Children Qualities in Hindi from Chanakya Niti

 

“जिस तरह एक ही अच्छा पेड़ अपने फूलों की सुगंध से संपूर्ण वन को सुगंधित बना देता है; उसी तरह एक ही सुपुत्र (Child) अपने शील और सद्गुणों से संपूर्ण कुल को यशस्वी और प्रसिद्ध बना देता है।”
– चाणक्य

 

Children Qualities in Hindi from Chanakya Niti
वे सौभाग्यशाली हैं जो बिना याद रखे दे सकते हैं और बिना भूलाये ले सकते हैं

Quality of Good Child in Hindi अच्छी संतान के गुण

Child Qualities in Hindi में आज हम आपको अच्छी संतान के गुणों के बारे में बतायेंगे। ग्रामीण भारत में आज भी यह कहावत प्रचलित है कि एक सत्पुत्र सात पीढ़ियों का उद्धार कर देता है। शायद यह विचारधारा भी उन महत्वपूर्ण कारणों में से एक है, जो प्रायः सभी भारतीय माता-पिता के मन में Child के रूप में एक पुत्र की लालसा को जन्म देती रही है।

हालाँकि ज्यादातर लोगों को यह बिलकुल भी उचित नहीं लगता होगा कि बेटे और बेटी में किसी तरह का विभेद किया जाय। ऐसे लोगों से हमारा बस यह कहना है कि इस लेख में हम केवल अच्छे पुत्र के गुण और कर्तव्य के विषय में बता रहे हैं, जिनका वर्णन आचार्य चाणक्य ने चाणक्यनीति में किया है। इसीलिये यह लेख बिना किसी दोषदृष्टि के ही पढ़ें।

यदि हम भारत के इतिहास पर दृष्टि डालें और श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्रवण कुमार, पांडव, हरिश्चंद्र, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद, दयानन्द, मदन मोहन मालवीय, अरविन्द घोष जैसे महापुरुषों के जीवन और कृतत्व का अवलोकन करें, तो पाएंगे कि वह हर भारतीय का आदर्श हैं।

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Child in Hindi माता पिता की ऋणी है हर संतान

अगर पति-पत्नी संतान (Child) के रूप में एक ऐसे पुत्र की अभिलाषा करते हैं, जो न केवल अपना जीवन सफल बनाये बल्कि उन्हें और अपने पूर्वजों को भी गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान करें, तो इसमें बुराई क्या है? निःसंदेह प्रत्येक माता-पिता अपने दाम्पत्य जीवन की पूर्णता के लिये संतान के रूप में एक आदर्श जीव की ही चाह रखते हैं।

जिसकी पूर्ति करना प्रत्येक अच्छी संतान (Good Child) का कर्तव्य है तभी वह माता-पिता के भारी ऋण से उऋण हो सकती है। जिन संतानों के कारण माता-पिता को दुःख, अपमान व् पीड़ा सहनी पड़ती है और उन्हें समाज में नीचा देखना पड़ता है, उनका जीवन एक पशु से भी अधिक निकृष्ट कहा गया है। यहाँ तक कि ऐसी संतानों का अपना जीवन भी भयंकर रूप से दुखमय होता देखा गया है।

निर्दोष माता-पिता को दुःख देकर कोई संतान (Child) सुख से नहीं रह सकती है, इसीलिये हर इन्सान को एक अच्छा पुत्र या पुत्री बनने का प्रयास करना चाहिये और एक गौरवशाली जीव होने का सौभाग्य हासिल करना चाहिये। हमें आशा है इससे पहले कि हम आचार्य चाणक्य के श्लोकों के माध्यम से, अच्छी संतानों (Good Child) का गुणगान करें, हम उनकी कुछ Quality के बारे संक्षिप्त रूप से बताना चाहेंगे –

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16 Traits of A Good Children in Hindi

1. एक अच्छी संतान (Good Child) विनम्र, उदार और सहिष्णु होती है। उसमे उच्च चरित्रबल, क्षमा, करुणा और साहस जैसे दिव्य गुण होते हैं।

