Zodiac Signs Meaning in Hindi and English

 

“ज्योतिष की 12 राशियाँ धरती के हर इन्सान के मन के रहस्यों को खोले वाली चाबी हैं। प्रकृति के चार मूल तत्वों का प्रतीक यह Zodiac Sign, हमें हमारे व्यक्तित्व तथा वर्तमान व भविष्य के जीवन के अनेक अनसुलझे सवालों का जवाब ढूँढने में मदद करती हैं।”

 

Zodiac Signs Meaning in Hindi and English
ज्योतिष से जानिये अपने जीवन और व्यक्तित्व के गुप्त रहस्य

Zodiac Sign in Hindi जानिये क्या कहती है आपकी राशि

ज्योतिष विज्ञान अनेकों अविश्वसनीय और महान रहस्यों को आत्मसात किये हुए है और उनमे से एक है – जन्म कुंडली के आधार पर मनुष्य के व्यक्तित्व और गुण-स्वभाव की विवेचना करना। किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली का संपूर्ण विश्लेषण तो मात्र एक पारंगत ज्योतिष मर्मज्ञ ही कर सकता है। लेकिन केवल जन्मराशि (Zodiac Sign) के आधार पर अपने और दूसरों के व्यक्तित्व की कई विशेषताएँ जान लेना प्रत्येक व्यक्ति के लिये संभव है।

जिसके लिए इस विद्या में विशेषज्ञ होने की कोई आवश्यकता नहीं है। बस जरुरत है तो एक सच्ची जिज्ञासा और एकाग्रता की, जिसका इस्तेमाल आपको Zodiac Sign Meaning in Hindi को पढने में करना होगा और तब आप जो जानेंगे, उससे खुद भी आश्चर्यचकित हुए बिना न रहेंगे। अगर आप ज्योतिष जैसी महान विद्या को सीखने के इच्छुक हैं, तो 12 राशियों की विशेषताओं की जानकारी हासिल करना एक अच्छी शुरुआत होगी।

इन Zodiac Signs (राशियों) के चरित्र, स्वभाव, लाभ और चुनौतियों की जानकारी आपके लिये ज्योतिष विज्ञान को समझना बहुत सरल बना देगी, तो आइये 12 राशियों की जानकारी प्राप्त करके अपनी और दूसरों की पर्सनालिटी को समझने की दिशा में एक कदम और बढाइये –

विशेष – इस लेख को अंत तक ध्यान से पढ़ें। अगर आप यहाँ दी गयी बातों को आत्मसात कर पायें, तो जन्मराशि के आधार पर अपने और दूसरों के जीवन और व्यक्तित्व की कई बातें बहुत आसानी से समझ सकेंगे। यह जानकारी आपके लिये इतनी बेशकीमती सिद्ध होगी कि आप खुद को खुशकिस्मत समझेंगे। इसीलिये पढ़ते समय थोडा धैर्य और एकाग्रता जरुर रखें। एक ही बार में उपरी नजर से पढने की कोशिश न करें।

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Zodiac Sign Meaning in Hindi

History of Zodiac जोडिएक शब्द का इतिहास

Zodiac शब्द प्राचीन यूनानी शब्द जोईडिआकोस क्य्क्लोस ‘Zoidiakos Kyklos’ से आया है, जिसका अर्थ है छोटे जानवरों का चक्र ‘The Circle of Little Animals’। यह 12 चिन्हों के उस पहिये या व्हील को प्रदर्शित करता है जो आकाशीय पिंडों से भरा हुआ है। Zodiac Sign का हिंदी में Meaning है राशि चिन्ह, जन्म राशि या राशि का प्रतीक। ज्योतिष में सूर्य को आधार मानकर, रविमार्ग (सूर्य के मार्ग) को 12 भागों में विभक्त करने से राशिचक्र का निर्माण हुआ है।

जबकि चंद्रमा को आधार मानकर रविमार्ग को 27 भागों में बाँटने से नक्षत्रचक्र स्थापित हुआ है। Zodiac Signs, भचक्र (Zodiacal Circle) के 12 बराबर भागों के विभाजन को प्रदर्शित करते हैं और इसका आरम्भ वसंत संपात बिंदु (वह स्थान जहाँ सूर्य वसंत ऋतु के आरम्भ में स्थित होता है) से होता है। आज मेष संक्रांति को ही वसंत संपात का वर्तमान बिंदु माना जाता है।

इसका तात्पर्य है कि कोई भी राशि किसी भी नक्षत्र से तय नहीं होती, बल्कि साल भर के मौसमों पर आधारित परिशुद्ध ज्यामितीय एप्रोच से परिभाषित की जाती है। भचक्र का अर्थ है – “संपूर्ण रविमार्ग जिसकी सीमा में रहकर समस्त गृह, सौरमंडल के स्वामी सूर्य के चारों ओर चक्कर काटते हैं।” चूँकि यह पथ वृत्ताकार है और किसी भी प्रकार के वृत्त का मान हमेशा 360 डिग्री ही होता है, इसलिये भचक्र का मान भी 360 डिग्री होता है।

