History of The First World War in Hindi

 

“प्रथम विश्व युद्ध यानि First World War के बारे में आप अपने स्कूली जीवन में पहले ही पढ़ चुके होंगे, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। यह युद्ध मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। इस युद्ध में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और इससे दोगुने घायल हो गये थे। लाखो लोगों को बेघर होने के कारण, असमय ही गरीबी, भुखमरी और तंगहाली में जीवन जीना पड़ा था।”

 

First World War History in Hindi
लाखों लोग मारे गये थे प्रथम विश्व युद्ध में

28 जुलाई का दिन विश्व इतिहास के एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन के रूप में याद रखा जाता है, क्योंकि इसी दिन First World War यानि प्रथम विश्व युद्ध आरम्भ हुआ था। दो देशों के बीच हुई एक हल्की झड़प ने किस तरह सम्पूर्ण विश्व को एक खतरनाक और अनिश्चितकाल काल की त्रासदी में फँसा दिया था, यह युद्ध उसका ज्वलंत उदाहरण है। वर्ल्ड वार या विश्व युद्ध से तात्पर्य एक ऐसे युद्ध से है जिसमे कई देश एक दूसरे से अपने-अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति हेतु लडे थे और जिसमे अनेक देशों को अभूतपूर्व क्षति उठानी पड़ी थी।

जब चार वर्ष के लम्बे अंतराल के पश्चात प्रथम विश्व युद्ध (First World War) समाप्त हुआ, तब तक संसार के चार बड़े साम्राज्य बर्बादी की हालत मे पहुँच गये थे। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका एक महाशक्ति बनकर उभरा और समूचे यूरोप की सीमाएँ फिर से निर्धारित हुई। पराजित राष्ट्रों को अपमानजनक संधियाँ स्वीकार करने को विवश किया गया और उनका समस्त गौरव और अहंकार धूल-धूसरित हो गया।

चूँकि सभ्यता के इतिहास में प्रथम विश्व युद्ध (First World War) एक अविस्मरणीय घटना है, इसीलिये आज हम आपको इस युद्ध की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं से संबंधित तथ्यों और सूचनाओं के बारे में बताने जा रहे हैं और साथ ही यह भी बतायेंगे कि आखिर यह विनाशकारी युद्ध हुआ ही क्यों –

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First World War Reasons in Hindi

1. First World War की शुरुआत के पीछे दो कारण बताये जाते हैं, जिनमे से तात्कालिक कारण था – ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक फ्रान्ज़ फर्डीनेंड और उनकी गर्भवती पत्नी सोफी का वध। इन दोनों की 28 जून 1914 के दिन, बोस्निया की राजधानी साराजेवो में एक सर्बियाई राष्ट्रवादी द्वारा हत्या कर दी गई, जिसके फलस्वरूप ऑस्ट्रिया और हंगरी ने 28 जुलाई को सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इनकी हत्या ने युद्ध को भड़काने में चिंगारी का काम किया।

2. फ्रान्ज़ फर्डीनेंड सम्राट फ्रेंज जोसफ के भतीजे थे और वह ऑस्ट्रिया और हंगरी की राजगद्दी के वारिस थे। इनकी हत्या की योजना एक सर्बियाई आतंकवादी संगठन ब्लैक हैण्ड ने बनायीं थी। जिस आदमी ने युवराज और उनकी पत्नी की हत्या की थी, वह गव्रिलो प्रिंसिप नाम का एक बोस्नियाई क्रांतिकारी था।

First World War History प्रथम विश्व युद्ध का इतिहास

3. लेकिन First World War के आरम्भ होने का सर्वप्रमुख कारण था – यूरोपीय देशों की अनियंत्रित महत्वाकांक्षा। औद्योगिक क्रांति के कारण सभी बड़े देश ऐसे उपनिवेश चाहते थे, जहाँ से वह कच्चा माल पा सकें और फिर अपने देश में मशीनों से बनाई हुई चीजों को दूसरे देशों में बेच सकें। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए हर देश, दूसरे देश पर साम्राज्य करने की चाहत पालने लगा।

4. फिर ऐसा करने के लिये सैनिक शक्ति बढ़ाई गई और गुप्त कूटनीतिक संधियाँ की गईं। इससे राष्ट्रों में अविश्वास और वैमनस्य बढ़ा और युद्ध अनिवार्य हो गया। साम्राज्य विस्तार की आग में पहले से ही सुलग रहा यूरोप युद्ध के मुहाने पर खड़ा ही था कि उसी समय ऑस्ट्रिया के युवराज की हत्या हो गयी। इस तरह वर्ल्ड वार छिड़ने के लिये जिस चिंगारी की जरुरत थी, वह इस घटना ने पूरी कर दी।

5. हर देश पिछली पराजयों में खोये क्षेत्रों को कब्जाना चाहता था और अपना साम्राज्य बढ़ाना चाहता था। ऑस्ट्रिया भी इससे अछूता नहीं रहा था। सर्बिया के नाराज होने का मुख्य कारण यही था कि ऑस्ट्रिया और हंगरी ने सन 1909 में बोस्निया पर कब्ज़ा कर लिया था।

6. इसके अलावा जर्मनी भी बहुत नाखुश था, क्योंकि फ्रांस ने मोरक्को पर कब्ज़ा कर लिया था। इस घटना के कारण सन 1911 से ही जर्मनी, फ्रांस के खिलाफ लगातार विरोध प्रकट कर रहा था।

7. शुरुआत में संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध से अलग था, पर जब जर्मनी की एक पनडुब्बी ने इंगलैण्ड के लुसिटिनिया जहाज़ को, जिसमे 125 अमेरिकी नागरिक समेत 1195 यात्री सवार थे, डूबो दिया तो अमरीका भी ब्रिटेन की ओर से First World War में कूद पड़ा।

