Best Parenting Tips for Kids in Hindi

 

“प्यार और सहकार से भरा-पूरा परिवार ही, धरती का स्वर्ग होता है और बच्चों की अच्छी तरह परवरिश (Parenting) करके हर माँ-बाप इस स्वर्गीय आनंद का लाभ उठा सकते हैं।”
– पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

 

Best Parenting Tips for Kids in Hindi
माता-पिता ही संतान के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक हैं

Parenting Tips in Hindi कैसे करें अपने बच्चों की परवरिश

आजकल माता-पिता और बच्चों में तकरार होना आम बात हो गई है। बच्चे माँ-बाप की बिल्कुल नहीं सुनते, अपनी ही जिद पूरी करने को दबाव डालते हैं। माँ-बाप को अशोभनीय बातें कहते और उन्हें कष्ट पहुँचाते हैं। कुछ तो इतना नीचे गिर जाते हैं कि अपने कार्यों से माता-पिता का मस्तक पूरे समाज में नीचा करा देते हैं। उनके जीवन को एक दारुण यंत्रणा बना देते हैं।

ऐसे द्रश्य आज न सिर्फ हमारे भारतीय समाज में, बल्कि दुनिया के हर देश में आम हो चले हैं, पर उनका उपाय किसी को नहीं सूझ पड़ता। एक श्रेष्ठ संतान को जन्म देना और परिवार में स्वर्ग जैसा वातावरण उपस्थित करना एक कष्टसाध्य, लम्बी और वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसका विस्तृत वर्णन कर पाना अभी संभव नहीं है।

लेकिन कुछ छोटी-छोटी बातों को जीवन में उतारकर हम न सिर्फ अपने बच्चों की अच्छी परवरिश कर सकते हैं, बल्कि उन्हें वह संस्कार और जीवन मूल्यों की वह अनमोल विरासत प्रदान कर सकते हैं जो उनमे जीवनभर स्थायी रहने वाली उन आदतों को विकसित करेंगी, जिनके बल पर वह एक Extraordinary Magnetic Personality develop करके अपने माता-पिता और देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

Parenting Tips in Hindi में आज हम उन बिन्दुओं की चर्चा करेंगे जो बड़े और छोटों के बीच व्याप्त कटुता को कम करते हुए बच्चों की अच्छी परवरिश को आसान बना सके। आशा है यह पेरेंटिंग टिप्स आपको अवश्य पसंद आयेंगी। एक अच्छे माता-पिता कैसे बनें इसका वर्णन हमने Parents Meaning in Hindi में विस्तार से किया है, इसलिये इस लेख को भी अवश्य पढ़ें –

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1. Identify Your Child’s Strengths बच्चों की क्षमता जाने

Hindi Parenting Tip 1: इस दुनिया में हर माता-पिता अपने बच्चे की सही तरह से परवरिश करना चाहता है, लेकिन बहुत ही कम माँ-बाप अपने बच्चे की उन शक्तियों पर ध्यान देते हैं जिन्हें वह संसार में अपने साथ लेकर आया है। ज्यादातर माता-पिता तो अपने बच्चे की नैसर्गिक विशेषताओं से अनभिज्ञ ही बने रहते हैं और इसका नतीजा होता है बच्चे का आधा-अधूरा विकास। अगर माँ-बाप अपने बच्चे की प्रतिभा को समय रहते पहचानकर उसे विकास करने पर ध्यान दें, तो वह न जाने कहाँ से कहाँ पहुँच जाय।

कुछ वर्ष पहले दिल्ली की एक स्त्री ने जो अपने पेशेवर जीवन में बहुत सफल थी, अपने उठते करियर का इसलिये त्याग कर दिया कि कहीं उनका बच्चा जो बेहद प्रतिभाशाली था, दूसरे आम बच्चों की तरह अपनी खूबियों को न खो दे। उन्होंने बाकी माँओं की तरह उसे स्कूल न भेजकर, घर पर ही लम्बे समय तक स्वयं पढाया। उसकी प्रतिभा को तराशा और परिणामस्वरुप वह बच्चा सिर्फ 14 वर्ष की आयु में IIT Topper (उत्तरी भारत का) बना।

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2. Make Them Responsible उन्हें जिम्मेदार बनाइये