2. एक अच्छी संतान (Good Child) आपत्ति पड़ने पर अपने माता-पिता का सहारा बनती है और उन्हें मुश्किलों के भँवर से निकालती है।

3. वह सीमित संसाधनों में संतोष करता है और कभी भी अपने माता-पिता को इच्छापूर्ति के लिये मजबूर नहीं करता।

4. एक अच्छी संतान (Good Child) अपने माता-पिता की शैक्षिक, आर्थिक और नैतिक उन्नति के लिये हमेशा प्रयासरत रहती है।

5. वह न सिर्फ अपने माता-पिता का, बल्कि अपने से आयु में बड़े सभी लोगों का आदर करता है।

6. वह अपने से छोटों के साथ कोमलता बरतता है और उनकी खुशी के लिये अपने स्वार्थ त्याग सकता है।

7. एक अच्छी संतान (Good Child) माता-पिता की आज्ञा का खुशी-खुशी पालन करती है।

8. न तो वह माता-पिता पर अत्याचार करता है, और न ही होते हुए देख सकता है।

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एक अच्छी संतान में होते हैं यह 16 गुण

9. वह उनके कार्यों में बिना कहे हाथ बंटाता है और उनके दिल की बात समझता है।

10. एक अच्छी संतान (Good Child) अपने माता-पिता की भूलों का परिमार्जन करने के लिये हमेशा तैयार रहती है।

11. वह अपने कामों से अपने माता-पिता का गौरव और प्रतिष्ठा बढाता है, ताकि वे उस पर गर्व कर सकें।

12. वह कभी कोई ऐसा काम नहीं करता जिससे उसके माता-पिता का सम्मान किसी प्रकार से नष्ट हो।

13. एक अच्छी संतान (Good Child) माता-पिता की प्रसन्नता के लिये अपनी सबसे प्यारी वस्तु का भी त्याग कर सकती है।

14. एक अच्छी संतान (Good Child) अपने माँ-बाप को कुमार्ग से हटाती है और सन्देह होने पर उनका मार्गदर्शन करती है।

15. एक अच्छी संतान (Good Child) न तो एकांत में और न ही दूसरों के सामने कभी अपने माता-पिता को अपमानित करती है।

16. वह अपने माता-पिता की प्रत्येक सेवा के लिये खुद को ह्रदय से कृतज्ञ मानता है, और उन्हें उससे भी ज्यादा देने का प्रयास करता है जो उसे मिला था।

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Who is A Good Child in Hindi

Child Quality in Hindi कुल का नाम रोशन करता है

1. एकेनाअपि सुवृक्षेण पुष्पितेन सुगन्धिना।
वासितं ताडवनं सर्वं सुपुत्रेण कुलं यथा॥

अर्थ – जिस प्रकार एक ही उत्तम वृक्ष अपने पुष्पों की सुगंध से संपूर्ण वन को सुगंधित बना देता है; उसी तरह एक ही सुपुत्र अपने शील और सद्गुणों से संपूर्ण कुल को यशस्वी और प्रसिद्ध बना देता है।

सभी जानते हैं कि पुष्पों की सुगंध वायु के साथ दूर तक जाती है। इसलिये एक ही वृक्ष समस्त वन को सुशोभित करने में समर्थ होता है, लेकिन व्यक्ति के सदगुणों की चर्चा तो चारों दिशाओं में फैलती है। इस तरह यदि कुल में एक भी गुणवान संतान (Good Child) उत्पन्न हो जाय, तो संपूर्ण कुल की प्रतिष्ठा में चार चाँद लग जाते हैं। अतः सभी विवाहित व्यक्तियों को एक उत्तम संतान (Good Child) उत्पन्न करने के लिये विशेष प्रयास करना चाहिये।

क्योंकि कामवासना से प्रेरित होकर एक नये जीव की उत्पत्ति करने में तो पशु भी समर्थ हैं, फिर इसमें मनुष्य के लिये गौरव करने लायक क्या बात है? गौरवशाली तो वही माता-पिता हैं जो इस पृथ्वी पर एक ऐसे जीव की अभिव्यक्ति का माध्यम बने हैं, जिसने अपने शील और सद्गुणों से उनके और अपने पूर्वजों का मान बढाया है और इस धरती पर दूसरे जीवों का भी सहायक बना है।

