Solar System Planets in Hindi

 

“सौर मंडल (Solar System) सूर्य और इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति में बंधे हुए ग्रहों, उपग्रहों, पुच्छल तारों और एस्टेरोइड का एक वृहत तंत्र है, जो 4.5 अरब वर्ष पूर्व निर्मित हुआ था। पृथ्वी भी इसी विशाल तंत्र का एक छोटा सा भाग है, जो अन्य ग्रहों की तरह अपनी कक्षा में स्थित हुई सूर्य की परिक्रमा करती है। हमारा सौर मंडल ओरियन आर्म में स्थित है जो मिल्की वे आकाशगंगा (Galaxy) के केंद्र से लगभग 26 हजार प्रकाश वर्ष दूर है। सूर्य इसका सबसे बड़ा सदस्य है।”

 

Solar System Planets in Hindi
हमारा सौर मंडल अनंत ब्रह्मांड का एक छोटा सा हिस्सा भर है

अपने घर के आस-पास के क्षेत्र और जिले के संबंध में लगभग हर इन्सान को जानकारी रहती है। उच्च शिक्षित और घूमने के शौक़ीन लोगों को तो देश-प्रदेश की भी जानकारी होती है, लेकिन जो हमारा स्थायी वास है और जिस पर हम जन्म से लेकर मृत्यु तक अपने सभी क्रियाकलापों को अंजाम देते हैं, उस धरती और जिस वृहत स्वचालित व्यवस्था का यह विशाल पृथ्वी भी एक बहुत ही छोटा हिस्सा है, उस सौर मंडल (Solar System) के बारे में हममे से अधिकांश लोगों को बस थोड़ी सी ही जानकारी है।

यह लेख हम केवल सौर मंडल (Solar System) की विशालता का अनुमान कराने के लिये ही नहीं दे रहे हैं, बल्कि हमारा उद्देश्य जनमानस की विचारशीलता को और अधिक उच्चतर आयामों पर पहुँचाने का है। फिर चाहे वह दो पल के लिये ही क्यों न हो?

यदि हमारे प्रखर मस्तिष्क में इन विशाल पिंडों के सापेक्ष अपनी लघुता का एक हल्का सा अनुमान कुछ समय के लिये भी ठहर सके, तो हमें यह समझने में देर नहीं लगेगी कि हमारी जानकारी, अनुभव और अहंकार का वह विशाल स्वरुप कितना क्षुद्र है, जिसने हमें एक संकुचित सीमा में ही आबद्ध कर दिया है। हम आशा करते हैं कि आप वह अवश्य समझ सकेंगे जो यहाँ इन शब्दों का अभिप्राय है, क्योंकि तथ्य स्थूल हैं –

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Solar System Quick Fact Sheet सौरमंडल तथ्य

कुल आयु – 4.6 अरब वर्ष
व्यास – 187.5 खरब किमी
तारों की संख्या – 1
ग्रहों की संख्या – 8
बौने ग्रहों की संख्या – 5
पुच्छल तारों की संख्या – 3,083
हीन ग्रहों की संख्या – 7,78,978

धूमकेतुओं की संख्या – 4,017
एस्टेरोइड की संख्या – 552,894
द्रव्यमान – 1.0014 सौर द्रव्यमान (Solar Mass)
प्राकृतिक उपग्रहों की संख्या – 525 (185 ग्रहीय और 347 हीन ग्रहीय)
सबसे नजदीकी तारा – प्रॉक्सिमा सेन्टरी (4.22 प्रकाश वर्ष)
सबसे नजदीकी ग्रह मंडल – ऍप्सिलन ऍरिडानी तारा प्रणाली (10.49 प्रकाश वर्ष)

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Solar System Definition in Hindi

1. Solar System या सौर मंडल जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, सूर्य और इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति में बंधे हुए ग्रहों, उपग्रहों, पुच्छल तारों और एस्टेरोइड का एक वृहत तंत्र है, जो सीधे या वक्रीय ढंग से इसके चारों ओर घूमते हैं। हमारी पृथ्वी भी इसी विशाल तंत्र का एक छोटा सा भाग है, जो अन्य ग्रहों की तरह अपनी कक्षा में स्थित हुई सूर्य की परिक्रमा करती है।