ज्योतिष में इसे 12 बराबर भागो में बाँट दिया गया, इस तरह 30 डिग्री का एक भाग हुआ और हर भाग एक राशि का प्रतिनिधित्व करता है। हर राशि का मान एक वृत्त के पूरे 30 डिग्री के बराबर होता है और यह एक मौसम के आदि, मध्य और अंत को प्रदर्शित करती है। सूर्य प्रत्येक मास एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, जिनके नाम, उनका स्वामी गृह और उनकी अंक संख्या नीचे एक टेबल में दी जा रही है।

Moon & Zodiac Sign जन्मराशि का आधार है चंद्रमा

हमारी जन्मराशि का आधार चंद्रमा है। व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में स्थित होगा, वही उसकी जन्मराशि होगी। इसी तरह जातक के जन्म नक्षत्र का अर्थ है कि उसके जन्म के समय चंद्रमा आकाश के किस भाग में था। प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण या भाग होते हैं और हर चरण का एक अक्षर और वर्ण होता है। इस तरह प्रत्येक नक्षत्र के अंतर्गत चार वर्ण या अक्षर आते हैं। एक राशि में सवा दो नक्षत्र होते हैं।

यानि एक राशि में नक्षत्रों के नौ चरण होते हैं। इसीलिये एक राशि के अंतर्गत 9 वर्ण या अक्षर आते हैं। राशि के नामों और अक्षरों का वर्णन हमने दूसरे लेख में किया है। चूँकि सभी 27 नक्षत्रों की प्रकृति भिन्न है और उनके स्वामी भी अलग-अलग हैं, इस आधार पर एक ही राशि में अलग-अलग नक्षत्रों में जन्म लेने वाले जातकों का स्वभाव भी अलग ही होगा।

लेकिन यदि सूक्ष्म फलकथन की आवश्यकता न हो, तो केवल राशियों के आधार पर ही किसी भी इन्सान के व्यक्तित्व का विस्तृत और एक हद तक सटीक विश्लेषण किया जा सकता है। अब आप इन 12 राशियों को उनके अंकों और अधिपति गृह सहित अपने मस्तिष्क में बैठा लीजिये। इससे आपको जल्दी समझने में आसानी रहेगी। अगले लेख से हम प्रत्येक राशि का अलग से संपूर्ण वर्णन करेंगे।

जिसमे उस राशि के स्त्री और पुरुष दोनों जातकों के स्वभाव, और व्यक्तित्व का विश्लेषण किया जायेगा। प्रत्येक राशि की प्रकृति कई अन्य छोटे-छोटे घटकों पर निर्भर करती है, जिन्हें एक सारणी के माध्यम से नीचे प्रदर्शित किया गया है। इसीलिये किसी निश्चय पर पहुँचते समय उन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता होती है। हम यह आशा करते हैं कि जीवनसूत्र के विद्वान् पाठक ऐसा करने में निश्चय ही सक्षम होंगे।

अपनी जन्म राशि को जानने का एक सरल तरीका इस लेख में दिया गया है इसे ध्यान से पढ़ें – Meri Rashi Kya Hai in Hindi मेरी राशि क्या है

 

Zodiac Sign in Hindi: Important Points

राशियों के संबंध में ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें

प्रत्येक राशि अपने तथा दूसरे लोगों के सन्दर्भ में एक विशेष प्रकार के दृष्टिकोण, चरित्र, इच्छाओं के समूह और धारणाओं को प्रदर्शित करती है। नीचे दी जा रही सारणी में हमने राशियों के चरित्र, गुण, और स्वभाव से संबंधित विशेषताएँ दी हैं। अगर आप Zodiacal Sign से अपने जीवन और व्यक्तित्व के बारे में सटीक रूप से जानना चाहते हैं, तो इन बातों को ध्यान में रखना अनिवार्य है। इन्हें हमने नीचे अच्छी तरह से समझाने का प्रयास किया है।

क्रम राशि स्वामी अंग-स्थान जाति लिंग रंग/वर्ण स्वभाव प्रकृति तत्व दिशा बल रत्न त्रिदोष
1 मेष मंगल मस्तिष्क क्षत्रिय पुरुष लाल चर उग्र/
तीक्ष्ण
अग्नि पूर्व दिनबली मूँगा पित्त
2 वृष शुक्र मुख वैश्य स्त्री सफ़ेद स्थिर सौम्य पृथ्वी दक्षिण रात्रिबली हीरा/
ओपल
सम
3 मिथुन बुध ग्रीवा/कंधे शूद्र पुरुष हरा द्विस्वभाव तीक्ष्ण वायु उत्तर दिनबली पन्ना वात
4 कर्क चन्द्र स्तन/फेफड़े ब्राहाण स्त्री रक्त्धवल चर सौम्य जल पश्चिम रात्रिबली मोती कफ
5 सिंह सूर्य ह्रदय/
उपरी पेट
क्षत्रिय पुरुष धूम्र/पीत स्थिर तीक्ष्ण अग्नि पूर्व दिनबली माणिक्य पित्त
6 कन्या बुध निम्न पेट/
कमर
वैश्य स्त्री पिंगल द्विस्वभाव सौम्य पृथ्वी दक्षिण रात्रिबली पन्ना सम
7 तुला शुक्र आंतरिक
जननांग
शूद्र पुरुष काला/
नीला
चर तीक्ष्ण वायु उत्तर दिनबली हीरा/
ओपल
वात
8 वृश्चिक मंगल लिंग/योनी ब्राहाण स्त्री शुभ्र/
श्वेत
स्थिर सौम्य जल पश्चिम रात्रिबली मूँगा कफ
9 धनु गुरु कूल्हे/जंघा क्षत्रिय पुरुष कंचन/
सुनहरा
द्विस्वभाव तीक्ष्ण अग्नि पूर्व दिनबली पुखराज पित्त
10 मकर शनि घुटने वैश्य स्त्री पीला/
पिंगल
चर सौम्य पृथ्वी दक्षिण रात्रिबली नीलम सम
11 कुम्भ शनि पिंडलियाँ शूद्र पुरुष विचित्र/
चितकबरा
स्थिर तीक्ष्ण वायु उत्तर दिनबली नीलम वात
12 मीन गुरु पैर ब्राहाण स्त्री सफ़ेद/
पिंगल
द्विस्वभाव सौम्य जल पश्चिम रात्रिबली पुखराज कफ

