Secret of Happiness in Hindi from Chanakya Niti

 

“सुख हम पर ही निर्भर है, और इसे हासिल करने का सबसे अच्छा रास्ता उन चीज़ों की चिंता छोड़ने से है जो हमारी इच्छाशक्ति से बाहर की बात हैं।”
– एपिक्टेटस

 

Secret of Happiness in Hindi from Chanakya Niti
दुःख नहीं पाना चाहते हैं तो इनसे हमेशा बचकर रहिये

Happiness Secrets in Hindi क्या है सुख का रहस्य

सुख पाने की इच्छा हर इन्सान के मन में समायी है, कोई भी आदमी दुःख नहीं पाना चाहता, लेकिन सुख-दुःख एक चक्र के रूप में हर व्यक्ति के जीवन में बारम्बार आते हैं। Happiness Secrets in Hindi में आज हम आपको उन 8 बेहद जरुरी बातों के बारे में बतायेंगे जिन्हें जानकर आप एक खुशहाल जिंदगी बिता सकते हैं। इस लेख में जो गुप्त बातें बतायी गयी हैं, वह चाणक्यनीति से ली गयी हैं। अगर आप विस्तार से सुखी जीवन का रहस्य जानना चाहते हैं तो 10 Jeevan Mantra in Hindi for Happiness यह लेख पढ़ें।

इसके अतिरिक्त जिंदगी को खुशहाल बनाने वाले 75 Golden Thoughts भी जरुर पढ़ें। इन दोनों लेखों को अच्छी तरह पढने के बाद आपको दूसरे लेखों को पढने की जरुरत नहीं पड़ेगी। आचार्य चाणक्य ने चाणक्यनीति में अनेकों स्थानों पर ऐसे श्लोकों का वर्णन किया है, जिनमे बताया गया है कि जिन व्यक्तियों को सुख पाने की इच्छा हो उन्हें क्या करना चाहिये? वैसे तो सुख पाने के लिये कई चीज़ों की आवश्यकता होती है।

जिनमे एक बात यह भी शामिल है कि आप उन लोगों से दूर रहें जो आपका बुरा कर सकते हैं। जो आपके दुश्मन हैं और दुश्मन ऐसे भी हो सकते हैं जो संबंधियों के रूप में आपके पास ही रहते हों। इसके अलावा आचार्य ने और भी कई जरुरी बातों पर प्रकाश डाला है जिन्हें आप नीचे दिए जा रहे Happiness Secrets के माध्यम से जान सकते हैं। आशा है चाणक्य नीति के यह गुप्त रहस्य आपके ज्ञान में निश्चित ही वृद्धि करेंगे –

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Happiness Secret 1 दुखी लोगों से हमेशा बचकर रहें

1. मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टस्त्रीभरणेन च।
दु:खितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोअप्यवसीदति॥

अर्थ – आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मूर्ख शिष्य को उपदेश देने से, दुष्ट और दुराचारिणी स्त्री का भरण-पोषण करने से तथा दुखी व्यक्तियों के साथ रहने से बुद्धिमान (पंडित) व्यक्ति को भी कष्ट उठाना पड़ सकता है।

Hindi Happiness Secret 1: मनुष्य के लिये मूर्खता किसी अभिशाप से कम नहीं है क्योंकि मूर्ख शिष्य किसी बात को न तो सही प्रकार से समझ सकता है और न ही उसका लाभ उठा सकता है, बल्कि अपने अविवेकपूर्ण कार्यों से वह, अपने परिवार, गुरु आदि के लिये अपमान और दुःख का कारण बनता है। इसी प्रकार से जिसकी पत्नी दुष्ट प्रकृति की हो, उस व्यक्ति को गृहस्थ जीवन का कोई सुख नहीं मिल सकता।

क्योंकि वह अपने बुरे कामों से न केवल अपने पति को बारंबार दुःख देती है, बल्कि उसके सामाजिक सम्मान को भी नष्ट कर देती है। वह एक कृतघ्न की तरह पति से अपनी हर इच्छा की पूर्ति तो कराती है, लेकिन न तो अपने किसी दायित्व का सही प्रकार से निर्वहन करती है और न ही उसे विवाहित जीवन (Marriage) का कोई सुख भोगने देती है। दुखी व्यक्तियों के साथ निरंतर रहने से व्यक्ति का अपना स्वयं का जीवन दुःख से भर जाता है।