2. पहले लोगों का अनुमान था कि पृथ्वी, ब्रह्माण्ड का स्थिर केंद्र है और आकाश में घूमने वाली दिव्य वस्तुओं से स्पष्ट रूप में अलग है। लेकिन सन 140 में क्लाडियस टॉलमी ने (जेओसेंट्रिक अवधारणा के अनुसार) बताया कि पृथ्वी ब्रह्माण्ड के केंद्र में है और सारे गृह पिंड इसकी परिक्रमा करते हैं। लेकिन कॉपरनिकस ने सन 1543 में बताया कि पृथ्वी नहीं, बल्कि सूर्य ब्रह्माण्ड के केंद्र में है और सारे ग्रह तथा पिंड इसकी परिक्रमा करते हैं।

3. हमारा सौर मंडल (Solar System) 4.6 अरब वर्ष पूर्व तब निर्मित हुआ था, जब एक विशाल तारे के आणविक बादल (Interstellar Molecular Cloud) की गुरुत्वीय शक्ति नष्ट हो गयी थी।

4. हमारे Solar System से सबसे समीप स्थित ग्रह प्रणाली (Planetary System) प्रोक्सिमा सेन्टौरी (Proxima Centauri) है जो 4.25 प्रकाश वर्ष दूर है और सबसे पास का तारा भी यही है।

5. हमारा सौर मंडल Orion Arm में स्थित है जो मिल्की वे आकाशगंगा (Galaxy) के केंद्र से लगभग 26 हजार प्रकाश वर्ष दूर है।

6. हमारे Solar System का केंद्र है सूर्य, इसलिये पहले हम इसकी ही चर्चा करेंगे।

Sun सूर्य

7. सूर्य का व्यास लगभग 13 लाख 90 हज़ार किलोमीटर है, जो पृथ्वी से लगभग 109 गुना ज्यादा है। सूर्य मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का एक विशाल गोला है तथा इसकी उर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है।

8. सूर्य से निकली ऊर्जा का छोटा सा भाग ही पृथ्वी पर पहुँचता है। जिसमें से 15 प्रतिशत अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाता है, 30 प्रतिशत पानी को भाप बनाने में काम आता है और बहुत सी ऊर्जा पेड़-पौधे और समुद्र सोख लेते हैं।

9. सूर्य से होने वाला प्लाज़्मा का प्रवाह (सौर हवा) सौर मंडल को भेदता है। यह तारे के बीच के माध्यम में एक बुलबुला बनाता है जिसे हेलिओमंडल कहते हैं। जो इससे बाहर फैल कर बिखरी हुई डिस्क (तश्तरी) के बीच तक जाता है।

 

Structure of Solar System in Hindi

Solar System Planets सौरमंडल के ग्रह

1. वह 8 सबसे विशाल पिंड जो सीधे अपनी कक्षा में घूमते हुए सूर्य के चक्कर लगाते हैं, ग्रह कहलाते हैं। इनके अतिरिक्त भी कई छोटे पिंड है जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं। जैसे – क्षुद्र ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, बौने ग्रह (Dwarf Planets), उल्का, धूमकेतु, और खगोलीय धूल।

2. सौर मंडल (Solar System) में 8 ग्रहों के अलावा, इन ग्रहों के 181 ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह (प्लूटो, सेरेस, हौमा, मेकमेक और इरिस) और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं। [स्रोत]

Inner Solar System आंतरिक सौर मंडल

3. Solar System के आसान वर्गीकरण के लिये इसे दो भागों में बाँटा जाता है आंतरिक सौर मंडल (Inner Solar System) और बाहरी सौर मंडल (Outer Solar System)।

4. आंतरिक सौर मंडल (Inner Solar System) में वह चार छोटे ग्रह सम्मिलित हैं जो सूर्य के सबसे ज्यादा नजदीक हैं। अर्थात – बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल इन ग्रहों को स्थलीय ग्रह (Terrestrial Planets) भी कहते हैं। यह मुख्यतः चट्टानों और धातुओं से बने हैं।

