Best Life Changing Story of A Greedy Person in Hindi

 

“कोई भी इंसान कभी उसके लिये सम्मानित नहीं हुआ है जो उसे हासिल हुआ है। सम्मान उसका पुरस्कार रहा है जो उसने दिया था।”
– केल्विन कूलिज

 

इस शानदार और प्रेरक कहानी का पिछला भाग आप Hindi Story on Life Transformation: जब अमीर सूदखोर बना महान फकीर में पढ़ ही चुके हैं। अब प्रस्तुत है अगला भाग –

इत्तेफाक से उसने भी खाना खाने की इच्छा ही प्रकट की। उस औरत को अपनी मजबूरी पर रोना आ गया। उसने सिसकते हुए फ़कीर से कहा, “बाबा, घर में केवल एक ही इंसान के लिये खाना है और एक मेहमान पहले से ही यहाँ मौजूद है। इसलिये मै आपको कुछ भी खिला पाने में बेबस हूँ। वह फ़कीर सब समझ गया।

जाते-जाते उसने उस औरत को दुआ देते हुए कहा, “गम न कर बेटी! तू भले ही अमीर न बन सके, पर दो वक्त की रोटी की कमी तुझे कभी न होगी।” यह कहकर वह फकीर आगे बढ़ गया और वह स्त्री हबीब के लिये खाना निकालने लगी। जैसे ही उसने बर्तन से सब्जी निकाली, तो हैरत के मारे उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी।

सब्जी की जगह सिर्फ खून ही खून नजर आ रहा था। उसकी चीख निकल गयी। हबीब दौड़कर उसके पास आये। वह औरत उन्हें देखते ही उन पर लानत देते हुए रोकर कहने लगी, “कितनी मुश्किल से मै खाने का सामान जुटा पाई थी, पर देखो तुम्हारी बेगैरती और जुल्मो-सितम ने यह क्या कर दिया? सारी सब्जी लहू में बदल गयी।”

अपनी आँखों के सामने का मंजर देखकर हबीब अन्दर तक दहल गये। उनकी आँखों पर पड़ा दौलत का नशा एक झटके में काफूर हो गया। आज जाकर उन्हें समझ में आया कि अब तक उन्होंने दूसरों पर कितना जुल्म ढाया है और उनकी इस बदबख्ती का ही नतीजा है कि आज उन्हें यह दिन देखना पड़ा।

उसी वक्त उन्होंने सूदखोरी के काम से तौबा कर ली और अल्लाह के नाम पर कसम खायी कि आज के बाद वह कभी किसी पर जुल्म नहीं करेंगे और अपनी बाकी की जिंदगी एक नेक इंसान बनकर गुजारेंगे। बिना कुछ कहे वे उस कर्जेदार के घर से चले गये और सीधे सूफी संत हसन बसरी के पास पहुँचे।

वहाँ उनकी अनमोल नसीहतों को लेकर वे घर लौटे और जितने भी कर्जेदार थे उन सबका कर्ज माफ़ कर दिया। इतना ही नहीं, बल्कि उन दस्तावेजों को भी फाड़कर फेंक दिया जिसमे कर्जे की रकम लिखी हुई थी। अपनी बाकी की दौलत भी खुदा की राह में खर्च कर दी और एक फ़कीर के भेष में घर से निकल पड़े।

समय रहते संत हबीब को भी इस बात का बोध हो गया कि जिस रास्ते पर वह चल रहे हैं, कल वही उनकी दुर्गति का कारण बनेगा। उस राह पर चलकर उन्हें दुःख, पीड़ा और पश्चाताप के सिवा और कुछ हासिल न हो सकेगा। वक्त रहते उन्होंने अपने जीवन की दिशा बदली और उस खोये सम्मान, प्रेम, और आनंद को फिर से पा लिया जो एक समय उनसे बिलकुल बिछड़ चुका था।

“उदारता उससे अधिक देना है जितना आप दे सकते हैं, और अपनी आवश्यकता से कम लेना गर्व है।”
– खलील जिब्रान

 

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