क्योंकि दुःख में मदद करने के लिए आपको उसके साथ रहना होगा, उसे ढाढस बँधाना होगा, समय-समय पर आपको अपने आवश्यक कार्य छोड़कर उसकी मदद करनी होगी, अपने परिश्रम से उपार्जित धन-संपत्ति को उस पर खर्च करना होगा, जिससे आपका अपना जीवन भी दुःख से भर जायेगा। अतः सुख चाहने वाले हर इन्सान को इस तरह के लोगों के साथ रहने से अवश्य बचना चाहिये।

Happiness Secret 2 मूर्खों की संगति में न रहें

2. मूर्खस्तु परिहर्त्तव्यः प्रत्यक्षो द्विपदः पशुः।
भिद्यते वाक्यशल्येन अदृष्टः कंटकम यथा॥

अर्थ – मनुष्य की तरह दो पैरों से युक्त होने पर भी मूर्ख व्यक्ति, पशु के समान ही होता है। क्योंकि जिस प्रकार पशु बुद्धिहीन होता है, उसे उचित और अनुचित बातों के संबंध में कोई ज्ञान नहीं होता; उसी प्रकार मूर्ख को भी इस बात का ज्ञान नहीं होता कि उसे क्या कहना चाहिये और क्या करना चाहिये।

Hindi Happiness Secret 2: जिस तरह पैर के भीतर धंसा हुआ शूल (काँटा) बाहर से दिखाई न देने पर भी अंदर ही अंदर पीड़ा देता रहता है, उसी प्रकार से मूर्ख व्यक्ति भी अपने वचनों से और कार्यों से दूसरों को दुःख और पीड़ा ही देता रहता है। यह कहावत कि “एक मूर्ख दोस्त से समझदार दुश्मन ज्यादा अच्छा” का तात्पर्य यही है कि बेवकूफी हर स्थिति में एक बुरी और खतरनाक बात है।

क्योंकि मूर्ख कब कोई ऐसा काम कर जाय जिससे परिणाम में बहुत बड़ा नुकसान हो, उसके बारे में कुछ निश्चित नहीं रहता। यहाँ तक कि कभी-कभी तो लोगों की मूर्खता के कारण लोगों की जान तक चली जाती है। कुछ वर्ष पहले ऐसे ही कुछ मूर्खों ने NCR क्षेत्र में एक व्यक्ति की अपनी मूर्खता से तब जान ले ली थी, जब उन्होंने खेल-खेल में उसके गुदा मार्ग पर कंप्रेसर का पाइप लगा दिया था।

पेट में हवा का दबाव बहुत ज्यादा हो जाने से वह बेचारा मर गया था। इसीलिये जिन्हें सुख से रहने की इच्छा हो, उन्हें मूर्ख व्यक्तियों से सदा बचकर ही रहना चाहिये। क्योंकि मूर्खों की मूर्खता ने इतिहास में बड़े कोहराम मचाये हैं।

 

Happiness Secrets from Chanakya Niti

Happiness Secret 3 दुष्ट लोगों के साथ न रहें

3. वरं न राज्यं न कुराज्यराज्यं, वरं न मित्रं न कुमित्रमित्रम्।
वरं न शिष्यो न कुशिष्यशिष्यो, वरं न दारा न कुदारदाराः॥

अर्थ – किसी दुष्ट राजा के राज्य में रहने के बजाय, किसी राज्य में न रहना ज्यादा अच्छा है, दुष्ट मित्रों के बजाय बिना दोस्त के रहना ज्यादा अच्छा है, दुष्ट शिष्य के बजाय कोई शिष्य न होना ज्यादा अच्छा है, और बुरी पत्नी के बजाय बिना पत्नी के रहना ज्यादा अच्छा है।

Hindi Happiness Secret 3: इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने दुष्ट राजाओं और खराब सरकारों से सावधान रहने को कहा है, क्योंकि वे लोगों का कब और किस तरह से नुकसान कर बैठे, कुछ कहा नहीं जा सकता। आये दिन हम देखते ही हैं कि जब-तब किसी न किसी देश के लोग अपने शासकों के खिलाफ आन्दोलन छेड़े ही रहते हैं। अगर किसी कारणवश इन शासकों की किसी व्यक्ति विशेष पर नजरें टेढ़ी हो जाँय, तो न सिर्फ उसके धन-संपत्ति, बल्कि जीवन को भी खतरा हो जाता है।

“दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है उम्र भर का गम हमें ईनाम दिया है” यह पंक्ति उन्ही दोस्तों (Friends) के लिये लिखी गयी है जो सामने ठाकुरसुहाती करते हैं और पीठ पीछे छुरा घोंपने वाला काम करते हैं। ऐसे दोस्त आस्तीन के साँप होते हैं, वह कब आपको चोट पहुँचा दें कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे दोस्तों पर विश्वास करने वाला इन्सान हर समय खतरे में रहता है।