Hindi Parenting Tip 2: माँ-बाप अक्सर अपने बच्चों के प्रति बहुत ज्यादा सुरक्षात्मक रवैया रखते हैं। उन्हें पता ही नहीं चल पाता है कि कब वह बच्चों की जरूरतों का ध्यान रखते-रखते सुरक्षा की सीमा का अतिक्रमण कर गये हैं। अपने बच्चे को जिम्मेदार बनाना, हर माता-पिता का कर्तव्य होना चाहिये। अपने बच्चे को आत्म-निर्भर बनने में मदद करें। उसे यह सिखायें कि कैसे उसे स्वतंत्र रहकर निर्णय लेना है। उसे सही और गलत का अंतर समझना सिखाइये।

जब तक आवश्यक न हो तब तक बीच में बिल्कुल हस्तक्षेप मत कीजिये। जैसे-जैसे वह बड़ा होता जाय, उसे छोटे-छोटे कामों में हाथ बंटाने को कहिये, ताकि उसे पता चले कि परिवार और समाज के प्रति उसका भी कोई कर्तव्य है। छुटपन से ही उत्तरदायित्व की भावना को ग्रहण कर लेने से, वह बड़े होकर अपने आप ही अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में संलग्न हो जायेगा। इसीलिये रॉबर्ट हेनलिन कहते हैं – “अपने बच्चों की जिंदगियों को आसान बनाकर उन्हें अक्षम मत बनाइये।”

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3. Show Them Your Affection उनसे प्यार करिये

Hindi Parenting Tip 3: पुरानी कहावत है कि बच्चे ईश्वर का उपहार है और उपहारों को हमेशा अपने दिल में बसाकर रखा जाता है। अपने बच्चों के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार कीजिये। उन्हें कोई शर्त थोपे बिना अपना निष्कपट प्यार और स्नेह दीजिये। आपके आँचल की छाँव में ही वह सच्ची उन्नति कर सकेंगे। जिस तरह माली पौधों का दिन-रात ध्यान रखते हुए अपनी कुशलता से उसे भरा-पूरा वृक्ष बना देता है, उसी तरह का समर्पण आपकी संतान को भी चाहिये।

और यह अच्छी बात है कि दुनिया में ज्यादातर माँ बाप अपने बच्चों से ह्रदय की गहराइयों से स्नेह करते हैं। बच्चों से प्यार करने का तात्पर्य है, उन्हें उनकी आजादी का जन्मसिद्ध अधिकार देना, उन्हें उस समय प्रोत्साहन देना जब वह कोई अच्छा काम कर रहे हों और उन्हें इस बारे में निश्चिंत करना कि आप हमेशा उनसे प्यार करेंगे, फिर चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी क्यों न हों?

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Parenting Tips in Hindi for Children

4. Don’t Always Say Yes हमेशा हाँ न कहें

Hindi Parenting Tip 4: बच्चे की आवश्यक जरूरतों को पूरा करना प्रत्येक माता-पिता का कर्तव्य है, लेकिन उसकी हर इच्छा को पूरा करना एक अपराध है। जिसे अनजाने ही न जाने कितने माँ-बाप करते हैं और नतीजा यह होता है कि बड़ा होने तक वह जरुरत से ज्यादा लाड-प्यार पाने के कारण बिल्कुल बिगड़ जाता है। ऐसा मत कीजिये। अपने बच्चे की हर जायज-नाजायज माँग को तब तक कतई मत पूरा कीजिये, जब तक कि उसे उसकी अनिवार्य रूप से आवश्यकता न हो।

इसका तात्पर्य यह नहीं है कि बच्चे के मन में कभी-कभी बालसुलभ उठने वाली छोटी-छोटी इच्छाओं को भी न पूरा किया जाय, लेकिन इसकी एक सीमा निश्चित की जानी चाहिये। जॉन ग्रे ने इस बारे में क्या खूब कहा है – “बच्चे और ज्यादा देने से नहीं बिगड़ते हैं, बल्कि झगडे से बचने हेतु और ज्यादा देने से बिगड़ते हैं।”

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5. Monitor Their Activities Closely उन पर नजरें रखें

Hindi Parenting Tip 5: इन्सान का शारीरिक और मानसिक विकास बहुत धीमे-धीमे होता है और लगभग 25 वर्ष की आयु में कहीं जाकर वह पूरा होता है। बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से एक व्यस्क व्यक्ति की तुलना में कहीं ज्यादा अविकसित होते हैं। उन्हें आसानी से बहकाया जा सकता है और गलत कामों में धकेला जा सकता है। इसके अलावा उनकी जिज्ञासा की प्रवृत्तियाँ इतनी तेज और अस्थिर होती हैं कि वह कब सावधानी की सीमा का अतिक्रमण कर जाय, इस बारे में कोई भी इन्सान निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता।