1. क्रम – का अर्थ है उस राशि का क्रमांक, जैसे 6 अंक कन्या राशि को प्रदर्शित करता है, चाहे यह जन्म कुंडली में कहीं पर भी लिखा हो।

2. स्वामी – का अर्थ है उस राशि का स्वामी ग्रह, जैसे क्रमांक 5 की राशि यानि सिंह राशि का स्वामी सूर्य है।

3. अंग-स्थान – का अर्थ है राशि का इन्सान के शरीर में किस जगह वास है, जैसे मेष राशि का वास व्यक्ति के मस्तिष्क में है तो मीन का पैरों में।

4. जाति – का तात्पर्य है कि राशि के कैसे गुणधर्म है, जैसे ब्राहमण जाति का अर्थ है, वह राशि सौम्य, और उच्चतर गुणों से संपन्न है। राशियों की चार जातियाँ हैं –

ब्राह्मण राशियाँ – कर्क, वृश्चिक, मीन (4, 8, 12)
क्षत्रिय राशियाँ – मेष, सिंह, धनु (1, 5, 9)
वैश्य राशियाँ – वृष, कन्या, मकर (2, 6, 10)
शूद्र राशियाँ – मिथुन, तुला, कुम्भ (3, 7, 11)

5. लिंग – का तात्पर्य है कि राशि का लिंग कैसा है, जैसे धनु राशि का स्वभाव पुरुष के जैसा और मीन का स्त्री के जैसा होता है। विषम संख्या जैसे 1, 3, 5, 7… पुरुष राशि का प्रतीक है और सम संख्या जैसे 2, 4, 6, 8… स्त्री राशि का प्रतीक है।

6. रंग या वर्ण – का तात्पर्य है कि किसी राशि का रंग कैसा है, जैसे कन्या का पिंगल या पीला रंग (हरे रंग की आभा के साथ) है।

7. स्वभाव – का तात्पर्य है कि किस राशि का स्वभाव कैसा है, जैसे कर्क का स्वभाव चर अर्थात चंचल, सिंह का स्थिर और कन्या का द्विस्वभाव (दोहरा व्यक्तित्व) होता है।

चर राशियाँ – मेष, कर्क, तुला, मकर
स्थिर राशियाँ – वृष, सिंह, वृश्चिक, कुम्भ
द्विस्वभाव राशियाँ – मिथुन, कन्या, धनु, मीन

8. प्रकृति – का अर्थ है कि राशि व्यवहार करते समय कैसे बर्ताव करती है, जैसे सभी स्त्री लिंग की राशियाँ सौम्य और पुरुष लिंग की राशियाँ उग्र होती हैं।

9. तत्व – प्रकृति में चार मूल तत्व हैं – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु सभी 12 राशियाँ किसी न किसी तत्व का प्रतीक हैं, जैसे –

वायु राशियाँ – मिथुन, तुला, कुम्भ (3, 7, 11)
जल राशियाँ – कर्क, वृश्चिक, मीन (4, 8, 12)
अग्नि राशियाँ – मेष, सिंह, धनु (1, 5, 9)
पृथ्वी राशियाँ – वृषभ, कन्या, मकर (2, 6, 10)

10. दिशा – प्रत्येक राशि की अपनी एक निश्चित दिशा है, जिधर उसका वास माना जाता है, जैसे –

पूर्व राशियाँ – मेष, सिंह, धनु (1, 5, 9)
पश्चिम राशियाँ – कर्क, वृश्चिक, मीन (4, 8, 12)
उत्तर राशियाँ – मिथुन, तुला, कुम्भ (3, 7, 11)
दक्षिण राशियाँ – वृष, कन्या, मकर (2, 6, 10)

11. बल – प्रत्येक राशि दिन के एक विशेष समय बलि रहती है, जैसे दिनबली दिन के समय और रात्रिबली रात के समय ताकतवर रहती है।

दिनबली राशियाँ – सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन (5, 6, 7, 8, 11, 12)
रात्रिबली राशियाँ – मेष, वृष, मिथुन, कर्क, धनु, मकर (1, 2, 3, 4, 9, 10)

