Ultimate Success Mantras in Hindi from Lord Hanuman

 

“हनुमान एक आदर्श व्यक्तित्व हैं; उनका कृतत्व वर्णनातीत है। वह सफलता, महानता, उदारता, विनम्रता और सेवाभाव की जीती-जागती मिसाल हैं; करोड़ों भारतीयों की श्रद्धा के पात्र हैं और भगवान के अनन्य भक्त भी हैं। सम्पूर्ण इतिहास में बहुत खोजने पर भी उनके जैसा अनुपम उदाहरण कहीं और देखने को नहीं मिलता।”

 

Success Mantras in Hindi from Lord Hanuman

Success Mantra in Hindi सफलता और महानता का प्रतीक हैं हनुमान

हर साल की तरह इस बार भी बालाजी जयंती का आयोजन पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो रहा है और ऐसा हो भी क्यों नहीं, आखिर इस दिन भगवान श्रीराम के अनन्य सेवक और सेवाधर्म की प्रतिमूर्ति महावीर हनुमानजी का जन्म जो हुआ था। आज हम आपको श्री बालाजी महाराज के महान चरित्र और व्यक्तित्व की उन 12 विशेषताओं, उन 12 Success Mantra के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में उतार सके तो वह भी सफलता और महानता की सीढ़ियों पर आसानी से चल सकेगा।

हनुमान सिर्फ एक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वह एक आदर्श हैं। सद्गुणों का मूर्तिमान प्रतीक हैं, साहस, शौर्य और ओज की सीमा हैं, भक्ति और सेवाधर्म की पराकाष्ठा हैं, बुद्धि और बल का अद्भुत संगम हैं और स्वामिभक्ति तथा कर्तव्यनिष्ठा का ज्वलंत उच्चतम प्रमाण है। इस छोटे से लेख में इस असाधारण व्यक्तित्व के गुणों और कृतत्व का वर्णन कर पाना असंभव है और यह लेखक की क्षुद्र बुद्धि की सीमाओं से भी परे है।

लेकिन यह सोचते हुए कि इससे श्री बालाजी महाराज के भक्तों और धर्मप्रेमियों को सुख पहुँचेगा तथा उनके विराट व्यक्तित्व की थोड़ी सी झलक जनसामान्य के सामने आ सकेगी हम यह लेख लिख रहे हैं। हालाँकि इसमें कुछ स्वार्थ हमारा भी है क्योंकि इससे हमें भी कुछ समय तक उनके अप्रत्यक्ष विचारचिंतन रुपी सान्निध्य में बैठने का अवसर मिल सकेगा।

श्री बालाजी महाराज का जीवन चरित्र सिर्फ पूजा-उपासना की पुस्तकों में संकलित करने के लिये नहीं है, बल्कि व्यावहारिक जीवन में अनिवार्य रूप से उतारने योग्य है। वह सिर्फ पंडितों, पुजारियों और उपासकों की श्रद्धा का विषय नहीं हैं, बल्कि हममें से प्रत्येक उस व्यक्ति को जो महानता की ओर अग्रसर होना चाहता है और अपने देश तथा समाज के लिये जिसके ह्रदय में कुछ करने की इच्छा है, श्री हनुमान के जीवन का गहन अध्ययन करना चाहिये और उससे प्रेरणा लेनी चाहिये।

राजनेताओं, न्यायाधीशों और प्रशासनिक अधिकारीयों तक के लिये महावीर हनुमान का जीवन वरेण्य व अनुकरणीय है, क्योंकि स्वामिभक्ति और देशभक्ति में सिर्फ स्वरुप का अंतर है।

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Success Mantra for Sure Victory in Hindi

हनुमानजी के जीवन में चमत्कारों को घटित करने वाले यह 12 Success Mantra कामयाबी के वह अचूक सिद्धांत हैं जो हर इन्सान को उपलब्धियों के शीर्ष पर पहुँचा सकते हैं और उसके जीवन में भी विजय और सफलता ऐसे ही हमराही बन सकते हैं जैसे वह महावीर के सहचर रहे थे। यह नियम कालातीत हैं, इनकी महत्ता कभी कम नहीं होगी और इन्हें प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में उतार कर सफलता की पगडंडियों पर आगे बढ़ सकता है।