क्योंकि जिस पर वह विश्वास करता है, वही उसे धोखा देने को तैयार रहता है। इसीलिये ऐसे दोस्त (Friends) होने के बजाय बिना दोस्त के रहना ज्यादा अच्छा है। इसी तरह दुष्ट शिष्य भी कब अपने गुरु का अहित कर बैठें, कुछ नहीं कहा जा सकता। अतीत में और आज भी ऐसी कितनी ही घटनाएँ देखने-सुनने में आती हैं, जब शिष्य ने अपने स्वार्थ के लिये गुरुओं का सब कुछ लूट लिया।

इसीलिये बिना परीक्षा लिये किसी को चेला नहीं बनाना चाहिये। पति-पत्नी का रिश्ता (Relationship) सबसे विश्वसनीय नाता माना जाता है और यदि पत्नी कोई ऐसा काम करे जिससे पति की जिंदगी मुश्किलों से घिर जाय या पति का जीवन ही संकट में पड़ जाय तो ऐसी पत्नी (Wife) के साथ रहने के बजाय बिना बीबी के रहना ज्यादा अच्छा है।

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Happiness Secret 4 बुराई करने वालों से बचें

4. पक्षिणां काक्श्चांडालः पशूनां चैव कुक्कुरः।
मुनीनां पाप्श्चांडालःसर्वेषां चैव निन्दकः॥

अर्थ – पक्षियों में सबसे अधिक दुष्ट और चांडाल (नीच) कौआ होता है। इसी प्रकार पशुओं में सबसे नीच कुत्ता होता है। मुनियों और साधुओं में सबसे अधिक चांडाल (नीच) वह होता है जो पाप कर्म करता है और सबसे बढ़कर चांडाल वह होता है जो दूसरों की निंदा करता है।

Hindi Happiness Secret 4: कौए को पक्षियों में सबसे नीच इसलिये कहा जाता है, क्योंकि वह सब कुछ खा लेता है। क्या खाना है क्या नहीं? इसका वह कोई विचार नहीं करता। इसी तरह पशुओं में सबसे नीच कुत्ता होता है, क्योंकि कुत्ते भी हर जगह मुँह मारते फिरते हैं। साधुओं में पाप कर्म करने वाले को सबसे नीच बताने का कारण, हर कोई आसानी से समझ ही सकता है।

पर आचार्य चाणक्य ने निंदक को सबसे बड़ा चांडाल इसलिये बताया है, क्योंकि वह पीठ पीछे उस व्यक्ति की बुराई करता है जो वहाँ पर अपना पक्ष रखने के लिये उपस्थित ही नहीं होता। निंदा के पीछे एकमात्र उद्देश्य दूसरे व्यक्ति को नीचा दिखाकर उसकी प्रतिष्ठा का नाश करना होता है और इस पाप कर्म को करने के पीछे निंदक का व्यक्तिगत संतुष्टि का भाव रहता है।

जिस व्यक्ति की बुराई हो रही है वह चाहे निंदा का पात्र क्यों न हो, लेकिन फिर भी उसकी पीठ पीछे निंदा नहीं होनी चाहिये। क्योंकि धर्म की दृष्टि से ऐसा करना महान पाप है। हाँ, उसकी आलोचना अवश्य की जा सकती है, क्योंकि आलोचना सुधारात्मक होती है और उसमे व्यक्ति की कल्याण कामना निहित होती है। इसलिये जहाँ तक हो सके निन्दा और निंदक दोनों से बचकर रहें।

 

Top Secrets for Happiness in Hindi

Happiness Secret 5 प्यार न करने वालों से दूर रहें

55. त्यजेत् धर्म दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत्।
त्यजेत् क्रोधमुखीं भार्यां निःस्नेहान् बान्धवाँ स्त्यजेत्॥

अर्थ – जिस धर्म में दया नहीं हो, उसे त्याग देना चाहिये; जिस गुरु के पास विद्या न हो, उसे त्याग देना चाहिये; जो स्त्री सदा क्रोध से भरी रहती हो, उसे त्याग देना चाहिये और जिन बंधु-बांधवों में स्नेह न हो, उन्हें भी त्याग देना चाहिये।

Hindi Happiness Secret 5: इस श्लोक में आचार्य ने उन बातों पर प्रकाश डाला है जो हर मनुष्य के जीवन से जुडी हैं। जैसे उन्होंने बताया है कि किसी भी धर्म का सबसे मुख्य गुण है – दया (Forgiveness)। चूँकि धर्म की स्थापना इसलिये ही हुई थी कि हर व्यक्ति सुख-शांति से पूर्ण जीवन जी सके और यदि कभी उससे मर्यादा का निर्वहन करने में कोई गलती हो जाय, तो उसमे इतनी गुंजाईश अवश्य हो कि उसे सुधार करने का अवसर अवश्य मिले।