इसलिये अपने बच्चों की गतिविधियों पर एक सतर्क और पैनी निगाह जरुर रखें। आज बच्चों द्वारा होने वाले खतरनाक अपराध या उन पर होने वाले अत्याचार से यह बात आसानी से समझ में आ जाती है कि उनके माता-पिता ने अवश्य ही इस सम्बन्ध में उपेक्षा की होगी। आज साइबर अपराध भी बच्चों के लिये एक बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं, विशेषकर इन्टरनेट, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफार्म, और चैट के कारण पैदा होने वाले खतरे।

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6. Don’t be Too Disciplinarian कठोर अनुशास्ता न बनें

Hindi Parenting Tip 6: अनुशासन एक अच्छी चीज है, लेकिन इसकी अति मत कीजिये। बच्चे पुष्प की तरह कोमल होते हैं। यह कोमलता सिर्फ उनके शरीर के कारण नहीं है, बल्कि उनकी निष्कपट और सरल भावनाओं तथा अत्यधिक संवेदनशील मन की है, जो बहुत ज्यादा कठोरता के कारण टूट कर बिखर सकते हैं। इसलिये उनसे प्रेमपूर्ण व्यवहार कीजिये और जब तक वह कोई बहुत बड़ी गलती न कर दे, तब तक कभी भी उससे कठोर बर्ताव मत कीजिये।

गलतियाँ होने पर भी पहले उन्हें प्रेमपूर्वक समझाइये, क्योंकि एक-दो और छोटी-छोटी गलतियाँ हमेशा क्षमा करने योग्य होती हैं। सिर्फ कुछ बेहद उद्दंड प्रकृति के बालकों को छोड़ दिया जाय, तो ज्यादातर बच्चे सही ढंग से और प्यार से समझाने पर तुरंत सही रास्ते पर आ जाते हैं।

बच्चों को मारना-पीटना और उन्हें कठोर दंड देना उन मासूमों पर एक घोर अत्याचार है और न ही दंड कभी उतना कारगर रहा है जितना कि प्रशंसा और इनाम। इसीलिये रॉबर्ट ओर्बेन कहते हैं – “कभी भी अपने बच्चों पर हाथ मत उठाइये; यह आपके आधे-अंश को असुरक्षित कर देता है।”

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Parenting Tips in Hindi for Kids

7. Teach Them To Be Grateful उन्हें कृतज्ञता सिखाइये

Hindi Parenting Tip 7: कृतज्ञता एक उच्च भावना है जो न सिर्फ दूसरों के ह्रदय को संतोष देती है, बल्कि किसी व्यक्ति के जीवन मूल्यों, प्रतिष्ठा और संस्कारों की भी परिचायक है। अपने बच्चों में बचपन से ही Thank You और Please जैसे शब्दों को कहने की आदत डालिये। उन्हें लोगों द्वारा दिए गये स्नेह और प्रशंसा की बड़ाई करना सिखाइये।

उन्हें सिखाइये कि कैसे उन्हें उन सभी अच्छी और बेशकीमती चीजों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिये जो जीवन में बहुत अहमियत रखती हैं। यदि वह Gratitude की Feeling को अपनाने से इंकार करें तो उन्हें बताइये कि जीवन में आखिर इसकी क्या महत्ता है और क्यों उन्हें इसे अपनाना ही चाहिये। Thankfulness की भावना आपके बच्चे के व्यक्तित्व को निखारने के लिये अनिवार्य है।

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8. Teach Them The Value of Things चीजों का महत्व बताइये

Hindi Parenting Tip 8: Thomas Alva Edison ने किसी चीज के दुरूपयोग को उस चीज के खोने से भी ज्यादा बुरा माना है। महान महात्मा गाँधी भी चीजों के दुरूपयोग को इन्सान के Character की एक बड़ी बुराई मानते थे। चीजों का दुरूपयोग करना इसलिये भी बुरा है, क्योंकि धरती पर कितने ही इन्सान उस चीज की कमी को अपने जीवन में शिद्दत से महसूस करते हैं जिसे एक इन्सान यूँ ही बर्बाद कर देता है।

उदाहरण के लिये – धरती पर रोजाना लाखों लोग भूखे पेट सोते हैं, वहीँ दूसरी तरफ शादी-ब्याह और दूसरे समारोहों में इतना भोजन, जीभ के चटोरेपन के पीछे बर्बाद हो जाता है जिससे इन लाखों लोगों के पेट की आग बुझाई जा सके। इसलिये अपने बच्चों को चीजों की कद्र करना सिखाइये। उन्हें बताइये कि कैसे वह वक्त, पैसे, अन्न, जल, और दूसरी जरुरी चीजों को अच्छे से इस्तेमाल में ला सकते हैं और इनकी बर्बादी से क्या हानि है?