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First World War Progress in Hindi

8. पहला विश्व युद्ध 28 जुलाई सन 1914 के दिन आरंभ हुआ था और चार वर्ष बाद 11 नवंबर सन 1918 में जाकर समाप्त हुआ। इस तरह First World War लगभग 52 महीने तक चला था। यह युद्ध एशिया, यूरोप और अफ्रीका इन तीन महाद्वीपों में जल, थल तथा आकाश में लड़ा गया था।

9. सन 1915 में लुसिटानिया के डूबने पर अमेरिका भी युद्ध में कूद पड़ा। हालाँकि अमेरिका युद्ध नहीं चाहता था, वह सिर्फ इसका शांतिपूर्ण हल चाहता था। लेकिन जब जर्मनों ने धमकी दी कि वह ब्रिटेन जाने वाले हर जहाज को डुबो देंगे, तो नागरिकों के विरोध के कारण अमेरिका को मजबूरन युद्ध में उतरना ही पड़ा। अमेरिका ने 6 अप्रैल 1917 को युद्ध में सक्रिय रूप से प्रवेश किया।

10. दुनिया के लगभग सभी शक्तिशाली देश First World War में शामिल थे। इस युद्ध में दो पक्ष थे एक केंद्रीय शक्तियाँ और दूसरे मित्र राष्ट्र। जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी, तुर्की और उस्मानिया केंद्रीय शक्तियाँ थीं।

11. जबकि ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, इटली, सर्बिया, पुर्तगाल, यूनान, बेल्जियम मित्र राष्ट्र थे। बाद में संयुक्त राज्य अमेरिका भी मित्र राष्ट्रों की ओर से फर्स्ट वर्ल्ड वार में शामिल हो गया था।

इस तरह आगे बढ़ा था फर्स्ट वर्ल्ड वार

12. First World War को सभी युद्धों को खत्म करने वाला युद्ध (The War to End All Wars), राष्ट्रों का युद्ध (The War of the Nations) और महायुद्ध (The Great War) के नाम से भी जाना जाता है।

13. First World War के मुख्य नेता थे – केसर विल्हेल्म II, रूस का जार निकोलस II, सर्बिया के राजकुमार एलेग्जेंडर, अमेरिकी राष्ट्रपति विल्सन, ब्रिटेन के विदेश सचिव एडवर्ड ग्रे और डेविड लियोड जॉर्ज।

14. रूस विश्व युद्ध की शुरुआत से ही ऑस्ट्रिया-हंगरी के साथ आ गया था, लेकिन रूसी क्रांति के कारण वह First World War के इस महायुद्ध से अलग हो गया।

15. प्रारंभ में जर्मनी की जीत हुई। 1917 में जर्मनी ने अनेक व्यापारी जहाज़ों को डुबोया। 1918 ई. में ब्रिटेन , फ़्रांस और अमरीका ने जर्मनी आदि राष्ट्रों को पराजित किया।

16. जर्मनी और आस्ट्रिया की प्रार्थना पर 11 नवम्बर 1918 को प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति हुई।

17. First World War ख़त्म होते-होते चार बड़े साम्राज्य रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और उस्मानिया ढह गए। यूरोप की सीमाएँ फिर से निर्धारित हुई और अमेरिका एक महाशक्ति बन कर उभरा।

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First World War Casualities in Hindi

18. प्रथम विश्व युद्ध क्रूरता, आतंक और इंसानी बुराइयों का नंगा नाच था, जिसमे मानवता अपनी बेबसी पर आँसू बहा रही थी। हर देश उन निर्दोष सैनिकों के खून की होली खेलने पर आमादा था, जो मूर्ख और लोभी शासकों की लिप्सा पर अपनी जान की बाजी लगाने को मजबूर थे। इस भीषण युद्ध में जितने मरे वह सब मजबूर और दूसरों के निर्देशों के गुलाम थे, लेकिन जिन्होंने युद्ध की आग भड़काई उन्हें कुछ नहीं हुआ।

19. First World War के दौरान 30 देशों के 6.5 करोड़ से ज्यादा सिपाहियों को युद्ध क्षेत्र में भेजा गया, जिनमे से 60 लाख तो सिर्फ यूरोपीय देशों से ही थे। इनमे से 1 करोड़ से ज्यादा सैनिकों की मौत हो गयी और लगभग 2 करोड़ 10 लाख सिपाही जख्मी हुए। इनमे से मित्र राष्ट्रों के 60 लाख सैनिकों की मौत हुई और केन्द्रीय शक्तियों के 40 लाख लोग सैनिक मरे।

20. रूस ने First World War में अपने 1 करोड़ 20 लाख सैनिक भेजे थे, और रूसी सेना युद्ध की सबसे बड़ी सेना थी। युद्ध में तीन चौथाई से ज्यादा रूसी सैनिक मारे गये, घायल हुए या फिर युद्ध क्षेत्र में ही लापता हो गये। संयुक्त राज्य अमेरिका First World War के अंतिम वर्ष और लड़ाई के बीच में सम्मिलित हुआ था।

21. First World War के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका सिर्फ साढ़े सात महीनों की अवधि के लिये ही सक्रिय होकर लड़ा था, लेकिन इतने ही वक्त में उसके 116,000 सैनिकों को अपनी जान गँवानी पड़ी और 204,000 सैनिक गंभीर रूप से जख्मी हुए।

भीषण नरसंहार हुआ था फर्स्ट वर्ल्ड वार में

22. First World War के दौरान 75 लाख सिविलियन (आम लोगों) की भी मौत हुई जिनका युद्ध से कोई वास्ता ही नहीं था। पूरे First World War के दौरान मरने वाले लोगों की कुल संख्या 1.8 करोड़ से भी ज्यादा मानी जाती है, जबकि घायल लोगों की संख्या 2 करोड़ से उपर थी।