Outer Solar System बाहरी सौर मंडल

5. बाहरी सौर मंडल (External Solar System) में Asteroid Belt (क्षुद्रग्रह घेरा), चार विशाल गैस से बने बाहरी गैस दानव ग्रह, काइपर घेरा (Kuiper Belt) और बिखरा चक्र (Scattered Disc) भी शामिल हैं। काल्पनिक और्ट बादल भी सनदी क्षेत्रों से लगभग एक हजार गुना अधिक दूरी पर उपस्थित है।

6. बाहरी सौर मंडल में वह चार विशाल ग्रह आते हैं जो चार अंदरूनी ग्रहों से काफी भारी हैं और सूर्य से बहुत दूर हैं। इनमे शनि, बृहस्पति, अरुण और वरुण शामिल हैं।

7. शनि और बृहस्पति गैसों से बने हैं, विशेषकर हाइड्रोजन और हीलियम से। जबकि अरुण और वरुण बर्फ से निर्मित हैं। यह आठों ग्रह अपनी-अपनी कक्षा में भ्रमण करते हैं जो लगभग गोलाकार है।

सौर मंडल का सुदूर क्षेत्र

8. वरुण की कक्षा से परे Kuiper Belt और Scattered Disc स्थित हैं जो बर्फ से निर्मित अनेकों छोटे-बड़े पिंडो का समूह है। 10 हजार से भी अधिक आकाशीय पिंड अपनी ही गुरुत्वाकर्षण शक्ति से चक्कर काट रहे हैं। इन्हें ही क्षुद्र ग्रह (Dwarf Planets) कहा जाता है। इनमें Asteroid Ceres, यम (Pluto) तथा एरिस (Eris) शामिल हैं।

9. सौर मंडल (Solar System) में Asteroid Belt जैसे छोटे पिंड भी हैं जो मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच में स्थित है। यह भी चट्टानों और धातुओं से बने पदार्थों से निर्मित हैं।

10. इनके अतिरिक्त Comets, Centaurs और Interplanetary Dust Clouds, जैसे कई छोटे पिंड भी इन क्षेत्रों में मुक्त रूप से विचरण कर रहे हैं।

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Evolution of Solar System in Hindi

1. हालाँकि सौर मंडल (Solar System) कैसे बना, इस बात पर वैज्ञानिकों में मतभेद है, लेकिन फिर भी हम आपको इसके निर्माण के पीछे जो सर्वश्रेष्ठ अवधारणा बतायी गयी है, उसके बारे में बता रहे हैं।

2. लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले गैसों और धूलों का एक विशाल बादल किसी सुपरनोवा में हुए विस्फोट के कारण उत्पन्न हुए बल से चारों ओर बिखर गया था। इस बिखराव के कारण और बादल में उत्पन्न हुई उर्जा की वजह से, बादल गतिशील होना आरम्भ हो गया।

3. एक बार जब यह गतिशील हो गया, तो बादल अपने ही गुरुत्व के कारण खुद ही टूटना शुरू हो गया और टूटने-बिखरने की इस प्रक्रिया के दौरान बादल, गर्म होने लगा और घूमने लगा। [स्रोत]

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हमारा सौर मंडल वास्तव में कैसे बना था

4. जैसे-जैसे यह बादल बिखरता गया, वैसे-वैसे इसका तापमान बढ़ता चला गया और इसके घूमने की गति भी तेज से तेज होती चली गयी। परिणामस्वरुप, अंततः बादल एक डिस्क की तरह चपटा होता चला गया और इसका अधिकतर द्रव्यमान इसके केंद्र में स्थित हो गया।

5. निरंतर परिवर्तन की इस प्रक्रिया के दौरान एक समय ऐसा भी आया कि बादल के केंद्र पर ताप और दाब इतना ज्यादा हो गया कि नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया शुरू हो गयी और उसी समय सूर्य का जन्म हुआ।

6. जब सूर्य का जन्म हुआ, तब डिस्क के केंद्र से दूर स्थित गैसे और धूल, ठंडे होकर छोटे-छोटे कणों में संघनित होने शुरू हो गये।

