Incredible Health Benefits of Desi Ghee in Hindi

 

“घी हजारों वर्षों से भारतीय लोगों के भोजन का अभिन्न अंग रहा है जो न केवल साधारण भोजन को स्वादिष्ट और सुरुचिपूर्ण बना देता है, बल्कि शारीरिक स्वास्थय के लिये भी एक शक्तिशाली पदार्थ है। आयुर्वेद के अनुसार घी एक रसायन है, क्योंकि इसके निर्माण में एक रासायनिक प्रक्रिया शामिल है। घी सिर्फ शरीर को ही बलिष्ठ बनाता हो, ऐसी बात नहीं है। यह कई बीमारियों का भी अदभुत उपचार है और इन सबसे बढ़कर यह करोड़ों हिन्दुओं के धार्मिक कृत्यों का अनिवार्य अंग है।”

 

घी की महत्ता से दुनिया के अधिकांश लोग परिचित हैं। गाय के घी को इसके दूध की ही तरह अमृत की संज्ञा दी गयी है। और यह कोई अलंकारिक तथ्य नहीं है, बल्कि अपने स्वयं के अनुभव तथा ज्ञानियों और विद्वानों द्वारा प्रतिपादित सत्य द्वारा हम यह अवश्य सिद्ध भी कर देंगे कि दूध और घी के जैसा निरापद, सुलभ और बलकारी पदार्थ इस धरती पर इंसानों को दूसरा कहीं उपलब्ध नहीं हो सकता है। घी के संबंध में इंटरनेट पर जो सामग्री उपलब्ध है वह अत्यंत सीमित है और उसमे पर्याप्त शोध का अभाव है।

जीवनसूत्र पर दिये गये अन्य लेखों की तरह हम यहाँ अपने और दूसरों के अनुभव का वर्णन करेंगे, इसीलिये यह लेख भी काफी लम्बा ही होगा। केवल प्रयोगशाला की जाँच के आधार पर सिद्ध हुए प्रमाणों को पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के शरीर की प्रकृति अलग-अलग होती है, आवश्यक नहीं है कि जो पदार्थ एक मनुष्य के लिये हितकर हो वह दूसरे को भी लाभ दे इसीलिये हम बहुसंख्यक लोगों के व्यक्तिगत अनुभव को अधिक महत्ता देते हैं।

What is Ghee or Clarified Butter : –

घी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘घृत’ शब्द से हुई है, जिसका सामान्य अर्थ है – ‘मंथन से तैयार हुआ।’ घी के निर्माण का सर्वप्रथम ज्ञान भारतीयों को ही था जो हजारों वर्षों से इसके अनेकों प्रयोगों से परिचित हैं। बाद में भारत से ही घी के गुणों का ज्ञान पहले दक्षिणी एशिया और फिर सारे संसार में फैला था। मक्खन तो सभी लोगों ने खाया ही होगा, क्योंकि यह धरती पर खाये जाने वाले सबसे प्रिय भोज्य पदार्थों में से एक है। भोजन को स्वादिष्ट बना देने की अपनी अनोखी क्षमता के कारण यह हर दिल अजीज चीज है।

घी इस मक्खन (Butter) से ही तैयार किया जाता है और दूध का सार पदार्थ है। मक्खन में दूध का कुछ अंश होता है, लेकिन घी केवल वसा अम्लों का शुद्ध स्वरुप है। चूँकि घी को उबालकर तैयार किया जाता है और इसमें सड़ने वाला कोई पदार्थ नहीं बचता है, इसीलिये इसे रेफ्रीजरेटर में रखने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यह सिर्फ कुछ दिन या महीने नहीं, बल्कि कई साल तक बिल्कुल सुरक्षित रहता है। आयुर्वेद के अनुसार घी जितना पुराना होता है, वह उतना अधिक गुणकारी माना जाता है।