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Mantra 1. Firm Faith in His Aim ध्येय के प्रति अटूट निष्ठा

स्वामी विवेकान्द और महात्मा गाँधी से लेकर संसार के लगभग सभी महान व्यक्तियों ने ध्येय के प्रति अटूट निष्ठा को सफलता की अनिवार्य शर्त माना है। यदि आपका लक्ष्य, आपकी अभिलाषा स्पष्ट नहीं है तो फिर उसके प्रति दृढ निष्ठा उत्पन्न होना बहुत मुश्किल है और इस स्थिति में सफलता हमेशा संदिग्ध रहेगी। स्वेट मार्डेन के अनुसार 99 प्रतिशत नाकामयाब लोगों की नाकामयाबी के पीछे यही एक कारण काम करता है।

महावीर हनुमान ने अपने जीवन का लक्ष्य सिर्फ श्रीराम की इच्छापूर्ति को, उनकी प्रसन्नता को बना रक्खा है और इसका उन्हें हर समय स्मरण बना रहता है। आठों पहर, दिन-रात के चौबीसों घंटे उन्हें सिर्फ रामकाज की चिंता है, इस काम में उन्हें कभी भी थकान अनुभव नहीं होती। गोस्वामी तुलसीदास जी ने कितने सुन्दर शब्दों में इसका वर्णन किया है आप स्वयं देख लें – “राम-काज किये बिना कहाँ मोहे विश्राम।”

क्या इससे भी बढ़कर लक्ष्यप्राप्ति की उत्कट इच्छा के बारे में आपने कभी सुना है। हजारों पुस्तकें पढने के पश्चात भी हमने आज तक ऐसे किसी व्यक्ति के बारे में तो कहीं नहीं सुना। अगर आप भी Life में Successful होना चाहते हैं तो इस Success Mantra को गाँठ बाँध लें।

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Mantra 2. Unshakabale Self Confidence अटूट आत्म विश्वास

चीनी दार्शनिक लाओ से ने आत्म विश्वास को सबसे बड़ा मित्र कहा है। क्योंकि यह आपका आत्म-विश्वास ही है जो दिल तोड़कर रख देने वाली असफलताओं के प्रतिघात से आपकी रक्षा करता है। सिसेरो ने भी कुछ इन शब्दों में चरित्र की इस विशेषता की प्रशंसा की है – “अगर आपको स्वयं पर विश्वास नहीं है, तो आप जीवन की दौड़ में दो बार हार चुके हैं। विश्वास के सहारे, आप शुरू करने से पहले ही जीत चुके हैं।”

महावीर हनुमानजी को अपनी क्षमता पर दृढ विश्वास है। उनका आत्म-विश्वास पर्वत की तरह अडिग और आकाश की तरह ऊँचा है जिसके बारे में वह श्रीराम से कुछ इस प्रकार से कहते हैं – “प्रभु जब तक आपकी कृपा मुझ पर बनी हुई है तब तक इस ब्रह्माण्ड में कोई भी कार्य मेरे लिये असंभव नहीं है। यह उनका आत्म-विश्वास ही था जो वह अपने शैशव में ही सूर्यलोक में चले गये थे, उनके दुसहः तेज से डरे बिना।

रात्रि के चंद घंटों में हिमालय पर्वत से जडी-बूटी को ढूंढकर लाना भी उनके अटल आत्म विश्वास को ही दर्शाता है। जब श्रीराम इस कार्य को असंभव घोषित करते हुए लक्ष्मणजी के लिये व्याकुल हो जाते हैं तब हनुमान कहते हैं – “प्रभु! क्या आपका इस दास पर से विश्वास उठ गया है जो आप इस प्रकार से दुखी हो रहे हैं?