लेकिन जो धर्म व्यक्ति के जीवन (Life) और उसकी स्वतंत्रता (Freedom) पर प्रतिबन्ध लगाता है, वह धर्म निश्चय ही त्याग देने लायक है। गुरु का महत्व उनके तप, ज्ञान और शिष्य के प्रति उत्तरदायित्व की भावना के कारण है, लेकिन जिस गुरु में यह गुण न हों, वह किसी काम का नहीं है और उसका वेश सिर्फ एक प्रवंचना मात्र है। ऐसे गुरु को त्याग देना अधिक उचित है।

इसी तरह जो पत्नी हर समय लडती-झगडती रहती है, जिसके मुख पर क्रोध हर समय छाया रहता है, उससे व्यक्ति को छुटकारा पा लेना चाहिये। क्योंकि पत्नी सुखमय विवाहित जीवन (Happy Married Life) का मूल आधार है और यदि वह अपने निर्दोष जीवनसाथी पर अकारण ही अत्याचार करने को उतारू है, तो सुख चाहने वाले को उसे निश्चय ही त्याग देना चाहिये।

रिश्ते-नातेदारों और सगे-सम्बन्धियों का महत्व इसीलिये है, क्योंकि वे सुख (Happiness) में हर्ष मनाकर खुशियाँ बाँटते है और दुःख में सांत्वना और सहयोग देकर पीड़ा को कम करने में मदद करते हैं। लेकिन यदि उन्हें हमारे प्रति कोई स्नेह न हो, वे हमारी उन्नति से जलें और दुःख में भी मदद करने को आगे न आयें, तो उनसे सम्बंध बनाये रखना व्यर्थ है और ऐसे बंधुओं को त्याग देना ही बेहतर है।

Happiness Secret 6 ईर्ष्या करने वालों दुष्टों से दूर रहें

6. तुष्यन्ति भोजने विप्रा मयूराः घनगर्जिते।
साधवः परसंपत्तौ खलाः परविपत्तिषु॥

अर्थ – ब्राह्मण (ज्ञानी व्यक्ति) सिर्फ भोजन से तृप्त हो जाते हैं, मोर सिर्फ बादल के गरजने भर से तृप्त हो जाते हैं, संत तथा सज्जन व्यक्ति सिर्फ दूसरे की समृद्धि देखकर प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन दुष्ट व्यक्ति सिर्फ तभी प्रसन्न होता है, जब वह दूसरे को विपत्ति में पड़ा देखता है।

Hindi Happiness Secret 6: इस श्लोक के माध्यम से आचार्य इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाना चाहते हैं कि हर इंसान को दुष्ट और ईर्ष्यालु व्यक्ति से बचने का प्रयत्न करना चाहिये। क्योंकि वह अपने से समृद्ध लोगों को देखकर जलता है और उन्हें विपत्ति में पड़ा देखकर खूब प्रसन्न होता है।

आप चाहे उनकी कितनी भी सहायता और सेवा क्यों न कर लें, आप उन्हें कभी भी प्रसन्न नहीं कर सकेंगे। यहाँ तक कि अपने बुरे समय में भी आपको उनसे किसी प्रकार की मदद की आशा बिलकुल नहीं रखनी चाहिये, फिर चाहे वह संबंधी के वेश में हो या एक कपटी मित्र के रूप में।

चाणक्यनीति में पढिये आचार्य चाणक्य के जिंदगी बदलने वाले 25 अनमोल सूत्र Best Chanakya Niti Sutra in Hindi

 

Happiness Mantra in Hindi by Chanakya

Happiness Secret 7 यह छह चीजें हर आदमी को दुखी करती हैं

7. कुग्रामवासः कुलहीन सेवा कुभोजनं क्रोधमुखी च भार्या।
पुत्रश्च मूर्खो विधवा च कन्या विनाग्निना षट् प्रदहन्ति कायम्॥

अर्थ – ऐसे ग्राम या ऐसे स्थान पर निवास करना जहाँ न आजीविका का प्रबंध हो, न लोगों में सामाजिक समरसता की भावना हों और जहाँ दुष्ट, दुराचारी लोगों का निवास हो; किसी कुलहीन, आचारहीन नीच व्यक्ति की सेवा करना; केवल उच्छिष्ट, बासी और अरुचिकर भोजन का ही उपलब्ध होना; झगडालू और दुष्ट प्रकृति की पत्नी का मिलना; एक मूर्ख पुत्र का होना और घर में विधवा कन्या का निवास करना, ये छह चीज़ें मनुष्य के शरीर को बिना किसी अग्नि के हर समय जलाते रहते हैं।