7. इस तरह जैसे-जैसे ज्यादा से ज्यादा कण बनें, वे एक-दूसरे के साथ टकराने लगे और फिर जुड़ने लगे। इस तरह से चट्टानें और पत्थरों जैसी बड़ी संरचनाओं का निर्माण हुआ।

8. उन छोटे-छोटे कणों की ही तरह यह चट्टानें भी एक दूसरे से टकराकर जुड़ने लगी और इससे बहुत छोटे ग्रहों (Planetisimals) का निर्माण हुआ। [स्रोत]

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Origin of Solar System in Hindi

9. अंततः बहुत सारे Planetisimals ने जुड़कर ग्रहीय भ्रूणों (Planetary Embryos) का निर्माण किया। हालाँकि दूसरे कणों, चट्टानों, और बहुत छोटे ग्रहों की तुलना में यह ग्रहीय भ्रूण इतने बड़े और भारी थे कि अपने आस-पास के पिंडो पर पर्याप्तगुरुत्वाकर्षण बल डाल सकें।

10. इसलिये, पिंडों के बीच यदा-कदा होने वाले टकराव के स्थान पर, इन ग्रहीय भ्रूणों ने अपने समीप के क्षेत्रों में आकाशीय पिंडों को खींचना शुरू कर दिया।

11. जब एक बार प्रत्येक ग्रहीय भ्रूण के क्षेत्र में सभी पदार्थ खींच लिये गये, तब ग्रहों का जन्म हुआ।

12. सौर मंडल की बाकी दूसरी चीजें जो सूर्य और ग्रहों के निर्माण के समय उनसे नहीं जुड़ सकी थीं, ग्रहों के चंद्रमाओं, धूमकेतुओं, और पुच्छ्ल तारों के रूप में घनीभूत होनी शुरू हो गयी।

13. जैसे-जैसे समय बीतता रहा वैसे-वैसे ग्रहों की कक्षाएँ और दूसरे पिंड सौर मंडल में स्थिर होते गये और आज उस वर्तमान रूप में विद्यमान हैं जैसा कि हम देखते हैं। [स्रोत]

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Inner Solar System in Hindi

अब हम आपको Solar System के 8 Planets के बारे में बतायेंगे। यह ग्रह सूर्य से उनकी दूरी के क्रम में दिये जा रहे हैं। सौरमंडल के ग्रह दो तरह के होते हैं – “स्थलीय ग्रह” जिनमें ज़मीन होती है और “गैसीय ग्रह” जिनमें अधिकतर गैस ही गैस है। आसान वर्गीकरण के लिये सौर मंडल को आंतरिक और बाहरी सौर मंडल में बाँटा जाता है।

एस्टेरोइड बेल्ट से पहले स्थित चार ग्रह Inner Solar System (आंतरिक सौर मंडल) और इसके बाद के चार ग्रह और सुदूर स्थित पिंड Outer Solar System (बाहरी सौर मंडल) के अंतर्गत आते हैं। यहाँ हम सिर्फ इन ग्रहों का संक्षिप्त वर्णन ही करेंगे। इनके बारे में विस्तार से जानने के लिये जीवनसूत्र पर इनसे संबंधित लेख पढ़ें। [स्रोत]

Mercury बुध

बुध सौर मंडल (Solar System) का सूर्य से सबसे निकट स्थित ग्रह है और आकार में भी यह सबसे छोटा है। पहले यम यानि प्लूटो को ही सबसे छोटा ग्रह माना जाता था, पर अब इसका वर्गीकरण बौने ग्रह के रूप में किया जाता है। यह ग्रह लोहे और जस्ते का बना हुआ हैं और इसका व्यास 4880 किमी है। Mercury सूर्य की एक परिक्रमा करने में 88 दिन का समय लगाता है। अपने परिक्रमा पथ पर यह 29 मील प्रति सेकेण्ड की गति से चक्कर लगाता हैं।