आपके प्रताप से मै एक रात में हिमालय तो क्या सातों लोकों की परिक्रमा करके वापस लौट सकता हूँ? क्या उत्कट विश्वास है उन्हें अपनी शक्ति पर और वह भी अभिमान से पूर्णतया रहित। Unshakabale Self Confidence महावीर हनुमानजी के प्रेरक जीवन का दूसरा Success Mantra है।

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Mantra 3. Great Humility उच्च विनम्रता

विनम्रता के तीसरे Success Mantra के बारे में टॉलस्टॉय का कहना है जहाँ सरलता नहीं है, वहां कोई महानता भी नहीं है और व्यक्तित्व में सरलता आती है विनम्रता से। चाणक्य ने विनम्रता को शील का भूषण कहा है। अमर गुरु महावतार बाबाजी ने भी विनम्रता को ऐसा गुण बताया है जो ईश्वर को सबसे ज्यादा प्रिय है। व्यवहार में भी देखा गया है कि गुणी और विनम्र लोग समाज में सबसे अधिक सम्मान पाते हैं।

लेकिन शक्तिसंपन्न होते हुए विनम्रता धारण करना बड़ा दुर्लभ है, क्योंकि प्रायः शक्ति प्राप्त होते ही व्यक्ति मद के चक्रव्यूह में फँस जाता है। लेकिन हनुमानजी की विनम्रता का स्तर तो देखिये। वह अपने साहस और शक्ति से संपन्न हुए प्रत्येक कार्य का श्रेय श्रीराम को ही देते हैं।

जब वह सीताजी का पता लगाकर वापस लौटते हैं, तो श्रीराम उनके उस अतुलित पराक्रम की जो उन्होंने सागर पार करने, रावण के पुत्र को मारने और लंका जलाने में दिखलाया था, की प्रशंसा करते हैं। तब वह कहते हैं – ” प्रभु इसमें मेरी कोई बड़ाई नहीं है, बन्दर की तो बस इतनी प्रभुता है कि वह एक डाल से दूसरी डाल पर चला जाता है। यह सब तो आपकी शक्ति का प्रताप है।”

सम्पूर्ण रामायण महावीर हनुमान के अविश्वसनीय कार्यों से भरी पड़ी है और यह बात पूर्णतया स्पष्ट है कि यदि महावीर हनुमान न होते तो रामजी को इस भीषण संग्राम को जीतने में कितनी कठिनाइयाँ आतीं, पर फिर भी उन्होंने कभी भी किसी कार्य का श्रेय स्वयं नहीं लिया, बल्कि इसे श्रीराम की कृपा ही मानते रहे। क्या इस विनम्रता और महानता का दूसरा कोई उदाहरण आपने इतिहास में देखा है?

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Mantra 4. Limitless Enthusiasm प्रचंड जोश

Limitless Enthusiasm महावीर हनुमान का चौथा Success Mantra है। राल्फ वाल्डो एमर्सन उत्साह को सभी महान कार्यों की प्रथम आवश्यकता मानते हैं। अर्ल नाइटिंगेल कहते हैं अगर हम खुद के अन्दर किसी सच्ची ताकत को पैदा करने की आशा करते हैं, तो हमें उत्साहित होना ही पड़ेगा। सफलता हासिल करने के लिये जोश की महत्ता से कोई भी इंसान इंकार नहीं कर सकता, क्योंकि लोग उस काम मे मुश्किल से ही सफल होते हैं जब तक कि उनमे उस काम के प्रति जोश नहीं होता जिसे वे कर रहे हैं।

हनुमानजी प्रचंड जोश का ज्वलंत उदाहरण हैं। उनसे बढ़कर उत्साही और जोशीला व्यक्ति कहीं किसी काल में नहीं हुआ। महर्षि वाल्मीकि उनकी अनन्य रामभक्ति और सदा नवीन रहने वाले उत्साह का उदाहरण देते हुए लव-कुश से कहते हैं – “पुत्रों! हनुमान उत्साह की सीमा हैं, वह वायु के वेग से कार्य करते हैं। श्रीराम को कहने भर की देर है, हनुमान किसी भी कार्य को क्षणों में पूर्ण कर सकते हैं। अपने स्वामी की आज्ञा का पालन करने के लिये वह आठों याम निरत हैं।

कई सिद्धों और योगियों का मानना है कि यदि श्रीराम आज्ञा दे देते तो रावण सहित लंका का समस्त निशाचर समुदाय एक ही दिन में हनुमानजी की क्रोधाग्नि में भस्म हो जाता, क्योंकि उन्हें स्वयं ब्रह्माजी ने अवध्य होने का वरदान दिया था। रणभूमि में उनके प्रचंड जोश को देखकर रावण और उसका पुत्र मेघनाद तक हक्के-बक्के रह गये थे।