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9. Have Some Happy Moments कुछ फुर्सत के पल निकालें

Hindi Parenting Tip 9: जिस तरह जीवन में जिम्मेदारी, समर्पण, अनुशासन और परिश्रम का महत्व है, उसी तरह जीवन में छोटी-छोटी खुशियों का भी बहुत महत्व है। अपने बच्चों के लिये नियमित रूप से इतना वक्त जरुर निकालिये जो आप उनके साथ हँसी-मजाक कर सकें, दो पल निकालकर उनके पास फुर्सत से बैठ सकें, उन्हें कहीं घुमाने ले जा सकें। इसके लिये यह जरुरी नहीं है कि किसी महँगी ट्रिप के लिये हजारों रूपये खर्च किये जांय।

बल्कि एक छोटे से पिकनिक से, जो आपके शहर में भी हो सकता है, से भी यह उद्देश्य पूरा हो सकता है। असली बात अपने परिवार के साथ प्रकृति की गोद में शांति से वक्त बिताना है। यह न केवल आपके मन को सुकून देंगी, बल्कि आपके बच्चों की संसार के प्रति समझ को भी विकसित करेंगी और यादें भी पूरे जीवन के लिये स्थायी हो जायेंगी।

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Ultimate Parenting Tips in Hindi

10. Care for Their Total Health उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखें

Hindi Parenting Tip 10: तंदुरुस्ती पहली दौलत है, दुनिया में किसी भी इन्सान के लिये उसके अपने शरीर या स्वास्थ्य से बढ़कर दूसरी कोई संपत्ति नहीं हो सकती, इसलिये अपने बच्चों के पूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान दीजिये। पूर्ण स्वास्थ्य का अर्थ है शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का पूर्ण साम्य होना। भौतिक शरीर का रोगमुक्त और बलवान होना ही स्वास्थ्य की निशानी नहीं है, बल्कि आपके बच्चे के मन और उसके आत्मा का स्वस्थ होना भी बहुत जरुरी है।

शारीरिक स्वास्थ्य के लिये उसे बेहतर और पौष्टिक भोजन दीजिये, न कि सिर्फ जीभ को संतुष्ट करने वाला आहार। मन के स्वास्थ्य का तात्पर्य है – मन का चिंता, क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष जैसी खतरनाक बुराइयों से मुक्त होना, क्योंकि शरीर में बीमारी लाने का सबसे पहला काम यह छिपे दुश्मन ही करते हैं। आत्मा के स्वस्थ होने का तात्पर्य है – समस्त इच्छाओं और वासनाओं से मुक्त होकर अपने स्वरुप में स्थित हो जाना, संसार से अनासक्त हो जाना।

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11. Talk About The Safety Measures सुरक्षा पर ध्यान दें

Hindi Parenting Tip 11: संसार जितना सुन्दर प्रतीत होता है यह उतना ही ज्यादा खतरनाक भी है। एक सीमा से बाहर जाते ही जीवनदायिनी चीज भी विष की भांति जीवन को संकट में डालने वाली हो जाती है। जैसे – मानव जीवन में बिजली की कितनी महत्ता है इसे बताने की जरुरत शायद ही किसी को पड़े, लेकिन यह कितनी खतरनाक है इसे भी हर कोई अच्छी तरह समझता है।

अपने बच्चों को ऐसी सभी चीजों का भी ज्ञान दीजिये जो उसके जीवन को संकट में डाल सकते हैं। उसे उन सभी नियमों का भी ज्ञान कराइए जिनका पालन करना एक सभ्य समाज में बहुत जरुरी है। इसके अलावा उसे यह भी बताइये कि दूसरों को किसी परेशानी में फंसे देखकर उसे क्या करना चाहिये।

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12. Practice Altruism Regularly परोपकारी बनें

Hindi Parenting Tip 12: परोपकार का हमारे जीवन और मानव समाज में क्या महत्व है, इसके बारे में बताने की शायद आवश्यकता न पड़े। क्योंकि यह परोपकार की भावना ही है जिसने इस संसार की सुन्दरता को बचाये रखा है। हम जब कभी परोपकार का कोई काम करते हैं, तो वह सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अपने सूक्ष्म स्वरुप से सर्वत्र फ़ैल जाता है।