12. रत्न – प्रत्येक राशि का अपना एक विशिष्ट रत्न भी होता है जिनके बारे में सारणी में दिया गया है। रत्नों के बारे में विस्तार से जानने के लिये यह लेख पढ़ें –

ध्यान दीजिये, भारतीय ज्योतिष में 12 राशियाँ हैं और नौ ग्रह माने गये हैं। लेकिन इन 12 राशियों पर स्वामित्व सिर्फ सात ही ग्रहों को दिया गया है, सभी को नहीं। सूर्य व चन्द्रमा को सिर्फ एक-एक राशि का स्वामित्व दिया गया है, जबकि शेष सभी ग्रहों को दो-दो राशियों का मालिकाना हक दिया गया है। राहू-केतु को छाया ग्रह होने के कारण किसी भी राशि पर अधिकार नही दिया गया है।

 

Elements of Zodiac Signs in Hindi

इससे पहले कि हम सभी 12 राशियों का वर्णन करें, हम आपको उन चारों तत्वों के बारे में कुछ आवश्यक बातें बताना चाहेंगे जिनका राशियों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। क्योंकि राशियों में इन तत्वों (वायु, जल, पृथ्वी और अग्नि) की न्यूनता और अधिकता के कारण ही, इनका स्वभाव और गुणधर्म पूरी तरह से बदल जाता है।

Zodiac of The Element of Air वायु तत्व की राशियाँ

वैसे तो तत्व पाँच हैं, लेकिन आकाश तत्व अर्थात ईथर बाकी चारों तत्वों का आधार है और यह इनमें अदृश्य रूप से समाहित रहता है, इसीलिये इसे अलग रखा गया है। वायु तत्व धरती पर हर जगह व्यापत है। एक तरह से वायु को रहस्यमय तत्व कहा जा सकता है, क्योंकि न तो इसे देखा जा सकता है और न ही छुआ जा सकता है। लेकिन चाहे जो कुछ भी हो हमारा जीवन इसी पर निर्भर है और यह धरती पर रहने वाले हर जीवधारी के अस्तित्व के लिये अनिवार्य है।

जिस तरह वायु की गति तेज और पूर्वानुमान के दायरे से बाहर होती है, उसी तरह वायु तत्व की राशियाँ भी स्वतंत्र, तेज, मुक्त और आश्चर्य चकित करने वाले गुणों से परिपूर्ण होती हैं। वह लोग जिनका चंद्रमा वायु तत्व की राशियों में होता है, सामाजिक, वाकपटु (बोलने-चालने के कौशल में माहिर) और अपनी मानसिक प्रक्रियाओं पर केन्द्रित रहने वाले होते हैं।

उनकी तेजी उन्हें भावुकता की गहराइयों में जाने से दूर रखती है और अक्सर उन्हें अनासक्त और वास्तविकता से दूर ले जाती है जैसे कि सांसारिक संबंध उनकी पहुँच से बहुत दूर हों। वायु राशियों के जातकों को हम विचारक कह सकते हैं, क्योंकि वे मानसिक शक्तियों पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित रखते हैं।

वे पढने के साथ-साथ नयी और रुचिकर चीजों की जानकारी इकठ्ठा करना पसंद करते हैं। इसके अलावा इन्हें लोगों से मेल-जोल करना भी बहुत प्रिय है, लेकिन दूरी तरफ यह कुछ जल्दबाज और आडम्बरप्रिय होते हैं और अक्सर निर्णय लेने में जल्दबाजी दिखाते हैं। मिथुन, तुला और कुम्भ वायु तत्व की राशियाँ हैं।

Zodiac of The Element of Fire अग्नि तत्व की राशियाँ

आग को साधारणतया इसकी ज्वलनशील प्रकृति के कारण एक खतरनाक तत्व माना जाता है। दुनियाभर में आग के कारण होने वाली खरबों रूपये की तबाही से अग्नि तत्व के विनाशक रूप का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन यह तत्व जितना खतरनाक है, उतना ही लाभदायक भी है, क्योंकि अगर अग्नि तत्व न हो तो इस धरती पर शायद ही किसी प्राणी का जीवन संभव हो पाये। धरती पर ज्यादातर जीवधारी गर्म रक्त वाले प्राणी है।

अगर अग्नि तत्व न रहे तो इन सबका जीवन कतई संभव नहीं, यहाँ तक कि हमारा भी। अग्नि न सिर्फ हमें उष्णता देती है, बल्कि सूर्य के रूप में सबको जीवन प्रदान करने वाली भी है। वायु तत्व की तरह अग्नि की गति और तेजी का भी पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। जिन लोगों का चंद्रमा अग्नि तत्व की राशि में होता है, वे न सिर्फ आक्रामक स्वभाव वाले होते हैं, बल्कि अपने मन को भी वह अपनी उग्र भावनाओं से युक्त कर लेते हैं।

यह लोग अपनी बढ़ी हुई उर्जा को इस संसार में सौंदर्य, आनंद और प्रेम बढ़ाने के लिये इस्तेमाल कर सकते हैं। यह जोशीले, कर्मठ और संघर्षशील होते हैं। यह अक्सर अपनी संवेदनशीलता से अनभिज्ञ होते हैं और अगर इन्हें चोट पहुंचायी जाय तो यह एकदम से क्रोध में आ जाते हैं। लेकिन जितनी तेजी से इन्हें गुस्सा आता है, उतनी ही तेजी से यह भूल भी जाते हैं और लोगों को माफ कर देते हैं।

