैं। नवजात शिशुओं के अंदर इस विटामिन की कमी होने से रक्त की कुछ कमी (हीमोलाय्टिक एनीमिया) हो जाती है। इस विटामिन को अधिक मात्रा में लेने से ह्रदय की गति रुकने की सम्भावना हो सकती है, ऐसा एक विस्तृत पर अनियमित अध्ययन में सामने आया है।

विश्व के अधिकांश देशों के निवासियों में Vitamin E की भी काफी कमी है, जिसके कारण बढती उम्र में थकान, कमजोरी, अनिद्रा आज सभी के लिये एक व्यापक समस्या बन चुकी है।


विटामिन E के स्रोत व मात्रा -

फल व सब्जियाँ जैसे एवोकेड़ो, गिरियाँ और बीज जैसे - बादाम, काजू, अखरोट, चिरौंजी, पहाड़ी बादाम, खरबूजे के बीज, जौ, साबुत अनाज, जैतून का तेल आदि इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में विटामिन E पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 15 mg Vitamin E की आवश्यकता होती है, जो हमें इस आहार से बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा 1000 mg निर्धारित है।


4. विटामिन K : -


Vitamin K का रासायनिक नाम फिलोक्वीनोन, मेनाक्वीनोन है। यह अनिवार्य विटामिन शरीर के घावों को भरने के लिये और हड्डियों के विकास के लिये बहुत आवश्यक है। K शब्द का तात्पर्य जर्मन शब्द koagulation से है, जिसका अर्थ है थक्का जमाना। यह विटामिन कटे-फटे स्थान से बहते हुए रक्त को थक्कों के रूप में जमाकर, शरीर के घावों को शीघ्र ठीक होने में सहायता करता है और घातक संक्रमण को फैलने से रोकता है।

जो स्त्रियाँ गर्भ निरोधक गोलियाँ ले रही है, उन्हें इस विटामिन की अधिक खुराक लेने से बचना चाहिये, क्योंकि यह गोलियाँ और इस Vitamin की अतिरिक्त मात्रा अनावश्यक थक्के जमाने का खतरा बढ़ा देती हैं।


विटामिन K की कमी और अधिकता के कारण होने वाली समस्या -

शरीर में इसकी मात्रा कम हो जाने से रक्त बहने, नाक से रक्त निकलने, मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्त निकलने व चोट के प्रति सुग्राहिता बढ़ने की समस्या हो जाती है। रक्त जल्दी नहीं जमता और संक्रमण फैलने का भय रहता है। इस Vitamin को अधिक मात्रा में भी नहीं लेना चाहिये। क्योंकि यह रोगियों में, विशेषकर उनमे जो वारफेरिन ले रहे हैं, खून के थक्के जमने की गति को बढ़ा देता है, जिसके कारण शरीर के भीतर ही किसी स्थान पर थक्के जमने से व्यक्ति का जीवन संकट में पड़ सकता है।


विटामिन K का स्रोत व मात्रा -

यकृत, अंडे की जर्दी, हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे - पालक, ब्रोकोल्ली, पत्ता गोभी, सरसों, करमसाग, अजमोद आदि इस विटामिन के प्रमुख स्रोत हैं, जिनमे भरपूर मात्रा में विटामिन K पाया जाता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 120 µg Vitamin K की आवश्यकता होती है, जो हमें इस आहार से बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसकी प्रतिदिन के लिये अधिकतम मात्रा अभी निर्धारित नहीं की जा सकी है, इसलिये इसे कम ही मात्रा में लें।


"आरोग्य की इच्छा हमेशा ही स्वास्थ्य की आधी रही है।"
- सेनेका


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