Child Quality in Hindi परिवार को सुख देता है

2. किं जातैर्बहुभिः पुत्रैः शोकसन्तापकारकै।
वरमेकः कुलाअल्मबी यत्र विश्राम्यते कुलम्॥

अर्थ – अपने आचरण से शोक और सन्ताप देने वाले बहुत से पुत्रों की अपेक्षा, तो कुल की प्रतिष्ठा को बढाने वाला और समस्त परिवार को सुख देने वाला एक ही पुत्र अधिक अच्छा है।

यहाँ आचार्य ने संख्या की अपेक्षा गुण को अधिक महत्व देते हुए, एक गुणवान पुत्र (Good Child) को कई निक्कमे पुत्रों की अपेक्षा अधिक योग्य बताया है। जैसे सौ दुष्ट कौरवों की अपेक्षा पाँच पांडव संख्या में कम होते हुए भी, गुणों में उनसे कहीं अधिक श्रेष्ठ थे। कष्ट सहते हुए भी अपने धर्म पर अटल रहने के कारण, अपने शील और सद्गुणों का त्याग न करने के कारण, समस्त संसार आज भी उनका सम्मान करता है।

अपने सत्कर्मों और त्याग से उन्होंने अपने पूर्वजों की कीर्ति को इतने उच्च स्तर पर प्रतिष्ठित कर दिया कि वह आज हजार वर्ष बीत जाने पर भी फीकी नहीं पड़ी है। इतिहास भी यही सिद्ध करता है कि दुष्टता चाहे कितनी भी प्रबल क्यों न हो जाय; अंत में विजय गुणों की ही होती है, संख्या/बल की नहीं।

Child Quality in Hindi शीलवान और विद्वान होता है

3. एकेनाअपि सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना।
आह्लादितं कुलं सर्वं यथा चन्द्रेण शर्वरी॥

अर्थ – जिस प्रकार एक अकेला चाँद घोर अँधेरी रात को भी अपने प्रकाश से जगमगा देता है, अंधकार दूर कर उसे सुहानी बना देता है; उसी तरह से एक ही शीलवान, विद्वान और अच्छे स्वभाव का सुपुत्र अपने सद्गुणों, आचरण और सुयश से संपूर्ण कुल को गौरवान्वित कर देता है और समस्त परिवार को आह्लादित कर देता है।

जैसे अँधेरी रात किसी को अच्छी नहीं लगती, वैसे ही कुपुत्र (Bad Child) भी किसी को नहीं सुहाता। आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक में सत्पुत्र के गौरव को रेखांकित किया है। चंद्रमा समस्त संसार का अन्धकार दूर करता है और उसे सुखी बनाता है।

वैसे ही एक श्रेष्ठ, सुयोग्य और चरित्रवान संतान (Good Child) न केवल अपने माता-पिता, बल्कि अपने समस्त पूर्वजों को, संपूर्ण कुल को यशस्वी बनाती है। उन्हें सम्मानित महसूस करने का एक अलभ्य अवसर प्रदान करती है। इतना ही नहीं, समाज भी उनके उच्चतर कार्यों से लाभ पाता है।

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Child Traits in Hindi from Chanakya Niti

Child Trait in Hindi कुपुत्र कुल को कलंकित करता है

4. एकेन शुष्कवृक्षेण दह्यमानेन वहिनना।
दह्यते तदवनं सर्वं कुपुत्रेण कुलं यथा॥

अर्थ – जिस प्रकार जलता हुआ एक ही सूखा वृक्ष सारे वन को जला कर राख बना देता है, ठीक वैसे ही कुपुत्र भी संपूर्ण कुल को उसी वन की तरह दग्ध कर देता है। अर्थात संपूर्ण कुल को अपने कुकर्मों से कलंकित कर देता है।