क्योंकि उसमे वसा अम्लों की तीव्रता उतनी अधिक बढती जाती है। 20 वर्ष से अधिक पुराने गाय के घी को महाघृत की संज्ञा दी गयी है। इसका प्रयोग कुछ विशेष रोगों के उपचार में किया जाता है। घी गाय, भैंस और बकरी समेत कई पशुओं के दूध से तैयार किया जा सकता है, पर मुख्यतः खाने में गाय और भैंस के घी का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है। गाय का घी हल्के पीले रंग की आभा लिये होता है जबकि भैंस का घी श्वेत रंग का होता है। चूँकि गौ के घी की वसा पचने में भैंस के घी से हल्की होती है अतः यह अधिक श्रेष्ठ माना जाता है।

सभी गायों में देशी गौ का घी सर्वोत्तम है और यदि वह घी कपिला गौ का हो तो तब तो कहना ही क्या! पर ऐसा घी मिल पाना दुर्लभ ही है। घी को बनाने की जितनी भी विधियाँ हैं उनमे धीमी आँच पर उबाले गये दूध से तैयार किये मक्खन को पिघलाकर बनाया हुआ घी सर्वोत्तम माना जाता है। लेकिन यह एक लंबी प्रक्रिया है और ऐसा घी अब शायद बहुत कम लोगों को ही उपलब्ध हो पाता हो, इसीलिये आप किसी भी विधि से तैयार हुआ घी उपयोग में ला सकते हैं। घी को बनाने और उसे संरक्षित करने की विधि और उसके कुछ प्रयोगों का वर्णन हम अगले लेख में करेंगे।

Nutritional Facts about Cow’s Ghee : –

आयुर्वेद के अनुसार घी कफकारक, वातनाशक, पित्त शामक, ओज प्रदायक और स्निग्ध होता है। यह शीतल प्रकृति का होता है। यह नसों की कमजोरी को दूर करने वाला और चर्म रोगनाशक है। घी वसा का शुद्ध स्वरुप है, लेकिन इसमें कई महत्वपूर्ण विटामिनों के साथ-साथ बहुत उर्जा भी होती है। घी का Smoke Point (250 °C or 482 °F) अन्य खाद्य तेलों की तुलना में कहीं अधिक होता है जिससे यह Free Radicals में नहीं टूटता। कई लोग यह सोच सकते हैं कि जब घी में केवल वसा ही होती है तो फिर इसे खाने से क्या लाभ?

उनसे हमारा यह कहना है कि fat शरीर के लिये अनिवार्य तत्वों में से एक है। जिसकी शरीर की प्रतिदिन की मरम्मत के लिये, मस्तिष्क के कोशों के लिये और मजबूत मांसपेशियों के लिये आवश्यकता होती है। हमारे शरीर के लिये जो वसा हानिकारक होती है उसे Saturated Fat या संतृप्त वसा कहते हैं। घी में Monounsaturated Fat (असंतृप्त वसा) Omega-3s होती है जो मानव स्वास्थ्य के लिये अच्छी वसा मानी जाती है। (ध्यान दें घी में Saturated Fat भी बहुत मात्रा में होती है अतः विचारपूर्वक सेवन करें।) घी में मुख्य रूप से यह तत्व पाये जाते हैं –

1. 100 ग्राम घी में 99.5 ग्राम वसा होती है। जिसमे 61.9 ग्राम Saturated Fat, 28.7 ग्राम Monounsaturated Fat और 3.7 ग्राम Polyunsaturated Fat होती है।

2. इसके अतिरिक्त घी में 4 ग्राम Trans Fats, 1.447 मिग्रा Omega-3 Fatty Acids, 2.247 मिग्रा Omega-6 Fatty Acids और 25.026 मिग्रा Omega-9 Fatty Acids भी पाये जाते हैं।

3. घी में 3069 IU विटामिन A, 2.8 मिग्रा विटामिन E और 8.6 माइक्रोग्राम विटामिन K पाया जाता है।