23. 1 जुलाई 1916 को, जिस दिन सोम्मे के युद्ध (Battle of the Somme) की शुरुआत हुई, पहले ही दिन 58,000 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हो गयी और 2000 से भी ज्यादा घायल हुए। मिलिटरी के इतिहास में यह युद्ध के एक ही दिन में होने वाला सबसे बड़ा नुकसान रहा था।

24. First World War की सबसे भीषण लड़ाई ‘हंड्रेड डे ओफेन्सिव’ था। सन 1916 में शुरू हुई इस लड़ाई में सिर्फ कुछ महीने के दौरान ही 18 लाख से ज्यादा लोगों/सैनिकों ने अपने प्राण गंवायें थे।

25. First World War प्रत्येक देश के सैनिकों के लिये एक बुरा स्वप्न और कालदूत बनकर आया। युद्ध के समाप्त होने तक लगभग 250,000 जख्मी ब्रिटिश सैनिक या तो पूर्ण रूप से या फिर आंशिक रूप से अपंग हो गये थे।

26. विश्व युद्ध के दौरान सर्बिया ने अपने लगभग 850,000 खोये, जो युद्ध से पूर्व इसकी एक चौथाई जनसँख्या थी।

इंसानों का अनिवार्य काल था फर्स्ट वर्ल्ड वार

27. First World War में वेस्टर्न फ्रंट पर लगभग 80 लाख लोगों की मौत हुई थी, आश्चर्यजनक रूप से लगभग इतनी ही संख्या मरने वाले घोड़ों की भी थी।

28. सन 1918 में फैली इन्फ्लुएंजा की महामारी ने दुनियाभर में लगभग 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला दिया, जो प्रथम विश्व युद्ध से भी कहीं ज्यादा घातक थी।

29. अगस्त 1914 में जर्मन सैनिकों ने एर्सचोट में 150 नागरिकों की इसलिये हत्या कर दी, ताकि जीते हुए क्षेत्रों के निवासी बाद में उनके विरुद्ध विद्रोह न कर सकें। यह उनकी युद्धनीति का ही एक हिस्सा था।

30. फ्रांस First World War में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला देश था, क्योंकि इस महायुद्ध में फ्रांस की लगभग 11 प्रतिशत आबादी या तो खत्म हो गयी थी या फिर वह गंभीर रूप से जख्मी थी।

31. उधर मिडिल ईस्ट में भी युद्ध चरम पर और भीषणतम होता चला जा रहा था। यहाँ मित्र राष्ट्रों को गल्लीपोली अभियान की असफ़लता के दौरान तुर्कों के खिलाफ 250,000 सैनिकों को खोना पड़ा।

32. First World War के दौरान स्पेनिश फ्लू के कारण लगभग एक तिहाई सैनिकों की मौतें हुई थीं। इस बीमारी से एक ही वर्ष में इतने लोगों की मौत हुई थी, जितने की प्लेग से 1347 से 1351 तक, चार साल में भी नहीं हुई थी।

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First World War Death Toll in Hindi

33. युद्ध की विभीषिका सैनकों के सिर्फ शरीर छलनी नहीं कर रही थी, बल्कि उनके मन में भी युद्ध और मौत का खौफ पसरने लग गया था। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि विश्व युद्ध में लगभग 10 लाख से भी ज्यादा सैनिकों को शेल-शॉक अर्थात बंदूकों और गोलियों के खौफ से भयंकर कष्ट उठाना पड़ा था।

34. आँकड़ों के अनुसार First World War में 4 लाख से ज्यादा सैनिकों की मौत शेल-शॉक से हुई थी, अर्थात उनके शरीर पर कोई गोली नहीं लगी थी। लेकिन वह युद्ध के तनाव से उपजने वाली समस्यों जैसे कि अनियंत्रित हैजा, अनिद्रा, स्तब्धता, सुन्नपन और घंटों रहने वाली कंपकपाहट से धीरे-धीरे काल के गाल में समा गये। इनमे से 80,000 ब्रिटिश सैनिक थे।

35. First World War के दौरान तुर्कों ने लगभग 15 लाख आर्मेनियनों का क़त्ल कर दिया। इस व्यापक नरसंहार ने बाद में शायद हिटलर का भी ध्यान खींचा होगा और कहा जा सकता है कि इस घटना ने ही आगे चलकर उस विध्वंसक प्रचंड विनाश के बीज बोये जो फिर Second World War में देखने को मिला था।

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फर्स्ट वर्ल्ड वार में उड़ाया गया था मानवता का मजाक

36. First World War के दौरान जहाज आरएमएस लुसिटानिया के रवाना होने से 16 दिन पहले ही, जर्मनी ने प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स में एक चेतावनी छपवाई थी जिसके अनुसार अगर जहाज ब्रिटेन की तरफ चला तो वह उसे डुबो देंगे। लेकिन उनकी चेतावनी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और जहाज पर सवार 1198 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

37. First World War के दौरान जर्मनों ने 68 हजार टन गैस का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया, वहीँ ब्रिटेन और फ्रांस ने लगभग 51 हजार गैस छोड़ी थी। कुल मिलाकर दोनों तरफ के लगभग 12 लाख सैनिक गैस से प्रभावित हुए थे, जिनमे से लगभग 91,200 की बहुत दर्दनाक तरीके से मौत हुई थी।

38. युद्ध के दौरान एक तिहाई लोग बीमारियों और संक्रमण फैलने से मरे। सैनिकों की वासनाओं को संतुष्ट करने के लिये मोर्चे से थोडा पीछे छोटे-छोटे वेश्यालय भी खोले गये थे, जहाँ से मिले गुप्त रोगों से लगभग 150,000 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हुई।