यह लोग कभी भी बहुत लम्बे समय के लिये मन में मैल नहीं रखते। आग्नेय राशियों के जातक रोमांच को पसंद करने वाले और बेहद उर्जावान होते हैं। अपने हर काम को यह बड़े जोश के साथ शुरू करते हैं और हमेशा चौकस रहते हैं। मेष, सिंह और धनु अग्नि तत्व की राशियाँ हैं।

Zodiac of The Element of Water जल तत्व की राशियाँ

वायु और अग्नि तत्वों की तुलना में जल तत्व कुछ स्थूल होता है, पर फिर भी यह अपने आप में बहुत सारे रहस्य समेटे हुए है। इसकी गतियाँ वायु और अग्नि की तुलना में धीमी होती है, लेकिन इसकी गहराई को पूरी तरह से समझ पाना, एकबारगी उच्चतर मानवीय बुद्धि के लिये भी संभव नहीं है। जिन लोगों का चंद्रमा जल तत्व की राशियों में होता है, वह संवेदनशील, दयालु, उदार, शांतिप्रिय, प्रकृति से प्रेम करने वाले और निष्पक्ष होते हैं।

जल शांति, निश्चलता, शुद्धता, सजीवता और शीतलता का प्रतीक है। ये अपने आस-पास के लोगों के भावों और जरूरतों को आसानी से समझ लेते हैं। जब कोई इन्हें चोट पहुँचाता है, तो अग्नि तत्व की राशियों के जातकों की तरह यह अत्यंत उग्र रवैया प्रदर्शित नहीं करते, बल्कि उदासीन होकर खुद तक सिमट जाते हैं और अपने दिल की खिडकियों को चोट पहुँचाने वालों के लिये बंद कर लेते हैं।

इनका यह व्यवहार एकबारगी उन आक्रामक लोगों को भी चकित कर देता है। जल तत्व की राशियों के जातक, दूसरों को समझने वाले, मददगार और मासूम होते हैं। ये अपने संबंधों में सच्ची घनिष्ठता और समर्पण दिखाते हैं। यह लोग बहुत भावुक और कल्पनाजीवी होते हैं। अगर यह अपनी भावुकता और कल्पना को एक सही दिशा दे सकें, तो यह जीवन में बहुत आगे बढ़ सकते हैं। कर्क, वृश्चिक और मीन जल तत्व की राशियाँ हैं।

Zodiac of The Element of Earth पृथ्वी तत्व की राशियाँ

पृथ्वी तत्व बाकी तीनों तत्वों की तुलना में ज्यादा स्थूल है। आप इसे देख सकते हैं, छू सकते हैं, महसूस कर सकते हैं, यहाँ तक कि सूँघ भी सकते हैं। यह तत्व जल्दी से अपना स्वरुप नहीं बदलता। यह विशेष तत्व सदियों तक अपरिवर्तित रूप में रह सकता है। पृथ्वी तत्व की राशियों के जातक दुनियादार, चतुर और परिपक्व होते हैं। एक तरह से यह Down to Earth Personality वाले लोग होते हैं जो वास्तविकता में जीना पसंद करते हैं।

पृथ्वी तत्व से युक्त सभी राशियाँ व्यवहारिक और सांसारिक चीजों को महत्व देने वाली होती हैं। इस तत्व की राशियों के जातकों को कोरे शब्दों या खोखले वादों से नहीं बहलाया जा सकता, वह चीजों को मूर्त और वास्तविक रूप में देखना चाहते हैं। यदि आप किसी काम को सच में होते हुए देखना चाहते हैं, तो पृथ्वी तत्व के जातकों का साथ होना अच्छी बात है।

अगर यह उन्नति की ओर से नजरें हटा लेते हैं तो संकोची हो सकते हैं या फिर ज्यादा वक्त बीतने से कुछ भयभीत भी हो सकते हैं। ये विश्वसनीय लोग होते हैं जो आपको कभी भी निराश नहीं होने देंगे। अगर आप किसी योजना को क्रियान्वित होते हुए देखना चाहते हैं और इसके परिणाम के बारे में निश्चिंत होना कहते हैं, तो पृथ्वी तत्व के जातक सबसे बेहतर हैं। वृषभ, कन्या और मकर पृथ्वी तत्व की राशियाँ हैं।

 

Name of The 12 Zodiac Signs in Hindi

अब हम क्रमवार 12 राशियों का संक्षिप्त वर्णन कर रहे हैं। इनके बारे में विस्तार से जानने के लिये इन राशियों के दिए लिंक पर क्लिक करें –

1. Aries Zodiac Sign मेष राशि

मेष राशि भचक्र का प्रथम खंड है। अतः इसे अंक 1 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 1 से 30 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 1 अंक लिखा होगा, वह मेष राशि का परिचायक होगा। अगर इस स्थान पर चंद्रमा है, तो आपकी राशि मेष होगी। इस राशि का अधिपति गृह मंगल है। मेष राशि अग्नि तत्व का सबसे शुद्ध और प्रबलतम स्वरूप है, इसीलिये मेष जातक बेहद आक्रामक, गुस्सैल, जोशीले और उर्जा से भरे होते हैं।