4. इसके अतिरिक्त घी में लिनोलेक अम्ल (Conjugated Linoleic Acid) और बटरिक अम्ल (Butyric Acid) जैसे वसा अम्ल भी होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ और बलिष्ठ बनाये रखने में बडा योगदान देते हैं।

5. 100 ग्राम घी में 256 मिग्रा कोलेस्ट्रॉल होता है।

When and How should You Eat Ghee : –

1. घी को किसी भी समय और लगभग हर चीज के साथ खाया जा सकता है, फिर भी घी खाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिये –

2. प्रातःकाल और दोपहर के समय घी का सेवन करना सर्वोत्तम है, क्योंकि लगभग सभी मनुष्य दिन के समय अधिक क्रियाशील रहते हैं जिससे घी का पाचन आसान हो जाता है।

3. घी का सेवन देर रात्रि के समय मत करें, क्योंकि इससे शरीर में कफ की मात्रा बढती है।

4. घी का भोजन में इस्तेमाल करना आम बात है, लेकिन गाय के घी को बहुत गर्म करके तब उसका सेवन न करें।

5. दूध में घी मिलाकर पीया जा सकता है। ऐसा करने में कोई हानि नहीं है, जब तक कि आप किसी गंभीर रोग से ग्रस्त न हों।

6. घी और शहद को कभी भी एक साथ एक समान मात्रा में मिलाकर नहीं खाना चाहिये। ऐसा करने से यह शरीर के लिये विषरूप हो जाता है।

7. घी खाने के पश्चात ठंडा पानी मत पीयें। यदि पीना ही हो तो हल्का गर्म पानी पीयें, अन्यथा मन्दाग्नि या खाँसी की समस्या पैदा हो सकती है।

8. घी को करेले और दही के साथ भी प्रयोग न करें, क्योंकि यह विपरीत प्रकृति के भोज्य पदार्थ हैं। ऐसा करने से पाचन अंगों की क्रियाशीलता प्रभावित होती है।

9. एक बार में 25 ग्राम से अधिक और दिन भर में 40-50 ग्राम से अधिक घी न खायें, जब तक कि आप कठोर शारीरिक या मानसिक परिश्रम न करते हों।

Great Benefits of Ghee/Clarified Butter : –

शारीरिक स्वास्थ्य के लिये घी कितना बलदायी और शक्तिवर्धक रसायन है, यह आप नीचे दिये जा रहे बिन्दुओं से आसानी से समझ सकेंगे –

Ghee is Great Source of Essential Vitamins –

घी दूध का सार पदार्थ है, लेकिन दूध को उबालने के पश्चात भी इसके अधिकांश पोषक तत्व बचे रहते हैं जिनमे कई तरह के विटामिन भी शामिल हैं। घी Healthy Fat-soluble Vitamins जैसे विटामिन A, D, E और K का प्रचुर स्रोत है जो न केवल हड्डियों और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिये आवश्यक हैं, बल्कि शरीर को रोगों से भी बचाते है। मानव शरीर के लिये विटामिन क्यों आवश्यक हैं और वह कितने प्रकार के होते हैं इसका विस्तृत वर्णन हमने Health Benefits of Vitamins in Hindi और Essential Vitamins इन लेखों में किया है।

Ghee is Good for Development of Healthy Brain –

एक स्वस्थ और तेज मस्तिष्क के लिये घी बहुत ही आवश्यक वस्तु है। हमारे विचार से अधिकांश लोग इस तथ्य से परिचित ही होंगे कि कठोर शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति की तुलना में कठोर मानसिक श्रम करने वाले व्यक्ति को दुगुनी उर्जा की आवश्यकता होती है, क्योंकि मस्तिष्क को सामान्य कार्य करने के लिये भी बहुत रक्त चाहिये होता है। हमारे शरीर में सबसे अधिक रक्त गुर्दों और मस्तिष्क में ही प्रवाहित होता है। (कुल रक्त का 20 प्रतिशत हर अंग में प्रवाहित होता है।)