39. गर्भनिरोध निषेध कानून (Anti-contraception Laws) के चलते अमेरिका में कंडोम पर प्रतिबन्ध लगा हुआ था, जो सन 1972 तक बरकरार रहा। इसकी वजह से First World War में अमेरिकी सैनिकों में यौन संचारित रोगों (Sexually Transmitted Disease) की दर बहुत ज्यादा बढ़ गयी थी।

40. First World War में जिन खाइयों का निर्माण युद्ध की व्यूह रचना के आवश्यक अंग के रूप में हुआ था, वह भी एक खतरनाक हत्यारा सिद्ध हुई। 200,000 से भी ज्यादा सैनिकों की मौत इन खाइयों में हुई थी।

41. यह खाइयाँ, लाखों चूहों, मेंढकों, जूंओं और अनगिनत बैक्टीरिया का वास-स्थान थीं जो सैनिक युद्ध क्षेत्र में घायल होकर पड़े रहे। उन्हें इन जीवों के कारण फैलने वाली जानलेवा बीमारियाँ और संक्रमण बेवक्त लील गये।

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Soldiers and First World War in Hindi

42. First World War के ज्यादातर युद्ध कीचड और खंदकों (ट्रेंच) के अन्दर रहकर लडे गये थे, लेकिन एक बेहद अलग तरह का युद्ध सैनिकों के पैरों के नीचे भी लड़ा गया था। आप सोच रहे होंगे आखिर यह कैसे हो सकता है। दरअसल इसका राज छिपा है, उन बारुदी सुरंगों के अन्दर जिन्हें पूरी गोपनीयता बरतते हुए, जमीन से लगभग 100 फीट नीचे की गहराई में, दुश्मन पक्ष की खाइयों के नीचे खोदा गया था।

43. जिनमें बड़ी मात्रा में खतरनाक विस्फोटक भरकर उन्हें उड़ा दिया जाता था। इसमें सबसे बड़ी सफलता मिली, बेल्जियम की मेस्सिंस रिज में, जहाँ 19 भूमिगत सुरंगों में लगभग 410 टन विस्फोटक में लगातार धमाके किये गये। इन धमाकों से जर्मनी की अग्रिम सैन्य पंक्ति लगभग पूरी तरह से ध्वस्त हो गयी थी, क्योंकि इसमें 10000 जर्मन सैनिक मारे गये थे।

44. यह धमाके इतने तेज थे कि इनकी गूँज वहाँ से 235 किमी दूर लंदन में भी सुनायी दी थी। शांति का तालाब, बेल्जियम के शहर मेस्सिनेस के पास एक 12 मीटर गहरी झील है जो उस क्रेटर को भरती है जिसका निर्माण तब हुआ था, जब ब्रिटेन ने यह विस्फोट किया था।

प्रथम विश्व युद्ध में सैनिकों का जीवन

45. First World War के दौरान 16,000 ब्रिटिश सैनिक ऐसे भी थे, जिन्होंने लड़ने से मना कर दिया था। इनमे से कई को सफेद पंख प्रदान किये गये जो कायरता का प्रतीक था। कुछ को युद्ध से इतर भूमिका सौंपी गयी और कुछ को जेल में डाल दिया गया।

46. प्रथम विश्व युद्ध में कुल 628 सैनिकों को विक्टोरिया क्रॉस प्रदान किया गया था। जिसमे से सबसे कम उम्र का सैनिक था, जैक कॉर्नवेल जो जूटलैंड के युद्ध के दौरान घायल होने के बावजूद मोर्चे पर डटा रहा था।

47. लगभग 350 ब्रिटिश सैनिकों को उनकी अपनी ही सेनाओं ने धोखे से गफलत में मार डाला था। कुछ को फील्ड में मिलने वाली सजा के रूप में दुश्मन की सीमा में जाकर बन्दूक के साथ घूमना पड़ता था।

48. First World War के दौरान एक सैनिक साल में औसतन 55 दिन अग्रिम मोर्चे पर तैनात रहता था, पर एक बार में यह कभी भी 15 दिन से ज्यादा नहीं होता था।

49. खंदकों में रहने के दौरान औसत जीवन प्रत्याशा सिर्फ छह सप्ताह यानि 42 दिन थी। सबसे ज्यादा खतरा जूनियर अफसरों और स्ट्रेच लाने-ले जाने वालों को रहता था।

प्रथम विश्व युद्ध के साहसी वीर

50. First World War में हवाई युद्ध में भी दोनों तरफ का कौशल देखने को मिला। जर्मनी के फाइटर पायलट मन्फ्रेड फ्रेहर्र वों रिचथोफेन First World War के सबसे सफल पायलट थे, जिन्हें लाल नवाब (Red Baron) कहा जाता था। इन्होने मित्र राष्ट्रों के 80 एयरक्राफ्ट मार गिराये थे।

51. उधर मित्र देशों के सबसे सफल पायलट थे, फ्रांस के रेने फोंक्क जिन्होंने दुश्मनों के 75 जहाज मार गिराये थे। ब्रिटिश मेजर एडवर्ड मंनोक्क ने भी दुश्मन देशों के 61 लड़ाकू विमान उड़ा दिये थे। हालाँकि रेने फोंक्क को छोड़कर, बाकी दोनों जाँबाज युद्ध में ही मारे गये।

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Weapons in First World War in Hindi