बुध सूर्य के सबसे नजदीक का ग्रह है इसलिये यह बहुत गर्म है, लेकिन फिर भी यह सौर मंडल (Solar System) का सबसे गर्म ग्रह नहीं है। द्रव्यमान के आधार पर भी यह आठों ग्रहों में सबसे हल्का है। बुध ग्रह का व्यास गैनिमीड और टाईटन उपग्रहों से भी कम है, लेकिन इसका द्रव्यमान उनसे दोगुना है।

Venus शुक्र

शुक्र सूर्य से दूसरा ग्रह है और Solar System का छठवाँ सबसे बड़ा ग्रह है। शुक्र का व्यास 12,103.6 किमी है और इसका परिक्रमा पथ 108¸200¸000 किलोमीटर लम्बा है। शुक्र सौर मंडल का सबसे गरम ग्रह है। इसका औसत तापमान 400 डिग्री सेंटीग्रेड से भी ज्यादा रहता है। अपने अधिक तापमान की वजह से ही यह Solar System का सबसे चमकीला ग्रह बना है।

शुक्र ग्रह 224.7 दिनों में सूर्य की परिक्रमा करता है। चूँकि शुक्र का आकार और बनाबट लगभग पृथ्वी के बराबर है, इसलिए इसे पृथ्वी की बहन भी कहा जाता है। ज्यादातर ग्रहों का पथ दीर्घ वृत्ताकार है लेकिन वीनस का ग्रहपथ लगभग पूर्ण वृत्त है।

Earth पृथ्वी

हमारी पृथ्वी यानि धरती बुध और शुक्र के बाद सूर्य से तीसरा ग्रह है। 4 आतंरिक ग्रहों में यह सबसे बड़ा ग्रह है। न सिर्फ हमारे Solar System और गैलेक्सी में, बल्कि समूचे ब्रह्माण्ड में यह एकमात्र ऐसा पिंड है, जहाँ पर ज़िन्दगी मौजूद है। धरती का व्यास (माध्यमिक) 12,742 किमी है। सूर्य से पृथ्वी के बीच की दूरी को 1 खगोलीय इकाई (1 Astronomical Unit) कहते हैं।

यह दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर (149598023 किमी) है। पृथ्वी 365.26 दिन में सूर्य की परिक्रमा करती है। धरती इसकी सतह पर उपस्थित जल और वनस्पति के कारण अंतरिक्ष से नीले रंग की दिखायी देती है, इसलिये इसे नीला ग्रह भी कहते है॑।

Mars मंगल

मंगल सूर्य से चौथा ग्रह होने के साथ-साथ अंतिम आंतरिक ग्रह भी है। हमारे सौरमंडल (Solar System) का सबसे ऊँचा पर्वत, ओलम्पस मोन्स, भी मंगल पर ही स्थित है। इसके अतिरिक्त विशाल ‘कैन्यन वैलेस मैरीनेरिस’ भी यहीं पर स्थित है। चूँकि मंगल पृथ्वी से लाल रंग का दिखता है, इसलिये इसे “लाल ग्रह” के नाम से भी जाना जाता है।

सूर्य से इसकी दूरी 227,939,200 किमी और व्यास 7980 किमी है। यह 686.971 दिनों में सूर्य की परिक्रमा करता है। सौर मंडल (Solar System) में जितने भी ग्रह हैं, उनमे सिर्फ मंगल ही पृथ्वी से सबसे ज्यादा मिलता-जुलता है। अपनी भौगोलिक विशेषताओं के अलावा, मंगल का घूर्णन काल और मौसमी चक्र पृथ्वी के समान हैं। पृथ्वी की तरह, मंगल भी एक स्थलीय धरातल वाला ग्रह है और इसका वातावरण विरल है।

मंगल की सतह देखने पर, चंद्रमा के गर्त और पृथ्वी के ज्वालामुखियों, घाटियों, रेगिस्तान और ध्रुवीय बर्फीली चोटियों की याद दिलाती है। मंगल ग्रह के अध्ययन से पता चला है कि यहाँ पहले कभी जीवन रहा था, क्योंकि हमारी पृथ्वी के अलावा, मंगल ग्रह पर पानी होने की संभावना सबसे अधिक है।