मस्तिष्क की अदभुत और अनोखी सामर्थ्य का वर्णन हमने Incredible Brain Facts in Hindi में विस्तार से किया है। जब कोई व्यक्ति मस्तिष्क से अधिक काम लेता है तो रक्त प्रवाह बढ़कर 30 से 40 प्रतिशत तक हो जाता है। मस्तिष्क की बढ़ी हुई उर्जा जरूरतों को घी आसानी से पूरा कर सकता है, क्योंकि इसमें उपस्थित HDL कोलेस्ट्रोल मस्तिष्क की कोशिकाओं और न्यूरोन के निर्माण के लिये बेहद जरुरी है।

आपको बता दें कि मस्तिष्क के कुल भार का 60 प्रतिशत भाग केवल वसा होती है। हमारे शरीर में जितना कोलेस्ट्रॉल होता है उसका 25 प्रतिशत केवल हमारे मस्तिष्क में संचित होता है। घी कैसे मस्तिष्क को तेज बना सकता है इसके बारे में विस्तार से जानने के लिये How to Sharpen Your Mind, यह लेख ध्यान से पढ़ें।

Ghee is A Great Source of Energy –

घी उर्जा का प्रचुर स्रोत है जो न केवल थके शरीर की क्लांति को दूर करता है, बल्कि लंबे समय तक उर्जा की कमी भी नहीं होने देता है। इतना ही नहीं, घी शरीर की सातों धातुओं को पुष्ट करता है, शरीर के बल और तेज की वृद्धि करता है और ओज का क्षय नहीं होने देता है। घी में उपस्थित वसा में Medium-chain Fatty Acids होते हैं जिन्हें यकृत अन्य वसा अम्लों की तुलना में आसानी से पचा सकता है। इसके अतिरिक्त घी में ओमेगा-3 भी पाया जाता है जो शरीर के लिये बहुत ही फायदेमंद है। ऐसे शायद बहुत ही कम भोज्य पदार्थ होंगे जो गुणों में घी की बराबरी कर सकते हो और साथ ही इतने निरापद भी हों।

Ghee makes Your Body Strong –

घी आपके शरीर को सबल, पुष्ट और शक्तिशाली बनाता है। यह न केवल हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, बल्कि क्षीणकाय और दुर्बल लोगों के शरीर पर माँस की परत भी चढ़ाता है, इसीलिये मोटापे से ग्रस्त लोगों को घी का सेवन नहीं करना चाहिये। आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर में सात धातुएँ होती हैं, जिनके नाम हैं – रस, रक्त, माँस, मेद, अस्थि, मज्जा और वीर्य/रज।

हम जो कुछ भी खाते हैं वह पहले रस बनता है जिसे आँते अवशोषित करके यकृत में भेज देती हैं। बाद में यह रस क्रम से देह में रूपांतरित होता हुआ वीर्य और रज के रूप में बदल जाता है। जब तक शरीर में सातों धातुओं का संतुलन बना रहता है तब तक यह रोगग्रस्त नहीं होता। घी अपने अनोखे वसा अम्लों और सुपाच्य वसा के द्वारा समस्त धातुओं का पोषण करता है।

Ghee Protects Your Eyes –

घी नेत्रों की ज्योति को न केवल घटने से बचाता है, बल्कि इन्हें इस सीमा तक तेजस्वी बना सकता है कि वृद्धावस्था तक आपको चश्मे की जरुरत ही न पडे। दरअसल घी की इस क्षमता का रहस्य छिपा है इसमें समाहित विटामिन A और एंटीऑक्सीडेंट की प्रचुर मात्रा में। हमारी आँखों को मुख्य रूप से विटामिन A की ही आवश्यकता होती है और इसका भंडार यकृत में सुरक्षित रहता है जो 4-5 वर्ष तक पूर्ति कर सकता है। प्रतिदिन घी खाने से यकृत का रिज़र्व स्टॉक सुरक्षित बना रहता है और साथ ही आँखों की जरुरत भी पूरी हो जाती है।