इन्हें रुकना पसंद नहीं है, पर फिर भी यह हमेशा बहुत सतर्क रहते हैं। कभी-कभी ये कुछ सवालों का जवाब ढूँढने के लिये अपने अतीत में झांकते हैं और अपने अनुभवों से सीखते हैं। हर समय जोश से लबरेज रहने वाले मेष जातक एक बच्चे की तरह से सरल और स्पष्ट होते हैं। मेष जातक एकReal Leader होते हैं और यह पलक झपकते ही आपके अन्दर के जोश को जगा सकते हैं।

जब मेष जातक क्रियाशील और समर्पित रहते हुए अपनी उर्जा को अपने लक्ष्यों पर केन्द्रित कर देते हैं, तो यह अग्नि तत्व का सबसे परिशुद्ध और नियंत्रित स्वरुप प्रदर्शित करते हैं। लेकिन अपने अनियंत्रित रूप में यह अग्नि तत्व की तीनों राशियों में सबसे ज्यादा उग्र और खतरनाक सिद्ध होते हैं। मेष राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये Aries Zodiac in Hindi मेष राशिफल यह लेख पढ़ें।

2. Taurus Zodiac Sign वृषभ राशि

वृष राशि भचक्र का दूसरा खंड है। अतः इसे अंक 2 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 30 से 60 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 2 अंक लिखा होगा, वह वृष राशि का संकेत करेगा। इस राशि का स्वामी गृह शुक्र है। पृथ्वी तत्व की जितनी भी राशियाँ हैं, उनमे वृषभराशि सबसे स्थायी है। क्योंकि स्थिरता इसका गुण है और इसमें पृथ्वी तत्व की सबसे अधिक मात्रा है। वृषभ राशि के जातक धैर्यवान, हठी, मनमौजी, सीधे-सादे, और अपनी धुन में मस्त रहने वाले होते हैं।

यह बुद्धिमान और भरोसेमंद लोग होते हैं। इन्हें जल्दी गुस्सा नहीं आता, लेकिन जब आता है तो यह बिल्कुल Out of Control हो जाते हैं। ये लोग बिल्कुल जल्दबाज नहीं होते और पूरी तरह संसारी होते हैं। ये लोग भावुक और अड़ियल होते हैं, पर जीवनसाथी के प्रति वफादार होते हैं। वृषभ राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये Taurus Zodiac in Hindi वृषभ राशिफल यह लेख पढ़ें।

3. Gemini Zodiac Sign मिथुन राशि

मिथुन राशि भचक्र का तीसरा खंड है। अतः इसे अंक 3 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 60 से 90 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 3 अंक लिखा होगा, वह मिथुन राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह बुध है। सभी राशियों में मिथुन राशि ही सबसे ज्यादा अस्थिर है, क्योंकि इसमें वायु तत्व सबसे ज्यादा है। इसीलिये मिथुन राशि के जातक अस्थिर स्वभाव के, चंचल और परिवर्तन पसंद होते हैं।

ये हमेशा किसी नयी और रोमांचकारी चीज की कोशिश में रहते हैं, पर जिस चीज को चाहते हैं, उसे कैसे पाया जाय, इस बारे में इन्हें कोई खास अनुभव और जानकारी नहीं होती। इनका पूरा जीवन किसी ऐसी चीज के पीछे लगे रहने में बीत जाता है जो इन्हें पूर्ण बनायें और इन्हें वह शांति दे सके जिसकी इन्हें हमेशा से चाह रही है। वैसे यह बुद्धिमान और ज्ञानवान होते हैं। मिथुन राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये Gemini Zodiac in Hindi मिथुन राशिफलयह लेख पढ़ें।

4. Cancer Zodiac Sign कर्क राशि

कर्क राशि भचक्र का चौथा खंड है। अतः इसे अंक 4 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 90 से 120 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 4 अंक लिखा होगा, वह कर्क राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह चन्द्रमा है। जल तत्व की अधिकता रहने के कारण, कर्क जातक दयालु और दूसरों का ध्यान रखने वाले होते हैं। ये बेहद भावुक और संवेदनशील होते हैं। इनके जीवन के ज्यादातर फैसले दिमाग से नहीं दिल से होते हैं, पर ये लगन के पक्के होते हैं।

यह लोग चांदनी रात, तालाब और जल की निकटता से विशेष प्रकार की खुशी महसूस करते हैं। अगर इन्हें चोट पहुंचायी जाय तो यह अपने दिल के दरवाजे बंद कर लेते हैं और जिनसे प्यार करते हैं उनके लिये और ज्यादा चिंतित हो जाते हैं। ये अपने घर-परिवार के प्रति इतने समर्पित रहते हैं कि अपने आस-पास रहने वाले खतरे का भी इन्हें अहसास नहीं होता। कर्क राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये Cancer Zodiac in Hindi कर्क राशिफल यह लेख पढ़ें।