 

Success Mantras in Hindi That Never Fails

Mantra 5. Highly Patient असीम धैर्यवान

नेपोलियन हिल कहते हैं – “धैर्य और द्रढ़ता कामयाबी हासिल करने का एक अपराजेय गठजोड़ है।” धैर्यवान लोग हर मुश्किल का सामना कर सकते हैं। कठिनाइयाँ जीवन में हर समय नहीं बनी रहती हैं, लेकिन जब उनकी तीव्रता का स्तर चरम पर होता है तब व्यक्ति जीवन से निराश होने लगता है और उसकी दृष्टि भविष्य और अपने बचे हुए लंबे जीवन की ओर से हट जाती है। यही वह वक्त है जब हमें धैर्य की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

महान और बेहद शक्तिशाली लोगों का जीवन भी दुखों और पीड़ा के आँधी-तूफानों से नहीं बचा रह सका है। हनुमानजी में अपार बल के साथ-साथ असीम धैर्य भी है जो हमें कई स्थानों पर देखने को मिलता है। अशोक वाटिका में जब रावण देवी सीता को कठोर दुर्वचन कहता है तो वह समय की नजाकत को भाँपते हुए पेड़ के ऊपर चुपचाप बैठे रहते हैं। यदि वह चाहते तो उसी समय सीताजी को छुड़ाकर ले जाते, लेकिन श्रीराम की आज्ञा न होने के कारण ऐसा कोई प्रयास नहीं करते।

जब लंका के राक्षस उन्हें बांधकर त्रास देते हैं और सभा में रावण उन्हें दुर्वचन कहता है तब भी वह शांत बने रहते हैं और रावण को उसके कुल का गौरव याद दिलाते हुए समझाते हैं। जब श्रीलक्ष्मणजी के शक्ति लगने पर सभी लोग विषाद कर रहे होते हैं तब हनुमानजी ही धैर्यपूर्वक उनके प्राण बचाने के लिये उद्योग करते हैं और सुषेण वैद्य को तथा संजीवनी बूटी को लाते हैं। यह असीम धैर्य महावीर हनुमानजी का पाँचवाँ Success Mantra है।

Mantra 6. Positive Attitude and Leadership सकारात्मक दृष्टिकोण और नेतृत्वक्षमता

एक सच्चा मार्गदर्शक हमेशा एक जीतने वाला द्रष्टिकोण प्रदर्शित करता है, फिर चाहे वह भीषण गतिरोधों से क्यों न जूझ रहा हो। जॉन डी. रॉकफेलर कहते हैं – “अच्छे नेतृत्व का तात्पर्य सामान्य लोगों को यह दिखाना है कि कैसे बेहतर लोगों का कार्य करना है।” हनुमानजी नेतृत्वक्षमता की कसौटी पर पूरी तरह से खरे उतरते हैं, क्योंकि लंका जाकर जिस प्रकार से वह देवी सीता का पता लगाते हैं, विभीषण को अपनी ओर मिलाते हैं और राक्षसों के ह्रदय में श्रीराम का डर बैठाते हैं वह वास्तव में अत्यंत प्रशंसनीय है।

जब रणभूमि में कुम्भकर्ण को देखकर सभी वानर डर के मारे भागने लगते हैं तब रणधीर हनुमान दूसरे मोर्चे से हटकर स्वयं उसका सामना करने के लिये आते हैं और उससे जूझने लगते हैं। उन्हें ऐसा करते देखकर वानरों को आशा बँधती है और वह लौट आते हैं। हनुमानजी के सकारात्मक दृष्टिकोण और उच्च नेतृत्वक्षमता का परिचय उस समय भी मिलता है जब वह निराश सुग्रीव को दिलासा देते हुए उचित काल की प्रतीक्षा करने को कहते हैं।

और फिर श्रीराम के मिलने पर सुग्रीव की उनसे मित्रता कराकर, बाली को नष्ट कराके उसे दुःख के सागर से बाहर निकालते हैं। वरना सुग्रीव बालि के डर से जीवन से ही निराश हो चला था। सकारात्मक नजरिया हनुमानजी का छठा Success Mantra है। जिम रॉन की यह उक्ति संकटमोचक हनुमान पर बिल्कुल सटीक बैठती है –