फर्स्ट वर्ल्ड वार के रासायनिक हथियार

52. First World War के दौरान दुश्मन फौजों के खिलाफ गैस हथियार का इस्तेमाल करने वाला पहला देश फ्रांस था, न कि जर्मनी। अगस्त 1914 में उन्होंने पहली बार आँसूं गैस के ग्रेनेडों (जैलिल ब्रोमाइड) का जर्मनों के खिलाफ इस्तेमाल किया था। जनवरी 1915 में जर्मनी ने पहली बार अश्रु गैस का उपयोग रूसी सेना के खिलाफ किया था, लेकिन ठंडी हवा होने के कारण गैस द्रव में बदल गयी। पहली बार जहरीली क्लोरीन गैस का इस्तेमाल अप्रैल 1915 में जर्मन सेना ने किया था।

53. First World War में लगभग 30 अलग-अलग जहरीली गैसों का इस्तेमाल हुआ था। आपात स्थिति में इन गैसों के आक्रमण से बचने के लिये सैनिकों को अपने पेशाब से ढका कप अपने मुँह पर बाँधना पड़ता था। क्योंकि फिल्टर से युक्त गैस मास्क जो एक प्रभावशाली सुरक्षा मुहैया कराते थे, सन 1918 तक ही मिलने शुरू हो पाये थे। युद्ध के समाप्त होने के बाद कई देशों ने रासायनिक हथियार को इस्तेमाल से बाहर करने के लिये एक संधि पर हस्ताक्षर किये थे।

54. फर्स्ट वर्ल्ड वार में खुलकर मशीन गनों, तोपों, और रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ। विजय हासिल करने के लिये एक पक्ष दूसरे पक्ष को जिस किसी तरह से जितना ज्यादा नुकसान पहुँचा सकता था, उसे निःसंकोच अंजाम दिया गया।

55. First World War से ही पहली बार युद्ध में मस्टर्ड गैस जैसे रासायनिक हथियारों के प्रयोग की शुरुआत हुई, जिसका प्रयोग पहली बार जर्मनी ने किया था। इसके अलावा उन्होंने क्लोरीन गैस का भी इस्तेमाल किया था।

56. पहले तो अंग्रेज भी जर्मनी के रासायनिक हथियारों के प्रयोग करने के कारण भौचक्के रह गये, लेकिन फिर उन्होंने भी घातक गैसों का हथियार के रूप में प्रयोग किया।

57. मस्टर्ड गैस जिसे इसका निर्माण करने वाले युद्ध में विजय हासिल करने वाले हथियार के रूप में देख रहे थे, अविश्वसनीय सिद्ध हुआ और न तो First World War के चरम पर और न ही Second World War में इसका इस्तेमाल हुआ।

फर्स्ट वर्ल्ड वार के स्वचालित हथियार

58. First World War में मशीन गन का भरपूर इस्तेमाल हुआ था। इस शस्त्र का पेटेंट अमेरिका में हिरम मैक्सिम ने सन 1884 में कराया था। मैक्सिम का वजन लगभग 45 किलो था और यह पानी से ठंडी की जाती थी। यह एक मिनट में 450 से 600 राउंड फायर कर सकती थी। First World War की ज्यादातर मशीने मैक्सिम डिजाईन पर ही बनी हुई थीं।

59. बिग बार्था एक 48 टन वजनी होवित्ज़र थी, जिसका इस्तेमाल जर्मनी ने First World War में किया था। इसका नाम इसके डिजाईनर गुस्ताव कृप्प की पत्नी के नाम पर रखा गया था। यह लगभग 930 किलो विस्फोटक 15 किमी की दूरी तक फेंक सकती थी। हालाँकि इस मशीन को जोड़ने में 200 लोगों को छह घंटे का समय लगता था। जर्मनी के पास उस समय ऐसी 13 विशाल बंदूकें थीं, जिन्हें वह वंडर वेपन कहते थे।

60. जर्मनी की सेना अगर दुश्मन के किसी हथियार से सबसे ज्यादा खौफ खाती थी, तो वह थी फ़्रांसिसी सेना की एक तोप जिसे जर्मन डेविल गन के नाम से पुकारते थे। यह तोप 4 मील दूर से भी सही निशाना लगा सकती थी। फ्रेंच मिलिटरी के कमांडर अपनी इस डेविल गन को ही First World War में जीत का श्रेय देते थे।

61. सन 1914 तक किसी भी सैनिक के पास धातु का हेलमेट नहीं था। सन 1915 में पहली बार फ्रेंच लोगों ने धातु का हेलमेट बनाया। सन 1916 में मोर्चे पर लड़ते हुए ब्रिटेन के भविष्य के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने भी वह हेलमेट पहना था।

फर्स्ट वर्ल्ड वार के विशेष हथियार

62. फर्स्ट वर्ल्ड वार में अलग तरह की मशीने भी इजाद की गयीं, जैसे कि पेरिस्कोप राइफलों को इसलिये विकसित किया गया कि 12 फुट ऊँची खंदकों के उपर से भी देखा जा सके। इसके अतिरिक्त धुआं फेंकने वाले उपकरणों और टैंको का भी आविष्कार हुआ।

63. First World War में आग फेंकने वाले उपकरण (Flamethrowers) का प्रयोग सबसे पहले जर्मनी ने किया था। उनके फ्लेमथ्रोअर 40 मीटर की दूरी तक आग की लपटें फेंक सकते थे।

64. टैंकों को पहले ‘लैंडशिप’ अर्थात ‘धरती के जहाज’ कहा जाता था। हालाँकि हथियार के रूप में प्रचारित करने के बजाय, उन्हें पानी का भण्डारण करने वाले टैंक कहकर दुश्मनों की नजर से छिपाया गया। इसके लिये ब्रिटिश सेना ने उनका कोड नाम टैंक रखा था।

65. First World War के दौरान ही पहले टैंक का आविष्कार हुआ था जिसका नाम था, लिटिल विल्ली जो सन 1915 में बना था। इसमें तीन लोग बैठ सकते थे और यह लगभग 4.8 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता था।