घी में पाया जाने वाला Carotenoid Antioxidant, शरीर को नुकसान पहुँचाने वाले उन Free Radicals को समाप्त करता है जो लेंस की कोशिकाओं (Macular Cells) पर आक्रमण करके उन्हें कमजोर करते हैं और इस तरह यह Macular Degeneration के खतरे को दूर करके आँखों की कई बीमारियों से बचाता है।

Ghee Reduces Inflammation of Muscle and Joints –

घी सूजन को काफी हद तक कम कर सकता है, क्योंकि इसमें उपस्थित बटरिक अम्ल उन सबसे महत्वपूर्ण वसा अम्लों में से एक है जिनकी शरीर को बहुत आवश्यकता होती है। हालिया शोध में यह पाया गया है कि यह वसा अम्ल शरीर के अंगों में होने वाली सूजन को बहुत हद तक कम कर सकता है, विशेषकर पाचन संस्थान (Gastrointestinal Tract) की सूजन। एक Report के अनुसार Ulcerative Colitis से पीड़ित कुछ लोगों में घी के प्रयोग से लाभ देखा गया है।

अपने और दूसरे कई लोगों के अनुभव में हमने यह पाया है कि घी आरंभिक अवस्था के मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में भी बहुत लाभ देता है। लेकिन इसके लिये घी को खाद्य पदार्थ के रूप में नहीं, बल्कि एक अभ्यंग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। प्रतिदिन सोते समय एक विशेष रूप से तैयार किये गये घी से (जिसका वर्णन हमने Home Treatment of Muscle and Joint Pain में किया है।) जोड़ों और मांसपेशियों की मालिश करने से पीड़ा में बहुत आराम मिलता है।

Ghee Aids in Nose Bleeding –

घी नाक की नसों के कमजोर होने के कारण और गर्मियों के मौसम में अक्सर चलने वाली नकसीर का रामबाण इलाज है जिसे हमने कुछ रोगियों पर सफलतापूर्वक आजमाया है। उनमे से सबसे मुश्किल रोग मेरे अपने जीवन से संबंधित है, लेकिन इसके बारे में हम विस्तार से Home Treatment of Nose Bleeding में पढ़ेंगे।

यहाँ हम केवल यह बताना चाहते हैं कि नियमित रूप से नाक के दोनों छिद्रों में दो-दो बूँद गौ का शुद्ध घी डालने से न केवल मौसमी जुकाम में लाभ होता है, बल्कि नकसीर (नाक से अचानक रक्त बहना) का चलना भी बंद हो जाता है। इसके अतिरिक्त यह मस्तिष्क के लिये भी अत्यंत लाभदायक है। यह उपाय हमारा अपना अनुभूत है।

Ghee is an Immunity Booster Tonic –

घी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और उसे इतना प्रबल कर सकता है कि सामान्य तो क्या घातक संक्रमण तक से शरीर का कुछ न बिगड़ पाये। सभी जानते हैं कि रोगों के खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस कमजोर शरीर पर ही आक्रमण करते हैं। कमजोर होने का तात्पर्य केवल दुर्बल शरीर से नहीं है, बल्कि निर्बल जीवनीशक्ति से है। एक स्वस्थ और सबल दिखने वाला व्यक्ति भी कमजोर जीवनीशक्ति वाला हो सकता है।

जबकि एक पतला व्यक्ति भी प्रचंड रोग प्रतिरोधक क्षमता से संपन्न हो सकता है। शरीर की इस क्षमता का अनुमान केवल शरीर के आकार से नहीं लगया जा सकता है। एक Research में पाया गया है कि घी में उपस्थित Butyric Acid जो इसके सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है, उन T-cells के उत्पादन की प्रक्रिया को बढ़ा देता है जो हमारे सशक्त Immune System के लिये मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं।