“नेतृत्व की चुनौती बलवान होने में तो है पर असभ्य होने में नहीं; दयालु होने में तो है, पर कमजोर होने में नहीं; साहसी होने में तो है, पर दबंग होने में नहीं; विनम्र होने में तो है, पर डरपोक होने में नहीं; गर्व करने में तो है, लेकिन अहंकारी होने में नहीं; विनोद करने में तो है, लेकिन मूर्खता के साथ नहीं।”

Mantra 7. Indestructible Courage अदम्य साहस

सैमउल जॉनसन ने कहा है – “साहस सभी सद्गुणों में सबसे बढ़कर है, क्योंकि यदि आपमें साहस नहीं है, तो आपको दूसरे किसी भी सद्गुण का उपयोग करने का अवसर नहीं मिल सकेगा।” निश्चित रूप से अपनी अज्ञात क्षमताओं को जानने के लिये साहस एक अनिवार्य सद्गुण है जिसके बिना बड़ी से बड़ी प्रतिभा भी बेकार है। यह अदम्य साहस ही हनुमानजी का सातवाँ Success Mantra है।

हनुमानजी साहस और शौर्य की तो मानों मूर्ति ही हैं। अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिये वह कितना दुर्धुर्ष प्रयास कर सकते हैं यह आप उनके कार्यों को देखकर समझ लीजिये। सोने की लंका में रहने वाले हजारों-लाखों भीमकाय राक्षसों के सामने वह अकेले जाते हैं और उनके ही नगर में उनका संहार भी कर देते हैं।

पर उनके साहस की पराकाष्ठा तो तब देखने को मिलती है जब वह रावण की सभा में एक से बढ़कर एक वीरों के सामने उसे फटकारते हैं और उसके पुत्र को मारकर उसे चुनौती देते हैं। इसके अलावा वह सौ योजन विशाल समुद्र को पार करने के लिये बिना डरे चल देते हैं, मार्ग में आने वाली बाधाओं की परवाह किये बिना।

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Mantra 8. Incredible Faitfulness स्वामिभक्ति (वफादारी)

इस संसार में यदि किसी भावना का सबसे अधिक पतन हुआ है तो वह है स्वामिभक्ति अर्थात वफादारी की भावना का। जॉर्ज मैकडोनल्ड के अनुसार विश्वास किया जाना, प्रेम किये जाने से भी अधिक उच्च अभिनंदन है। सामाजिक संबंधों के दुखदायी और नष्ट होने के पीछे निष्ठा की कमी एक बहुत बड़ा कारण है। आज जब संतान और जीवनसाथी तक उपकार पर उपकार और सेवा करने के बावजूद समर्पित नहीं होते, तब हनुमानजी का निःस्वार्थ भाव से सम्पूर्ण जीवन श्रीराम की सेवा में निरत रहना किसी अविश्वसनीय चमत्कार से कम नहीं लगता।

अपने स्वामी की सेवा किस प्रकार से करनी चाहिये, यह हनुमानजी से सीखा जाना चाहिये। अपने लिये किसी भी चीज की चाह रखे बिना वह सदैव श्रीराम की सेवा के कार्यों में संलग्न रहे। क्या हमारे राजनेताओं, सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों को महावीर के जीवन से कोई प्रेरणा नहीं लेनी चाहिये? क्या उन्हें नहीं सीखना चाहिये कि देश सेवा करने के लिये उन्होंने जो पद ग्रहण किया है उसका उत्तरदायित्व कितना बडा है?

देश की जनता अपनी गाढ़ी कमाई, जिसे सरकारें बलपूर्वक कर के रूप में वसूल करती हैं, इन्हें इस आशा से इनके हाथों में सौंप देती हैं कि यह अपने उन गरीब भाई-बहनों के जीवन को अधिक सुखमय और उन्नत बना सकें जो दिन रात परिश्रम करके कमाये गये धन का एक हिस्सा इन लोगों को बिना किसी शर्त के सौंप देते हैं।