Hindi Happiness Secret 7: आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस इन्सान को इन छह चीजों के साथ रहना पड़ता है न तो वह चैन से खा-पी सकता है और न ही चैन से सो सकता है। उसका जीवन एक दुखद यंत्रणा के समान हो जाता है। क्योंकि जहाँ आस-पास दुष्ट व्यक्तियों का निवास हो, कोई सहयोग करने को तैयार न हो, वहां रहना खतरे से खाली नहीं।

यदि किसी व्यक्ति को मजबूरी में ऐसे आदमी की चाकरी करनी पड़ती हो जो दुष्ट, असभ्य और आततायी हो, तो उसके लिये इससे बढ़कर दुःख की बात कोई नहीं है, क्योंकि वहां सम्मान खोकर काम करना पड़ता है। इंसान भोजन के कारण ही जिन्दा रह पाता है, यदि किसी व्यक्ति को परिश्रम करने के पश्चात भी खाने को पौष्टिक और शुद्ध भोजन न मिल सके, तो उसके लिये जीवन में इससे अधिक बुरा और क्या हो सकता है?

जिस व्यक्ति की स्त्री अत्यंत क्रोधी स्वभाव की होती है, वह हमेशा अपने पति (Husband) का सुख-चैन छीने रहती है, उसकी सेवा-सहायता को भूल सदा उस पर प्रभुत्व जमाकर रखती है। ऐसे पुरुष को न तो कहीं सुख-शांति मिल सकती है और न ही वह चैन से जी सकता है। ऐसे ही जिस व्यक्ति का पुत्र मूर्ख हो और जिस व्यक्ति की पुत्री विधवा होकर घर में निवास करती हो, उसके लिये भी जीवन में समस्या और अपमान के अवसर बार-बार आते हैं।

उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा नष्ट हो जाती है। वह समाज में सिर उठाकर नहीं चल पाता। क्योंकि लोग उसकी संतान व उसकी हालत पर पीठ पीछे ख़ुशी मनाते हैं, मजाक उड़ाते हैं; जो उस व्यक्ति के लिये बहुत कष्टदायी होता है। अतः जिस व्यक्ति को सुख की कामना हो वह प्रयत्न करके इन दुखदायक परिस्थितियों से बचने का प्रयत्न करे।

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Happiness Secret 8 धूर्त लोगों के साथ कभी मत रहें

8. नराणां नापितो धूर्तः पक्षिणां चैव वायसः।
चतुश्पदां शृगालस्तु स्त्रीणां धूर्ता च मालिनी॥

अर्थ – मनुष्यों में नाई, पक्षियों में कौआ, पशुओं में गीदड़ और स्त्रियों में मालिन को धूर्त माना गया है।

Hindi Happiness Secret 8: इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने इन चार जीवों से बचने को कहा है, क्योंकि ये सभी बिना किसी उचित कारण के ही दूसरों का कार्य बिगाड़ते हैं, सर्वदा अपने ही स्वार्थ की सिद्धि में लगे रहते हैं और दूसरों से ईर्ष्या करते हैं। इसलिये जो व्यक्ति सुख-शांति से रहना चाहता हो, उसे इन लोगों के साथ रहने से बचना चाहिये।

इस श्लोक के विषय में कुछ लोगों को शंका हो सकती है, विशेषकर प्रथम और अंतिम पद में। क्योंकि बाकी बीच के दोनों पदों के विषय में तो सभी जानते हैं कि कौवे और गीदड़ कितने धूर्त होते हैं। जब आचार्य के परीक्षा करने पर यह सत्य (Truth) सिद्ध हुआ है, तो निश्चय ही प्रथम और अंतिम पद के विषय में उन्होंने जो कहा है, उस पर भी सभी व्यक्तियों को अवश्य विश्वास करना चाहिये।

आगे पढिये आचार्य चाणक्य के जिंदगी बदलने वाले 100 प्रेरक विचार – 100 Chanakya Quotes in Hindi

“लगातार पैदल चलने वाले लोगों पर जल्दी ही बुढ़ापा आ जाता है, हर समय खूँटे से बंधे रहने वाले घोड़े जल्दी बूढ़े हो जाते हैं, तेज धूप में सुखाने से कपड़ों की उम्र कम हो जाती है और सम्भोग (मैथुन) से वंचित रहने से स्त्रियों पर जल्दी बुढ़ापा आ जाता है।”
– आचार्य चाणक्य

 

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