Ghee is The Best Hair Growth Solution –

बालों में घी लगाने के पश्चात इसकी विशेष महक लोगों के लिये परेशानी का कारण जरुर बन सकती है, पर धरती पर शायद ही कोई ऐसा पदार्थ होगा जो बालों के समुचित पोषण की जरूरतों को पूरा करने में घी की बराबरी कर सके। मजबूत बालों के लिये विटामिन A की बहुत आवश्यकता होती है और घी में इस विटामिन की प्रचुर मात्रा होती है। इसीलिये यदि घी खाने के साथ-साथ बालों की घी से मालिश की जाय तो न केवल बालों को पर्याप्त Nutrients मिलेंगे, बल्कि वह मजबूत होकर तेजी से भी बढ़ेंगे।

यदि आपके परिवार में कोई ऐसी वृद्धा स्त्री हो जों ग्रामीण पृष्ठभूमि से हों तो आपको इसकी महत्ता का आँकलन हो सकता है। हमने कई वृद्ध स्त्रियों से बातकर इस उपाय की सामर्थ्य की पुष्टि की है और स्वयं पर परीक्षण करके भी इसे बिल्कुल सत्य पाया है। (बशर्ते आप किसी अन्य रोग से ग्रस्त न हो)

Ghee is The Treatment of Skin Diseases –

घी त्वचा से सम्बंधित अनेकों रोगों के उपचार में लाभदायक है। छाजन, एक्जिमा और सोरायसिस जैसे चर्म रोगों में घी का सेवन करने से रोग की तीव्रता में कमी देखी गयी है और उपचार में आशातीत लाभ हुआ है। आयुर्वेद के अनुसार सभी प्रकार के चर्म रोग, शरीर में पित्त के असंतुलन के कारण पैदा होते हैं और घी एक शक्तिशाली पित्तनाशक है।

सर्दियों में शरीर की त्वचा अक्सर शुष्क होकर फटने लगती है। यदि कुछ दिन तक घी की मालिश की जाय तो त्वचा की खुश्की दूर होती है और इसकी कान्ति बढ़ने के साथ-साथ कोशिकाओं को भी भरपूर पोषण प्राप्त होता है। पैरों में बिवाईयाँ होने पर यदि उन्हें सही प्रकार से साफ करके उन पर रात को घी लगा दिया जाय, तो कुछ ही दिन में वह बिलकुल ठीक हो जाती हैं।

Ghee Prevents Cancer –

घी में Powerful Antioxidants होते हैं जो शरीर को रोगग्रस्त करने वाले Free Radicals की वृद्धि को रोकते हैं। कुछ Research में ऐसा पाया गया है कि घी में पाये जाने वाले fatty acids कुछ विशेष प्रकार के कैंसर, जैसे – आँतों और गुदा का कैंसर, से बचाव करने में सहायक हो सकते हैं। क्योंकि यह उन Free Radicals को समाप्त कर देते हैं जो कैंसर कोशिकाओं की पैदा होने और बढ़ने में सहायता करते हैं। इसके अतिरिक्त घी में पाये जाने वाले तत्व ट्यूमर को बढ़ने से भी रोकते हैं।

Ghee Kills Worms –

घी शरीर के कीड़ों को मारने में भी बेहद ही असरदायक है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो आज भी पशुओं के घावों में पडे कीड़ों को मारने के लिये घी का इस्तेमाल किया जाता है जिन लोगों के घावों में कीड़े (maggots) हो जाते हैं उन्हें यदि कई वर्ष पुराना घी मिल सके तो उन्हें उस दुखदायी रोग से जल्दी छुटकारा मिल सकता है। आज हालाँकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने बहुत प्रगति कर ली है और इस रोग की दवाइयाँ भी अधिकांश स्थानों पर उपलब्ध है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब घी इस रोग की मुख्य औषधि हुआ करता था। हमने स्वयं अपनी आँखों से ग्रामीण लोगों को यह उपाय करते देखा है। (ध्यान दें यह पेट के कीड़ों का उपचार नहीं है।)