भ्रष्टाचार करके अनैतिक कमाई को जोड़कर उसे आगे आने वाली पीढ़ियों के लिये संरक्षित करके रखने वाले इन तथाकथित योग्य व्यक्तियों को क्या महावीर का जीवन चरित्र पढ़कर लज्जा नहीं आनी चाहिये? स्वामिभक्ति और वफादारी का यह दिव्य सद्गुण हनुमानजी का आठवाँ Success Mantra है।

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Success Mantras for A Great Career in Hindi

Mantra 9. Man of Great Wisdom प्रज्ञासंपन्न

असफल लोग अक्सर अस्थिरचित्त वाले होते हैं। वह न केवल दूसरों के विचारों से आसानी से प्रभावित हो जाते हैं, बल्कि अपने स्वयं के विवेक और अनुभव का भी प्रयोग नहीं करना चाहते हैं। जबकि सफल व्यक्ति अपनी बुद्धिमानी से परिस्थितियों को अनुकूल बनाते हुए अपने लक्ष्य तक पहुँच जाते हैं। सामान्य बुद्धि तो तात्कालिक लाभ-हानि के विषय में ही सोच पाती है, लेकिन जाग्रत विवेक से युक्त बुद्धि की उच्चतम अवस्था जिसे प्रज्ञा कहा जाता है, अत्यंत दुर्लभ है और एक सशक्त चरित्र की अनुगामिनी है।

हनुमानजी प्रज्ञा से संपन्न हैं, इसी कारण से वह आने वाली घटनाओं को पहले ही ताड़ जाते हैं। मुश्किल से मुश्किल स्थिति में भी उनकी बुद्धि बहुत तेज चलती है और जैसा कि कहा भी गया है “मुश्किल वक्त में भी जिनकी बुद्धि काम करती है वही वास्तव में बुद्धिमान हैं।” जब देवता हनुमानजी की बुद्धिमानी की परीक्षा लेने के लिए सुरसा को भेजते हैं तो वह उन्हें कई बार डराती है, क्रोधित होने के लिये उत्तेजित करती है और अपना मार्ग बदलने के लिये विवश करती है।

लेकिन हनुमान उसे अपनी अनोखी बुद्धिमानी से परास्त करके संतुष्ट कर देते हैं। लंका में घूमने के लिये वह मच्छर जितना छोटा रूप धारण करते हैं ताकि कोई उन्हें देख न सके। जब रावण उनकी पूँछ में आग लगाने का आदेश देता है तब वह अपनी पूँछ को बढ़ा लेते हैं ताकि शत्रु की ज्यादा से ज्यादा हानि की जा सके।

कालनेमि के कपट को जानकर वह उसे उचित दंड देते हैं और अहिरावण के कपटजाल को तोड़कर राम-लक्ष्मण की रक्षा करते हैं। इस तरह अपने अनोखे बुद्धि-चातुर्य से वह राक्षसों को हर जगह मात देते नजर आते हैं। प्रज्ञा और उच्चतर विवेक की यह संपदा हनुमानजी का नौवाँ Success Mantra है।

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Mantra 10. High Level of Abstinence संयमशीलता

दानवीर अरबपति के रूप में प्रसिद्ध एंड्रू कार्नेगी के अनुसार जो इन्सान अपने स्वयं के मन पर पूर्ण नियंत्रण रखने की योग्यता अर्जित कर लेते हैं, वे हर उस चीज़ पर अधिकार कर सकते हैं जिसके वे वास्तव में हकदार हैं। और यह निर्विवाद रूप से सत्य है कि एक महान व्यक्ति जो अपने मन पर नियंत्रण रख सकने में सक्षम है, सारे संसार को संभाल सकने में सक्षम है।

हनुमानजी ने संयम के महाव्रत को सिद्ध किया है। उन्होंने अपनी इन्द्रियों और मन पर पूर्ण अधिकार कर लिया है, इसीलिए उन्हें मनोजवं भी कहते हैं। वह इतने बलशाली और शक्तिशाली इसीलिए हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी समस्त वासनाओं को जीतकर उन छिद्रों को बंद कर दिया है जहाँ से शक्तियाँ का स्राव हो सकता है। ब्रह्मचर्यं के उत्कट व्रत के प्रभाव से ही वह इतने शक्तिसंपन्न बने हैं।