5. Leo Zodiac Sign सिंह राशि

सिंह राशि भचक्र का पाँचवा खंड है। अतः इसे अंक 5 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 120 से 150 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 5 अंक लिखा होगा, वह सिंह राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह सूर्य है। अग्नि तत्व की प्रधानता के मामले में सिंह राशि मेष राशि के बाद दूसरे स्थान पर है। सिंह राशि के जातक अपने आस-पास रहने वाले हर इन्सान का ध्यान अपनी तरफ खींचना चाहते हैं। ये बड़े गर्वीले और अहंकारी होते हैं।

स्थिर स्वभाव होने के कारण इन्हें बदलाव ज्यादा पसंद नहीं होता। यह आत्मविश्वासी और हिम्मती होते हैं, लेकिन दिखावापसंद भी होते हैं। इनकी नजर में धन-दौलत और सांसारिक सुख-भोग ही ज्यादा जरुरी चीजें हैं, धर्म-कर्म में इनकी ज्यादा रूचि नहीं होती। इन्हें गुस्सा भी जल्दी ही आ जाता है और किसी को अपनी तकलीफ बताना पसंद नहीं करते। सिंह राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये Leo Rashifal in Hindi लियो राशिफल यह लेख पढ़ें।

6. Virgo Zodiac Sign कन्या राशि

कन्या राशि भचक्र का छठा खंड है। अतः इसे अंक 6 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 150 से 180 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 6 अंक लिखा होगा, वह कन्या राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह बुध है। कन्या भी एक पृथ्वी तत्व युक्त राशि है, लेकिन वृषभ की तरह अड़ियल होने के बजाय यह बेहद व्यवहारिक और सुलझे हुए इन्सान होते हैं।

अपनी जिंदगी में यह कहीं किसी घाटे में न रह जाएं, इसका इन्हें हमेशा ख्याल बना रहता है। ये एक Flexible Attitude वाले लोग होते हैं और लड़ाई-झगड़ों से कोसों दूर रहते हैं। इनमे भावुकता और समझदारी दोनों एक साथ होती है। ये भीड़ से दूर रहने वाले और संकोची होते हैं, लेकिन भरोसेमंद और दूसरों का ध्यान रखने वाले भी होते हैं। कन्या राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये Virgo Zodiac in Hindi कन्या राशिफल यह लेख पढ़ें।

7. Libra Zodiac Sign तुला राशि

तुला राशि भचक्र का सातवाँ खंड है। अतः इसे अंक 7 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 180 से 210 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 7 अंक लिखा होगा, वह तुला राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह शुक्र है। तुला राशि के जातक सूक्ष्म विश्लेषण करने वाले और Innovative Nature के होते हैं। यह विनम्र, दूसरों का ध्यान रखने वाले और निष्पक्ष होते हैं।

अपनी जिंदगी में सारे काम यह नियम-कायदे और कानून से करने में यकीन रखते हैं। इन्हें पार्टी और महफ़िलों में रहने का शौक होता है। यह विपरीत लिंगियों की संगति पसंद करने वाले और Magnetic Personality के मालिक होते हैं। ये हर काम को सोच-विचार कर करते हैं, इन्हें जल्दबाजी पसंद नहीं होती। तुला राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये यह लेख पढ़ें।

8. Scorpio Zodiac Sign वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि भचक्र का आँठवा खंड है। अतः इसे अंक 8 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 210 से 240 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 8 अंक लिखा होगा, वह वृश्चिक राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह मंगल है। वृश्चिक स्थिर प्रकृति की जल तत्व युक्त राशि है। यह सभी अँधेरे स्थानों और गंदे जल का प्रतीक है। वृश्चिक सभी राशियों में सबसे ज्यादा रहस्यमयी राशि है और इसके जातक भी ऐसे ही होते हैं।

यह उपर से कुछ और अन्दर से कुछ होते हैं। आम तौर पर यह लोग अड़ियल, हठी और बहुत अभिमानी होते हैं। अपना अपमान जल्दी से नहीं भूलते और मौका मिलते ही बदला लेने वाले होते हैं। यह बहुत अच्छे भी हो सकते हैं और बहुत बुरे भी। यह हिम्मती और जोशीले होते हैं, इसीलिये खतरा उठाने से नहीं हिचकिचाते, पर इनमे बुरा सोचने की प्रवृत्ति भी रहती है। वृश्चिक राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये यह लेख पढ़ें।

9. Sagittarius Zodiac Sign धनु राशि

धनु राशि भचक्र का नौवां खंड है। अतः इसे अंक 9 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 240 से 270 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 9 अंक लिखा होगा, वह धनु राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह बृहस्पति है। धनु राशि के जातक आदर्शवादी और अपने लक्ष्य के पीछे लगे रहने वाले होते हैं। इनमे आगे बढ़ने की भूख बहुत ज्यादा होती है और यह हमेशा उच्च से उच्चतर पर पहुँचने की इच्छा रखते हैं।

ये Creative लोग होते हैं और नाकामयाबी से जल्दी निराश नहीं होते। धनु जातक सभी आग्नेय राशियों में सबसे ज्यादा उदार होते हैं, ठीक उसी तरह जैसे आग अपना काम पूरा करने के बाद धीरे-धीरे बुझती चली जाती है। यह अपनी मर्जी के मालिक होते हैं, पर अपने कमिटमेंट से पीछे नहीं हटते। इनका दिल साफ होता है और यह दूसरों की मदद करने के स्वभाव वाले होते हैं। धनु राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये यह लेख पढ़ें।