Ghee helps in Asthma and Respiratory Problems –

वैसे तो घी भोजन के रूप में खाने पर प्रत्येक श्वास रोग में हानिकारक ही सिद्ध होता है, लेकिन यदि इसे अप्रत्यक्ष रूप से अभ्यंग के रूप में प्रयुक्त किया जाय तो यह खतरनाक दमा रोग में भी बहुत लाभदायक सिद्ध होता है। लहसुन के सत्व को घी में मिलाकर छाती की पसलियों पर मालिश करने से रोगी को बहुत आराम मिलता है। क्योंकि इस रोग में खाँसते-खाँसते व्यक्ति का सीना दुखने लगता है। छाती की मांसपेशियाँ धीरे-धीरे कमजोर होकर इतनी अशक्त हो जाती हैं कि रोगी चैन से बैठ भी नहीं सकता है और हरदम हाँफता ही रहता है।

औषधि और परहेज के साथ-साथ यदि नियमित रूप से रोगी की मालिश की जाय तो उसे बहुत आराम मिलता है। क्योंकि यह सर्वविदित है कि श्वास रोगियों के शरीर का माँस धीरे-धीरे सूखने लगता है और अंत में शरीर एक अस्थि पिंजर के रूप में ही बचता है। हमने कई लोगों को इस उपाय से लाभ होते देखा है और पाया है कि शरीर की पीड़ा में उन्हें इससे बहुत लाभ पहुँचा है।

Ghee Reduces Allergy –

घी यूँ तो दूध से ही तैयार होता है फिर भी इसमें लैक्टोज का कोई अंश नहीं होता है। घी की यही खूबी इसे उन लोगों के लिये एक उत्तम भोज्य पदार्थ बना देती है जिन्हें दूध और दूध से बने अन्य उत्पाद जैसे दही, पनीर और मक्खन हजम नहीं होते है, अर्थात जिन्हें दुग्ध उत्पादों से एलर्जी होती है। ऐसे लोग Gastrointestinal Problems की चिंता किये बिना घी खा सकते हैं।

Ghee Aids in Disease of Reproductive Organs –

घी प्रजनन तंत्र से सम्बंधित कई रोगों में भी लाभदायक है। आयुर्वेद में पुरुषों के धातु रोग और स्त्रियों के प्रदर रोग समेत कुछ अन्य रोगों जैसे सुजाक आदि में घी को कुछ अन्य औषधियों के साथ मिलाकर प्रयोग करने से रोगों की तीव्र अवस्था में भी बहुत लाभ होता है।

Special Benefits of Ghee in Uncommon Diseases –

घी के कुछ विशेष प्रयोग कई दुर्लभ और कम दिखने वाली बीमारियों के उपचार में भी प्रयुक्त होते हैं जिनमे घी को कई वनौषधियों के साथ मिलाकर एक नयी औषधि का निर्माण किया जाता है। ऐसे कुछ प्रयोग हम अगले लेख में देंगे।

Who should not Consume Ghee (Side Effects of Ghee) : –

घी निःसंदेह मानव शरीर के लिये बहुत गुणकारी है। लेकिन अति सर्वत्र वर्जयेत की उक्ति के अनुसार इसे अधिक मात्रा में खाना स्वास्थ्य को मुश्किलों में भी डाल सकता है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति पहले से ही किसी रोग से ग्रस्त हों उन्हें भी इसका सेवन बहुत ध्यान से करना चाहिये। क्योंकि ऐसा न करने से उनकी बीमारी गंभीर रूप धारण कर सकती है। हम ऐसे ही कुछ रोगों का वर्णन यहाँ कर रहे हैं जिनमें घी का प्रयोग करना नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है –