66. First World War में ब्रिटेन ने अपने टैंकों को दो वर्गों – पुरुष और स्त्री में बाँटा था। जहाँ पुरुष टैंकों पर तोपें लगी रहती थीं, वहीँ स्त्री टैंकों पर भारी मशीन गन लगी रहती थी।

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Indians in First World War in Hindi

67. First World War के दौरान भारतीय सेना ने भी हिस्सा लिया था। यहाँ तक कि युद्ध की शुरुआत में तो भारतीय सैनिकों की संख्या ब्रिटिश सैनिकों से भी ज्यादा थी। आँकड़ों के अनुसार भारत से लगभग 13 लाख सैनिकों और श्रमिकों को यूरोप, अफ्रीका और मध्य-पूर्व के युद्ध क्षेत्रों में भेजा गया था, क्योंकि यह युद्ध कई मोर्चों पर लड़ा जा रहा था।

68. इसके अलावा भारत से बड़ी मात्रा में रसद, पैसा और हथियार भी भेजा गया। इन सैनिकों में से लगभग 140,000 सैनिक पश्चिमी छोर (Western Front) और 700,000 मध्य-पूर्व (Middle East) में डटे थे।

69. भारत के सिपाही फ्रांस और बेल्जियम ,अदन, अरब, पूर्वी अफ्रीका, गाली पोली, मिस्र, मेसोपेाटामिया, फिलिस्‍तीन, ईरान और सालोनिका के साथ-साथ दुनिया भर में विभिन्न लड़ाई के मैदानों में बड़े सम्मान के साथ लड़े। गढ़वाल राईफल्स रेजिमेंट के दो सिपाहियो को युद्ध में उच्च श्रेणी का साहस दिखाने के लिये उच्चतम पदक, विक्टोरिया क्रॉस भी मिला था।

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फर्स्ट वर्ल्ड वार में धोखा दिया था अंग्रेजों ने

70. बहुत से लोगों का विचार था कि यदि ब्रिटेन First World War में लग गया, तो भारत के क्रान्तिकारी इस अवसर का लाभ उठाकर देश से अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने में सफल हो जाएंगे। किन्तु इसके उल्टा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं का मत था, स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए इस समय ब्रिटेन की सहायता की जानी चाहिए।

71. First World War के कारण भारत की अर्थव्यवस्था लगभग दिवालिया हो गयी थी। भारत के नेताओं को आशा थी कि युद्ध में ब्रिटेन के समर्थन से ख़ुश होकर अंग्रेज़ भारत को इनाम के रूप में स्वतंत्रता दे देंगे या कम से कम स्वशासन का अधिकार देंगे, किन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उलटे अंग्रेज़ों ने जलियाँवाला बाग़ नरसंहार जैसे घिनौने कृत्य से भारत के मुँह पर तमाचा मारा।

72. जब 4 अगस्त को प्रथम विश्व युद्ध आरम्भ हुआ, तो ब्रिटेन ने भारत के नेताओं को अपने पक्ष में कर लिया। रियासतों के राजाओं ने इस युद्ध में दिल खोलकर ब्रिटेन की आर्थिक और सैनिक सहायता की।

73. First World War के समाप्त होने तक लगभग 48,000 भारतीय सैनिक मारे गये और 66000 से ज्यादा घायल हुए।

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Superpowers in First World War in Hindi

फर्स्ट वर्ल्ड वार में ब्रिटेन ने बरती थी चालाकी

74. First World War में बहुत से लोगों का ऐसा मानना था कि ब्रिटिश जनरल और उच्च सैन्यधिकारी लड़ाई के मोर्चे पर जाने से डरते हैं, लेकिन ऐसा नहीं था। दरअसल वह लोग तो लड़ना चाहते थे, लेकिन सम्राट और राजतन्त्र ने उनके लड़ने पर इसलिये प्रतिंबंध लगा दिया था कि कहीं उनके मरने पर फिर युद्ध में सेना का नेतृत्व करने वाला ही कोई न बचे और युद्ध में टिके रहना ही असंभव हो जाय।

75. इतने वर्षों तक युद्ध लड़ने के पश्चात भी सबसे कम हानि ब्रिटिश सेना को ही हुई, क्योंकि सीधे मोर्चे पर वह कम ही जाते थे। उनका ज्यादातर समय खाइयों और खंदकों से गुजरने में ही बीत जाता था। रूटीन जॉब और दूसरे काम ही उनके जिम्मे रहते थे।

76. एक स्रोत के अनुसार 10 में से 9 अंग्रेज सैनिक First World War से जीवित बचकर लौट आये थे। यह घटना बताने के लिये काफी है कि अंग्रेज जाति का इतिहास ही षडयंत्र और चालबाजी से परिपूर्ण रहा है।

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फर्स्ट वर्ल्ड वार के अंत में जुडा था अमेरिका

77. First World War की शुरुआत में अमेरिका युद्ध में शामिल नहीं हुआ था, इसलिये कुछ अमेरिकी नाराज हो गये और वह ब्रिटिश, फ्रेंच और कनाडा की सेनाओं में शामिल हो गये। यहाँ तक कि अमेरिकी वायु सेना के कुछ पायलट भी फ्रांस की वायु सेना में शामिल हो गये थे।

78. अमेरिका में किसानों को युद्ध में जाने से छूट मिली हुई थी, जिसका फायदा कुछ ऐसे लोगों ने भी उठाया जो युद्ध में नहीं जाना चाहते थे। मिन्नी स्चोंबर्ग जो अपने दो बेटों को युद्ध में नहीं भेजना चाहती थी, ने एक फार्म खरीदकर अपने बेटों को जबरदस्ती इसलिये काम पर लगा दिया, ताकि उन्हें युद्ध में न जाना पड़े।