10. Capricorn Zodiac Sign मकर राशि

मकर राशि भचक्र का दसवाँ खंड है। अतः इसे अंक 10 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 270 से 300 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 10 अंक लिखा होगा, वह मकर राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह शनि है। चूँकि मकर राशि में पृथ्वी और जल तत्व दोनों का सम्मिश्रण है, इसी कारण से इनमे स्थिरता और भावुकता दोनों पायी जाती है। मकर जातक मेहनती, और जागरूक होते हैं।

जिस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हैं, उसे निभाते हैं। ये जल्दी से गुस्सा नहीं करते, लेकिन अगर आ जाय तो जल्दी से शांत भी नहीं होते। ये अपने परिवार से प्यार करने वाले इन्सान होते हैं और उनके लिये अपनी बड़ी से बड़ी खुशी को त्याग सकते हैं। मकर राशि के लोग हमेशा एक अज्ञात डर या असुरक्षा को महसूस करते हैं, इसीलिये इनमे अकेलेपन का भाव रहता है। मकर राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये यह लेख पढ़ें।

11. Aquarius Zodiac Sign कुम्भ राशि

कुम्भ राशि भचक्र का ग्यारहवाँ खंड है। अतः इसे अंक 11 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 300 से 330 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 11 अंक लिखा होगा, वह कुम्भ राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह शनि है। कुम्भ राशि के जातक मौलिक और विचाशील होते हैं। वायु तत्व की राशि होने के कारण इन जातकों में मानसिक परिश्रम की ओर विशेष रूचि होती है।

यह अपनी ही धुन में लगे रहने वाले लोग होते हैं, पर जितना पचा सकते हैं उससे कहीं ज्यादा ग्रहण कर लेते हैं। आध्यात्मिक प्रवृत्ति होने के कारण इन्हें सेवा धर्म में काफी रूचि रहती है और अकारण ही दूसरों की मदद करने को तैयार हो जाते हैं। जब कभी ये भावनात्मक रूप से दुखी होते हैं, तो एकांतप्रिय हो जाते हैं। कुम्भ राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये यह लेख पढ़ें।

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12. Pisces Zodiac Sign मीन राशि

मीन राशि भचक्र का अंतिम खंड है। अतः इसे अंक 12 से प्रदर्शित किया जाता है। इस राशि का विस्तार 330 से 360 डिग्री तक है। जन्मकुंडली के जिस खाने में 12 अंक लिखा होगा, वह मीन राशि का परिचायक होगा। इस राशि का अधिपति गृह बृहस्पति है। मीन राशि सर्वाधिक जल तत्व युक्त राशि है और यह अपने चरित्र में किसी गहरे समंदर की ही तरह गहन है। मीन राशि वाले चंचर और अस्थिर स्वभाव वाले सरल इन्सान होते हैं।

इनके मन में अक्सर एक अंतर्द्वंद सा मचा रहता है, इसी कारण से यह अक्सर अपने लक्ष्य से विमुख होते देखे जाते हैं। आध्यात्मिक प्रकृति के संवेदनशील मीन जातक प्रतिभाशाली और हुनरमंद इन्सान होते हैं। लेकिन इन्हें अपनी छिपी प्रतिभा का ज्ञान नहीं होता, अक्सर यह जातक अपने आप में खोये रहते हैं। मीन राशि के बारे में विस्तार से जानने के लिये यह लेख पढ़ें।

व्यक्ति की जन्मराशि उसके स्वभाव, व्यक्तित्व और जीवन के गुप्त पहलुओं को जानने का बहुत ही सशक्त माध्यम है। कोई व्यक्ति आपसे चाहे कितना ही झूठ क्यों न बोले, लेकिन यदि आपके पास उसकी सही जन्मकुंडली है और आप इसे डिकोड (कूट अनुवाद) कर पाने में सक्षम हैं, तो वह अपना वास्तविक व्यक्तित्व आपसे कभी नहीं छुपा सकेगा। यह महत्वपूर्ण जानकारी आपके जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काम आयेगी।

चाहे मित्रों और जीवनसाथी का चुनाव हो या फिर अपने ही व्यक्तित्व की कमजोरियों का पता लगाकर उन्हें दूर करना हो, या फिर अपने भविष्य को सँवारना हो, जीवन को एक नयी दिशा देनी हो आप हर जगह इसका लाभ उठायेंगे। आगे के लेखों में हम इन सभी 12 राशियों के संपूर्ण नैसर्गिक स्वभाव की विस्तार से चर्चा करेंगे और किस राशि के जातक (स्त्री और पुरुष) का स्वभाव कैसा होगा, उस पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।

चूँकि स्त्रियों का स्वभाव, अभिरुचि, आदतें और उनकी शारीरिक और मानसिक संरचना पुरुषों से बिल्कुल भिन्न होती हैं, इसीलिये उनके लिये अलग से विवेचन किया जायेगा।

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“देवता आपका भाग्य नहीं बनाते, बल्कि आप स्वयं ही उसका निर्माण करते हैं।”
– पवन प्रताप सिंह

 

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