1. ह्रदय रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों को घी नहीं खाना चाहिये। विशेषकर जिन्हें कभी ह्रदय आघात (Cardiac Arrest) पड़ा हो या दिल की सर्जरी से गुजरना पड़ा हो। हालाँकि कुछ Research में यह पाया गया है कि घी से दिल को नुकसान नहीं पहुँचता है, लेकिन कई शोध के अनुसार घी ह्रदय रोगियों के लिये अच्छा नहीं होता है। हमारे अनुभव में भी यह तथ्य सही सिद्ध हुआ है, क्योंकि जिन ह्रदय रोगियों ने घी का सेवन किया था उनके Lipid Profile में हानिकारक Cholesterol की काफी वृद्धि पायी गयी थी और उनकी शारीरिक समस्याएँ और अधिक बढ़ गयी थीं।

2. घी अगर किसी रोग में सबसे अधिक नुकसानदायक है तो वह है श्वास रोग। श्वास रोग फेफड़ों से सम्बंधित कई तरह की बीमारियों का समूह है जिसमे, काली खाँसी से लेकर ब्रोनकाईटिस और अस्थमा तक शामिल हैं। आयुर्वेद चिकित्सक किसी भी श्वास रोग में घी का सख्त परहेज रखते हैं, क्योंकि यह रोग को और अधिक बढ़ा देता है। यदि किसी व्यक्ति को यह तथ्य अतिश्योक्तिपूर्ण लगता है तो वह इसकी आसानी से परीक्षा कर सकता है। दमे की किसी भी अवस्था में घी खाना बहुत ही नुकसानदायक है। इसके स्थान पर रोगी की घी से मालिश करनी चाहिये।

3. मोटापे की समस्या से ग्रस्त लोगों को घी नहीं खाना चाहिये। यह देखा गया है कि मोटे लोगों का रक्तचाप अक्सर बढ़ा हुआ होता है और उच्च रक्तचाप वाले रोगियों में घी का High Saturated Fat Content उनके लिये नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। (अच्छे चिकित्सक की सलाह अवश्य लें)

4. कमजोर पाचन शक्ति वाले और उदर रोगों से ग्रस्त लोगों को भी घी नहीं खाना चाहिये, क्योंकि यह पचने में भारी होता है। जिन लोगों को दीर्घकालीन कब्ज, गैस, यकृत और आँतों का कोई रोग हो, उन्हें घी का सेवन सुयोग्य चिकित्सक से बिना पूछे नहीं करना चाहिये।

5. ज्वर की अवस्था में घी का प्रयोग नहीं करना चाहिये, ऐसा अनुभवी लोगों और वैद्यों का मत है। उनके अनुसार ऐसा करने से बुखार और जटिल हो जाता है और आसानी से नहीं उतरता।

घी के संबंध में जो तथ्य यहाँ दिये गये हैं, वह हमने अपनी जानकारी, अनुभव और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर दिये हैं। हमारा उद्देश्य केवल जनसामान्य की जानकारी का अभिवर्धन और जागरूकता का प्रसार है। यह चिकित्सीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी रोग के सम्बन्ध में एक निष्णात चिकित्सक की वैज्ञानिक द्रष्टिकोण युक्त सलाह को सर्वप्रमुख महत्व दिया जाना चाहिये।

“संसार की समस्याएँ संभवतया उन निन्दाशील या मनुष्यद्वेषी लोगों के द्वारा हल नहीं की जा सकती हैं जिनके क्षितिज स्पष्ट वास्तविकताओं के कारण सीमित हैं। हमें उन लोगों की आवश्यकता हैं जो उन चीज़ों के सपने देख सकें जो कभी थी ही नहीं।”
– जॉन कीट्स

 

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