संयम से उत्पन्न हुई मानसिक एकाग्रता और बलिष्ठता के कारण ही वह उन कार्यों को संपन्न कर पाये जिन्हे दूसरे पूरा करना दुष्कर ही समझते थे। उनका जीवन यही सिद्ध करता है कि जिन्हें सफलता की चाह हो वह अपनी सम्पूर्ण शक्ति को एक ही स्थान पर नियोजित कर दें। यह संयमशीलता ही महावीर हनुमानजी का दसवाँ Success Mantra है।

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Mantra 11. Punctual समय के पाबंद

एक विद्वान ने कहा है – “भविष्य को वह समय मत बनने दीजिये जब आप यह इच्छा करें कि आपको वह करना चाहिये था जो आप अब नहीं कर रहे हैं, क्योंकि समय इस जीवन की सबसे मूल्यवान सम्पदा है।” हनुमानजी समय की महत्ता को अच्छी तरह समझते हैं, इसीलिये वह बिना देर किये सीताजी की कुशलता का समाचार श्रीराम तक पहुँचाते हैं, नागपाश से राम-लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिये अकेले ही गरुड़जी को बुलाने चल देते हैं।

आधी रात में ही हिमालय पर्वत पर संजीवनी बूटी लाने पहुँच जाते हैं और जब लगता है कि वह बूटी की पहचान नहीं कर सकेंगे तो बिना देर किये सारा पहाड़ ही उठाकर चल देते हैं। इसीलिये जो कोई भी एक अच्छे भविष्य का आनन्द लेना चाहता है, उसे हनुमानजी के जीवन से शिक्षा लेते हुए अपने वर्तमान के एक क्षण का भी दुरूपयोग नहीं करना चाहिये, क्योंकि वक्त ही जिंदगी है। Punctuality का यह गुण हनुमानजी का ग्यारहवाँ Success Mantra है।

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Mantra 12. Free from Ego अभिमान से मुक्त

इतने शक्तिशाली, इतने बुद्धिमान और गुणों के सागर होते हुए भी हनुमानजी में लेशमात्र भी अभिमान नहीं है। वह हमेशा अपने आपको प्रभु श्रीराम का अदना सा सेवक भर मानते हैं। जिनके अप्रतिहत तेज के सामने राक्षसराज रावण भी निस्तेज सा प्रतीत होता था, वह सिर्फ अपने स्वामी की चाकरी में ही सुख मानते हैं। जिनके सामने युद्ध में टिकने वाला कोई रणधीर आज तक किसी युग में नहीं हुआ है, वह सिर्फ श्रीराम की आज्ञापालन की बाट जोहते रहते हैं।

उनकी अभिमानशून्यता इतनी अधिक है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गरुड़ और सुदर्शन का अभिमान तोड़ने के लिये स्वयं महावीर हनुमान को ही याद किया था। हनुमान जी के व्यक्तित्व के यह 12 गुण उनके उच्चस्तरीय चरित्र की एक हल्की सी झलक भर हैं और यह सभी गुण न केवल एक दृढ और सशक्त चरित्र का आधार हैं, बल्कि सफलता के वह बुनियादी सिद्धांत भी हैं जिनका हमने इस लेख में 12 Success Mantra in Hindi के नाम से वर्णन किया है।

यदि आपने यह लेख पूरा पढ़ा है तो हमारी आपसे यह प्रार्थना है कि बजरंगबली हनुमानजी को सिर्फ उपासना के पात्र एक देवता की दृष्टि से मत देखें। उन्हें एक सच्चा आदर्श मानकर उनके जीवन से शिक्षा ग्रहण करें और स्वयं को भी वैसा ही बनायें जैसे कि एक अच्छे इंसान से अपेक्षा की जाती है। तो आइये हनुमान जयंती के इस महापर्व पर हम सभी इस महान, अपने चिरयश से देदीप्यमान, ईश्वर के सच्चे भक्त और असाधारण शूरवीर उन महावीर बजरंगबली का जयघोष करें –

जय श्री बालाजी महाराज!

“मन को जीतने वाले, वायु के समान वेग से चलने वाले, जितेन्द्रिय, बुद्धिमानों में सबसे बड़े, पवनपुत्र, वानरों के स्वामी, श्रीराम दूत की मै शरण में जाता हूँ।”
– तुलसीदास

 

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