Asteroid Belt क्षुद्रग्रह घेरा

एस्टेरोइड बेल्ट हमारे Solar System का एक आकाशीय क्षेत्र है जो मंगल और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच स्थित है। इस बेल्ट में हज़ारों-लाखों क्षुद्रग्रह (ऐस्टरौएड) सूरज की परिक्रमा कर रहे हैं। इनमें एक 950 किमी व्यास वाला सीरीस नामक बौना ग्रह भी है, जो अपने स्वयं के गुरुत्वाकर्षक खिंचाव के कारण लगभग गोल आकार में आ गया है।

यहाँ तीन, अन्य 400 किमी व्यास से अधिक चौड़े क्षुद्रग्रह मिल चुके हैं। जिनके नाम हैं वेस्टा, पैलस और हाइजिआ। पूरी एस्टेरोइड बेल्ट के कुल द्रव्यमान का आधे से ज़्यादा हिस्सा इन्ही पिंडो में सन्निहित है। बाक़ी पिंडों का आकार भिन्न-भिन्न है – इनमे से कुछ तो 10-20 किलोमीटर तक चौड़े हैं और कुछ सिर्फ कंकड़ और धूल के कण मात्र हैं।

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Outer Solar System in Hindi

Jupiter बृहस्पति

बृहस्पति सूर्य से पांचवाँ और हमारे सौरमंडल (Solar System) का सबसे बड़ा ग्रह है। इसका व्यास 139,822 किमी है तथा यह 11.862 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा करता है। बृहस्पति का द्रव्यमान सौरमंडल में मौजूद अन्य सात ग्रहों के कुल द्रव्यमान का ढाई गुना तथा सूर्य के हजारवें भाग के बराबर है। रोमन सभ्यता के देवता जुपिटर के नाम पर इस ग्रह का नाम जुपिटर रखा गया था। प्राचीन काल से ही खगोलविदों को बृहस्पति का ज्ञान रहा है तथा यह कई संस्कृतियों की पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों के साथ जुड़ा हुआ है।

बृहस्पति को आकाश में आसानी से देखा जा सकता है। पृथ्वी से देखने पर बृहस्पति, चन्द्रमा और शुक्र के बाद तीसरा सबसे अधिक चमकदार ग्रह दिखता है। शनि, अरुण (युरेनस) और वरुण (नेप्चून) की तरह बृहस्पति भी एक गैस दानव (Gas Giant) है और यह सबसे बड़ा गैसीय ग्रह है। इन चारों ग्रहों को बाहरी ग्रहों के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह एस्टेरोइड बेल्ट के बाहर स्थित हैं। [स्रोत]

Saturn शनि

शनि सूरज से छठवाँ ग्रह है और सौरमंडल (Solar System) में बृहस्पति के बाद सबसे बड़ा ग्रह हैं। इसका व्यास 116,464 किमी है और यह 29.4571 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा करता है। शनि ग्रह की खोज प्राचीन काल में ही हो गई थी और भारतीय ज्योतिष ग्रंथों में अन्य ग्रहों के साथ-साथ इसका भी वर्णन मिलता है। आधुनिक काल में प्रसिद्ध खगोलविद गैलीलियो गैलिली ने सन 1610 में दूरबीन की सहायता से इस ग्रह को खोजा था। शनि ग्रह को एक गैसीय ग्रह माना जाता है।

क्योंकि इसकी रचना 75% हाइड्रोजन और 25% हीलियम से हुई है। जल, मिथेन और अमोनिया गैस तथा पत्थर यहाँ बहुत कम मात्रा में पाये जाते हैं। शनि सहित चार बाहरी ग्रहों को गैस दानव कहने का कारण यह है कि इनमें मिटटी-पत्थर की बजाय अधिकतर गैस पायी जाती है और इनका आकार भी बहुत विशाल है। जितने भी ग्रह हैं उनमे सबसे ज्यादा प्राकृतिक उपग्रह शनि के ही हैं। अभी तक इसके 62 उपग्रह का पता चला हैं, जिसमें टाइटन सबसे बड़ा है।