79. First World War चलते रहने के दौरान भी, जर्मन भाषा संयुक्त राज्य अमेरिका की दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बनी हुई थी। यहाँ तक कि लोकल गवर्नमेंट, स्कूल और कई अख़बारों में भी जर्मन भाषा का ही चलन था। लेकिन सरकार के दबाव पर इसका उपयोग में लाया जाना बलपूर्वक बंद करा दिया गया।

80. अमेरिकी सेना में सैनिकों की संख्या बढ़ाने के लिये कांग्रेस ने 1917 में Selective Service Act पास किया था। विश्व युद्ध के समाप्त होने तक लगभग 27 लाख लोगों ने अपने नाम भेजे थे, जबकि 13 लाख स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर रहे थे।

81. First World War के दौरान अमेरिका में जर्मन मूल के लोगों को सन्देश की नजर से देखा जाता था। यहाँ तक कि कई बार तो जर्मनों के खिलाफ उग्र विद्रोह तक हुए, जिसमे जर्मन पुस्तकों को जलाना और जर्मन शेफर्ड कुत्तों को मारना तक शामिल था।

82. अमेरिकन सेना ने First World War के दौरान अपनी पहली लड़ाई 2 नवम्बर 1917 को फ्रांस में बार्थलमेंट की खंदकों में लड़ी थी।

83. First World War के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति रहे वुडरो विल्सन, श्वेत लोगों के पक्षधर (White Supremacist) थे।

84. युद्ध के कारण अमेरिका के हजारों सैनिक अपंग और विकृत चेहरे वाले हो गये। उनके चेहरों को ठीक करने के लिये सर्जरी की गयी, लेकिन फिर भी कुछ के चेहरे इतने बिगड़ चुके थे कि उन्हें मास्क से ढकना पड़ता था। यहाँ तक कि कुछ सैनिक तो अपनी पूरी जिंदगी नर्सिंग होम में ही रहे थे।

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End of First World War in Hindi

85. सन 1918 में जर्मनी में युद्ध के विरोध में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन होने लगे, क्योंकि ब्रिटिश नेवी ने लगभग हर बंदरगाह पर कब्ज़ा कर लिया था और जर्मनवासी भूखे मरने लगे थे इसके अतिरिक्त अर्थव्यवस्था भी दिवालियेपन के कगार पर आकर खड़ी हो गयी थी।

86. 9 नवम्बर सन 1918 को जर्मन सम्राट केसर विल्हेल्म 2 को गद्दी से उतार दिया गया। दोनों तरफ के नेतागण फ्रांस के कोम्पिएग्ने में आकर मिले और युद्ध विराम के घोषणा पत्र पर 11 नवम्बर 1918 को दस्तखत हुए।

87. 11 नवम्बर 1918 के दिन 11 बजे जब बन्दूक नीचे रखने के साथ First World War थमा, तब जॉर्ज एडविन विल्सन का नाम इतिहास में अमर हो गया, क्योंकि First World War में मरने वाले वह आखिरी ब्रिटिश सैनिक थे।

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प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति से जुडी जरुरी बातें

88. हालाँकि युद्ध समाप्ति की घोषणा, अल सुबह 5 बजे ही हो गयी थी, लेकिन उसके कुछ देर तक भी झडपें होती रहीं। पर सिर्फ इन पाँच घंटों में ही 11,000 सैनिकों की जीवन लीला समाप्त हो गयी। अंततः 11 बजे युद्ध पर पूर्ण विराम लग ही गया।

89. आधिकारिक रूप से First World War 28 जून सन 1919 को समाप्त हुआ, अर्थात ऑस्ट्रिया के राजकुमार की हत्या के ठीक पाँच साल बाद। 11 नवम्बर 1918 को युद्ध विराम की घोषणा के पश्चात युद्ध तो बंद हो गया, लेकिन शांति कायम करने में और वर्साय की संधि की शर्तें तैयार करने में छह महीने से ज्यादा का समय लग गया।

90. वर्साय की संधि के अनुसार जर्मनी को युद्ध छेड़ने का दोषी माना गया और उसे इसकी पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ी उसे न सिर्फ अपनी मिलिटरी/सेना का आकार घटाना पड़ा, बल्कि अपने कुछ क्षेत्रों और कालोनियों से अधिकार को भी त्यागना पड़ा।

91. वर्साय की सन्धि में जर्मनी पर कड़ी शर्तें लादी गईं। इसका बुरा परिणाम Second World War के रूप में प्रकट हुआ और राष्ट्रसंघ की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य की पूर्ति न हो सकी।

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प्रथम विश्व युद्ध पर आये खर्च से संबंधित कुछ आँकड़ें

92. 20वीं शताब्दी में ब्रिटेन एक आर्थिक महाशक्ति (Economic Superpower) के रूप में उभर रहा था, लेकिन 1st World War से लगभग सभी देशों की अर्थव्यवस्था हिल गयी थी और ब्रिटेन भी इससे अछूता नहीं रहा था। उदाहरण के लिये सितंबर 1918 में 24 घंटे की अवधि में बरसने वाली गोलियों का खर्च लगभग 40 लाख पौंड था।

93. सन 1918 तक ब्रिटेन First World War पर हर रोज 60 लाख पौंड खर्च कर रहा था। पूरे युद्ध पर आयी सम्पूर्ण लागत लगभग 910 करोड़ पौंड थी।

94. First World War में वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिटेन का नेतृत्व हमेशा के लिये चला गया, क्योंकि इस पर भारी कर्ज चढ़ गया था, बेरोजगारी आसमान छूने लगी और उन्नति मंद पड़ गयी।

95. फ्रांस की भी कुछ ऐसी ही दशा हुई, इसने रूस को जो कर्जा दिया था, वह इसे कभी वापस नहीं मिला। मुद्रास्फीति बहुत तेज और लगभग स्थायी हो गयी। इसके अलावा देश का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से कंगाल हो गया।