जब आप किसी की मदद करें या कोई दान दें तो उस काम को अपने बच्चों के साथ मिलकर करें। इससे न सिर्फ उसकी उदारता की भावना बलवती होगी, बल्कि वह समाज के साथ अपने संबंधों को और अच्छी तरह से जान सकेगा। ध्यान रखें, इस काम को किसी एक दिन या छुट्टी में नहीं, बल्कि नियमित रूप से करें, ताकि वह इसका अभ्यस्त हो जाय।

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13. Choose A Good Company अच्छी संगति में रहें

Hindi Parenting Tip 13: बच्चे अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं, वह उसे बड़ों से ही सीखते हैं। इसलिये अपने दोस्तों, मित्रों, साथियों और सम्बन्धियों का चुनाव करते समय सतर्कता बरतिये। आप जैसे लोगों की संगति में रहेंगे, उसका प्रभाव आपके बच्चों पर अनिवार्य रूप से पड़ेगा, क्योंकि वह आपको और उन्हें जैसा करते देखेंगे, खुद भी उसी तरह करेंगे।

जैसे आप बोलेंगे वैसे ही शब्दों का चुनाव वह भी करेंगे। अगर आपके यार-दोस्तों में कोई बुराई है, तो किसी दिन आपके बच्चों में उनकी संगति से वह बुराई पनप सकती है। और आपकी अपने बच्चों को बेहतर बनाने की सारी मेहनत पर पानी फिर सकता है, इसीलिये अच्छे लोगों की ही संगति में रहिये।

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14. Talk to Senior Members of Family बड़ों से बात करें

Hindi Parenting Tip 14: वैसे तो आजकल एकल परिवार जिनमे बस माँ-बाप और बच्चे होते हैं, ही ज्यादा देखने को मिलते हैं। लेकिन अगर आप किसी बड़ी Joint Family का हिस्सा हैं, तो अपने बच्चों की परवरिश पर आपको थोडा और ध्यान देने की जरुरत हैं। क्योंकि ऐसे परिवारों में बुजुर्ग और प्रौढ़ आयु के लोग अवश्य होते हैं, जैसे कि दादा-दादी, नाना-नानी या फिर दूसरे कोई और। ज्यादातर यही देखा गया है कि जिस परिवार में बुजुर्ग होते हैं, वहाँ अक्सर बच्चे कुछ ज्यादा ही बिगड़ते हैं।

क्योंकि उन्हें अच्छी तरह से पता होता है कि अगर हम कोई गलती करें और माता-पिता डाटें, तो दादा-दादी या नाना-नानी उन्हें जरुर बचा लेंगे। ऐसे में माता-पिता के लिये यह आवश्यक हो जाता है कि वह बुजुर्गों को विश्वास में लेकर पहले ही उन्हें सारी बातें सच-सच बता दें कि अपनी संतान से उन्हें क्या अपेक्षाएं हैं, और उन्हें बच्चों से किस तरह व्यवहार करना है?

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15. Create Supportive & Loving Atmosphere वातावरण बदलें

Hindi Parenting Tip 15: अब तक हम आपको 14 पेरेंटिंग टिप्स के बारे में बता चुके हैं, यह सभी टिप्स बहुत प्रभावी हैं, पर इनका अच्छी तरह से अभ्यास करने के लिये एक Supportive और Loving Atmosphere का होना बहुत जरुरी है। इस प्रकार का वातावरण बनाये बिना आप अपने बच्चे की अच्छी परवरिश के मुश्किल लक्ष्य में ज्यादा सफल नहीं हो सकेंगे।

प्रेम और सहयोगयुक्त पारिवारिक वातावरण का निर्माण करना कोई बहुत ज्यादा मुश्किल काम नहीं है, लेकिन इसके लिये माँ-बाप के साथ-साथ परिवार के दूसरे लोगों का साथ मिलना भी बहुत जरुरी है। एक ऐसा स्थान जहाँ बच्चे की भौतिक आवश्यकताओं के साथ-साथ भावनात्मक खालीपन की भी पूर्ति हो सके, निश्चित रूप से स्वर्ग से कम सुखकर स्थान नहीं है।

यदि इन 15 बातों को गहराई से अमल में लाया जा सके, अपने बच्चों में श्रेष्ठ संस्कार बचपन से ही रोपें जा सकें, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि आप उनकी उसी तरह से परवरिश करने में सक्षम होंगे जिससे वे बड़े होकर एक सच्चे इन्सान बन सकें और एक बेहतर समाज की रचना करने में समर्थ हों।

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“सार्थक और प्रभावी उपदेश वह है, जो वाणी से नहीं अपने आचरण से प्रस्तुत किया जाता है।”
– पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

 

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