Urenaus अरुण

अरुण या यूरेनस सूर्य से सातवाँ ग्रह है। आकार में यह हमारे सौर मण्डल (Solar System) का तीसरा सबसे बड़ा और द्रव्यमान के आधार पर चौथा सबसे बड़ा ग्रह है। इसका व्यास 50,730 किमी है और यह 84.0205 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा करता है। अरुण आकार में पृथ्वी से 63 गुना ज्यादा बड़ा है, लेकिन द्रव्यमान में यह पृथ्वी से सिर्फ 14.5 गुना अधिक भारी है। विलियम हर्षल ने 13 मार्च 1781 में इसकी खोज की थी। अरुण दूरबीन द्वारा खोजा जाने वाला पहला ग्रह था। यह पृथ्वी से बहुत कम घना है।

क्योंकि पृथ्वी पर पत्थर और अन्य भारी पदार्थ अधिक मात्रा में हैं, जबकि अरुण पर गैस अधिक है। इसीलिए पृथ्वी से 63 गुना बड़ा आकार रखने के बावजूद यह धरती से बस थोडा ही ज्यादा भारी है। अरुण को बिना किसी दूरबीन के नंगी आँखों से भी देखा जा सकता है, परन्तु बहुत दूर होने के कारण इसकी रोशनी हल्की प्रतीत होती है। इसी कारण से प्राचीन विद्वानों ने कभी भी इसे ग्रह का दर्जा नहीं दिया और इसे एक दूर टिमटिमाता तारा ही समझा।

Neptune वरुण

वरुण या नेप्चयून हमारे सौर मण्डल में सूर्य से आठवाँ ग्रह है। आकार में यह हमारे सौर मण्डल (Solar System) का चौथा सबसे बड़ा और द्रव्यमान के आधार पर तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है। इसका व्यास 49,262 किमी है और यह 164.8 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा करता है। वरुण का द्रव्यमान पृथ्वी से 17 गुना अधिक है, लेकिन अपने पड़ौसी ग्रह अरुण (युरेनस) से बस थोड़ा सा ही ज्यादा है।

वरुण की सूर्य से कुल दूरी है, यानि वरुण पृथ्वी की तुलना में सूरज से लगभग तीस गुना अधिक दूर है। वरुण को सूरज की एक पूरी परिक्रमा करने में 164.79 वर्ष लगते हैं, यानि वरुण का एक वर्ष धरती के 164.79 वर्षों के बराबर है।

 

Farther Bodies of Solar System

Solar System के पाँच छोटे पिंडों को बौने ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जिनमे से एक सीरीस एस्टेरोइड बेल्ट में है और बाकी के चार वरुण से परे है। जिनके नाम हैं – यम (जिसे पहले नवें ग्रह के रूप में मान्यता प्राप्त थी), हउमेया, माकेमाके और ऍरिस। छह मुख्य ग्रह और तीन बौने ग्रहों की परिक्रमा प्राकृतिक उपग्रह करते हैं, जिन्हें प्रायः पृथ्वी के चंद्रमा के नाम पर “चन्द्रमा” ही पुकारा जाता है।

Centaurs सेंटोरस

सेंटोरस बर्फीले कॉमेट जैसे पिंड हैं जिनकी कक्षाएँ बृहस्पति (5.5 AU) की तुलना में थोड़ी सी अधिक विस्तृत हैं, लेकिन वरुण (30 AU) से कम हैं। अभी तक खोजे गये सबसे बड़े सेंटोरस 10199 चारिक्लो का व्यास 250 किमी है।

Comets पुच्छल तारें

कॉमेट्स Solar System के छोटे पिंड हैं। इन्हें पुच्छल तारा भी कहा जाता है। यह सिर्फ कुछ किमी ही चौड़े होते हैं और ज्यादातर वाष्पीकृत बर्फ से बने होते हैं। इनकी कक्षाएँ बेहद विषम होती है। जब कोई कॉमेट् अंदरूनी Solar System में प्रवेश करता है, तो सूर्य से इसकी नजदीकी बढ़ने पर इसकी बर्फीली सतह आयनीकृत होकर वाष्पित होने लगती है, जिससे एक कोमा (गैस और धूल की एक लम्बी पूँछ) पैदा होता है। इसे आसमान में नंगी आँखों से अक्सर देखा जा सकता है।