96. First World War पर अमेरिका का कुल खर्च 30 अरब डॉलर से भी ज्यादा था।

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Impact of First World War in Hindi

97. First World War ने राजतन्त्र को कमजोर करने और प्रजातंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। क्योंकि युद्ध होने का सबसे बड़ा कारण राज्य की इसके नागरिकों पर असीमित और प्रभुत्वकारी शक्ति का होना था। First World War के कारण ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, बेल्जियम, स्पेन, तुर्की, जापान और जर्मनी जैसे कई देशों में राजशाही के अधिकार बेहद सीमित कर दिए गये और वास्तविक सत्ता का हस्तांतरण प्रजा के हाथों में आ गया।

98. First World War से दुनिया को पहली बार किसी बड़े युद्ध के भीषण परिणामों का पता चला। भविष्य में ऐसे किसी भी युद्ध की नौबत न आये, इसके लिये लीग ऑफ नेशन्स (League of Nations) की स्थपाना की गयी जो आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र संघ के रूप में परिणत हो गयी।

99. First World War ने ही रूस को USSR के रूप में एक नयी महाशक्ति को जन्म दिया और यह संसार का पहला कम्युनिस्ट देश बना और विश्व इतिहास में इसने एक अभूतपूर्व प्रगति की।

100. First World War ने संयुक्त राज्य अमेरिका को, संसार की सबसे बड़ी मिलिटरी ताकत बना दिया।

101. First World War के बाद फिनलैंड, एस्टोनिया, लिथुअनिया और पोलैंड स्वतंत्र राष्ट्रों के रूप में उभरे।

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लीग ऑफ नेशन्स और प्रथम विश्व युद्ध

102. लीग ऑफ नेशन्स ने यूरोप को फिर से खड़ा होने में मदद की और सन 1923 तक 53 देशों ने इसकी सदस्यता ले ली, लेकिन अमेरिकी सीनेट के दबाव के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका, इसमें शामिल नहीं हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन जो इस लीग के मुख्य सूत्रधार थे, उन्हें इससे बड़ा गहरा धक्का लगा और वह अपने बाकी के कार्यकाल में सही प्रकार से कार्य करने में अक्षम हो गये।

103. सन 1926 में जर्मनी भी लीग ऑफ नेशन्स में सम्मिलित हो गया। लेकिन वर्साय की संधि से जर्मनी और जापान दोनों ही बहुत अपमानित महसूस कर रहे थे, इसीलिये सन 1933 में उन्होंने लीग छोड़ दी। सन 1936 में इटली ने भी लीग का बहिष्कार कर दिया।

104. लीग ऑफ नेशन्स भी इटली, जापान और जर्मनी को अपनी शक्ति का विस्तार करने से नहीं रोक सकी और उन्होंने दूसरे छोटे देशों पर अधिकार करना शुरू कर दिया। कई लोगों का तो यहाँ तक मानना है कि First World War का अंत ही नहीं हुआ था और Second World War सिर्फ उसका विस्तार ही था।

फर्स्ट वर्ल्ड वार के दस सबसे भीषण युद्ध

First World War के दस सबसे खतरनाक युद्ध क्रमशः इस प्रकार हैं –
1. हंड्रेड डे ओफेन्सिव (Hundred Day Offensive) – 1,855,369
2. स्प्रिंग ओफेन्सिव (Spring Offensive) – 1,539,715
4. वेर्दुं का युद्ध (Battle of Verdun) – 1,163,000
5. पासचेंडेले का युद्ध (Battle of Passchendaele) – 848,614
6. सर्बिया अभियान (Serbian Campaign) – 633,500
7. मर्नेस का प्रथम युद्ध ((First Battle of Marnes) – 483,000
8. गल्लीपोली का युद्ध (Battle of Gallipoli) – 473,000
9. अरास का युद्ध (Battle of Arras) – 278,000
10. टेनिनबर्ग का युद्ध (Battle of Tannenberg) – 182,000

References:

1. साइमन एडम्स, प्रथम विश्व युद्ध, डी. के. पब्लिकेशन, 2007
2. जॉन हैमिलटन, प्रथम विश्व युद्ध के हथियार, 2004
3. डेविड क्रो, यूरोप का इतिहास, 2001
4. डेविड टेलर, प्रथम विश्व युद्ध की प्रमुख लडाइयां, 2001
5. लियोनोर्ड पोर्टर, जर्मनी के साथ युद्ध
6. प्रथम विश्व युद्ध, विकिपीडिया
7. जेसन टर्नर, प्रथम विश्व युद्ध, 2008
8. गॉर्डन मार्टेल, प्रथम विश्व युद्ध की उत्पत्ति, 2003
9. जेराल्ड मेयर, महान युद्ध की कहानी, 2006
10. इन्टरनेट पर उपलब्ध स्रोत 1
11. इन्टरनेट पर उपलब्ध स्रोत 2
12. इन्टरनेट पर उपलब्ध स्रोत 3
13. इन्टरनेट पर उपलब्ध स्रोत 4

“दूसरे कई सैनिकों की तरह फ्रांस के सेकेण्ड लेफ्टिनेंट अल्फ्रेड जोबेर को भी यह नरसंहार पसंद नहीं था। उन्होंने मरने से पहले अपनी डायरी में लिखा था – मानवता पागल है। यह उसे करने में पागल है जो इसे नहीं करना चाहिये। क्या नरसंहार है! आतंक और संहार के कितने वीभत्स दृश्य! अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिये मेंरे पास कोई शब्द नहीं हैं। नरक भी शायद इतना भयंकर नहीं हो सकता। आदमी पागल ही है!”

 

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