आचार्य चाणक्य ने कुपुत्र (Bad Child) की, जलते सूखे वृक्ष के साथ तुलना उचित ही की है। क्योंकि न तो वह अपने परिवार के सदस्यों को ही सुख से जीने देता है और न ही दूसरे प्राणियों को। वह वंश की समस्त उच्च मान-मर्यादाओं को नष्ट कर देता है।

जिससे संसार में न केवल उसे अपयश (बदनामी) मिलता है, बल्कि उसके कारण संपूर्ण कुल को भी लज्जित होना पड़ता है। अतः प्रत्येक सद्गृहस्थ का यह कर्तव्य है कि वह अपनी संतान (Child) को जन्म से ही श्रेष्ठ संस्कारों की शिक्षा दे और उसे एक शीलवान, विद्वान् व्यक्ति बनने के लिये प्रोत्साहित करे।

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Child Trait in Hindi एक गुणवान पुत्र सैकड़ों निकम्मों से अच्छा है

5. एकोअपि गुणवान पुत्रो निर्गुणश्च शतैर्वरः।
एकश्चंद्रस्तमो हन्ति न च ताराः सहस्त्रशः॥

अर्थ – व्यक्ति के केवल एक गुणवान पुत्र का होना, सैकड़ों गुणहीन पुत्रों से अधिक अच्छा होता है। ठीक वैसे ही जैसे एक अकेला चाँद रात्रि के समस्त अंधकार को दूर कर देता है, लेकिन हजारों तारे मिलकर भी उस अंधकार को दूर नहीं कर पाते।

यहाँ आचार्य ने गुणवान पुत्र की तुलना चाँद से की है। क्योंकि एक शीलवान पुत्र (Good Child) अपने सत्कर्मों से पूरे कुल का नाम रोशन करता है, यश-प्रतिष्ठा अर्जित करता है। लेकिन सैकड़ों गुणहीन मूर्ख पुत्र मिलकर भी कोई श्रेष्ठ कार्य नहीं कर सकते।

बल्कि अपनी दुर्बुद्धि से वैसे कार्य कर बैठते हैं जो कुल को कलंकित करते हैं और दूसरों को कष्ट देते हैं। यही कारण है कि श्रेष्ठ व्यक्ति ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि यदि उन्हें संतान प्राप्त हो, तो एक शीलवान संतान (Good Children) ही मिले, अन्यथा अच्छा है कि संतान ही न हो।

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Child Trait in Hindi मूर्ख संतान का मरना ही अच्छा है

6. मूर्खश्चिरायुर्जातोअपि तस्माज्जातमृतो वरः।
मृतः स चाल्पदुःखाय यावज्जीवं जड़ो दहेत्॥

अर्थ – अज्ञानी और मूर्ख पुत्र के चिरायु होने की अपेक्षा उसका जन्म लेते ही मर जाना अधिक अच्छा है, क्योंकि जन्म लेकर तुरंत मरने वाले का दुःख तो थोड़े समय तक ही रहता है। लेकिन मूर्ख पुत्र तो जब तक जीवित रहता है, तब तक सबको दुःख देता रहता है।

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने मूर्ख संतान (Foolish Child) के जीवन को धिक्कार योग्य माना है और यह उचित भी प्रतीत होता है। वास्तव में ऐसी संतान को सुपुत्र (Good Child) किसी प्रकार से नहीं कहा जा सकता जो जड्मूर्ख है, जिसमे न ज्ञान है न बुद्धि, न विवेक है न शील।

ऐसा प्राणी जब तक जीता है तब तक न केवल अपने परिवार के लिये, बल्कि जहाँ भी वह निवास करता है, वहां के निवासियों के लिये भी समस्याएँ ही उपस्थित करता रहता है। ऐसी संतान (Child) इस धरती पर बोझ ही है। अतः आचार्य ने उसकी मृत्यु को उसके लम्बे जीवन से अधिक श्रेष्ठ माना है।

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“अपने बच्चों की जिंदगियों को आसान बनाकर उन्हें अक्षम मत बनाइये।”
– रॉबर्ट ए. हेनलिन

 

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