Kuiper Belt कुइपर बेल्ट

इसके अलावा Solar System में कुइपर बेल्ट भी है जो एस्टेरोइड बेल्ट ही तरह एक बेहद विशाल और छल्लेदार संरचना है। लेकिन इसके ज्यादातर पिंड मुख्यतः बर्फ से बने हैं। यह सूर्य से 30 से 50 AU की दूरी तक फैली है। भले ही यह माना जाता हो कि इसमें कुछ दर्जन से लेकर हजारों बौने ग्रह हो सकते हैं, लेकिन यह मुख्यतः छोटे सौर मंडलीय पिंडों से बनी है। कुइपर बेल्ट के कई बड़े पिंड जैसे कि कुआओर, वरुणा और ओर्कस बौने ग्रहों जैसे प्रतीत होते हैं।

वैज्ञानिकों ने ऐसा अनुमान लगाया है कि कुइपर बेल्ट में 50 किमी से ज्यादा चौड़े कम से कम 100,000 पिंड मौजूद हैं। लेकिन फिर भी कुइपर बेल्टका कुल द्रव्यमान धरती के कुल द्रव्यमान का सिर्फ दसवाँ या सौंवा हिस्सा ही माना जाता है। कुइपर बेल्ट के कई पिंडों के कई उपग्रह हैं। [स्रोत]

Pluto यम

प्लूटो जिसे सन 2006 तक Solar System का नौवाँ ग्रह माना जाता था, सूर्य से 39 AU की दूरी पर स्थित है और यह कुइपर बेल्ट में सबसे बड़ा पिंड है। इसकी खोज सन 1930 में हुई थी। चरोन प्लूटो का सबसे बड़ा चंद्रमा है। इसके अतिरिक्त प्लूटो के चार छोटे चंद्रमा और हैं जिनके नाम हैं – स्टिक्स, निक्स, केरबेरोस और हाइड्रा।

प्लूटो के अलावा कुइपर बेल्ट में मेकमेक और होमिया नाम के बौने ग्रह भी हैं। प्लूटो के बाद मेकमेक कुइपर बेल्ट का सबसे चमकीला पिंड है और इसका आकार करीब-करीब होमिया जितना ही है। मेकमेक सूर्य से औसतन 45.79 AU और होमिया औसतन 43.13 AU की दूरी पर स्थित है। [स्रोत]

बाहरी सौर मंडल के अन्य पिंड

इनके अतिरिक्त कुइपर बेल्ट में एरिस नाम का एक Scattered Disc पिंड भी है जो सबसे बड़ा बौना ग्रह है और 68 AU की दूरी पर स्थित है। यह प्लूटो के ही आकार का है, लेकिन उससे 25 प्रतिशत ज्यादा भारी है। सभी बौने ग्रहों में यह सबसे ज्यादा भारी है। इसके चंद्रमा का नाम डिसनोमिया है। प्लूटो की तरह इसका ग्रहपथ भी बहुत ही ज्यादा विषम है।

हालाँकि यह अभी तक पूरी तरह से निश्चित नहीं हो पाया है कि किस बिंदु पर Solar System की सीमा समाप्त होती है और Interstellar Space की सीमा आरंभ होती है। क्योंकि इसकी बाहरी सीमाएँ दो अलग-अलग बलों द्वारा निर्धारित की जाती हैं – एक सौर वायु और दूसरा सूर्य का गुरुत्व।

सौर वायु के प्रभाव की सीमा सूर्य से प्लूटो तक की दूरी की चार गुणा मानी गयी है। उधर दूसरी ओर सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल की सीमा इससे भी हजार गुणा ज्यादा ओर्ट बादल तक मानी गयी है।

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“सौरमंडल सूर्य और उसकी परिक्रमा करते ग्रह, क्षुद्रग्रह और धूमकेतुओं से बना है। इसके केन्द्र में सूर्य है और सबसे बाहरी सीमा पर वरुण (ग्रह) है। वरुण के परे यम (प्लुटो) जैसे बौने ग्रहो के अतिरिक्त धूमकेतु भी आते है।”

 

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